अर्थव्यवस्थाराष्ट्रीय
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर चांदी ₹1.90 लाख और सोना ₹1.45 लाख के पार
त्योहारी खरीदारी पर सीधा असर, धनतेरस और दीपावली में कीमती धातुओं पर जोरदार तेजी

धनतेरस और दीपावली के पावन पर्व से ठीक पहले घरेलू और वैश्विक कमोडिटी बाजारों में अप्रत्याशित हलचल देखने को मिली है। पिछले कई कारोबारी सत्रों से लगातार जारी गिरावट और ठहराव के चक्र को तोड़ते हुए सोने और चांदी की कीमतों ने गुरुवार को बेहद आक्रामक और तेज रिकवरी दर्ज की है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर वायदा कारोबार के दौरान चांदी ने तेजी का नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए एक लाख नब्बे हजार रुपये प्रति किलोग्राम का स्तर छू लिया, जबकि सोना भी उछलकर एक लाख पैंतालीस हजार रुपये प्रति दस ग्राम के मनोवैज्ञानिक आंकड़े के पार निकल गया। त्योहारी सीजन के ऐन मुहाने पर कीमती धातुओं में आई इस अचानक तेजी ने पारंपरिक रूप से आभूषण, सिक्के और बर्तन खरीदने की योजना बना रहे आम परिवारों और खुदरा खरीदारों के बजट को सीधे तौर पर प्रभावित किया है।
भारतीय परंपरा में धनतेरस के दिन सोना, चांदी या पीतल की धातु खरीदना समृद्धि, संपन्नता और पारिवारिक कल्याण का प्रतीक माना जाता है। इस वर्ष खरीदार पिछले कुछ दिनों से कीमतों में आई गिरावट को देखकर राहत की सांस ले रहे थे और उम्मीद कर रहे थे कि बाजार निचले स्तरों पर स्थिर रहेगा। कई परिवारों ने अपनी खरीदारी की योजना को यह सोचकर टाल रखा था कि धनतेरस के निकट भाव और गिर सकते हैं। हालांकि, गुरुवार के कारोबारी सत्र में बाजार ने एकाएक करवट बदली और सुबह के शुरुआती कारोबार से ही वायदा बाजार में आक्रामक लिवाली का दौर शुरू हो गया। सटोरियों और संस्थागत निवेशकों द्वारा निचले स्तरों पर की गई शॉर्ट कवरिंग और वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों के चलते देखते ही देखते दोनों प्रमुख धातुओं के ग्राफ ऊपर चढ़ने लगे, जिससे खुदरा सर्राफा बाजारों में भी हलचल तेज हो गई।
इस तीव्र उछाल के पीछे अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दोनों स्तरों पर कई महत्वपूर्ण आर्थिक कारक एक साथ सक्रिय नजर आ रहे हैं। वैश्विक वित्तीय परिदृश्य में अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में अचानक दर्ज की गई कमजोरी और बॉन्ड यील्ड में आई सुस्ती ने सर्राफा बाजार को मजबूत सहारा दिया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कमोडिटी विश्लेषकों का कहना है कि जब भी डॉलर की ताकत में नरमी आती है, तो वैश्विक निवेशक अपनी पूंजी को सुरक्षित परिसंपत्ति यानी सेफ-हेवन एसेट्स की ओर मोड़ देते हैं। अंतरराष्ट्रीय कॉमेक्स बाजार में हाजिर सोना चार हजार डॉलर प्रति औंस के स्तर को मजबूती से थामे हुए है, जबकि विदेशी बाजारों में चांदी भी बावन डॉलर प्रति औंस के पार कारोबार कर रही है। विदेशी बाजारों की इस तेजी का सीधा और तत्काल प्रभाव भारतीय घरेलू वायदा बाजार पर देखने को मिला, जहां रुपया-डॉलर विनिमय दर के उतार-चढ़ाव ने इस रैली को और अधिक हवा दे दी।
घरेलू स्तर पर त्योहारी मांग का दबाव भी इस मूल्य वृद्धि का एक बड़ा इंजन बनकर उभरा है। धनतेरस के ठीक पहले देश भर के प्रमुख ज्वेलर्स, शोरूम्स और कॉरपोरेट रिटेल चेन्स ने अपनी भौतिक इन्वेंट्री को पूरा करने के लिए थोक स्तर पर ताबड़तोड़ खरीदारी की है। पिछले सप्ताह जब कीमतों में तीन से चार प्रतिशत का करेक्शन देखने को मिला था, तब कई बड़े आभूषण निर्माताओं ने अपने अग्रिम ऑर्डर रोक दिए थे। अब त्योहारी तारीखें बेहद नजदीक आने के कारण रि-स्टॉकिंग की मजबूरी ने बाजार में तात्कालिक मांग पैदा कर दी। थोक मंडियों में आपूर्ति की तुलना में अचानक बढ़ी इस खरीद ने कीमतों को ऊपर धकेलने में उत्प्रेरक का काम किया, जिसका सीधा असर खुदरा बोर्ड दरों पर दिखाई देने लगा।
वायदा बाजार के साथ-साथ देश के प्रमुख हाजिर और खुदरा सर्राफा बाजारों में भी इस तेजी का व्यापक प्रभाव महसूस किया गया। राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक चांदनी चौक और कूचा महाजनी, मुंबई के झवेरी बाजार, कोलकाता के बड़ा बाजार और चेन्नई के टी-नगर जैसे प्रमुख आभूषण व्यापारिक केंद्रों में सोने और चांदी के नए रेट कार्ड जारी किए गए। खुदरा बाजार में चौबीस कैरेट शुद्ध सोने की कीमतें जीएसटी और अन्य स्थानीय प्रभारों के बिना ही एक लाख छियालीस हजार रुपये प्रति दस ग्राम के आसपास पहुंच गईं। वहीं आभूषण निर्माण के लिए सर्वाधिक प्रयुक्त होने वाले बाईस कैरेट हॉलमार्क सोने का भाव एक लाख तैंतीस हजार रुपये प्रति दस ग्राम से ऊपर दर्ज किया गया। चांदी के हाजिर भावों में भी भारी आग लगी रही और कई प्रमुख शहरों में शुद्ध चांदी के सिक्के और सिल्लियां दो लाख से लेकर दो लाख दस हजार रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर बिकती देखी गईं।
कीमतों में आई इस उछाल ने आम मध्यमवर्गीय उपभोक्ता के त्योहारी गणित को पूरी तरह से उलझा दिया है। जब कोई उपभोक्ता खुदरा दुकान से सोने के आभूषण खरीदता है, तो उसे केवल धातु के आधार मूल्य का भुगतान नहीं करना होता, बल्कि उसके ऊपर मेकिंग चार्ज और वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी का अतिरिक्त भार भी जुड़ता है। वर्तमान दरों के अनुसार, यदि एक उपभोक्ता बाईस कैरेट सोने का दस ग्राम का हार या चूड़ी खरीदता है, तो लगभग एक लाख चौंतीस हजार रुपये के बेस प्राइस पर आठ से पंद्रह प्रतिशत तक मेकिंग चार्ज जुड़ जाता है। इसके पश्चात कुल राशि पर तीन प्रतिशत का जीएसटी देय होता है। इस पूरी गणना के बाद दस ग्राम के हल्के आभूषण का अंतिम बिल डेढ़ लाख रुपये से लेकर एक लाख छप्पन हजार रुपये के बीच बैठ रहा है। इस भारी वित्तीय आंकड़े ने उन खरीदारों को सोचने पर मजबूर कर दिया है जो एक निश्चित बजट के साथ खरीदारी की योजना बनाकर बाजार पहुंचे थे।
चांदी के बाजार में भी स्थिति काफी गंभीर बनी हुई है। पारंपरिक रूप से भारतीय समाज में धनतेरस पर चांदी के सिक्के, लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां, पूजा के बर्तन और चांदी के कलश खरीदने की व्यापक परंपरा रही है। आम मध्यम वर्ग और निम्न मध्यम वर्ग के वे परिवार, जो सोने के ऊंचे भावों के कारण आभूषण नहीं खरीद पाते, वे हमेशा चांदी को एक सुलभ और शुभ विकल्प मानते रहे हैं। लेकिन चांदी का भाव एक लाख नब्बे हजार रुपये प्रति किलो के पार निकल जाने और खुदरा में दो लाख का आंकड़ा छू लेने के कारण अब चांदी के बर्तनों और सिक्कों की खरीद भी काफी महंगी हो चुकी है। सौ ग्राम का एक साधारण चांदी का सिक्का, जो कुछ समय पूर्व आसानी से उपलब्ध था, अब बीस हजार रुपये से अधिक के बजट की मांग कर रहा है। इसके चलते सर्राफा कारोबारियों का कहना है कि ग्राहक अब भारी आभूषणों या बर्तनों के बजाय बेहद हल्के वजन के उपहारों की ओर रुख करने लगे हैं।
बाजार विशेषज्ञों और आभूषण उद्योग के जानकारों का कहना है कि इस मूल्य वृद्धि के बावजूद भारतीय ग्राहकों में त्योहार की आस्था और परंपरा को लेकर उत्साह पूरी तरह कम नहीं हुआ है, बल्कि खरीद के तौर-तरीकों में एक रणनीतिक बदलाव आ गया है। बड़े आभूषणों के स्थान पर अब ग्राहक एक ग्राम, दो ग्राम या पांच ग्राम के प्रमाणित सोने के सिक्कों और गोल्ड बार्स को प्राथमिकता दे रहे हैं। सिक्कों की खरीद में मेकिंग चार्ज नाममात्र यानी एक से तीन प्रतिशत के आसपास होता है, जिससे उपभोक्ता का अतिरिक्त खर्च बचता है और उसकी निवेशित पूंजी पूरी तरह धातु के रूप में सुरक्षित रहती है। कई प्रतिष्ठित ज्वेलर्स ने ग्राहकों के इसी बदले हुए मिजाज को देखते हुए पहले से ही लाइटवेट और आधुनिक डिजाइनों की ज्वैलरी का भारी स्टॉक तैयार किया है, ताकि कम ग्राम में भी आकर्षक आभूषण बेचे जा सकें।
इसके समानांतर, भारतीय शहरी निवेशकों में डिजिटल विकल्पों के प्रति आकर्षण में भी उल्लेखनीय उछाल देखा जा रहा है। भौतिक आभूषणों पर लगने वाले भारी मेकिंग चार्ज, लॉकर में रखने की चिंता और शुद्धता की जांच के झंझटों से बचने के लिए शिक्षित और युवा निवेशक अब गोल्ड ईटीएफ यानी एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड्स और डिजिटल गोल्ड प्लेटफॉर्म्स की ओर रुख कर रहे हैं। डिजिटल गोल्ड में उपभोक्ता मात्र सौ रुपये या एक ग्राम के छोटे अंश में भी चालू बाजार भाव पर शुद्ध चौबीस कैरेट सोना खरीद सकते हैं। कमोडिटी विश्लेषकों का मानना है कि इस धनतेरस पर डिजिटल और पेपर गोल्ड के लेन-देन में रिकॉर्ड वॉल्यूम दर्ज हो सकता है, क्योंकि यह पारंपरिक भौतिक खरीद की तुलना में अधिक लागत-प्रभावी और पारदर्शी वित्तीय माध्यम बनकर उभरा है।
औद्योगिक मोर्चे पर यदि देखा जाए तो चांदी की कीमतों में आई यह तेजी केवल त्योहारी सट्टेबाजी या मौसमी लिवाली का परिणाम नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरे बुनियादी और ढांचागत कारण मौजूद हैं। विश्व भर में हरित ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन और सौर ऊर्जा प्रौद्योगिकियों के तेजी से हो रहे विस्तार ने चांदी की औद्योगिक मांग को ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। आधुनिक फोटोवोल्टिक सोलर पैनल्स, 5जी दूरसंचार उपकरणों और ऑटोमोटिव इलेक्ट्रॉनिक्स में चांदी एक अनिवार्य सुचालक के रूप में प्रयुक्त होती है। विश्व भर के चांदी खनन भंडारों में सीमित उत्पादन और बढ़ती वैश्विक खपत के चलते बाजार में मांग और आपूर्ति का अंतर लगातार चौड़ा हो रहा है। यही वजह है कि जब भी चांदी में कोई छोटा करेक्शन आता है, वैश्विक औद्योगिक खरीदार तुरंत बाजार में कूद पड़ते हैं और कीमतों को दोबारा ऊपर खींच लेते हैं।
कमोडिटी वायदा बाजार के तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए निकट भविष्य में सोने और चांदी में कोई बड़ी मंदी आने के आसार बेहद कम हैं। तकनीकी चार्ट्स पर सोने के लिए एमसीएक्स पर एक लाख तैंतालीस हजार रुपये का स्तर एक मजबूत आधार बन चुका है, जिसके नीचे भावों का फिसलना फिलहाल मुश्किल नजर आता है। वहीं ऊपर की दिशा में सोने के लिए एक लाख अड़तालीस हजार से लेकर एक लाख पचास हजार रुपये का स्तर अगला बड़ा प्रतिरोध क्षेत्र साबित हो सकता है। चांदी के मामले में विश्लेषक मान रहे हैं कि यदि मौजूदा वैश्विक और औद्योगिक रुझान इसी प्रकार बरकरार रहे, तो आने वाले हफ्तों में चांदी दो लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर को वायदा बाजार में भी स्थायी रूप से पार कर सकती है।



