
मई २०२६ में तमिलनाडु की सत्ता संभालने के बाद, नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री और ‘तमिलगा वेट्ट्री कज़गम’ (TVK) के प्रमुख जोसेफ विजय ने अपने शुरुआती नीतिगत निर्णयों से राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। विश्वास मत (Floor Test) जीतने के तुरंत बाद, मुख्यमंत्री विजय ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण सामाजिक और राजनीतिक घोषणा की है। इसके तहत राज्य भर में संचालित 600 से अधिक ‘अम्मा कैंटीन’ (Amma Unavagam) का व्यापक स्तर पर आधुनिकीकरण, जीर्णोद्धार और सुदृढ़ीकरण किया जाएगा।
यह निर्णय न केवल राज्य के शहरी गरीबों, दिहाड़ी मजदूरों और प्रवासियों को भुखमरी से सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि यह तमिलनाडु की पारंपरिक द्रविड़ कूटनीति में एक बड़ा रणनीतिक बदलाव भी है। सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि मुख्यमंत्री विजय ने स्पष्ट किया है कि इन कैंटीनों का नाम परिवर्तित नहीं किया जाएगा; ये अपनी मूल पहचान यानी “अम्मा कैंटीन” के नाम से ही संचालित होती रहेंगी। यह निर्णय पूर्व मुख्यमंत्री और दिवंगत नेता जे. जयललिता की जनकल्याणकारी विरासत के प्रति गहरे सम्मान का परिचायक है।
अम्मा कैंटीन योजना की शुरुआत २४ फरवरी, २०१३ को तत्कालीन मुख्यमंत्री जे. जयललिता के जन्मदिन के अवसर पर चेन्नई नगर निगम से हुई थी। इस योजना ने बेहद कम कीमतों पर पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराकर देश-विदेश के नीति निर्माताओं का ध्यान आकर्षित किया था। कैंटीन में मात्र ₹१ में इडली, ₹५ में सांभर चावल या लेमन राइस और ₹३ में दही चावल उपलब्ध कराया जाता था।
२०१६ में जयललिता के निधन और उसके बाद राजनीतिक बदलावों के कारण, इन कैंटीनों को बजटीय संकट, बुनियादी ढांचे की अनदेखी और भोजन की गुणवत्ता में गिरावट का सामना करना पड़ा। कई केंद्रों पर बर्तनों की कमी, टूटी हुई डाइनिंग टेबल और अस्वच्छ रसोई की शिकायतें आम हो गई थीं। मुख्यमंत्री विजय ने इस बात को पहचाना कि यह योजना भले ही विपक्ष (AIADMK) के शासनकाल में शुरू हुई थी, लेकिन इसका सीधा संबंध तमिलनाडु के सबसे वंचित वर्ग की खाद्य सुरक्षा से है। ६०० से अधिक केंद्रों के कायाकल्प की यह घोषणा इस व्यवस्था में नई जान फूंकने का प्रयास है।
मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, यह जीर्णोद्धार अभियान केवल सतही मरम्मत तक सीमित नहीं होगा, बल्कि इसे एक ‘सस्टेनेबल सोशल किचन’ (Sustainable Social Kitchen) मॉडल के रूप में पुनर्गठित किया जा रहा है सभी ६००+ कैंटीनों में पुराने और जर्जर बर्तनों को बदलकर एलपीजी आधारित आधुनिक कमर्शियल बर्नर और बड़े आकार के स्टीम इडली मेकर लगाए जाएंगे।
प्रत्येक केंद्र पर रिवर्स ऑस्मोसिस (RO) वाटर प्यूरीफायर की स्थापना अनिवार्य कर दी गई है ताकि उपभोक्ताओं को साफ और सुरक्षित पानी मिल सके। बैठने और खड़े होकर भोजन करने वाले क्षेत्रों की मरम्मत की जाएगी, दीवारों पर नया पेंट होगा और उचित वेंटिलेशन (Exhaust Systems) की व्यवस्था की जाएगी।
भोजन पकाने और परोसने वाली महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के लिए एप्रन, ग्लव्स और हेयरनेट का उपयोग अनिवार्य होगा।नागरिक निकायों (Civil Bodies) और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा भोजन के पोषण स्तर और स्वाद की साप्ताहिक जांच की जाएगी ताकि जयललिता के समय के स्वर्ण मानकों (Gold Standards) को फिर से हासिल किया जा सके।
अमम्मा कैंटीनों का संचालन पूरी तरह से महिला स्वयं सहायता समूहों (Self-Help Groups) द्वारा किया जाता है। मुख्यमंत्री विजय ने इन महिला कर्मचारियों के दैनिक मानदेय की समीक्षा करने और उन्हें समय पर भुगतान सुनिश्चित करने का आदेश दिया है, जिससे ग्रामीण और अर्ध-शहरी महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण को बल मिलेगा।
तमिलनाडु वर्तमान में बढ़ते कर्ज के बोझ से जूझ रहा है। इसके साथ ही, विजय सरकार द्वारा हाल ही में लिए गए कुछ बड़े फैसलों (जैसे स्कूलों, कॉलेजों और धार्मिक स्थलों के पास स्थित ७०० से अधिक ‘टास्माक’ (TASMAC) शराब की दुकानों को बंद करना और मुफ्त बिजली के वादे) के कारण राज्य के राजस्व पर भारी दबाव है। ऐसे में ६००+ कैंटीनों के जीर्णोद्धार के लिए फंड जुटाना एक बड़ी चुनौती है।
सरकार नगर निगमों के आंतरिक फंड और राज्य के सामाजिक कल्याण बजट (Social Welfare Budget) से इसके लिए विशेष अनुदान जारी कर रही है। सरकार निजी कंपनियों को सीएसआर फंड के माध्यम से इन कैंटीनों को गोद लेने या उनके आधुनिकीकरण में सहयोग करने के लिए आमंत्रित करने की योजना बना रही है। सरकार का स्पष्ट मानना है कि अम्मा कैंटीन कोई व्यावसायिक उद्यम नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री ई. पलानीस्वामी के उस कथन को आधार बनाया गया है कि “यह एक सेवा-उन्मुख पहल है, इसमें लाभ या हानि देखना उचित नहीं है।”
| प्रमुख पहलू | विस्तृत विवरण और नीतिगत रणनीतियाँ |
| घोषणाकर्ता | मुख्यमंत्री जोसेफ विजय (तमिलगा वेट्ट्री कज़गम – TVK) |
| लक्षित केंद्र | पूरे तमिलनाडु में ६०० से अधिक चालू कैंटीन |
| नामकरण नीति | “अम्मा कैंटीन” ब्रांडिंग पूरी तरह अपरिवर्तित रहेगी |
| मुख्य लक्षित वर्ग | असंगठित क्षेत्र के मजदूर, ऑटो चालक, छात्र और गरीब परिवार |
| संचालन मॉडल | महिला स्वयं सहायता समूह (SHGs) आधारित स्व-रोजगार |
| आर्थिक मॉडल | पूर्णतः राज्य-प्रायोजित खाद्य लोककल्याण (Highly Subsidized) |
तमिलनाडु की राजनीति हमेशा से ‘नाम बदलने’ और राजनीतिक प्रतिशोध की संस्कृति से प्रभावित रही है, जहाँ सत्ता बदलने पर पुरानी सरकारों की योजनाओं को बंद कर दिया जाता था या उनके नाम बदल दिए जाते थे। मुख्यमंत्री विजय का यह निर्णय इस पारंपरिक ढर्रे से बिल्कुल अलग है कैंटीन का नाम “अम्मा” बनाए रखकर विजय ने सीधे तौर पर एआईएडीएमके (AIADMK) के पारंपरिक और वफादार मतदाता आधार, विशेष रूप से महिलाओं और कामकाजी वर्ग के दिलों में जगह बनाने का प्रयास किया है।
अपनी पार्टी ‘टीवीके’ के पहले बड़े प्रशासनिक कार्यकाल में विजय खुद को एक ऐसे नेता के रूप में पेश कर रहे हैं जो बदले की भावना से ऊपर उठकर जनहित को प्राथमिकता देता है। फ्लोर टेस्ट के दौरान उन्हें कांग्रेस, वामपंथियों और एआईएडीएमके के कुछ विधायकों का जो समर्थन मिला, उसे वे इस प्रकार के सर्वसमावेशी निर्णयों से और मजबूत कर रहे हैं। जैसा कि विजय ने विश्वास मत जीतने के बाद कहा था कि “यह सरकार आम नागरिक के लिए होगी और इसकी एक मजबूत अंतरात्मा होगी।” भोजन की सुरक्षा सुनिश्चित करना इसी अंतरात्मा को प्रदर्शित करने का सबसे अचूक तरीका है।
अमूल्य चोल ताम्रपत्रों की नीदरलैंड से वापसी जैसी राष्ट्रीय सांस्कृतिक सफलताओं के बीच, राज्य स्तर पर ६०० से अधिक अम्मा कैंटीनों का यह पुनरुद्धार भारत के आंतरिक सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करने का एक बेहतरीन उदाहरण है। मुख्यमंत्री विजय का यह निर्णय दर्शाता है कि वास्तविक कूटनीति और सुशासन वही है जो अंतरराष्ट्रीय पटल पर देश का गौरव बढ़ाए और जमीन पर देश के सबसे गरीब नागरिक की थाली को सूनी न रहने दे।
‘अम्मा कैंटीन’ का यह आधुनिकीकरण न केवल भूख के खिलाफ तमिलनाडु की लड़ाई को तेज करेगा, बल्कि यह आने वाले समय में देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक मार्गदर्शक सिद्धांत बनेगा कि कैसे लोककल्याणकारी योजनाओं को राजनीति से ऊपर उठकर जीवित और प्रासंगिक बनाए रखा जा सकता है।



