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प्रयागराज में जमीन खोदकर निकाला गया नोटों का अकूत खजाना

नवाबगंज के बरईपुर रामनगर में बरामदे के नीचे तीन ड्रमों में दबा मिला बेहिसाब कैश

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जनपद के गंगापार क्षेत्र में स्थित नवाबगंज थाना क्षेत्र से एक सनसनीखेज और हैरतअंगेज मामला सामने आया है, जिसने समूचे प्रशासनिक और पुलिस अमले को हिलाकर रख दिया है। बरईपुर रामनगर गांव में स्थित एक पक्के मकान के भीतर जमीन खोदकर छिपाई गई बेहिसाब नकदी का एक बहुत बड़ा जखीरा बरामद किया गया है। पुलिस की संयुक्त टीमों ने जब पुख्ता खुफिया इनपुट के आधार पर मकान के बरामदे के पक्के फर्श को मजदूरों की मदद से खुदवाया, तो लगभग चार से पांच फीट नीचे जमीन के भीतर गड़े हुए तीन बड़े प्लास्टिक के ड्रम बरामद हुए। इन ड्रमों को जब रस्सियों के सहारे बाहर निकालकर खोला गया, तो पुलिसकर्मियों की आंखें फटी की फटी रह गईं। ड्रमों के भीतर वाटरप्रूफ काली और नीली पॉलीथिन की कई परतों में लपेटकर 500 रुपये के नोटों की गड्डियों के अंबार ठूंस-ठूंस कर भरे गए थे। बरामद नकदी इतनी अधिक थी कि स्थानीय पुलिस के लिए हाथ से उसकी गिनती कर पाना असंभव हो गया, जिसके बाद भारतीय स्टेट बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा के अधिकारियों को नोट गिनने वाली कई स्वचालित मशीनों के साथ मौके पर बुलाया गया।
इस चौंकाने वाली बरामदगी के तुरंत बाद पुलिस ने मौके से मकान में मौजूद दो सगे भाइयों, राकेश यादव और राजेश यादव को हिरासत में ले लिया है। प्राथमिक जांच और गांव के लोगों से पूछताछ में सामने आया है कि दोनों भाई काफी समय पहले महाराष्ट्र के पुणे शहर में किसी निजी कंपनी में साधारण वेतन पर काम करने की बात कहते थे। किंतु पिछले कुछ वर्षों में गांव लौटने के बाद दोनों भाइयों की आर्थिक स्थिति में अप्रत्याशित और अकल्पनीय उछाल आया था। उन्होंने न केवल इलाके में कई बीघा कृषि भूमि, कीमती व्यावसायिक प्लॉट, पक्के मकान और दुकानें खरीदीं, बल्कि उनके पास से कई गाड़ियां और महंगी संपत्ति के दस्तावेज भी मिले हैं। इतनी विशाल मात्रा में भूमिगत नकदी मिलने की सूचना मिलते ही पुलिस मुख्यालय ने तत्काल प्रभाव से आयकर विभाग की अन्वेषण शाखा, राज्य माल एवं सेवा कर (जीएसटी) खुफिया विंग और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों को आधिकारिक सूचना देकर मौके पर तलब कर लिया। एजेंसियां अब इस बात की पड़ताल में जुटी हैं कि जमीन के नीचे दबी यह काली कमाई पुणे की किसी कॉर्पोरेट धोखाधड़ी, हवाला नेटवर्क, अंतर-राज्यीय वित्तीय गबन या किसी संगठित आपराधिक सिंडिकेट से जुड़ी है या नहीं।
इस पूरी कार्रवाई की पृष्ठभूमि दीपावली के त्योहार के मद्देनजर चलाए जा रहे विशेष अपराध नियंत्रण और नकबजनी निरोधक अभियान से जुड़ी हुई है। प्रयागराज पुलिस कमिश्नरेट के गंगानगर जोन के डीसीपी और उनकी विशेष जांच टीम को गोपनीय सूत्रों और पुलिस के ‘यक्ष’ सत्यापन तंत्र के माध्यम से सूचना मिली थी कि बरईपुर रामनगर गांव में स्थित यादव बंधुओं के घर में चोरी, गबन या संदिग्ध हवाला माध्यम से लाई गई अकूत नकदी छिपाई गई है। पुलिस ने किसी भी प्रकार की सूचना लीक होने से बचाने के लिए अत्यधिक सतर्कता बरती। दबिश देने से पूर्व सुरक्षा की दृष्टि से पूरे गांव की बिजली आपूर्ति को कुछ समय के लिए नियंत्रित किया गया और कई थानों की फोर्स ने मिलकर पूरे मकान को चारों तरफ से घेर लिया। जब पुलिस दल ने घर के भीतर प्रवेश किया, तो पहली नजर में सब कुछ सामान्य दिखाई दे रहा था। मकान के किसी भी कमरे, अलमारी या लॉकर में कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली। किंतु तलाशी दल में शामिल अनुभवी पुलिस अधिकारियों की नजर बरामदे के फर्श पर पड़ी, जहां सीमेंट के प्लास्टर का एक हिस्सा हाल ही में तैयार किया गया प्रतीत हो रहा था।
संदेह गहराने पर पुलिस अधिकारियों ने फर्श पर थाप दी, जिससे नीचे खोखलापन महसूस हुआ। इसके बाद किसी भी कानूनी विवाद से बचने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों और स्वतंत्र गवाहों को मौके पर बुलाया गया तथा पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी शुरू कराई गई। स्थानीय मजदूरों को बुलाकर जब हथौड़े और गैंती से पक्के फर्श को तोड़ा गया और मिट्टी हटाई गई, तो लगभग चार फीट की गहराई पर प्लास्टिक के ड्रमों के ढक्कन दिखाई देने लगे। लगभग दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद जब तीनों ड्रमों को बाहर निकाला गया, तो वे वजनदार और पूरी तरह सीलबंद थे। ड्रमों के ढक्कनों को जब खोला गया, तो अंदर से नमी, दीमक और पानी से बचाने के लिए एयरटाइट पॉलीथिन में पैक किए गए करेंसी नोटों के बंडल निकलने लगे। ड्रमों के भीतर से अधिकांश करेंसी 500 रुपये के नए नोटों की गड्डियों के रूप में व्यवस्थित तरीके से सजाई गई थी।
इतने विशाल पैमाने पर नोटों के मिलने की खबर जंगल में आग की तरह फैल गई, जिसके बाद बरईपुर रामनगर और आसपास के गांवों से सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण मकान के बाहर इकट्ठा हो गए। स्थिति की संवेदनशीलता और कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए नवाबगंज, सोरांव और थरवई थानों से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाकर गांव में बैरिकेडिंग कर दी गई। पुलिस अधिकारियों ने बरामद सभी ड्रमों और नकदी को अपने कब्जे में लेकर सुरक्षित रूप से सील किया और नोटों की वास्तविक गिनती के लिए स्थानीय बैंक शाखाओं के प्रबंधकों से संपर्क साधा। बैंक कर्मियों द्वारा लाई गई हाई-स्पीड करेंसी काउंटिंग मशीनों के माध्यम से नोटों की गिनती का काम देर रात तक चलता रहा। ग्रामीण जहां इस रकम के 50 से 60 करोड़ रुपये तक होने की अटकलें लगाते रहे, वहीं पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि वास्तविक और अंतिम आंकड़े की पुष्टि सभी नोटों की आधिकारिक गिनती पूरी होने और जब्ती मेमो तैयार होने के बाद ही की जाएगी। इसके साथ ही यह भी परखा जा रहा है कि इन नोटों में कोई जाली करेंसी तो शामिल नहीं है।
गांव के स्थानीय निवासियों से बातचीत के दौरान हिरासत में लिए गए दोनों भाइयों की जीवनशैली को लेकर कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि करीब पंद्रह वर्ष पूर्व राजेश यादव और उसका भाई काम की तलाश में महाराष्ट्र के पुणे गए थे। उस समय उनकी पारिवारिक स्थिति बेहद साधारण थी और उनके पास आय का कोई बड़ा साधन नहीं था। पुणे में वे किसी निजी कंपनी या वेयरहाउस में काम करने की बात अपने परिचितों को बताते थे। किंतु लगभग चार-पांच वर्ष पूर्व जब दोनों भाई गांव लौटे, तो उनका रहन-सहन रातोंरात पूरी तरह बदल गया। उन्होंने नवाबगंज और सोरांव तहसील क्षेत्र के मुख्य मार्गों पर बेशकीमती जमीनें खरीदनी शुरू कर दीं। केवल जमीनें ही नहीं, बल्कि उन्होंने कई पक्की दुकानें, ट्रैक्टर, पिकअप वाहन खरीदे और दूसरे गांव में एक आलीशान नया मकान भी बनवाया। गांव में किसी को भी यह समझ नहीं आ रहा था कि एक साधारण नौकरी करने वाले परिवार के पास अचानक इतना धन कहां से आ गया। कुछ ग्रामीणों ने यह भी चर्चा की कि परिवार के लोग रोजमर्रा के घरेलू खर्चों और संपत्तियों की रजिस्ट्री के लिए समय-समय पर इसी भूमिगत ठिकाने से नकदी निकालते थे।
मामले के वित्तीय और अंतर-राज्यीय आयामों को देखते हुए जांच का दायरा अब स्थानीय पुलिस थाने से निकलकर केंद्रीय और राज्य स्तरीय वित्तीय जांच एजेंसियों तक पहुंच चुका है। प्रयागराज पुलिस कमिश्नरेट ने औपचारिक रूप से आयकर विभाग को पत्र लिखकर नकदी के भौतिक सत्यापन और वैधानिक जब्ती की प्रक्रिया में शामिल कर लिया है। आयकर विभाग के अधिकारी अब आरोपियों के पिछले छह वर्षों के बैंक खातों के विवरण, आयकर रिटर्न और उनकी घोषित वार्षिक आय की जांच करेंगे। दोनों भाइयों से यह पूछा जाएगा कि उनके घर की जमीन के भीतर दबा यह पैसा किसका है, इसे किस व्यवसाय या स्रोत से अर्जित किया गया था और इसे सामान्य बैंकिंग व्यवस्था में जमा कराने के बजाय जमीन के नीचे ड्रमों में छिपाकर क्यों रखा गया था। यदि वे इस अकूत धन का कोई वैध और संतोषजनक दस्तावेजी प्रमाण नहीं दे पाते हैं, तो आयकर अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत इसे अघोषित बेहिसाब संपत्ति मानते हुए भारी जुर्माना और जब्ती की कार्रवाई की जाएगी।
इसके अतिरिक्त, वाणिज्यिक कर और जीएसटी विभाग की एक विशेष टीम भी मामले की जांच में शामिल हो गई है। जीएसटी अधिकारियों को अंदेशा है कि यह नकदी किसी फर्जी बिलिंग नेटवर्क, बिना बिल के माल के अंतर-राज्यीय परिवहन या बोगस फर्मों के जरिए टैक्स चोरी करके जमा की गई राशि हो सकती है। वहीं दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश पुलिस की एक विशेष टीम महाराष्ट्र के पुणे पुलिस प्रशासन से संपर्क साध रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या पुणे में दोनों भाइयों के खिलाफ किसी वित्तीय धोखाधड़ी, बैंक गबन, डकैती या कंपनी से नकदी लेकर फरार होने का कोई पुराना आपराधिक मुकदमा दर्ज है। यदि जांच में यह साबित होता है कि यह पैसा किसी संगठित अपराध, हवाला कारोबार या धनशोधन के जरिए एकत्रित किया गया था, तो मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी का प्रवेश भी तय माना जा रहा है।
वर्तमान में बरईपुर रामनगर स्थित संबंधित मकान को पुलिस ने सील कर दिया है और पूरे परिसर की सुरक्षा के लिए सशस्त्र पुलिस बल तैनात किया गया है। दोनों भाइयों से पुलिस और खुफिया एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी अलग-अलग कमरों में बैठाकर गहन पूछताछ कर रहे हैं। पूछताछ के दौरान उनके बयानों में भारी विरोधाभास देखा जा रहा है और वे नकदी के स्रोत को लेकर गोलमोल जवाब दे रहे हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह केवल एक गांव के भीतर जमीन में दबे नोटों की बरामदगी का मामला नहीं है, बल्कि इसके तार एक बहुत बड़े अंतर-राज्यीय वित्तीय सिंडिकेट से जुड़े हो सकते हैं। आने वाले दिनों में जब जांच एजेंसियां उनके पुणे के संपर्कों, स्थानीय जमीन रजिस्ट्रियों और बैंक लेन-देन की कड़ियों को आपस में जोड़ेंगी, तब इस भूमिगत खजाने के पीछे छिपे असली चेहरों और पूरे गोरखधंधे का पर्दाफाश हो सकेगा।

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