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एकता के शिल्पकार को नमन: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एकता नगर में सरदार वल्लभभाई पटेल को अर्पित की श्रद्धांजलि

भव्य राष्ट्रीय एकता दिवस परेड की ली सलामी, विभाजनकारी ताकतों के विरुद्ध एकजुटता का दिया संदेश

भारत के प्रथम उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री, लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं पावन जयंती के पावन अवसर पर समूचा राष्ट्र राष्ट्रीय एकता दिवस के गौरवमयी उत्सव में सराबोर नजर आया। गुजरात के नर्मदा जिले में स्थित विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के चरण कमलों में उपस्थित होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र की ओर से इस महान विभूति को भावभीनी पुष्पांजलि अर्पित की। 182 मीटर ऊंची इस भव्य और विहंगम प्रतिमा के समक्ष खड़े होकर प्रधानमंत्री ने सरदार पटेल के विराट व्यक्तित्व, उनकी अद्वितीय राजनीतिक सूझबूझ, अटूट संकल्प और राष्ट्र निर्माण में दिए गए अमूल्य योगदान को कृतज्ञतापूर्वक स्मरण किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरदार पटेल की असाधारण दूरदर्शिता और राष्ट्रीय एकीकरण के प्रति उनका अडिग समर्पण आज भी हर भारतीय के हृदय में राष्ट्रभक्ति की अलख जगा रहा है और आने वाली पीढ़ियों को ‘राष्ट्र प्रथम’ के संकल्प के साथ आगे बढ़ने की निरंतर प्रेरणा देता रहेगा।
पुष्पांजलि कार्यक्रम के साथ ही नर्मदा के पावन तट पर स्थित केवडिया का पूरा आकाश देशभक्ति के जयकारों और विहंगम दृश्यों से गुंजायमान हो उठा। ठीक उसी क्षण भारतीय वायुसेना के विशेष हेलीकॉप्टरों ने सरदार पटेल की विशाल प्रतिमा के ऊपर से उड़ान भरते हुए पुष्पों की मनोहारी वर्षा की, जिसने वहां उपस्थित हजारों दर्शकों और सुरक्षा बलों के भीतर एक नई ऊर्जा का संचार कर दिया। प्रधानमंत्री ने प्रतिमा परिसर में विधिवत पूजा-अर्चना और पुष्पांजलि के उपरांत सीधे परेड ग्राउंड का रुख किया, जहां राष्ट्रीय एकता दिवस के उपलक्ष्य में एक अत्यंत अनुशासित, भव्य और गरिमामयी संयुक्त परेड का आयोजन किया गया था। इस राष्ट्रीय परेड में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, सीमा सुरक्षा बल, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल, राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड और विभिन्न राज्यों के चुनिंदा पुलिस बलों के सजे-धजे दस्तों ने भाग लिया।
खुली जीप में सवार होकर परेड का निरीक्षण करने के उपरांत प्रधानमंत्री मोदी ने मंच पर पहुंचकर इन अर्द्धसैनिक और पुलिस बलों द्वारा प्रस्तुत ओजस्वी मार्च पास्ट की विधिवत सलामी ली। परेड के दौरान प्रदर्शित किए गए मोटर साइकिल स्टंट्स, श्वान दस्तों के साहसिक करतब और अर्द्धसैनिक बलों की महिला कमांडो द्वारा दिखाए गए जांबाज युद्ध कौशल ने समारोह में उपस्थित हर नागरिक को गर्व से भर दिया। मार्च पास्ट के पश्चात प्रधानमंत्री ने स्वयं देश भर के नागरिकों, सुरक्षा कर्मियों और उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों को राष्ट्रीय एकता की शपथ दिलाई। इस सामूहिक प्रतिज्ञा के माध्यम से देशवासियों ने राष्ट्र की एकता, अखंडता, संप्रभुता और आंतरिक सुरक्षा को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए स्वयं को समर्पित करने तथा सरदार पटेल के सपनों के भारत को साकार करने का दृढ़ संकल्प दोहराया।
समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरदार वल्लभभाई पटेल के ऐतिहासिक कार्यों का विस्तार से उल्लेख किया और बताया कि किस प्रकार आजादी के बाद के उस अत्यंत संकटपूर्ण और उथल-पुथल भरे दौर में उन्होंने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से भारत के भूगोल और भविष्य को नई दिशा दी। प्रधानमंत्री ने स्मरण कराया कि जब भारत स्वाधीन हुआ था, तब देश पांच सौ साठ से अधिक छोटी-बड़ी रियासतों में बंटा हुआ था। विदेशी हुकूमत और साम्राज्यवादी शक्तियां यह मानकर चल रही थीं कि भारत अपनी आंतरिक विविधताओं, भाषाई अंतरों और राजा-रजवाड़ों के आपसी विवादों के कारण बिखर जाएगा और कभी एक स्थिर राष्ट्र के रूप में खड़ा नहीं हो सकेगा। किंतु यह सरदार पटेल की लौह इच्छाशक्ति, कूटनीतिक चातुर्य और देशप्रेम का ही प्रतिफल था कि उन्होंने बिना किसी व्यापक रक्तपात के उन सभी रियासतों को भारतीय संघ का अभिन्न अंग बना दिया। जूनागढ़ से लेकर हैदराबाद तक और कश्मीर से लेकर त्रावणकोर तक उन्होंने बिखरे हुए भारत को एक सुदृढ़ और अखंड सूत्र में पिरोकर आधुनिक गणराज्य की मजबूत नींव रखी।
प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि सरदार पटेल केवल रियासतों के एकीकरण के शिल्पी नहीं थे, बल्कि उन्होंने स्वतंत्र भारत की प्रशासनिक रीढ़ कहे जाने वाले भारतीय प्रशासनिक तंत्र यानी ऑल इंडिया सिविल सर्विसेज की भी आधारशिला रखी थी। सरदार साहब मानते थे कि एक विशाल और विविधतापूर्ण राष्ट्र को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक निष्पक्ष, समर्पित और राष्ट्रीय सोच वाले प्रशासनिक ढांचे की आवश्यकता है, जिसे उन्होंने ‘स्टील फ्रेम ऑफ इंडिया’ की संज्ञा दी थी। आज देश की जो प्रशासनिक व्यवस्था दूरदराज के गांवों से लेकर महानगरों तक शासन की नीतियों को लागू कर रही है, उसमें सरदार पटेल की वही दृष्टि समाहित है। प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में जब भारत वैश्विक स्तर पर एक बड़ी शक्ति के रूप में उभर रहा है, तब सरदार पटेल के बताए गए सिद्धांतों की प्रासंगिकता और अधिक बढ़ गई है।
अपने ओजस्वी संबोधन में प्रधानमंत्री ने देश के समक्ष मौजूद आंतरिक और बाहरी सुरक्षा चुनौतियों का विशेष रूप से उल्लेख किया और समाज को बांटने वाली विघटनकारी शक्तियों के विरुद्ध कड़ा प्रहार किया। उन्होंने राष्ट्र को आगाह करते हुए कहा कि आज दुनिया के बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य में कुछ ऐसी ताकतें सक्रिय हैं जो भारत के आर्थिक उत्थान, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक गौरव से विचलित हैं। ये ताकतें जाति, धर्म, क्षेत्र और भाषा के नाम पर हमारे समाज में वैमनस्य के बीज बोने और नागरिकों को आपस में लड़ाने का निरंतर कुत्सित प्रयास कर रही हैं। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि हमें ऐसे किसी भी अलगाववादी और विभाजनकारी विचार को सिरे से नकारना होगा जो देश की सामूहिक शक्ति को कमजोर करता हो। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय एकता कोई एक दिन का उत्सव नहीं है, बल्कि यह हमारे दैनिक आचरण, विचार और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं का स्थायी स्वभाव होना चाहिए। जब एक सौ चालीस करोड़ देशवासी एक स्वर में सोचते हैं और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हैं, तो दुनिया की कोई भी शक्ति भारत की प्रगति को रोक नहीं सकती।
राष्ट्रीय एकता दिवस के इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री ने एकता नगर के सर्वांगीण विकास, सतत पर्यटन और पर्यावरणीय संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए चार सौ करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी किया। इन विकास कार्यों का उद्देश्य केवडिया को न केवल एक राष्ट्रीय तीर्थ के रूप में विकसित करना है, बल्कि इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्यावरण-अनुकूल और शून्य-अपशिष्ट पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करना भी है। इस अवसर पर लगभग दो दशमलव छह किलोमीटर लंबे नवनिर्मित ‘यूनिटी ट्रेल’ का उद्घाटन किया गया, जो पर्यटकों और पैदल यात्रियों के लिए प्रकृति की गोद में एक सुरक्षित, आधुनिक और विहंगम सैरगाह गलियारा प्रदान करता है। इसके साथ ही नर्मदा नदी के पावन तट पर आठ हजार श्रद्धालुओं की क्षमता वाले एक विस्तृत और अत्याधुनिक नर्मदा आरती घाट का लोकार्पण किया गया, जहां दैनिक आधार पर भव्य संध्या आरती का आयोजन किया जाएगा।
पर्यावरण संतुलन और हरित विकास की प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाते हुए एकता नगर में चार सौ पचास से अधिक दुर्लभ एवं सदाबहार प्रजातियों के विशाल वर्षावन क्षेत्र के विस्तार की घोषणा की गई, जिससे यह पूरा क्षेत्र जैव विविधता के एक समृद्ध केंद्र के रूप में विकसित हो सके। कचरा प्रबंधन की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए यहां प्रतिदिन पचास टन क्षमता वाले एक अत्याधुनिक सॉलिड वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट की शुरुआत की गई, जो सर्कुलर इकोनॉमी और ‘वेस्ट-टू-वेल्थ’ के सिद्धांत पर कार्य करते हुए पूरे एकता नगर को कचरा-मुक्त क्षेत्र बनाने में सहायक सिद्ध होगा। इसके अलावा समूचे परिसर में चौबीसों घंटे सौर ऊर्जा से जगमगाने वाली स्मार्ट लाइटिंग प्रणाली और इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्बाध संचालन के लिए नए चार्जिंग स्टेशनों का नेटवर्क भी राष्ट्र को समर्पित किया गया।
समारोह के सांस्कृतिक आयामों को विस्तार देते हुए प्रधानमंत्री ने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी परिसर में पंद्रह दिवसीय ‘भारत पर्व 2026’ का औपचारिक उद्घाटन भी किया। ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की मूल भावना पर आधारित इस भव्य सांस्कृतिक उत्सव में देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लोक कलाकारों, शिल्पकारों और संगीतकारों को एक साझा मंच प्रदान किया गया है। यहां आगंतुक भारत के विभिन्न कोनों की समृद्ध लोक कलाओं, हस्तशिल्प, पारंपरिक परिधानों और विभिन्न राज्यों के प्रामाणिक व्यंजनों का एक ही स्थान पर जीवंत अनुभव प्राप्त कर सकेंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की यह विविधता ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति है और जब देश के विभिन्न प्रांतों की संस्कृतियां एक-दूसरे से मिलती हैं, तो राष्ट्रीय एकता का ताना-बाना और अधिक सुदृढ़ हो जाता है।
एकता नगर में आयोजित इस मुख्य समारोह के समानांतर पूरे देश में सरदार पटेल की जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में अत्यंत उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। देश की राजधानी नई दिल्ली सहित सभी राज्यों की राजधानियों, जिला मुख्यालयों, कस्बों और सुदूरवर्ती सीमावर्ती चौकियों पर ‘रन फॉर यूनिटी’ यानी एकता दौड़ का भव्य आयोजन किया गया। लाखों की संख्या में युवाओं, स्कूली विद्यार्थियों, खिलाड़ियों, वरिष्ठ नागरिकों और सुरक्षा बलों के जवानों ने हाथ में तिरंगा थामकर इस दौड़ में हिस्सा लिया और समाज को एकजुटता का संदेश दिया। कश्मीर के लाल चौक से लेकर कन्याकुमारी के तटों तक और पूर्वोत्तर के पहाड़ी अंचलों से लेकर राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्रों तक आयोजित इन दौड़ों ने यह साबित कर दिया कि सरदार पटेल के विचार आज भी प्रत्येक भारतवासी के दिल की धड़कन बने हुए हैं।
शाम ढलते ही एकता नगर का विहंगम दृश्य अपनी पराकाष्ठा पर पहुंच गया, जब स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर सरदार पटेल के संपूर्ण जीवन, बारडोली सत्याग्रह, आजादी के आंदोलन और रियासतों के ऐतिहासिक विलय की गौरवगाथा को दर्शाने वाले एक उच्च-तकनीकी लेजर लाइट एंड साउंड शो का प्रदर्शन किया गया। रोशनी के उस सम्मोहन और नर्मदा के शांत जल के बीच गूंजते राष्ट्रभक्ति के गीतों ने हर दर्शक की आंखों को नम और हृदय को गर्व से भर दिया। एकता नगर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिया गया यह संदेश आने वाले अमृत काल में विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए एक स्पष्ट दिशा-निर्देश बनकर उभरा है कि भारत की शक्ति उसकी एकता में है, और जब तक देश सरदार वल्लभभाई पटेल के आदर्शों पर चलते हुए अखंड रहेगा, तब तक उसकी विकास यात्रा को कोई अवरोध नहीं रोक सकेगा।

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