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केरल का ‘किचन’ संकट: एलपीजी की कमी, होटल उद्योग की हड़ताल और गहराती आर्थिक चुनौतियां

23 मार्च की हड़ताल: 'आर-पार' की लड़ाई

18 मार्च, 2026 तक केरल में एलपीजी (LPG) का संकट एक विस्फोटक मोड़ पर पहुँच गया है। ‘केरल होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन’ (KHRA) ने 23 मार्च को राज्यव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है, जो इस बात का प्रमाण है कि राज्य का आतिथ्य क्षेत्र अब अपनी सहनशक्ति की अंतिम सीमा पर है। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान के कारण भारत के आयात में जो बाधा आई है, उसका सबसे कड़ा प्रहार केरल के वाणिज्यिक रसोईघरों पर पड़ा है।

केरल होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ने अपने विरोध को केवल सांकेतिक न रखकर इसे एक पूर्ण आर्थिक शटडाउन में बदलने का फैसला किया है। सोमवार, 23 मार्च को राज्य के छोटे टी-स्टॉल से लेकर बड़े लग्जरी होटलों तक, सभी व्यावसायिक इकाइयां बंद रहेंगी।हड़ताल से पहले, 19 मार्च (गुरुवार) को एसोसिएशन के सदस्य तेल कंपनियों के विभिन्न बॉटलिंग प्लांट्स (जैसे कोच्चि, कोझिकोड और कोल्लम) तक विरोध मार्च निकालेंगे। एसोसिएशन का कहना है कि सरकार घरेलू उपभोक्ताओं को बचाने के लिए कमर्शियल सेक्टर की ‘बलि’ दे रही है। कई क्षेत्रों में कमर्शियल सिलेंडर की आपूर्ति पिछले 10 दिनों से शून्य है।

होटल मालिकों का तर्क है कि वे केवल एक व्यवसाय नहीं हैं, बल्कि समाज के एक बड़े हिस्से (छात्रों, मरीजों, प्रवासियों और कामकाजी लोगों) के लिए भोजन का मुख्य स्रोत हैं। KHRA की सबसे बड़ी मांग यह है कि होटलों को ‘अनिवार्य सेवाओं’ की श्रेणी में रखा जाए। इससे संकट के समय उन्हें गैस आपूर्ति में प्राथमिकता मिलेगी। एसोसिएशन का आरोप है कि सरकारी आपूर्ति रुकने का फायदा उठाकर निजी गैस कंपनियां एक सिलेंडर की कीमत ₹1,800 से बढ़ाकर ₹3,000 से ऊपर ले गई हैं। वे सरकार से ‘प्राइस कैप’ (कीमत की सीमा) लगाने की मांग कर रहे हैं। जब तक आपूर्ति सामान्य नहीं होती, होटल मालिक मांग कर रहे हैं कि उन्हें सीमित संख्या में ‘घरेलू सिलेंडरों’ के उपयोग की कानूनी अनुमति दी जाए।

केरल के पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए यह स्थिति विनाशकारी साबित हो रही है कोच्चि और तिरुवनंतपुरम जैसे शहरों में लगभग 40% रेस्टोरेंट पहले ही बंद हो चुके हैं। शहरी इलाकों में अग्नि सुरक्षा नियमों के कारण लकड़ी के चूल्हों का उपयोग करना असंभव है। केरल का होटल उद्योग पश्चिम बंगाल और असम के मजदूरों पर निर्भर है। काम बंद होने और घर में चुनाव (अप्रैल-मई 2026) होने के कारण ये मजदूर सामूहिक रूप से राज्य छोड़ रहे हैं, जिससे भविष्य में ‘लेबर संकट’ खड़ा हो सकता है। जो रेस्टोरेंट खुले हैं, उन्होंने ‘लाइव कुकिंग’ (जैसे डोसा, पोरी, अप्पम) बंद कर दी है। अब केवल वही व्यंजन मिल रहे हैं जो एक बार में थोक में पकाए जा सकते हैं, जैसे बिरयानी या घी राइस।

केंद्र और राज्य सरकारें दोहरे मोर्चे पर काम कर रही हैं केंद्र सरकार ने घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम’ (Essential Commodities Act) लागू किया है। राहत की बात यह है कि ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ (47,000 मीट्रिक टन) जैसे टैंकर भारतीय तटों पर पहुँच चुके हैं। सरकार ने वादा किया है कि मार्च के अंतिम सप्ताह तक कमर्शियल सप्लाई में 20-30% का सुधार होगा।मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर केरल के लिए ‘विशेष एलपीजी कोटा’ की मांग की है, क्योंकि राज्य की खाद्य संस्कृति पूरी तरह गैस पर निर्भर है।

यह संकट केरल के होटल उद्योग के लिए एक सबक भी है सरकार अब कमर्शियल किचन को इंडक्शन स्टोव, स्टीमर्स और इलेक्ट्रिक कॉम्बी-ओवन पर शिफ्ट होने के लिए सब्सिडी देने पर विचार कर रही है। कोच्चि जैसे शहरों में पाइपलाइन प्राकृतिक गैस (PNG) का विस्तार करने की योजना को तेज किया जा रहा है, ताकि भविष्य में सिलेंडरों पर निर्भरता कम हो सके।

केरल में 23 मार्च की हड़ताल केवल होटलों की बंदी नहीं है, बल्कि यह एक ‘अलार्म’ है। यदि सरकार और तेल कंपनियां अगले 72 घंटों में कोई ठोस आपूर्ति चार्ट पेश नहीं करती हैं, तो यह आंदोलन अनिश्चितकालीन भी हो सकता है। ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ के आने से जगी उम्मीद की किरण को धरातल पर पहुँचने में अभी समय लगेगा, और तब तक केरल की थाली से उसका पसंदीदा स्वाद नदारद रह सकता है।

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