हिमालय का महानायक: कामी रीता शेरपा का 32वीं बार एवरेस्ट फतह
32वें शिखर आरोहण का घटनाक्रम: डेथ जोन को मात

17 मई, 2026 की सुबह दुनिया की सबसे ऊंची छत, माउंट एवरेस्ट ($8,848.86$ मीटर), एक ऐसे कीर्तिमान की गवाह बनी जिसे साधारण मानवीय सीमाओं के पार माना जाता है। नेपाल के 56 वर्षीय दिग्गज पर्वतारोही और गाइड कामी रीता शेरपा ने सुबह 10:12 बजे रिकॉर्ड 32वीं बार एवरेस्ट के शिखर पर तिरंगा और नेपाल का राष्ट्रीय ध्वज फहराकर अपना ही विश्व रिकॉर्ड तोड़ दिया। विश्व पर्वतारोहण समुदाय में उन्हें सम्मान से “एवरेस्ट मैन” (Everest Man) कहा जाता है।
नेपाल के पर्यटन विभाग (Department of Tourism) और एवरेस्ट बेस कैंप स्थित फील्ड ऑफिस ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि की आधिकारिक पुष्टि की है। यह केवल एक व्यक्ति की सफलता नहीं है, बल्कि यह पूरे शेरपा समुदाय के अदम्य साहस, श्रम और हिमालयी सभ्यता के वैश्विक प्रभाव की कहानी है।
कामी रीता शेरपा ने इस स्प्रिंग (बसंत) पर्वतारोहण सीजन 2026 के दौरान ’14 पीक्स एक्सपीडिशन’ (14 Peaks Expedition) द्वारा संचालित एक अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोही दल का नेतृत्व करते हुए यह सफलता हासिल की। कामी रीता और उनकी टीम ने शनिवार (16 मई) की रात को कैंप-4 (साउथ कोल, लगभग 7,900 मीटर) से अपनी अंतिम चढ़ाई शुरू की थी। इस क्षेत्र को पर्वतारोहण की भाषा में ‘डेथ जोन’ (Death Zone) कहा जाता है, जहाँ ऑक्सीजन का स्तर बेहद कम होता है।
हाड़ कंपा देने वाली ठंड, तेज हवाओं और बर्फीले रास्तों को पार करते हुए रविवार सुबह 10:12 बजे कामी रीता ने एवरेस्ट के सर्वोच्च बिंदु पर कदम रखा। बेस कैंप के को-ऑर्डिनेटर खीम लाल गौतम ने बताया कि शिखर पर कुछ समय बिताने के बाद कामी दाई (बड़े भाई) अपनी टीम के साथ सुरक्षित रूप से निचले कैंपों की ओर उतर रहे हैं।
कामी रीता शेरपा का जन्म 17 जनवरी, 1970 को नेपाल के सोलुखुम्बू जिले के थामे (Thame) गाँव में हुआ था। यह वही दुर्गम और पावन क्षेत्र है जिसने शेरपा कूटनीति के जनक तेंजिंग नोर्गे जैसे दिग्गजों को जन्म दिया है। पर्वतारोहण कामी रीता के खून में है। उनके पिता 1950 के दशक में एवरेस्ट के विदेशी पर्वतारोहियों के लिए खोले जाने के बाद पहले पेशेवर शेरपा गाइडों में से एक थे। उनके भाई लकपा रीता भी एक कुशल गाइड हैं, जिन्होंने 17 बार एवरेस्ट फतह किया है।
कामी रीता ने 1992 में एक कुली (Porter) और सहायक के रूप में अपना करियर शुरू किया था। उन्होंने अपनी पहली सफल एवरेस्ट चढ़ाई 13 मई, 1994 को मात्र 24 वर्ष की आयु में की थी। इतने रिकॉर्ड बनाने के बावजूद कामी रीता हमेशा विनम्र रहते हैं। उन्होंने बेस कैंप जाने से पहले एक साक्षात्कार में कहा था, “मैं रिकॉर्ड बनाने के लिए नहीं चढ़ता। पहाड़ों पर जाना मेरा पेशा है। अपने विदेशी ग्राहकों को सुरक्षित शिखर तक पहुँचाना और उनकी जान की रक्षा करना मेरा पहला कर्तव्य है।”
कामी रीता का दबदबा सिर्फ माउंट एवरेस्ट तक सीमित नहीं है। उनके नाम दुनिया के सबसे ऊंचे 14 पहाड़ों (जो 8,000 मीटर से ऊंचे हैं) पर सबसे ज्यादा बार चढ़ने का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड भी दर्ज है। 32 बार एवरेस्ट के अलावा, उन्होंने दुनिया के दूसरे सबसे ऊंचे और खतरनाक पर्वत K2 को एक बार, ल्होत्से (Lhotse) को एक बार, मनास्लु (Manaslu) को तीन बार और चो ओयू (Cho Oyu) को आठ बार फतह किया है। एवरेस्ट पर उनके सबसे करीबी प्रतिद्वंद्वी पसांग दावा शेरपा हैं, जो 29 बार एवरेस्ट चढ़ चुके हैं। हालांकि, पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य कारणों से पसांग दावा सक्रिय पर्वतारोहण से दूर हैं, जिससे कामी रीता ने अपनी बढ़त को ऐतिहासिक रूप से मजबूत कर लिया है।
17 मई, 2026 की सुबह नेपाल के लिए दोहरी खुशियाँ लेकर आई। कामी रीता के इतिहास रचने से ठीक 42 मिनट पहले, नेपाल की एक और महान बेटी ने आसमान छू लिया। 53 वर्षीय ल्हाकपा शेरपा (Lhakpa Sherpa), जिन्हें दुनिया ‘माउंटेन क्वीन’ कहती है, उन्होंने सुबह 9:30 बजे एवरेस्ट के शिखर पर कदम रखा। इसके साथ ही उन्होंने दुनिया में किसी भी महिला द्वारा सबसे ज्यादा बार (11वीं बार) एवरेस्ट फतह करने का अपना ही विश्व रिकॉर्ड तोड़ दिया। ल्हाकपा एवरेस्ट पर सफलतापूर्वक चढ़ने और उतरने वाली पहली नेपाली महिला भी हैं।
| पर्वतारोही | आयु | रिकॉर्ड का विवरण (17 मई, 2026) | पहली चढ़ाई | कुल 8000er चढ़ाइयां |
| कामी रीता शेरपा | 56 वर्ष | 32वीं बार एवरेस्ट फतह (विश्व में सर्वाधिक) | 1994 | 43 बार |
| ल्हाकपा शेरपा | 53 वर्ष | 11वीं बार एवरेस्ट फतह (महिलाओं में सर्वाधिक) | 2000 | – |
| पसांग दावा शेरपा | 55 वर्ष | 29 बार एवरेस्ट फतह (दूसरे स्थान पर) | – | – |
कामी रीता और ल्हाकपा शेरपा की यह सफलता उस समय आई है जब हिमालयी पर्वतारोहण उद्योग कई गंभीर चुनौतियों (जैसे जलवायु परिवर्तन के कारण पिघलते हिमनद, अप्रत्याशित हिमस्खलन और अनुभवी गाइडों की कमी) का सामना कर रहा है।
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने दोनों दिग्गजों को बधाई देते हुए एक्स (X) पर लिखा:
“एवरेस्ट केवल एक भौगोलिक ऊंचाई नहीं है; यह नेपाल के आत्मसम्मान, साहस, धैर्य और हमारी हिमालयी सभ्यता का सर्वोच्च प्रतीक है। शेरपा समुदाय का योगदान असाधारण और अद्वितीय है। उनके ज्ञान, श्रम और साहस के बिना इन पहाड़ों का गौरव अधूरा है। वे वास्तव में हिमालय के ‘अदृश्य महानायक’ (Unsung Heroes) हैं।”
वैश्विक तापमान बढ़ने के कारण खुंबू आइसफॉल (Khumbu Icefall) जैसे रास्ते अब और अधिक खतरनाक हो गए हैं। ऐसे समय में कामी रीता जैसे अनुभवी गाइडों की उपस्थिति युवा गाइडों के लिए एक सुरक्षा कवच और प्रेरणा का काम करती है।
कामी रीता शेरपा का 32वीं बार एवरेस्ट फतह करना यह साबित करता है कि उम्र केवल एक संख्या है यदि आपके पास दृढ़ संकल्प, अनुभव और अपने काम के प्रति ईमानदारी हो। जहाँ दुनिया के बड़े-बड़े पर्वतारोही जीवन में एक बार एवरेस्ट चढ़ने का सपना देखते हैं, वहीं कामी रीता ने इसे अपनी कर्मभूमि बना लिया है। उनकी यह सफलता नेपाल के पर्वतारोहण उद्योग को वैश्विक मंच पर और अधिक विश्वसनीय, प्रतिष्ठित और आकर्षक बनाएगी। यह मानव इतिहास की एक ऐसी गाथा है जो आने वाली कई पीढ़ियों को यह सिखाती रहेगी कि कोई भी शिखर इतना ऊंचा नहीं होता, जिसे इंसानी हौसलों से छोटा न किया जा सके।



