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विश्व फुटबॉल के एक स्वर्णिम और अविस्मरणीय युग का औपचारिक समापन
क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने पुर्तगाल की राष्ट्रीय टीम के लिए तेईस वर्षों के ऐतिहासिक सफर के बाद अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास का किया ऐलान

आधुनिक विश्व फुटबॉल के क्षितिज पर पिछले दो दशकों से अधिक समय तक अपनी अप्रतिम गति, असाधारण शारीरिक क्षमता, अचूक गोल-स्कोरिंग कौशल और अटूट इच्छाशक्ति से राज करने वाले पुर्तगाल के करिश्माई कप्तान क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से अपने संन्यास की आधिकारिक घोषणा कर दी है। वर्ष 2003 में महज अठारह वर्ष की उम्र में पुर्तगाल की सीनियर राष्ट्रीय टीम के लिए पदार्पण करने वाले इकतालीस वर्षीय इस महानतम फॉरवर्ड ने पूरे तेईस वर्षों तक अपने देश की लाल और हरी जर्सी का मान वैश्विक मंचों पर सर्वोच्च रखा। रोनाल्डो ने पुरुषों के अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल इतिहास के लगभग हर बड़े व्यक्तिगत और सामूहिक रिकॉर्ड को अपने नाम करते हुए कुल 234 अंतरराष्ट्रीय मैचों में अविश्वसनीय 146 गोलों के ऐतिहासिक आंकड़े के साथ अपने अंतरराष्ट्रीय सफर को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया है। उनके इस फैसले के साथ ही न केवल पुर्तगाली फुटबॉल बल्कि संपूर्ण वैश्विक खेल जगत के एक ऐसे गौरवशाली युग का पटाक्षेप हो गया है, जिसकी मिसाल आने वाले कई दशकों तक शायद ही दोबारा देखने को मिले।
लिस्बन में पुर्तगाली फुटबॉल महासंघ द्वारा जारी एक विस्तृत आधिकारिक बयान और रोनाल्डो के अपने सोशल मीडिया हैंडल्स पर साझा किए गए अत्यंत भावुक वीडियो संदेश में इस संन्यास की पुष्टि की गई। रोनाल्डो ने अपने संदेश में कहा कि अपने देश की राष्ट्रीय जर्सी पहनना, पुर्तगाल के राष्ट्रगान को अंतरराष्ट्रीय मैदानों पर गाना और राष्ट्रीय टीम की कप्तानी का आर्मबैंड पहनकर मैदान में उतरना उनके पूरे पेशेवर जीवन और अस्तित्व का सबसे बड़ा गौरव रहा है। उन्होंने कहा कि 2003 में जब उन्होंने पहली बार पुर्तगाल के लिए मैदान पर कदम रखा था, तब उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि वे दो दशकों से अधिक समय तक इस खूबसूरत सफर का हिस्सा रह पाएंगे और अपने देश को महाद्वीपीय चैंपियन बनाने का साक्षी बनेंगे। रोनाल्डो ने स्पष्ट किया कि उन्होंने अपने शरीर, अपनी आत्मा और अपने जुनून का हर एक कतरा पुर्तगाल की सेवा में समर्पित किया, लेकिन अब वह सही समय आ गया है जब उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच से गरिमा के साथ विदा लेनी चाहिए ताकि पुर्तगाल की नई और प्रतिभाशाली युवा पीढ़ी इस महान मशाल को आगे लेकर जा सके।
क्रिस्टियानो रोनाल्डो का अंतरराष्ट्रीय सफर केवल सांख्यिकी और आंकड़ों का संकलन मात्र नहीं है, बल्कि यह निरंतर संघर्ष, आत्म-सुधार, असफलता से उबरने और अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य पर पुर्तगाल जैसी अपेक्षाकृत छोटी फुटबॉल शक्ति को एक अपराजेय वैश्विक महाशक्ति में बदलने की महाकाव्यात्मक गाथा है। रोनाल्डो के राष्ट्रीय टीम में आने से पहले पुर्तगाल की पहचान एक ऐसी टीम के रूप में थी जिसके पास लुइस फिगो, रुई कोस्टा और पाउलो सूसा जैसे सुनहरी पीढ़ी के असाधारण व्यक्तिगत खिलाड़ी तो थे, लेकिन टीम अक्सर बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट्स के निर्णायक नॉकआउट मुकाबलों में दबाव के आगे बिखर जाती थी। 20 अगस्त 2003 को कजाकिस्तान के खिलाफ एक दोस्ताना मैच में दिग्गज लुइस फिगो के स्थानापन्न खिलाड़ी के रूप में जब अठारह वर्षीय दुबले-पतले रोनाल्डो मैदान पर उतरे थे, तब किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि यह लड़का आगे चलकर इस देश के फुटबॉल का इतिहास और भूगोल दोनों बदल देगा।
उनके अंतरराष्ट्रीय करियर का पहला बड़ा हृदयविदारक क्षण वर्ष 2004 में आया जब पुर्तगाल ने अपनी घरेलू धरती पर यूईएफए यूरो कप की मेजबानी की थी। उस टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए पुर्तगाल फाइनल तक पहुंचा, लेकिन फाइनल मुकाबले में अप्रत्याशित रूप से ग्रीस के हाथों 1-0 की हार का सामना करना पड़ा। फाइनल की सीटी बजने के बाद मैदान पर फूट-फूट कर रोते युवा रोनाल्डो की तस्वीरें दुनिया भर के खेल प्रेमियों के जेहन में आज भी ताजा हैं। उस रात रोनाल्डो ने अपने आंसुओं से संकल्प लिया था कि वे अपने देश को अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल का शीर्ष खिताब दिलाकर ही दम लेंगे। इस संकल्प को पूरा करने में उन्हें बारह लंबे वर्षों की कड़ी तपस्या करनी पड़ी, जिस दौरान उन्हें कई आलोचनाओं, असफलताओं और टूर्नामेंट्स से बाहर होने के दर्द को झेलना पड़ा, लेकिन उनका आत्मविश्वास कभी नहीं डगमगाया।
आखिरकार वर्ष 2016 की गर्मियों में फ्रांस की धरती पर आयोजित यूईएफए यूरो कप में रोनाल्डो का वह बहुप्रतीक्षित सपना साकार हुआ। पूरे टूर्नामेंट में टीम का आगे बढ़कर नेतृत्व करते हुए उन्होंने हंगरी और वेल्स के खिलाफ महत्वपूर्ण मुकाबलों में निर्णायक गोल दागे और पुर्तगाल को पेरिस के स्टेड डी फ्रांस में फाइनल तक पहुंचाया। मेजबान फ्रांस के खिलाफ उस ऐतिहासिक फाइनल में खेल के शुरुआती पच्चीसवें मिनट में ही दिमित्री पाएत के साथ एक भीषण टक्कर के बाद रोनाल्डो के घुटने में गंभीर चोट लग गई। चोट इतनी गहरी थी कि रोनाल्डो का मैदान पर खेल पाना असंभव हो गया और उन्हें स्ट्रेचर पर रोते हुए बाहर ले जाया गया। उस पल ऐसा लगा कि किस्मत एक बार फिर पुर्तगाल से रूठ गई है, लेकिन असली नायकत्व इसके बाद शुरू हुआ। रोनाल्डो घुटने पर भारी पट्टी बांधकर ड्रेसिंग रूम से बाहर निकले और पूरे मैच के दौरान डगआउट के पास टचलाइन पर खड़े होकर मुख्य कोच फर्नांडो सांतोस के साथ मिलकर अपने खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाते रहे। अतिरिक्त समय में जब एडर ने गोल दागकर पुर्तगाल को 1-0 से ऐतिहासिक जीत दिलाई, तो रोनाल्डो की आंखों में 2004 के दर्द की जगह खुशी के बेकाबू आंसू थे। पुर्तगाल ने अपने इतिहास की पहली बड़ी अंतरराष्ट्रीय ट्रॉफी जीती थी और कप्तान रोनाल्डो ने उसे पेरिस के आसमान में उठाकर अमरता हासिल कर ली थी।
यूरो 2016 की ऐतिहासिक सफलता के तीन वर्ष बाद वर्ष 2019 में रोनाल्डो ने एक बार फिर अपनी कप्तानी का लोहा मनवाया जब उन्होंने अपनी घरेलू सरजमीं पर उद्घाटन यूईएफए नेशंस लीग का खिताब जीता। सेमीफाइनल में स्विट्जरलैंड के खिलाफ एक शानदार हैट्रिक दागकर उन्होंने पुर्तगाल को फाइनल में पहुंचाया, जहां नीदरलैंड्स को 1-0 से हराकर पुर्तगाल ने तीन वर्षों के भीतर अपनी दूसरी बड़ी अंतरराष्ट्रीय ट्रॉफी पर कब्जा जमाया। इन जीतों ने पुर्तगाल को हमेशा के लिए उस मानसिक हीनभावना से मुक्त कर दिया जो बड़े टूर्नामेंट्स में उनके आड़े आती थी।
यदि व्यक्तिगत आंकड़ों की बात करें तो अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल में क्रिस्टियानो रोनाल्डो का कद उस हिमालय की तरह है जिसे छूना भविष्य के किसी भी खिलाड़ी के लिए लगभग असंभव प्रतीत होता है। उन्होंने पुरुष अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल में ईरान के महान स्ट्राइकर अली देई के 109 गोलों के सर्वकालिक रिकॉर्ड को सितंबर 2021 में आयरलैंड के खिलाफ दो सनसनीखेज हेडर गोल दागकर तोड़ा था। इसके बाद के वर्षों में उन्होंने इस रिकॉर्ड को इतना आगे बढ़ा दिया कि आज वे 146 अंतरराष्ट्रीय गोलों के साथ दुनिया के शीर्ष पर अकेले खड़े हैं। रोनाल्डो ने अपने इस लंबे सफर में 234 अंतरराष्ट्रीय मैच यानी कैप्स हासिल किए, जो पुरुष वर्ग में किसी भी देश के किसी भी फुटबॉलर द्वारा खेले गए सर्वाधिक मुकाबलों का एक अटूट विश्व रिकॉर्ड है। उनका गोल प्रति मैच अनुपात लगभग 0.62 रहा, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहद असाधारण माना जाता है।
रोनाल्डो के अंतरराष्ट्रीय करियर की सबसे बड़ी विशिष्टता उनका वैश्विक प्रभाव और निरंतरता रही है। उन्होंने दुनिया के 47 विभिन्न देशों की राष्ट्रीय टीमों के खिलाफ गोल दागे, जिनमें फुटबॉल के पारंपरिक पावरहाउस स्पेन, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड्स, अर्जेंटीना, स्वीडन, स्विट्जरलैंड और बेल्जियम शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल में कुल दस हैट्रिक लगाने का विश्व रिकॉर्ड भी रोनाल्डो के ही नाम दर्ज है। वर्ष 2018 के रूस विश्व कप में स्पेन के खिलाफ 3-3 के रोमांचक ड्रॉ मुकाबले में अंतिम मिनटों में फ्री-किक से लगाई गई उनकी जादुई हैट्रिक और वर्ष 2013 के विश्व कप प्ले-ऑफ में ज्लाटन इब्राहिमोविच के स्वीडन के खिलाफ स्टॉकहोम में दागी गई तीन गोलों की तूफानी हैट्रिक अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल की लोककथाओं में हमेशा के लिए दर्ज हो चुकी हैं। इसके अतिरिक्त रोनाल्डो दुनिया के एकमात्र ऐसे पुरुष फुटबॉलर हैं जिन्होंने पांच अलग-अलग फीफा विश्व कप टूर्नामेंट्स यानी 2006, 2010, 2014, 2018 और 2022 में गोल करने का अद्वितीय कीर्तिमान स्थापित किया है। वहीं यूईएफए यूरो चैंपियनशिप के इतिहास में भी वे छह अलग-अलग टूर्नामेंट्स में भाग लेने वाले और 14 गोलों के साथ टूर्नामेंट के सर्वकालिक शीर्ष स्कोरर बने हुए हैं।
इस असाधारण करियर की सबसे प्रेरणादायक बात रोनाल्डो का वह अलौकिक फिटनेस अनुशासन और पेशेवर रवैया रहा, जिसने उन्हें 41 वर्ष की उम्र तक अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल के सबसे तेज और क्रूर स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बनाया। फुटबॉल के आधुनिक युग में जहां अधिकांश आक्रामक स्ट्राइकर तीस या बत्तीस साल की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते अपनी गति खो देते हैं और अंतरराष्ट्रीय खेल की शारीरिक मांगों के आगे घुटने टेक देते हैं, वहीं रोनाल्डो ने अपने सख्त खान-पान, बर्फ के पानी से नहाने, सख्त नींद के चक्र और वैज्ञानिक प्रशिक्षण के दम पर उम्र के तकाजे को लगातार झुठलाया। खेल के प्रति उनके इसी बेजोड़ समर्पण ने उन्हें पांच बार बैलोन डी’ओर का विजेता और विश्व भर के करोड़ों युवाओं का आदर्श बनाया।
रोनाल्डो के अंतरराष्ट्रीय संन्यास की घोषणा के बाद संपूर्ण खेल जगत में सम्मान और कृतज्ञता की एक अभूतपूर्व लहर दौड़ गई है। फीफा के अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो ने अपने आधिकारिक संदेश में कहा कि क्रिस्टियानो रोनाल्डो केवल पुर्तगाल के नहीं, बल्कि विश्व फुटबॉल के एक जीवित संस्थान हैं, जिन्होंने अपने खेल से इस खूबसूरत खेल की परिभाषा और मानकों को हमेशा के लिए ऊंचा उठा दिया है। पुर्तगाली फुटबॉल महासंघ के अध्यक्ष फर्नांडो गोम्स ने कहा कि पुर्तगाल का नाम दुनिया के नक्शे पर खेल के माध्यम से जितना रोनाल्डो ने स्थापित किया, उतना शायद ही किसी अन्य व्यक्ति ने किया हो। वे पुर्तगाल के इतिहास के सबसे बड़े सांस्कृतिक और खेल राजदूत रहे हैं। उनके लंबे समय के साथी खिलाड़ियों पेपे, ब्रूनो फर्नांडीस, बर्नाडों सिल्वा और राफेल लियाओ सहित दुनिया भर के फुटबॉल दिग्गजों ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच से विदाई पर बधाई दी और उनके साथ ड्रेसिंग रूम साझा करने को अपने जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य बताया।



