ज़ी एंटरटेनमेंट की गिरती कमाई और बदलता मीडिया मॉडल
टीवी नेटफ्लिक्स युग के सामने क्यों हार रहा है

भारतीय मनोरंजन उद्योग में अगर किसी ब्रांड का नाम दशकों से पहचान बना हुआ है, तो वह है ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेस लिमिटेड (ZEEL)। लेकिन वह दौर अब बीतता लगता है जब टीवी स्क्रीन पर ज़ी का लोगो ही मनोरंजन का स्थायी प्रतीक था। कंपनी का हालिया वित्तीय प्रदर्शन उस बदलते परिदृश्य का प्रतिबिंब है, जहाँ पारंपरिक टीवी कारोबार मंथ पड़ रहा है और डिजिटल प्लेटफॉर्मों की नई ऊर्जा आगे बढ़ रही है।
आंकड़े साफ़ कहानी कहते हैं वित्त वर्ष 2024–25 में ज़ी का मुनाफ़ा 63% घट कर मात्र 76.5 करोड़ रुपये पर आ गया, जबकि विज्ञापन राजस्व में लगभग 12% की गिरावट हुई। लेकिन इसी दौरान कंपनी की डिजिटल शाखा ZEE5 ने अपनी हानि आधी कर ली FY24 के 1,110 करोड़ के घाटे से FY25 में सिर्फ़ 550 करोड़ तक। यह परिदृश्य अब सिर्फ़ ज़ी की नहीं, बल्कि पूरे भारतीय मीडिया इकोसिस्टम की कहानी बन चुका है।
भारतीय टेलीविज़न उद्योग दशकों से विज्ञापन पर टिका रहा है। विज्ञापन थे तो राजस्व था, वही चैनलों के कंटेंट, शो और दर्शक आंकड़ों को चलाते थे। लेकिन अब यह सूत्र तेजी से ढह रहा है। 2025 में ज़ी समेत लगभग सभी प्रसारण कंपनियों ने पाया कि विज्ञापन खर्च घट चुके हैं एफएमसीजी, ई-कॉमर्स, और ऑटो सेक्टरों ने बजट कस लिया है। इसके चलते चैनलों पर विज्ञापन दरें तकरीबन 8-10% गिरी हैं।
इसका सीधा असर यह हुआ कि टीवी चैनल जिन पर कभी ब्रांड्स ‘प्राइम टाइम’ स्लॉट खरीदने के लिए कतार लगाते थे, वहां अब विज्ञापनदाताओं की दिलचस्पी OTT प्लेटफॉर्मों जैसे ZEE5, Disney+ Hotstar, Netflix या JioCinema की तरफ शिफ्ट हो रही है।
ZEE5 का ग्राफ टीवी के ठीक उलट है। यह प्लेटफॉर्म, जो कुछ साल पहले भारी घाटे में था, अब कंपनी की सबसे बड़ी ताकत बन गया है। 2025 में ZEE5 का ऑपरेटिंग घाटा आधा रह गया और उसकी आय में 30% की उछाल दर्ज हुई। सब्सक्रिप्शन राजस्व में 7% की बढ़त हुई। प्लेटफॉर्म पर 25 मिलियन+ प्रीमियम यूज़र जुड़ चुके हैं। हिंदी के साथ-साथ बंगाली, मराठी और दक्षिणी भाषाओं में नया कंटेंट बढ़ने से दर्शक दायरा फैल गया है। ZEE5 अब 2026 तक “संपूर्ण लाभदायक” बनने की दिशा में काम कर रहा है।
इसका सीधा मतलब यह है कि जहां परंपरागत प्रसारक मंदी की गिरफ्त में हैं, वहीं डिजिटल माध्यम रफ्तार पा रहे हैं दर्शकों की जेब से निकले छोटे सब्सक्रिप्शन रुपये अब टीवी विज्ञापनों की कमी पूरी करने लगे हैं।
आज का भारतीय दर्शक अब तय समय पर प्रसारण देखने वाला नहीं, बल्कि मांग पर कंटेंट खोजने वाला ग्राहक बन गया है।
पहले जहां पूरा परिवार 8 बजे एक ही कार्यक्रम देखता था, अब हर सदस्य अपनी पसंद का शो अपने फोन या टैबलेट पर देखता है। यह निजीकरण मीडिया उद्योग का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट बना है।
इस बदलाव ने टीवी चैनलों के लिए दो स्थायी चुनौतियां पैदा कीं विज्ञापन बिखर गए अब दर्शक लाखों स्क्रीन पर फैले हैं। कंटेंट लागत बढ़ी ब्रांड्स और दर्शक दोनों उच्च गुणवत्ता की उम्मीद रखते हैं। नतीजा यह कि परंपरागत चैनल जहां लागत से जूझ रहे हैं, वहीं OTT प्लेटफॉर्म कंटेंट के जरिए सीधे दर्शकों की नब्ज़ पकड़ रहे हैं।
टीवी नेटवर्क अब “OTT बनाम टीवी” की लड़ाई नहीं लड़ रहे, बल्कि मिलेजुले मॉडल अपनाने लगे हैं। ज़ी अब अपने लोकप्रिय धारावाहिकों के एक्सक्लूसिव एपिसोड ZEE5 पर अपलोड करता है। इससे न सिर्फ दर्शक बनाए रखता है, बल्कि विज्ञापन और सब्सक्रिप्शन दोनों से राजस्व अर्जित करता है।
इस हाइब्रिड रणनीति के कुछ हिस्से हैं टीवी से OTT की ओर दर्शकों को धीरे-धीरे शिफ्ट करना। डाटा एनालिटिक्स के जरिये दर्शक रुझानों का अध्ययन। हर इलाके के लिए भाषा और थीम के अनुसार कंटेंट विकसित करना। वास्तविक रूप से, Zee Entertainment अब खुद को “TV broadcaster” नहीं, बल्कि “content enterprise” के रूप में पुनर्परिभाषित करने की कोशिश कर रहा है।
कंपनी के लिए वर्तमान स्थिति चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन यह अनिवार्य संक्रमण है। 2025 की पहली दो तिमाहियों में ज़ी ने लागत नियंत्रण से 8% ऑपरेटिंग खर्च घटाया और मार्जिन बेहतर बनाए। नई कंटेंट रणनीति में “प्रीमियम ओरिजिनल्स” और “रीजनल ब्लॉकबस्टर” दोनों शामिल हैं, ताकि टीवी की गिरावट की भरपाई OTT से की जा सके। सीईओ की हालिया टिप्पणी यह दर्शाती है कि आने वाले दो वर्षों में कंपनी डिजिटल कारोबार को राजस्व का प्रमुख स्रोत बनाने पर केंद्रित है। इस दिशा में, ZEE5 अब केवल सहायक प्लेटफॉर्म नहीं रहा, बल्कि भविष्य का मुख्य खिलाड़ी बन चुका है।



