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NEET (UG) परीक्षा का डिजिटल कायाकल्प: पेन-पेपर से CBT मोड की ओर एक ऐतिहासिक कदम

कंप्यूटर-आधारित टेस्ट (CBT) के तकनीकी लाभ

15 मई, 2026 को भारत के शिक्षा मंत्रालय ने देश की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण चिकित्सा प्रवेश परीक्षा, NEET (UG), के भविष्य को लेकर एक क्रांतिकारी घोषणा की है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने स्पष्ट किया है कि हालिया चुनौतियों और सुरक्षा चूक को देखते हुए, अगले वर्ष यानी 2027 से नीट परीक्षा को पूरी तरह से कंप्यूटर-आधारित टेस्ट (CBT) मोड में बदल दिया जाएगा। यह निर्णय न केवल परीक्षा आयोजित करने की पद्धति को बदलेगा, बल्कि यह भारतीय चिकित्सा शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को बहाल करने और इसे आधुनिक वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने की दिशा में एक निर्णायक मोड़ है।

नीट (NEET) जैसी विशाल परीक्षा, जिसमें हर साल 25 लाख से अधिक छात्र बैठते हैं, उसे पेन-और-पेपर मोड में आयोजित करना हमेशा से एक बड़ी लॉजिस्टिक चुनौती रही है। 2026 की परीक्षा के दौरान सीकर, दिल्ली और केरल जैसे केंद्रों से जुड़े पेपर लीक के मामलों ने पूरी प्रणाली को हिलाकर रख दिया था। फिजिकल पेपर का प्रिंटिंग प्रेस से लेकर बैंक के स्ट्रॉन्ग रूम और फिर परीक्षा केंद्रों तक पहुँचना, लीक होने के कई ‘लीक पॉइंट्स’ पैदा करता था।

ओएमआर (OMR) शीट आधारित परीक्षा में कई बार हेरफेर की शिकायतें आती रही हैं। डिजिटल मोड में जाने से मानवीय हस्तक्षेप लगभग शून्य हो जाएगा। जेईई (JEE Main), सीयूईटी (CUET) और कैट (CAT) जैसी परीक्षाएं पहले ही सफलतापूर्वक डिजिटल मोड को अपना चुकी हैं, जिससे यह सिद्ध हो गया है कि बड़े पैमाने पर सीबीटी (CBT) आयोजित करना संभव और सुरक्षित है।

अगले साल से लागू होने वाली इस नई प्रणाली के कई तकनीकी फायदे हैं जो परीक्षा की शुचिता सुनिश्चित करेंगे डिजिटल मोड में, प्रश्न पत्र परीक्षा शुरू होने से मात्र कुछ मिनट पहले ही ‘डाउनलोड’ किए जाते हैं। इससे पहले से पेपर लीक होने की गुंजाइश खत्म हो जाती है। डिजिटल मोड एनटीए (NTA) को विभिन्न सत्रों और तिथियों में परीक्षा आयोजित करने की सुविधा देगा। इससे नॉर्मलाइजेशन (Normalization) की प्रक्रिया अधिक सटीक होगी और केंद्रों पर भीड़ कम होगी। कंप्यूटर केंद्रों पर वेबकैम और एआई सॉफ्टवेयर के माध्यम से छात्रों की गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है, जिससे नकल की संभावना न्यूनतम हो जाती है।

छात्रों के दृष्टिकोण से, यह बदलाव उनके परीक्षा अनुभव को अधिक सुगम और तनावमुक्त बना सकता है ओएमआर शीट में एक बार गलत गोला भरने पर उसे बदला नहीं जा सकता था, जिससे छात्रों के अंक कट जाते थे। सीबीटी में, छात्र अंतिम समय तक अपने जवाबों को संशोधित कर सकते हैं। ओएमआर के गोलों को ध्यान से भरने में छात्रों के काफी मिनट खर्च हो जाते थे। डिजिटल मोड में केवल एक क्लिक की जरूरत होती है, जिससे छात्र प्रश्नों को हल करने पर अधिक ध्यान दे पाएंगे। जीव विज्ञान और भौतिकी जैसे विषयों में चित्र और आरेख कंप्यूटर स्क्रीन पर अधिक स्पष्ट और ज़ूम करने योग्य होते हैं, जिससे प्रश्नों को समझना आसान होता है।

विशेषता पुरानी व्यवस्था (Pen-Paper) नई व्यवस्था (CBT – 2027 से)
सुरक्षा स्तर मध्यम (फिजिकल पेपर का जोखिम) अत्यंत उच्च (डिजिटल एन्क्रिप्शन)
मूल्यांकन समय लेने वाला (OMR स्कैनिंग) तत्काल और सटीक (स्वचालित)
छात्र लचीलापन कम (जवाब सुधारना असंभव) अधिक (कभी भी सुधार संभव)
केंद्र प्रबंधन कठिन (लाखों प्रतियों का परिवहन) सरल (सर्वर आधारित वितरण)
पेपर लीक संभावना संगठित गिरोहों के लिए आसान लगभग असंभव

शिक्षा मंत्री ने स्वीकार किया कि इतने बड़े स्तर पर डिजिटल बदलाव रातों-रात नहीं हो सकता। इसके लिए सरकार निम्नलिखित कदम उठा रही है ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों में सरकार नए ‘परीक्षा केंद्र’ (TCS-iON जैसे मॉडल) स्थापित करेगी ताकि किसी भी छात्र को तकनीकी अभाव महसूस न हो। एनटीए देशभर में हजारों ‘प्रैक्टिस सेंटर’ खोलेगा जहाँ छात्र मुफ्त में सीबीटी मोड का अभ्यास कर सकेंगे। एनडीए ने अपनी आईटी सुरक्षा टीम को मजबूत करने और साइबर खतरों से निपटने के लिए नई विशेषज्ञों की नियुक्ति शुरू कर दी है।

नीट का डिजिटल होना केवल मोड बदलना नहीं है, बल्कि यह चिकित्सा प्रवेश प्रक्रिया के ‘लोकतांत्रीकरण’ की दिशा में एक कदम है। डिजिटल मोड से प्राप्त डेटा का उपयोग यह समझने के लिए किया जा सकता है कि छात्र किन क्षेत्रों में कठिनाई महसूस कर रहे हैं, जिससे भविष्य में पाठ्यक्रम में सुधार किया जा सके। हर छात्र के पास अपनी रिस्पॉन्स शीट का डिजिटल रिकॉर्ड होगा, जिससे मूल्यांकन के दौरान किसी भी प्रकार की धांधली का दावा करना कठिन हो जाएगा।

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की यह घोषणा 2026 के विवादों के बाद छात्रों के बीच खोए हुए विश्वास को वापस पाने की एक बड़ी कोशिश है। यह भारत की चिकित्सा शिक्षा प्रणाली को 21वीं सदी की तकनीक के साथ जोड़ने का प्रयास है। यद्यपि कुछ छात्रों और संस्थानों के लिए यह बदलाव शुरुआत में चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन दीर्घकालिक रूप से यह एक पारदर्शी, निष्पक्ष और सुरक्षित चयन प्रक्रिया सुनिश्चित करेगा।

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