
भारत सहित विश्व की तकनीकी उद्योग में 2025 में अभूतपूर्व छंटनी की लहर देखी गई है, जिसमें लगभग 1.1 लाख से अधिक तकनीकी पेशेवरों की नौकरियां चली गई हैं। यह समग्रता में टेक उद्योग के इतिहास में सबसे बड़े पुनर्गठन का दौर है, जो मुख्य रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑटोमेशन के तेजी से अपनाए जाने तथा आर्थिक अनिश्चितता के कारण उत्पन्न हुआ है।
दुनिया की प्रमुख टेक कंपनियों जैसे अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट, इंटेल, मेटा तथा भारत की बड़ी कंपनियां जैसे टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), इंफोसिस, HCLTech ने भारी छंटनी की। अकेले TCS ने अपने वैश्विक कर्मचारी आधार से लगभग 20,000 कर्मचारियों को बाहर किया, विशेष रूप से मध्य और वरिष्ठ स्तर के पदों से। इसके पीछे मुख्य वजह ‘स्किल और क्षमता असंगति’ मानी जा रही है, जहां तेजी से बदलती तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप कर्मचारियों के कौशल मेल नहीं खाते।
AI और मशीन लर्निंग ने दोहराए जाने वाले कार्य प्रणालियों को लगभग समाप्त कर दिया है। इससे पारंपरिक आईटी नौकरियों में गिरावट आई है, और नई तकनीकों में दक्षता के बिना कर्मचारियों के लिए रोजगार कठिन होता जा रहा है। उदाहरण स्वरूप, क्लाउड कम्प्यूटिंग, प्रोग्रामिंग ऑटोमेशन, डेटा एनालिटिक्स जैसे क्षेत्रों में दक्ष विशेषज्ञ की मांग बढ़ी है।
भारत में आईटी क्षेत्र की छंटनी ने खासकर युवा पेशेवरों में असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है। यह क्षेत्र देश की जीडीपी का लगभग 7.5% योगदान देता है और लाखों लोगों को रोजगार प्रदान करता है। 2025 की पहली छमाही में बेरोजगारी दर शहरी युवाओं में लगभग 19% तक पहुंच गई है, जो चिंता का विषय है। छंटनी से प्रभावित हुए कर्मचारियों को कौशल विकास, स्वरोजगार और उद्यमिता की ओर प्रेरित करने की आवश्यकता है। सरकार और निजी क्षेत्र को मिलकर तकनीकी शिक्षा प्रणाली को AI और अन्य उभरती तकनीकों के अनुरूप ढालने की जरूरत है।
तकनीकी छंटनी के नतीजे केवल आर्थिक नहीं हैं बल्कि सामाजिक और मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरे प्रभाव डालते हैं। नौकरी छूटने वाले पेशेवर वित्तीय दबाव, मानसिक तनाव, आत्मसंकोच जैसी समस्याओं का सामना करते हैं, साथ ही परिवारों की आर्थिक स्थिति भी बुरी तरह प्रभावित होती है। देश के सामाजिक-आर्थिक ढांचे में इस तरह के बड़े पैमाने की बेरोजगारी से सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों, सामाजिक सुरक्षा नेटवर्क और रोजगार योजनाओं पर दबाव बढ़ता है।
कामगारों को नए कौशल सीखने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। सरकार और कॉर्पोरेट्स को मिलकर प्रशिक्षिण कार्यक्रमों का आयोजन करना चाहिए जिसमें AI, साइबर सुरक्षा, IoT आदि के ज्ञान पर जोर हो। छोटे और मध्यम उद्यमों (MSME) को तकनीकी सहायता और वित्त पोषण प्रदान कर नए रोजगार सृजन को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। युवाओं को स्टार्टअप्स और नवाचार में प्रोत्साहित करें, जिससे नये रोजगार सृजित हों। सरकारी नीतियां ऐसी होनी चाहिए जो तकनीकी परिवर्तन के साथ रोजगार सुरक्षा सुनिश्चित करें, मजदूरों के अधिकारों को मजबूत करें। छंटनी के दौरान प्रभावितों के लिए मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता जरूरी है।
तकनीकी क्षेत्र में हो रही व्यापक छंटनी भारत के लिए चुनौती है, लेकिन सही रणनीतियों और सामूहिक प्रयास से इसे अवसर में बदला जा सकता है। AI, ऑटोमेशन और डिजिटल परिवर्तन के दौर में भारत को अपनी मानव पूंजी को विकसित करना होगा, ताकि एक ‘फ्यूचर रेडी’ कार्यबल तैयार हो सके और आर्थिक विकास की रफ्तार बनी रहे।



