राष्ट्रीयव्यक्ति विशेष

मध्य प्रदेश में ‘सेवा संकल्प अभियान’ का महा-शुभारंभ: 845 ऐतिहासिक स्थलों पर एक साथ जगमगाए 3.55 करोड़ दीये

उज्जैन के शिप्रा तट और महाकाल लोक में 33.27 लाख दीपों से बना नया विश्व रिकॉर्ड

नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिवस के उपलक्ष्य में गुरुवार शाम मध्य प्रदेश की धरा आस्था, लोक-कल्याण और सांस्कृतिक गौरव के एक अभूतपूर्व उत्सव से जगमगा उठी। प्रदेश भर में महीने भर चलने वाले ‘सेवा संकल्प अभियान’ (Seva Sankalp Abhiyan) के औपचारिक आगाज के अवसर पर राज्य के 55 जिलों में फैले 845 प्रतिष्ठित धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों पर एक साथ 3 करोड़ 55 लाख (3.55 करोड़) मिट्टी के दीये प्रज्वलित किए गए।
दीपोत्सव का सबसे अलौकिक और भव्य केंद्र भगवान महाकालेश्वर की पावन नगरी उज्जैन बनी। पवित्र शिप्रा नदी के रामघाट, दत्त अखाड़ा घाट, नृसिंह घाट और श्री महाकाल महालोक कॉरिडोर के विस्तृत प्रांगण में एक साथ 33 लाख 27 हजार (33.27 लाख) दीये जलाए गए। आयोजकों और राज्य सरकार ने एक ही शहर के नदी तटों और मंदिर परिसर में इतने विशाल पैमाने पर एक साथ दीप प्रज्वलन को एक नया विश्व रिकॉर्ड (World Record) घोषित किया है।
समारोह के मुख्य केंद्र उज्जैन के ऐतिहासिक रामघाट पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, भाजपा मध्य प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और प्रदेश प्रभारी महेंद्र सिंह ने संतों, महामंडलेश्वरों, 25,000 से अधिक स्वयंसेवकों और आम नागरिकों के साथ दीप प्रज्वलित कर शिप्रा महा-आरती की।
गुरुवार शाम 6:45 बजे जैसे ही अवंतिका नगरी के क्षितिज पर गोधूलि वेला की लालिमा फैली, उज्जैन में डमरू, शंख, घंटे और घड़ियालों की मंगल ध्वनि गूंज उठी। रामघाट पर मुख्य मंच से वैदिक आचार्यों ने मंत्रोच्चार शुरू किया और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तथा भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने पहले दीप को प्रज्वलित कर महाकाल की आरती उतारी।
इसके ठीक बाद, घाटों और महाकाल लोक में तैनात 25,000 से अधिक स्वयंसेवकों की श्रृंखला ने मात्र 12 मिनट के भीतर 33.27 लाख दीयों को प्रज्वलित कर दिया। 33.27 लाख दीयों को तेल, बाती और कपूर के साथ व्यवस्थित करने के लिए शिप्रा के दोनों किनारों को 120 विशेष सेक्टरों में विभाजित किया गया था। प्रत्येक सेक्टर का नेतृत्व विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों, एनसीसी अधिकारियों और सामाजिक संस्थाओं के प्रमुखों ने संभाला।
श्री महाकाल महालोक कॉरिडोर की विशाल शिव स्तंभों, भित्तिचित्रों और कमल कुंड के चारों ओर बिछी दीपों की पंक्तियों ने पूरे प्रांगण को किसी देवलोक जैसा स्वरूप दे दिया। श्रद्धालुओं ने नदी में बहते दीपों के प्रतिबिंब को देखकर ‘हर हर महादेव’ के जयकारे लगाए।
दीपोत्सव के बाद महाकाल लोक के आकाश में 500 ड्रोनों के समन्वय से भव्य लाइट शो आयोजित किया गया, जिसमें भगवान शिव के नटराज स्वरूप, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के लोक-सेवा काल और भारत के चंद्रयान व गगनयान अभियानों की आकृतियां उकेरी गईं।
यह आयोजन केवल उज्जैन तक सीमित नहीं था, बल्कि राज्य के हर कोने में स्थित ऐतिहासिक धरोहरों, नर्मदा घाटों और शक्तिपीठों में एक साथ आयोजित हुआ नर्मदा नदी के तट पर स्थित चौथे ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर में नर्मदा आरती के साथ 11 लाख दीप जलाए गए। महेश्वर के अहिल्या घाट पर पत्थरों की नक्काशीदार छतरियों के बीच जलते दीपों का दृश्य अद्भुत था।
भगवान श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के रामघाट पर संतों ने दीपदान किया, जबकि ओरछा में श्रीरामराजा सरकार के मंदिर प्रांगण को लाखों दीपों से सजाया गया। राज्य की सभी 23,000 ग्राम पंचायतों और 413 नगरीय निकायों के प्रत्येक वार्ड में ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम के तहत सामूहिक दीप प्रज्वलन हुआ, जिससे यह अभियान जन-जन का पर्व बन गया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने उज्जैन में सभा को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि यह दीपोत्सव केवल एक प्रतीकात्मक उत्सव नहीं है, बल्कि यह निरंतर 30 दिनों तक चलने वाले जनकल्याणकारी महा-अभियान की आधारशिला है अभियान के पहले दिन प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में मेगा ब्लड डोनेशन कैंप आयोजित किए गए। युवाओं और स्वयंसेवकों ने हजारों यूनिट रक्तदान कर आपातकालीन ब्लड बैंकों को समृद्ध किया।
गांधी जयंती से शुरू होने वाले इस चरण में प्रदेश के सभी विकासखंडों (Blocks) और शहरी जोनों में बहु-विभागीय ‘सेवा सेतु’ कैंप लगाए जाएंगे। इन शिविरों में आयुष्मान भारत कार्ड, किसान सम्मान निधि, लाडली बहना योजना, उज्ज्वला गैस कनेक्शन और वृद्धावस्था पेंशन के वंचित पात्र लाभार्थियों को मौके पर ही स्वीकृति पत्र दिए जाएंगे। ‘जन विश्वास अभियान’ को इसके साथ जोड़कर नागरिकों के नामांतरण, बंटवारा, राशन कार्ड और आधार अपडेशन जैसी राजस्व समस्याओं का तत्काल निपटारा किया जाएगा।
आंगनवाड़ी केंद्रों में कुपोषण, एनीमिया और टीकाकरण के खिलाफ जागरूकता फैलाने के लिए विशेष अभियान चलेगा। बच्चों को पौष्टिक स्नैक्स, खिलौने, खेल उपकरण और सचित्र शिक्षण सामग्री वितरित की जाएगी। मध्य प्रदेश के सभी 230 विधानसभा क्षेत्रों में पवित्र स्थलों की मिट्टी और सेवा संकल्प को लेकर ‘सेवा ज्योति कलश यात्रा’ निकाली जाएगी, जिसमें स्थानीय जनप्रतिनिधि, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिजन और सामाजिक कार्यकर्ता भाग लेंगे।
इस आयोजन का सबसे व्यावहारिक और आर्थिक रूप से सशक्त पहलू इसका जमीनी प्रभाव रहा राज्य भर में जलाए गए 3.55 करोड़ दीयों को मध्य प्रदेश माटी कला बोर्ड के पंजीकृत कुम्हारों और ग्रामीण कारीगरों से सीधे खरीदा गया। पिछले दो महीनों से प्रदेश के हजारों कुम्हार परिवार इन दीयों के निर्माण में जुटे थे।
मिट्टी के दीये, रुई की बाती, सरसो व तिल का तेल और पीतल के बर्तनों की भारी मांग ने ग्रामीण कुटीर उद्योग, स्थानीय तेली समुदाय और छोटे व्यापारियों की जेब में सीधे करोड़ों रुपये का राजस्व पहुंचाया। संपूर्ण आयोजन के दौरान सिंगल-यूज़ प्लास्टिक, थर्माकोल या गैर-बायोडिग्रेडेबल सामग्री के उपयोग पर सख्त प्रतिबंध रहा। पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए दीयों के विसर्जन और अवशेषों के प्रबंधन के लिए नगर निगमों ने विशेष टीमें गठित कीं।
रामघाट पर आयोजित विशाल जनसभा में नेताओं ने इस महा-अभियान के दार्शनिक और राजनीतिक मर्म को रेखांकित किया:
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का वक्तव्य:
“प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने अपने सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष चाहे वह गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में रहे हों या देश के प्रधान सेवक के रूप में बिना एक भी दिन का अवकाश लिए मां भारती के चरणों में समर्पित किए हैं। आज शिप्रा के तट पर और प्रदेश के 845 केंद्रों पर प्रज्वलित यह 3.55 करोड़ दीप केवल मिट्टी के दीये नहीं हैं, बल्कि यह मध्य प्रदेश की 8.5 करोड़ जनता के हृदय का आभार हैं। केन-बेतवा लिंक परियोजना, पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक और पीएम मित्र मेगा टेक्सटाइल पार्क जैसी सौगातें देकर प्रधानमंत्री जी ने मध्य प्रदेश को विकास की मुख्यधारा में स्थापित किया है। आज बाबा महाकाल की नगरी ने 33.27 लाख दीपों का जो विश्व रिकॉर्ड रचा है, वह पूरी दुनिया में भारत के सांस्कृतिक पुनरोत्थान का शंखनाद है।”
भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन का संबोधन:
“सेवा ही संगठन का मूल आधार है। जब विपक्ष राजनीति को केवल सत्ता पाने का माध्यम मानता है, तब भारतीय जनता पार्टी अपने सर्वोच्च नेता के जन्मदिवस को 16-30 दिनों के सेवा पखवाड़े के रूप में मनाकर अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति के आंसू पोंछने का काम करती है। उज्जैन का यह दृश्य अलौकिक है। शिप्रा के जल में तैरती दीपों की यह स्वर्णिम आभा इस बात का प्रमाण है कि सनातन संस्कृति और आधुनिक विकास एक साथ कदमताल कर सकते हैं।”
उज्जैन के पावन रामघाट और महाकाल लोक में शिप्रा की लहरों पर जब 33 लाख 27 हजार दीयों की स्वर्णिम रोशनी थिरक रही थी, तो वह केवल एक सांख्यिकीय कीर्तिमान नहीं था। वह भारत की उस प्राचीन आध्यात्मिक चेतना का पुनर्जागरण था जहां प्रकाश को ज्ञान, सेवा और त्याग का प्रतीक माना गया है।
मध्य प्रदेश के 845 स्थलों पर एक साथ जगमगाए 3.55 करोड़ दीयों ने पूरे देश को यह संदेश दिया है कि सत्ता का सच्चा सरोकार उत्सवधर्मिता में नहीं, बल्कि जन-सेवा के संकल्प में निहित है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के रूप में शुरू हुआ यह 30 दिवसीय पर्व आने वाले दिनों में जब अस्पतालों में रक्तदान, आंगनबाड़ियों में पोषण और ‘सेवा सेतु’ शिविरों में गरीबों के हक के रूप में फलीभूत होगा, तभी इस दीपोत्सव का वास्तविक उद्देश्य सिद्ध होगा। शिप्रा के तट पर रचा गया यह इतिहास आने वाले वर्षों तक लोक-कल्याण, आस्था और जन-भागीदारी की सबसे चमकदार मिसाल बनकर देश को आलोकित करता रहेगा।

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