कोलकाता में प्रदेश भाजपा मुख्यालय में पीएम नरेंद्र मोदी की मोम की आदमकद प्रतिमा का अनावरण
पारंपरिक बंगाली धोती-कुर्ते में सजी 5.7 फीट की मूर्ति; 76वें जन्मदिन और सार्वजनिक सेवा के 25 वर्षों का ऐतिहासिक उत्सव

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता स्थित भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मुख्यालय (मुरलीधर सेन लेन) में गुरुवार को एक ऐतिहासिक, कलात्मक और राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिवस और उनके संवैधानिक व लोकतांत्रिक नेतृत्व के 25 गौरवशाली वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में पार्टी कार्यालय में उनकी एक विशेष मोम की आदमकद प्रतिमा (Life-size Wax Statue) का भव्य और औपचारिक अनावरण किया गया।
पश्चिम बंगाल भाजपा के इतिहास में यह पहला अवसर है जब किसी जीवित राष्ट्रीय नेता की मोम की आदमकद प्रतिमा को राज्य कार्यालय के मुख्य प्रांगण में स्थायी रूप से स्थापित किया गया है। इस प्रतिमा का सबसे विशिष्ट और भावनात्मक पहलू इसकी वेशभूषा है। आम तौर पर चूड़ीदार पजामे, लंबे कुर्ते और नेहरू जैकेट में दिखने वाले प्रधानमंत्री को इस प्रतिमा में विशुद्ध पारंपरिक बंगाली पहनावे सफेद रेशमी धोती और पंजाबी (बंगाली शैली का कुर्ता) में प्रस्तुत किया गया है।
5.7 फीट ऊंची यह प्रतिमा पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्धमान जिले के आसनसोल निवासी विख्यात मूर्तिकार सुशांत रॉय (Sushanta Roy) द्वारा लगभग दो महीने के सघन और अनवरत परिश्रम के बाद तैयार की गई है। पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद शमिक भट्टाचार्य के नेतृत्व में आयोजित इस अनावरण समारोह में प्रदेश के तमाम वरिष्ठ नेताओं, वर्तमान सांसदों, विधायकों, बुद्धिजीवियों और सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
इस आदमकद प्रतिमा को आकार देने वाले 68 वर्षीय मूर्तिकार सुशांत रॉय भारत में मोम कला (Wax Sculpting) के अग्रदूतों में गिने जाते हैं। आसनसोल में भारत के शुरुआती निजी वैक्स म्यूजियम्स में से एक चलाने वाले रॉय इससे पहले पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत ज्योति बसु, राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, बॉलीवुड महानायक अमिताभ बच्चन, क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर, पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली और फुटबॉल के जादूगर डिएगो माराडोना की मोम की प्रतिमाएं बना चुके हैं।
सुशांत रॉय ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के विभिन्न सार्वजनिक संबोधनों, विशेषकर मई 2026 में नई दिल्ली स्थित भाजपा केंद्रीय कार्यालय में दिए गए विजय उद्बोधन के सैकड़ों हाई-डेफिनिशन वीडियो और तस्वीरों का फ्रेम-दर-फ्रेम अध्ययन किया। उन्होंने चेहरे की मांसपेशियों, भौंहों के खिंचाव और उनकी आंखों की विशिष्ट चमक को हूबहू उतारने के लिए विशेष सिलिकॉन-वैक्स कंपोजिट का उपयोग किया।
प्रतिमा के चेहरे पर सफेद दाढ़ी और सिर के बालों को एक-एक करके सुई के जरिए मोम के भीतर प्रत्यारोपित (Implant) किया गया, ताकि देखने वाले को यह बिल्कुल सजीव (Hyper-realistic) प्रतीत हो। मूर्तिकार ने बताया कि आम तौर पर प्रधानमंत्री मोदी को चूड़ीदार पजामे और जैकेट में चित्रित किया जाता है, लेकिन वे बंगाल के साथ प्रधानमंत्री के गहरे आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जुड़ाव को अभिव्यक्त करना चाहते थे। उन्होंने कहा:
“प्रधानमंत्री जी जब भी बंगाल आते हैं, वे स्वामी विवेकानंद, रबींद्रनाथ टैगोर, श्री रामकृष्ण परमहंस और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के आदर्शों का स्मरण करते हैं। बंगाल की मिट्टी और संस्कृति के प्रति उनके इसी अगाध प्रेम को दर्शाने के लिए मैंने उन्हें हमारी पारंपरिक बंगाली ‘धुति और पंजाबी’ पहनाने का फैसला किया। जब कोई बंगाली इस प्रतिमा को देखता है, तो उसे लगता है कि प्रधानमंत्री हमारे अपने परिवार और समाज के वरिष्ठ अभिभावक हैं।”
सुशांत रॉय पहले इस प्रतिमा को व्यक्तिगत रूप से नई दिल्ली ले जाकर प्रधानमंत्री को सीधे भेंट करना चाहते थे। हालांकि, प्रधानमंत्री के पूर्व-निर्धारित व्यस्त कूटनीतिक कार्यक्रमों (ब्रिक्स शिखर सम्मेलन व अन्य आधिकारिक जिम्मेदारियां) और एसपीजी सुरक्षा प्रोटोकॉल के चलते इसे आसनसोल से विशेष वातानुकूलित वाहन में सुरक्षित रूप से कोलकाता लाया गया और पार्टी नेतृत्व की सहमति से प्रदेश मुख्यालय में स्थापित किया गया।
गुरुवार दोपहर जैसे ही भाजपा प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ मिलकर लाल मखमली पर्दे को हटाकर प्रतिमा का अनावरण किया, पूरा पार्टी कार्यालय ‘भारत माता की जय’, ‘वंदे मातरम’ और ‘नरेंद्र मोदी जिंदाबाद’ के नारों से गूंज उठा अनावरण के तुरंत बाद पार्टी कार्यालय में उपस्थित सैकड़ों युवा कार्यकर्ताओं, महिला मोर्चा की सदस्यों और वरिष्ठ नेताओं में प्रतिमा के साथ तस्वीर और सेल्फी लेने का उत्साह देखा गया। कई कार्यकर्ताओं ने प्रतिमा के सामने हाथ जोड़कर नमन किया। अनावरण के पश्चात भाजपा सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के कलाकारों ने गुरुदेव रबींद्रनाथ टैगोर और काजी नजरुल इस्लाम के देशभक्ति गीतों की भावपूर्ण प्रस्तुतियां दीं।
प्रतिमा के अनावरण के अवसर पर आयोजित विशेष सभा को संबोधित करते हुए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्षों (2001–2026) के ऐतिहासिक सफर का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया शमिक भट्टाचार्य ने रेखांकित किया कि 7 अक्टूबर 2001 को नरेंद्र मोदी ने पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में संवैधानिक शपथ ली थी। तब से लेकर 17 सितंबर 2026 तक, यानी पूरे 25 वर्ष (लगभग 9,112 दिन), उन्होंने बिना एक भी दिन का अवकाश (Leave) लिए निरंतर संवैधानिक प्रमुख के रूप में देश और जनता की सेवा की है। लोकतांत्रिक इतिहास में किसी निर्वाचित नेता द्वारा इतने लंबे समय तक बिना थके काम करने का यह अपने आप में एक वैश्विक रिकॉर्ड है।
सभा में वक्ताओं ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के ‘अंत्योदय’ दर्शन को धरातल पर उतारते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने 80 करोड़ से अधिक देशवासियों को मुफ्त राशन, 55 करोड़ से अधिक गरीबों को ₹5 लाख तक का मुफ्त स्वास्थ्य सुरक्षा कवच (आयुष्मान भारत), और 12 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों को नल से स्वच्छ जल उपलब्ध कराकर भारतीय राजनीति की प्राथमिकताओं को बदल दिया है।
प्रधानमंत्री के जन्मदिन को केवल राजनीतिक भाषणों तक सीमित न रखते हुए प्रदेश भाजपा ने इसे गहन आध्यात्मिक और सामाजिक सेवा के कार्यों से जोड़ा मध्य कोलकाता में कॉलेज स्ट्रीट के समीप स्थित लगभग 300 वर्ष पुराने ऐतिहासिक ठंठनिया कालीबाड़ी में सुबह से ही भाजपा नेताओं का तांता लगा रहा।
पुजारियों ने मां काली के सम्मुख 108 आहुतियों के साथ विशेष हवन संपन्न किया। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और भारत को विश्व गुरु बनाने के संकल्प की सफलता के लिए वैदिक शांति मंत्रों का पाठ किया गया। मंदिर के बाहर उपस्थित श्रद्धालुओं और स्थानीय महिलाओं को 76वें जन्मदिन के उपलक्ष्य में 76 पवित्र तुलसी के पौधे वितरित किए गए। नेताओं ने कहा कि तुलसी का पौधा न केवल सनातन आस्था का केंद्र है, बल्कि वह घर-घर में स्वास्थ्य, शुद्धि और पर्यावरण चेतना का संदेश देता है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, कोलकाता के भाजपा मुख्यालय में प्रधानमंत्री की इस मोम की प्रतिमा का अनावरण, वह भी बंगाली वेशभूषा में, केवल एक जयंती समारोह नहीं है, बल्कि इसके गहरे राजनीतिक और सामाजिक मायने हैं पश्चिम बंगाल की राजनीति में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस अक्सर भाजपा पर ‘बाहरी लोगों की पार्टी’ होने का आरोप लगाती रही है। भाजपा मुख्यालय में बंगाली पारंपरिक परिधान में सजी प्रधानमंत्री की प्रतिमा की स्थापना इस बात का स्पष्ट कूटनीतिक जवाब है कि प्रधानमंत्री और उनकी पार्टी बंगाल के इतिहास, संस्कृति और परिधान को अपना सर्वोच्च आदर देते हैं।
प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने अपने भाषण में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने हमेशा बंगाल के गौरव को पुनर्स्थापित करने की बात कही है। चाहे वह शांति निकेतन को यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा दिलाना हो या नेताजी की होलोग्राम प्रतिमा को इंडिया गेट पर स्थापित करना मोदी सरकार ने बंगाल के नायकों को राष्ट्रीय पटल पर स्थापित किया है। कोलकाता मुख्यालय में आने वाले हर जिले, मंडल और बूथ स्तर के कार्यकर्ता के लिए यह प्रतिमा एक स्थायी प्रेरणा स्रोत का काम करेगी। चुनाव प्रचार और संगठन के कठिन दिनों में यह प्रतिमा उन्हें यह स्मरण कराएगी कि एक साधारण चाय बेचने वाले परिवार का बालक अपनी निष्ठा और जन-समर्पण के बल पर विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र का पथप्रदर्शक बन सकता है।
इस अनावरण के साथ ही पश्चिम बंगाल के सभी जिलों दार्जिलिंग, सिलीगुड़ी, मालदा, मुर्शिदाबाद, नदिया, हावड़ा, हुगली, उत्तर व दक्षिण 24 परगना, मेदिनीपुर और बांकुड़ा में महीने भर चलने वाले ‘सेवा संकल्प अभियान’ (Seva Sankalp Abhiyan) की औपचारिक शुरुआत हो गई राज्य भर के 42 संगठनात्मक जिलों में पार्टी के युवा मोर्चा द्वारा मेगा ब्लड डोनेशन कैंप आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि राज्य के सरकारी ब्लड बैंकों में रक्त की कमी को दूर किया जा सके।
पार्टी ने राज्य भर के 1 करोड़ से अधिक हिंदू, मतुआ और जनजातीय परिवारों से अपील की है कि वे गुरुवार शाम अपने-अपने घरों के आंगन और तुलसी के चौबारे पर प्रधानमंत्री की दीर्घायु के लिए एक मिट्टी का ‘आशीर्वाद का दीया’ प्रज्वलित करें। विभिन्न सरकारी मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों में भर्ती मरीजों को ताजे फल, दूध और पौष्टिक आहार वितरित किया गया।
कोलकाता के 6, मुरलीधर सेन लेन स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय के मुख्य हॉल में स्थापित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 5.7 फीट की यह मोम की प्रतिमा केवल एक शिल्पकला का नमूना नहीं है। यह आधुनिक भारत के उस राजनीतिक युग का प्रतीक है, जिसने देश को हीनभावना से निकालकर वैश्विक आत्मविश्वास की नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है।
आसनसोल के कलाकार सुशांत रॉय के हाथों तराशी गई यह प्रतिमा और उसे पहनाई गई पारंपरिक बंगाली धोती-कुर्ता इस बात का सजीव प्रमाण है कि भारत की सांस्कृतिक विविधता और एकात्मता एक-दूसरे के पूरक हैं। जब बंगाल का एक आम कार्यकर्ता या आगंतुक इस प्रतिमा के सामने खड़ा होता है, तो वह केवल एक नेता की छवि नहीं देखता, बल्कि वह 25 वर्षों के उस अथक परिश्रम, त्याग और सेवा को देखता है जिसने करोड़ों गरीबों के जीवन में आशा का उजियारा फैलाया है। 76वें जन्मदिन पर बंगाल की धरती से प्रधानमंत्री को दिया गया यह अनूठा कलात्मक उपहार आने वाले वर्षों तक मुरलीधर सेन लेन में आने वाली हर पीढ़ी को ‘राष्ट्र प्रथम’ (Nation First) के पावन संकल्प की याद दिलाता रहेगा।



