ओपिनियननिवेशपर्यटन

भारत में सड़क सुरक्षा संकट: हर साल डेढ़ लाख से अधिक जानें क्यों खो रहे हैं?

व्यक्तिगत जिम्मेदारी और सामाजिक सोच

सड़क सुरक्षा की चुनौती भारत के लिए एक गंभीर राष्ट्रीय मुद्दा बन चुकी है। हर वर्ष लगभग 1.5 लाख लोगों की जान सड़क दुर्घटनाओं में चली जाती है, जो परिवारों के लिए अपूरणीय क्षति है और देश के सामाजिक-आर्थिक विकास में बाधा उत्पन्न करता है। इस समस्या का समाधान ढूँढ़ना और इसे रोकना ज़रूरी है ताकि सड़कों पर होने वाली जानलेवा दुर्घटनाओं की संख्या कम की जा सके।

2025 के पहले छह महीने में भारत के राष्ट्रीय राजमार्गों पर 29,000 से अधिक लोगों की मौत हुई, जो पिछले वर्ष की तुलना में बढ़ोतरी दर्शाता है। राष्ट्रीय राजमार्ग केवल देश के 2% सड़क नेटवर्क का हिस्सा हैं, लेकिन इन पर करीब 30% सड़क हादसों की मौतें होती हैं। पूरे देश में 2024 में 1.72 लाख से अधिक सड़क दुर्घटना जानलेवा थीं। यह आंकड़े बताते हैं कि सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में सुधार की जल्द से जल्द जरूरत है।​

सड़क जाने वाले अनुचित व्यवहार जैसे तेज सड़क चलाना, शराब पीकर गाड़ी चलाना, यातायात नियमों की अनदेखी, हेलमेट और सीट बेल्ट का न पहनना, दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण हैं। इसके अलावा सड़कों का खराब होना, असुरक्षित सड़क डिजाइन, अपर्याप्त सिग्नलिंग और प्रकाश व्यवस्था भी दुर्घटना की संभावना बढ़ाते हैं। युवा वर्ग और दोपहिया चालक सबसे अधिक प्रभावित हैं, जिनमें से 43% मौतें हेलमेट न पहनने से टाली जा सकती थीं। इसके अलावा पैदल यात्रियों और साइकिल चालकों की भी बड़ी संख्या में मृत्यु होती है।​

भारत में सड़क सुरक्षा कानून तो बने हुए हैं, पर उनका ठोस और कड़ी से पालन नहीं होता। नियमों के उल्लंघन के लिए जुर्माना आम उतना प्रभावी नहीं होता कि लोग अपने व्यवहार बदलें। जागरूकता की कमी और पुलिस प्रशासन में संसाधन तथा प्रशिक्षण की कमी भी समस्या को बढ़ाती है। जागरूकता अभियान, शिक्षा एवं प्रशिक्षित ट्रैफिक पुलिस की त्वरित आवश्यकता है।​

सड़कों की हालत भी एक महत्वपूर्ण चुनौती है। कई क्षेत्र गड्ढे, टूटी हुई लेन और खराब साइनबोर्डिंग से ग्रस्त हैं। राष्ट्रीय राजमार्गों पर भी दुर्घटनाओं में वृद्धि दर्शाती है कि जितनी तेजी से सड़कें बढ़ रही हैं, उतनी तेजी से सुरक्षा उपाय और रखरखाव नहीं हो पा रहा। ग्रामीण एवं अर्ध-शहरी क्षेत्रों में यह समस्या और बढ़ जाती है जहां सड़कें कमजोर होती हैं और प्रबंधन कमज़ोर होता है।​

सड़क सुरक्षा में सबसे बड़ा योगदान आम सड़क उपयोगकर्ताओं का होता है। हेलमेट पहनना, सीट बेल्ट लगाना, ट्रैफिक नियमों का सही पालन करना, नशा न करना, और वाहन चलाते समय मोबाइल का प्रयोग नहीं करना कुछ ऐसे व्यवहार हैं जो दुर्घटनाओं को काफी हद तक रोक सकते हैं। युवाओं में विशेष जागरूकता लाने की जरूरत है ताकि वे सुरक्षित ड्राइविंग अपनाएं।​

सरकार ने मार्ग सुरक्षा सुधार के लिए कदम उठाए हैं, जैसे कड़े नियम बनाना, नेशनल हाईवे के काले धब्बों को हटाना, और डिजिटल निगरानी तकनीकों को अपनाना। इसके अलावा रोड प्रोजेक्ट्स की गुणवत्ता सुधारने के लिए फोकस रखा गया है और लगातार प्रधानमंत्री सड़क सुरक्षा अभियान चलाए जा रहे हैं। परन्तु राज्यों और अन्य स्थानीय संस्थाओं में क्रियान्वयन की नाकाफी क्षमता के कारण परिणाम धीमे आए हैं।​

सड़क दुर्घटनाओं के बाद त्वरित चिकित्सा इलाज से जान बचाई जा सकती है। भारत में अभी भी आपातकालीन हेल्पलाइन सेवाएं, एंबुलेंस नेटवर्क और ट्रॉमा केयर सुविधाओं में सुधार की काफी गुंजाइश है। ‘गोल्डन घंटा’ के भीतर घायल व्यक्ति तक उचित उपचार पहुंचाने पर ध्यान देना होगा ताकि मृत्यु दर कम की जा सके।​ नई टेक्नोलॉजी जैसे स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम, वाहनों में एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम, एयरबैग, और कनेक्टिविटी तकनीक से सड़क सुरक्षा में सुधार संभव है। नियमित वाहन परीक्षण से खराब वाहनों को सड़क से हटाना चाहिए, जिससे दुर्घटना के जोखिम कम होंगे।​

सड़क सुरक्षा केवल एक व्यक्ति या सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। स्कूलों और समुदायों में सुरक्षा को लेकर शिक्षा और जागरूकता बढ़ानी चाहिए, जिससे एक सुरक्षित और संवेदनशील ट्रैफिक कल्चर का विकास हो। भारत में सड़क सुरक्षा संकट जटिल है और इसमें मानव भूल, कमजोर कानून प्रवर्तन, खराब सड़क अवसंरचना, जागरूकता की कमी और चिकित्सा सुविधाओं की अपर्याप्तता मिलकर भूमिका निभाते हैं। यह समस्या सरकार, समाज और व्यक्ति की संयुक्त प्रयासों से ही सुधारी जा सकती है। कानूनी सख्ती, बेहतर सड़क डिज़ाइन, तकनीकी नवाचारों को अपनाना और जन-जागरूकता बढ़ाना सब मिलकर इस संकट को कम कर सकते हैं। केवल तभी हर साल लाखों की मात्रा में हो रही जानों की हानि रोकी जा सकेगी।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button