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एनीमेशन, गेमिंग और कॉमिक्स: राज्य की नई सॉफ्ट पावर का सीमांत

रचनात्मकता से नीति तक: भारत का AVGC सफर

आज भारत की सांस्कृतिक ताकत सिर्फ फिल्मों या संगीत से नहीं मापी जाती अब अवतार, ग्राफिक्स और वर्चुअल अनुभव भी उसकी पहचान का हिस्सा बन रहे हैं। एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स (AVGC) नाम का यह क्षेत्र भारत की नई “रचनात्मक क्रांति” का वाहक बन गया है। केंद्र सरकार ने इसे “चैंपियन सर्विस सेक्टर” का दर्जा दिया है, जबकि दिल्ली, महाराष्ट्र, कर्नाटक और मध्य प्रदेश जैसे राज्य इसे अपनी सॉफ्ट पावर का नया इंजन बना रहे हैं।​

कुछ वर्ष पहले तक एनीमेशन या गेमिंग को सिर्फ मनोरंजन माना जाता था। लेकिन अब यह एक ऐसा औद्योगिक और सांस्कृतिक क्षेत्र है जिसमें रोज़गार, शिक्षा, तकनीक और निवेश का अपार संभावनाएँ हैं। भारत का AVGC उद्योग पिछले कुछ वर्षों में 30–35% की वार्षिक दर से बढ़ा है। यह फिलहाल वैश्विक बाजार का लगभग $3 बिलियन हिस्सा है, पर वर्ष 2030 तक $26 बिलियन तक पहुंचने की संभावना है।​ इस सेक्टर में इस समय लगभग 2.6 लाख लोग काम कर रहे हैं, और 2032 तक यह 20–25 लाख नौकरियां पैदा कर सकता है।​

सरकार ने 2022 में एक AVGC प्रमोशन टास्क फोर्स बनाई ताकि राज्यों को इस क्षेत्र में नीति बनाने, प्रशिक्षण और स्टार्टअप्स को सहायता देने में मार्गदर्शन मिल सके।​

दिल्ली सरकार राजधानी को क्रिएटिव टेक हब बनाने में जुटी है। नई नीति के तहत सरकार शिक्षा संस्थानों में गेम डिज़ाइन, एनीमेशन और विजुअल आर्ट्स के पाठ्यक्रमों को प्रोत्साहन दे रही है। स्थानीय कलाकारों और स्टार्टअप्स के लिए एक क्रिएटिव फंड की योजना है ताकि नए उद्यमों को शुरुआती पूंजी मिल सके। दिल्ली की कोशिश है कि “पुरानी कला और नई तकनीक” का संगम हो जैसे रामायण या महाभारत की कहानियों को वर्चुअल रियलिटी में रूपांतरित करना।​

दूसरी ओर, महाराष्ट्र ने 3,268 करोड़ रुपए के बजट के साथ अपनी AVGC-XR नीति 2025 शुरू की है। मुंबई, पुणे और नागपुर जैसे शहरों में AVGC पार्क तैयार किए जा रहे हैं, जहाँ 24×7 प्रोडक्शन और एनीमेशन स्टूडियो को एक ही कैंपस में सुविधाएँ मिलेंगी। इस नीति से राज्य को अगले पाँच वर्षों में दो लाख से अधिक रोजगार मिलने की उम्मीद है। महाराष्ट्र की सोच साफ है फिल्म सिटी से अब गेमिंग सिटी तक”।​

दोनों राज्यों के दृष्टिकोण में एक अंतर है दिल्ली रचनात्मकता और संस्कृति पर ध्यान दे रही है, जबकि महाराष्ट्र आर्थिक पैमाने पर बड़ा निवेश आकर्षित करना चाहता है।

कर्नाटक और केरल ने इस क्षेत्र में शुरुआती पहल की थी, और आज भी इन्हें भारत का एनीमेशन हब माना जाता है। बेंगलुरु का AVGC Centre of Excellence विश्व-स्तरीय प्रशिक्षकों के साथ स्टार्टअप्स को प्रशिक्षण देता है।​ केरल ने AR/VR स्किल लैब्स स्थापित किए हैं जहां युवाओं को गेमिंग और डिजिटल कहानी कहने की तकनीक सिखाई जाती है। तेलंगाना भी “हैदराबाद मेडिया एली” प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है, जिससे राज्य को आकर्षक निवेश मिल रहा है। इन राज्यों की सफलता का कारण यह है कि उन्होंने तकनीकी शिक्षा और नीति निर्माताओं, दोनों को साथ जोड़ दिया है।

AVGC क्षेत्र को “नई क्रिएटिव इकोनॉमी” कहा जा रहा है, क्योंकि इसमें पारंपरिक उत्पादन की सीमाएँ टूट चुकी हैं। अब ये सेक्टर न सिर्फ़ मनोरंजन या फिल्म के दायरे में हैं, बल्कि शिक्षा, पर्यटन, स्वास्थ्य और सुरक्षा प्रशिक्षण जैसे क्षेत्रों में भी अपनी भूमिका निभा रहे हैं।​

जैसे-जैसे यह क्षेत्र बढ़ रहा है, वैसे-वैसे सरकारों के सामने नई चुनौतियाँ भी आ रही हैं। गेम्स या एनिमेशन में धार्मिक प्रतीकों के उपयोग को लेकर विवाद होते हैं। कॉमिक्स या डिजिटल आर्ट में राजनीतिक व्यंग्य कभी-कभी सेंसरशिप का कारण बनता है।इसलिए कई राज्य ‘एथिकल कंटेंट कोड’ बना रहे हैं ताकि रचनात्मकता की आज़ादी बनी रहे, मगर सांस्कृतिक संवेदनशीलता भी सुरक्षित रहे। यह संतुलन भारत के लिए ज़रूरी है क्योंकि यही इस उद्योग की विश्वसनीयता और स्वतंत्रता दोनों की नींव बनेगा।​

भारत का सांस्कृतिक निर्यात अब सॉफ्टवेयर से भी जुड़ गया है। हॉलीवुड फिल्मों में भारतीय एनीमेटर्स और गेम डेवलपर्स की मांग लगातार बढ़ रही है। स्पाइडर-मैन, अवतार, लाइफ ऑफ पाई जैसी फिल्मों के VFX में भारतीय स्टूडियो की भागीदारी रही है। राज्य इस क्षमता को पहचान चुके हैं इसलिए दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु सिर्फ घरेलू हब नहीं, बल्कि वैश्विक सुविधा केन्द्र बनना चाहते हैं। इससे भारत सिर्फ कंटेंट उपभोक्ता नहीं, बल्कि क्रिएटर के रूप में स्थापित होगा।

आने वाले दशक में यह सेक्टर भारत की अर्थव्यवस्था और संस्कृति दोनों को नई दिशा देगा। केंद्र सरकार का अनुमान है कि 2030 तक भारत का AVGC-XR सेक्टर मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री का 10% से अधिक योगदान देगा।​ अगर राज्यों ने अपनी नीतियाँ शिक्षा, निवेश और स्वतंत्र रचनात्मक माहौल पर आधारित रखीं, तो यह क्षेत्र भारत की सबसे शक्तिशाली सॉफ्ट पावर बन सकता है।​

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