राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में मतदाता सूची के बहुचर्चित और व्यापक विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के बीच एक बड़ा प्रशासनिक और सियासी घटनाक्रम सामने आया है। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल तथा उनके परिवार के चार अन्य सदस्यों को दिल्ली मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय द्वारा आधिकारिक नोटिस जारी किया गया है।
यह नोटिस निर्वाचन आयोग द्वारा ‘अनमैप्ड विद लास्ट एसआईआर’ (Unmapped with Last SIR / No Mapping) श्रेणी के अंतर्गत जारी किया गया है। नोटिस पाने वालों में अरविंद केजरीवाल के अलावा उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल, पिता गोबिंद राम केजरीवाल, माता गीता देवी और 25 वर्षीय पुत्र पुलकित केजरीवाल शामिल हैं।
केजरीवाल परिवार नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र (निर्वाचन क्षेत्र संख्या 40) के अंतर्गत पार्ट-51 (कस्तूरबा गांधी मार्ग / केजी मार्ग क्षेत्र) में पंजीकृत मतदाता है। इस विशिष्ट पोलिंग स्टेशन / पार्ट सेगमेंट में कुल 110 मतदाताओं को इस श्रेणी के तहत नोटिस जारी किए गए हैं, जिनमें केजरीवाल परिवार के पांचों सदस्य शामिल हैं। जैसे ही यह खबर सार्वजनिक हुई, आम आदमी पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार और भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की मंशा पर सवाल खड़े किए।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग और संबंधित निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) ने विस्तृत प्रेस वक्तव्य जारी कर स्थिति साफ की है। आयोग ने स्पष्ट किया कि राजधानी भर में 33.1 लाख से अधिक मतदाताओं को डेटा विसंगतियों और पिछले रिकॉर्ड से मिलान न होने के कारण नोटिस जारी हुए हैं, जिनमें दिल्ली की वर्तमान मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुब्रमण्यम स्वामी और इतिहासकार रोमिला थापर जैसी प्रमुख हस्तियां भी शामिल हैं।
दिल्ली में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को समझने के लिए चुनाव आयोग की डिजिटल मिलान प्रणाली और सत्यापन प्रक्रिया को जानना आवश्यक है चुनाव आयोग के नियमानुसार, विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान प्रत्येक मतदाता के वर्तमान विवरण को पिछली गहन पुनरीक्षण (Last SIR) सूची से डिजिटल रूप से लिंक किया जाता है।
यदि किसी मतदाता का विवरण (या उनके माता-पिता/पूर्वजों का विवरण) पिछली सूची में स्वतः नहीं मिल पाता, तो सॉफ्टवेयर उस प्रविष्टि को ‘अनमैप्ड’ के रूप में चिह्नित करता है। दिल्ली में ऐसे कुल 13,79,785 मतदाता पाए गए हैं जिनका डेटा सीधे लिंक नहीं हो सका।
नई दिल्ली (AC-40) के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी ने प्रेस बयान जारी करते हुए स्पष्ट किया:
“अरविंद केजरीवाल और उनके परिवार के सदस्यों द्वारा जमा किए गए इन्यूमरेशन फॉर्म में वे पूरे विवरण उपलब्ध नहीं थे, जो उन्हें उनके संबंधित राज्यों के पिछले पुनरीक्षण की मतदाता सूची से लिंक करने में सक्षम बनाते। निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के अनुसार, उन सभी मतदाताओं को नोटिस जारी किए जा रहे हैं जिन्हें पिछले पुनरीक्षण से लिंक नहीं किया जा सका है या जिनके विवरण में तार्किक विसंगतियां (Logical Discrepancies) हैं।”
आयोग ने कड़े शब्दों में स्पष्ट किया है कि नोटिस जारी होने का मतलब यह कतई नहीं है कि संबंधित व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से काट (Delete) दिया गया है। यह केवल एक विधिक सूचना है जिसके तहत मतदाता को अपने पहचान पत्र, पते का प्रमाण, जन्मतिथि और पूर्व निवास के दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाता है, ताकि 29 अक्टूबर 2026 तक ईआरओ द्वारा उनका निस्तारण किया जा सके।
जैसे ही यह सूचना सार्वजनिक हुई कि पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके परिवार को नोटिस भेजा गया है, आम आदमी पार्टी ने सोशल मीडिया और प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए तीखा हमला बोला आम आदमी पार्टी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा:
“क्या इस देश में सब कुछ केवल ‘परम प्रभु’ (Supreme Lord) को खुश करने के लिए हो रहा है? भारत निर्वाचन आयोग (@ECISVEEP), यह कैसे संभव है कि तीन बार दिल्ली के मुख्यमंत्री रहे अरविंद केजरीवाल जी और उनके परिवार के सदस्यों के नाम दिल्ली की वोटर लिस्ट से गायब या संदिग्ध हो जाएं?”
पार्टी प्रवक्ता अनुराग ढांडा ने कहा कि अरविंद केजरीवाल नई दिल्ली विधानसभा से लगातार विधायक रहे हैं और दिल्ली के मुख्यमंत्री के रूप में एक दशक तक सेवा की है। उनका निवास और पहचान सार्वजनिक ज्ञान का विषय है। ऐसे में उनके 80 वर्षीय बुजुर्ग माता-पिता और पूरे परिवार को नोटिस भेजना प्रशासनिक विफलता और दुर्भावना को दर्शाता है।
आप नेताओं ने 31 अगस्त को प्रकाशित ड्राफ्ट रोल का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि राजधानी में कुल मतदाताओं की संख्या 1.45 करोड़ से घटाकर 97.53 लाख कर दी गई है। पार्टी ने दावा किया कि गरीब बस्तियों और विपक्षी समर्थकों के वोट जानबूझकर काटे जा रहे हैं।
राजनीतिक विवाद के तूल पकड़ने के बाद चुनाव आयोग के अधिकारियों और दिल्ली मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विस्तृत आंकड़े प्रस्तुत किए और पक्षपात के आरोपों को खारिज कर दिया आयोग ने बताया कि सॉफ्टवेयर किसी का पद या राजनीतिक दल देखकर काम नहीं करता।
शालीमार बाग विधानसभा क्षेत्र (AC-14) से मतदाता दिल्ली की वर्तमान मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को भी इन्यूमरेशन फॉर्म के आधार पर ‘तार्किक विसंगति’ (Logical Discrepancy) के तहत नोटिस जारी किया गया था। उनके मामले में फॉर्म में दर्ज विवरण के अनुसार उनके और उनके माता-पिता के बीच की आयु का अंतर 15 वर्ष से कम दिखाई दे रहा था। नोटिस जारी होने के बाद संबंधित बीएलओ (Booth Level Officer) ने भौतिक फील्ड सत्यापन किया और मुख्यमंत्री द्वारा वैध दस्तावेज उपलब्ध कराए जाने के बाद उनकी प्रविष्टि को मान्य (Validated) घोषित कर 4 नवंबर 2026 की अंतिम सूची में शामिल कर लिया गया।
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, 19.33 लाख मतदाताओं में मुख्य विसंगतियां इस प्रकार हैं माता-पिता और संतान के बीच 15 वर्ष से कम अथवा 50 वर्ष से अधिक का आयु अंतर। दो संतानों (Progeny) के जन्म में 9 महीने से कम का अंतर दर्ज होना। मतदाता और उसके पिता/पति के नाम के उपनाम (Surname) या स्पेलिंग में गंभीर अंतर। एक ही पते पर 10 से अधिक अलग-अलग उपनाम वाले मतदाताओं का दर्ज होना।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन भी नागरिकों को नोटिस मिला है, उन्हें घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है जिन पात्र नागरिकों के नाम 31 अगस्त के ड्राफ्ट रोल में पूरी तरह छूट गए हैं, वे 30 सितंबर 2026 तक फॉर्म-6 भरकर अपना दावा प्रस्तुत कर सकते हैं। वहीं, विवरण में संशोधन के लिए फॉर्म-8 का उपयोग किया जा सकता है।
ईआरओ कार्यालयों को निर्देश दिया गया है कि वे सभी 33.1 लाख नोटिसों का निपटारा पारदर्शी सुनवाई और दस्तावेज सत्यापन के जरिए 29 अक्टूबर 2026 तक पूरा कर लें। नई दिल्ली के ईआरओ ने आश्वस्त किया है कि जैसे ही अरविंद केजरीवाल और उनके परिजनों द्वारा पूर्व पते या पहचान से जुड़े आवश्यक साक्ष्य प्रस्तुत किए जाएंगे, उनकी प्रविष्टि को सत्यापित कर 4 नवंबर को आने वाली अंतिम सूची में विधिवत शामिल कर लिया जाएगा।
अरविंद केजरीवाल और उनके परिवार को चुनाव आयोग का यह नोटिस केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह भारत के लोकतांत्रिक तंत्र में डेटा शुद्धिकरण और राजनीतिक अविश्वास के बीच बढ़ते द्वंद्व का प्रतीक बन गया है।
एक तरफ चुनाव आयोग का यह तर्क पूरी तरह तर्कसंगत और तकनीकी रूप से सुदृढ़ है कि एक त्रुटिरहित, पारदर्शी और फर्जी प्रविष्टियों से मुक्त मतदाता सूची तैयार करने के लिए सॉफ्टवेयर-आधारित ऑटोमेटेड ऑडिट जरूरी है, चाहे संबंधित व्यक्ति आम नागरिक हो या पूर्व मुख्यमंत्री। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और पूर्व उप-राष्ट्रपति जैसे दिग्गजों को नोटिस मिलना यह साबित करता है कि एल्गोरिदम ने किसी व्यक्ति विशेष को चुनकर निशाना नहीं बनाया।
दूसरी तरफ, मुख्य विपक्षी दल आम आदमी पार्टी की यह चिंता भी लोकतंत्र में स्वाभाविक है कि राजधानी के लगभग एक-तिहाई मतदाताओं (33.1 लाख) को नोटिस के दायरे में लाना और ड्राफ्ट रोल से 47 लाख नाम एक झटके में हटा देना आम जनता के लिए प्रशासनिक उत्पीड़न का कारण बन सकता है।
अब सारी निगाहें 29 अक्टूबर की समय-सीमा और 4 नवंबर 2026 को आने वाली अंतिम मतदाता सूची पर टिकी हैं। चुनाव आयोग की यह संवैधानिक जिम्मेदारी होगी कि वह यह सुनिश्चित करे कि कोई भी वास्तविक और पात्र नागरिक अपने मताधिकार से वंचित न हो, और राजधानी की चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर जनता का अटूट विश्वास बना रहे।



