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फिल्म जगत में खौफ के साए के बीच मुंबई पुलिस की बड़ी कार्रवाई: लॉरेंस बिश्नोई सिंडिकेट के नाम पर तुषार कपूर और आयुष्मान खुराना से रंगदारी मांगने वाला बेंगलुरु का आईटी इंजीनियर गिरफ्तार

दहशत का फायदा उठाकर रची थी करोड़ों ऐंठने की साजिश

भारतीय फिल्म उद्योग की जानी-मानी हस्तियों को कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और उसके आपराधिक सिंडिकेट के नाम पर धमकाकर भारी-भरकम रंगदारी वसूलने की एक सुनियोजित और सनसनीखेज कोशिश का मुंबई पुलिस की अपराध शाखा ने पर्दाफाश किया है। तकनीकी निगरानी, डिजिटल फॉरेंसिक विश्लेषण और साइबर सर्विलांस की मदद से मुंबई पुलिस की जबरन वसूली रोधी प्रकोष्ठ ने कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में छापेमारी कर तीस वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर वैभव मिश्रा को धर दबोचा। आरोपी पर मशहूर फिल्म अभिनेता तुषार कपूर, राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेता आयुष्मान खुराना और हिंदी सिनेमा से जुड़े कई अन्य प्रमुख कलाकारों व निर्माताओं को इंटरनेट कॉलिंग तथा एनक्रिप्टेड मैसेजिंग एप्लिकेशन्स के जरिए धमकी भरे ऑडियो संदेश भेजकर करोड़ों रुपये की अवैध उगाही की मांग करने का गंभीर आरोप है।
इस हाई-प्रोफाइल मामले में सबसे महत्वपूर्ण और चौंकाने वाला पहलू यह है कि पुलिस की प्राथमिक जांच और गहन तकनीकी पड़ताल में गिरफ्तार अभियुक्त का गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई, उसके गिरोह के किसी सक्रिय सदस्य या संगठित अंडरवर्ल्ड सिंडिकेट से कोई सीधा अथवा अप्रत्यक्ष संबंध स्थापित नहीं हुआ है। जांच अधिकारियों के अनुसार, यह पूरी साजिश एक उच्च-शिक्षित युवा द्वारा रची गई थी, जिसने हाल के महीनों में मुंबई के फिल्म जगत में सुरक्षा को लेकर उपजे भारी तनाव, भय और मनोवैज्ञानिक दबाव का गलत फायदा उठाने की सोची। आरोपी ने यह मान लिया था कि बिश्नोई गिरोह का नाम लेते ही नामी कलाकार बिना किसी हीला-हवाली के उसके सामने घुटने टेक देंगे और पुलिस में जाए बिना गुपचुप तरीके से मांगी गई भारी रकम का भुगतान कर देंगे।
यह पूरा घटनाक्रम तब शुरू हुआ जब पिछले सप्ताह अभिनेता तुषार कपूर और अभिनेता आयुष्मान खुराना के निजी प्रबंधकों और कानूनी सलाहकारों के आधिकारिक मोबाइल नंबरों पर कुछ बेहद संदिग्ध और डरावने ऑडियो संदेश प्राप्त हुए। इन संदेशों में अज्ञात कॉलर ने बेहद आक्रामक, खौफनाक और पेशेवर आपराधिक शैली में बात करते हुए खुद को उत्तर भारत के सबसे खतरनाक संगठित गिरोह लॉरेंस बिश्नोई सिंडिकेट का शीर्ष गुर्गा बताया। कॉलर ने ऑडियो में दावा किया कि दोनों अभिनेताओं के दैनिक कार्यक्रमों, उनकी रिहायशी इमारतों, आने-जाने के रास्तों और उनकी सुरक्षा व्यवस्था की मुकम्मल रेकी पहले ही पूरी कर ली गई है। संदेश में स्पष्ट रूप से चेतावनी दी गई थी कि यदि तय समय-सीमा के भीतर मांगी गई रंगदारी की रकम विदेशी बैंक खातों या डिजिटल वॉलेट में अंतरित नहीं की गई, तो इसका अंजाम बेहद खौफनाक होगा और अभिनेताओं पर जानलेवा हमला बोला जा सकता है।
लगातार आ रहे इन ऑडियो संदेशों और अत्यधिक दबाव के चलते अभिनेताओं के स्टाफ और परिजनों में गहरा डर पैदा हो गया। हाल ही में मुंबई के उपनगरीय इलाकों में फिल्मी सितारों के आवासों और वाहनों को निशाना बनाकर की गई गोलीबारी की पूर्व घटनाओं के कारण यह खतरा पूरी तरह वास्तविक और गंभीर प्रतीत हो रहा था। अभिनेताओं की कानूनी टीम और प्रबंधकों ने इस स्थिति में संयम बरतते हुए किसी भी अनौपचारिक समझौते से परहेज किया और तुरंत मुंबई पुलिस के आला अधिकारियों से संपर्क साधकर पूरे घटनाक्रम की लिखित शिकायत दर्ज कराई। मामले की संवेदनशीलता और फिल्मी हस्तियों की जान पर संभावित खतरे को भांपते हुए मुंबई पुलिस आयुक्त ने तुरंत इस जांच की कमान अपराध शाखा की विशेष इकाई एंटी-एक्सटॉर्शन सेल को सौंप दी।
जांच हाथ में लेते ही मुंबई क्राइम ब्रांच के संयुक्त पुलिस आयुक्त और वरिष्ठ अधिकारियों ने साइबर विशेषज्ञों और तकनीकी अन्वेषकों की एक बहुस्तरीय टीम गठित की। प्राथमिक जांच में यह स्पष्ट हो गया कि धमकी देने वाला व्यक्ति कोई साधारण अपराधी नहीं था, बल्कि वह आधुनिक डिजिटल संचार और इंटरनेट प्रोटोकॉल की गहरी समझ रखता था। धमकी देने वाले संदेश किसी सामान्य भारतीय मोबाइल नंबर से नहीं आ रहे थे, बल्कि उनके पीछे वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क यानी वीपीएन की कई परतें थीं। आरोपी ने अपनी वास्तविक भौगोलिक स्थिति छिपाने के लिए विदेश में स्थित प्रॉक्सी सर्वर्स, स्पूफिंग टूल्स और विदेशी नंबरों की आभासी पहचान प्रदान करने वाली अंतरराष्ट्रीय वीओआईपी सेवाओं का कुशलतापूर्वक इस्तेमाल किया था। प्रारंभिक स्तर पर ऐसा प्रतीत हो रहा था कि यह कॉल्स विदेश में बैठे किसी गैंगस्टर द्वारा की जा रही हैं।
साइबर विशेषज्ञों ने इसके बाद आरोपी के डिजिटल फुटप्रिंट्स का रिवर्स फॉरेंसिक विश्लेषण शुरू किया। कॉल डेटा रिकॉर्ड्स, आईपी पैकेट्स, रूटिंग लॉग्स और वर्चुअल नंबर प्रदाताओं से प्राप्त तकनीकी सूचनाओं का मिलान करने पर जांच एजेंसियों को पहला ठोस सुराग मिला। तकनीकी टीम को पता चला कि यद्यपि इंटरनेट कॉलिंग के लिए विदेशी गेटवे का इस्तेमाल किया गया था, लेकिन उस वीपीएन सुरंग की शुरुआत कर्नाटक के बेंगलुरु शहर स्थित एक विशिष्ट इंटरनेट सेवा प्रदाता के निजी फाइबर ब्रॉडबैंड कनेक्शन से हुई थी। इसके बाद जब पुलिस ने उस ब्रॉडबैंड कनेक्शन, उससे जुड़े राउटर की मैक आईडी और उस दौरान सक्रिय रहे मोबाइल फोन के आईएमईआई नंबरों का गहराई से विश्लेषण किया, तो पूरा डिजिटल पर्दाफाश हो गया और यह सारा जाल बेंगलुरु के इलेक्ट्रॉनिक सिटी इलाके में स्थित एक प्रीमियम अपार्टमेंट की ओर इशारा करने लगा।
पुख्ता साक्ष्य जुटाने के बाद मुंबई क्राइम ब्रांच की एक विशेष टीम को तुरंत विमान से बेंगलुरु रवाना किया गया। कर्नाटक पुलिस और स्थानीय साइबर सेल के सहयोग से मुंबई पुलिस की टीम ने इलेक्ट्रॉनिक सिटी के संबंधित फ्लैट की घेराबंदी की और 30 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर वैभव मिश्रा को हिरासत में ले लिया। मौके पर की गई शुरुआती तलाशी में पुलिस को आरोपी के पास से तीन उच्च-स्तरीय स्मार्टफोन्स, दो लैपटॉप, इंटरनेट डोंगल और कई अज्ञात सिम कार्ड बरामद हुए। जब इन डिजिटल उपकरणों की मौके पर ही प्रारंभिक फॉरेंसिक जांच की गई, तो उनके भीतर से वे सभी ओरिजिनल ऑडियो रिकॉर्डिंग्स, वॉयस मॉड्युलेटर सॉफ्टवेयर और अभिनेताओं के प्रबंधकों को भेजे गए संदेशों के लॉग्स पूरी तरह सुरक्षित पाए गए, जिससे आरोपी के खिलाफ अकाट्य तकनीकी प्रमाण हाथ लग गए।
स्थानीय अदालत में पेश कर पुलिस ने वैभव मिश्रा की ट्रांजिट रिमांड हासिल की और उसे हवाई मार्ग से मुंबई लाया गया। मुंबई में एंटी-एक्सटॉर्शन सेल के मुख्यालय में जब आरोपी से कड़ाई से पूछताछ की गई, तो उसने अपना जुर्म पूरी तरह कबूल कर लिया और इस पूरे षड्यंत्र के पीछे की असली कहानी बयां की। पूछताछ में आरोपी ने खुलासा किया कि उसने देश के एक प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थान से कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की थी और वह बेंगलुरु की एक प्रसिद्ध बहुराष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी में वरिष्ठ सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में कार्यरत था। उसने बताया कि वह न तो कभी किसी आपराधिक गिरोह से जुड़ा था और न ही उसका किसी भी अपराधी से कोई निजी संपर्क था।
आरोपी ने कबूल किया कि वह शेयर बाजार में डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग, अनधिकृत ऑनलाइन सट्टेबाजी और विलासितापूर्ण जीवनशैली के चक्कर में भारी वित्तीय घाटे में फंस गया था। उस पर विभिन्न बैंकों, ऋण देने वाले वित्तीय ऐप्स और निजी साहूकारों का कई करोड़ रुपये का भारी कर्ज चढ़ चुका था। कर्ज चुकाने के लिए उस पर लगातार दबाव बनाया जा रहा था और उसकी नौकरी पर भी संकट मंडरा रहा था। इसी दौरान उसने राष्ट्रीय समाचार माध्यमों और सोशल मीडिया पर देखा कि किस प्रकार अंडरवर्ल्ड और लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम पर देश भर में खौफ फैला हुआ है और कई उद्योगपति तथा मशहूर हस्तियां इस नाम से सहम जाती हैं। यहीं से उसके मन में एक शातिर विचार आया कि यदि वह किसी बड़े गैंगस्टर के नाम पर बॉलीवुड के प्रमुख कलाकारों को धमकाए, तो वे अपनी जान और प्रतिष्ठा की खातिर तुरंत भारी रकम चुकाने को तैयार हो जाएंगे।
वैभव मिश्रा ने अपने तकनीकी ज्ञान का दुरुपयोग करते हुए सबसे पहले इंटरनेट, सार्वजनिक डेटाबेस और विभिन्न कास्टिंग व इवेंट मैनेजमेंट पोर्टल्स से बॉलीवुड कलाकारों, फिल्म निर्माताओं और उनके करीबी प्रबंधकों के निजी व व्यावसायिक संपर्क नंबर जुटाए। इसके बाद उसने अंधेरे नेटवर्क यानी डार्क-वेब और कुछ एनक्रिप्टेड टूल्स के जरिए वर्चुअल फोन नंबर खरीदे। उसने अपनी आवाज को पहचान से परे बनाने के लिए आधुनिक डिजिटल वॉयस मॉड्युलेशन सॉफ्टवेयर का उपयोग किया ताकि उसकी सामान्य आवाज एक खूंखार और कठोर गैंगस्टर जैसी सुनाई दे। उसने पहले से तैयार की गई स्क्रिप्ट के आधार पर ऑडियो क्लिप्स रिकॉर्ड कीं और उनमें जानबूझकर बिश्नोई गिरोह के सक्रिय और फरार चल रहे प्रमुख शूटरों के नाम शामिल किए ताकि पीड़ितों को यह लगे कि यह संदेश वास्तविक अंडरवर्ल्ड नेटवर्क से आ रहे हैं।
मुंबई पुलिस ने स्पष्ट किया है कि आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न कठोर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। इनमें धारा 308(2) यानी जान से मारने या गंभीर क्षति पहुंचाने की धमकी देकर अवैध वसूली और जबरन वसूली का प्रयास, धारा 351 यानी आपराधिक धमकी, तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66डी के तहत कंप्यूटर संसाधनों और संचार उपकरणों के जरिए प्रतिरूपण करके धोखाधड़ी व आपराधिक साजिश रचने के आरोप शामिल हैं। पुलिस ने अदालत को सूचित किया है कि आरोपी ने बेहद संगठित तरीके से देश की न्याय प्रणाली, कानून-व्यवस्था और हस्तियों की व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने का काम किया है।
क्राइम ब्रांच के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रेस वार्ता में विशेष रूप से रेखांकित किया कि पिछले कुछ समय से समाज में यह एक खतरनाक प्रवृत्ति देखने को मिल रही है जहां कई सिरफिरे, साइबर अपराधी और कर्ज में डूबे हुए युवा किसी बड़े संगठित गिरोह की दहशत की आड़ लेकर ब्लैकमेलिंग का धंधा शुरू कर देते हैं। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि अपराध की दुनिया में केवल वही खतरे वास्तविक नहीं होते जो जमीनी स्तर पर बंदूक से पैदा होते हैं, बल्कि डिजिटल स्पेस में बैठकर तकनीकी उपकरणों की मदद से फैलाया जाने वाला मनोवैज्ञानिक खौफ भी कानून-व्यवस्था के लिए उतना ही बड़ा संकट बन सकता है। अधिकारियों ने कहा कि वैभव मिश्रा जैसे पढ़े-लिखे पेशेवर का अपराध के इस दलदल में उतरना यह दर्शाता है कि त्वरित धन कमाने का लालच और साइबर दुनिया की छद्म गुमनामी युवाओं को किस दिशा में भटका रही है।
इस गिरफ्तारी के बाद मुंबई पुलिस ने फिल्म उद्योग, कॉर्पोरेट जगत और आम जनता से अत्यंत सतर्क रहने की अपील की है। पुलिस ने साफ तौर पर कहा है कि यदि किसी भी नागरिक, व्यापारी या कलाकार को किसी गैंगस्टर, अंडरवर्ल्ड सिंडिकेट या अज्ञात स्रोत से धमकी भरी कॉल, संदेश या फिरौती की मांग आती है, तो वे तनिक भी न घबराएं और न ही किसी बिचौलिए या अनधिकृत माध्यम से कोई समझौता करने का प्रयास करें। पुलिस ने नागरिकों से आग्रह किया है कि ऐसी किसी भी घटना की सूचना तत्काल प्रभाव से पुलिस के साइबर सेल या एंटी-एक्सटॉर्शन सेल को दी जानी चाहिए। पुलिस प्रशासन के पास ऐसे अपराधियों के डिजिटल नेटवर्क को भेदने और उनकी वास्तविक पहचान उजागर करने के आधुनिकतम तकनीकी संसाधन मौजूद हैं।

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