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दिल्ली-एनसीआर में कुदरत का अनोखा मिजाज: मार्च में जनवरी जैसी सुबह, भारी बारिश के बाद घने कोहरे की चादर और लुढ़कता पारा

शनिवार की सुबह का दृश्य: जब 'धूप' की जगह 'धुंध' ने ली

21 मार्च, 2026 की सुबह दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के निवासियों के लिए किसी बड़े मौसम संबंधी अचंभे से कम नहीं थी। कैलेंडर के अनुसार जहाँ दिल्ली को चिलचिलाती धूप और वसंत के अंत की ओर बढ़ना चाहिए था, वहीं शनिवार की सुबह राजधानी ने एक ऐसी चादर ओढ़ी जो आमतौर पर दिसंबर या जनवरी के मध्य में दिखाई देती है। शुक्रवार की शाम और रात भर हुई मूसलाधार बारिश के बाद, शनिवार तड़के पूरा इलाका घने कोहरे (Dense Fog) की गिरफ्त में था। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने इस बदलाव को “असाधारण” करार दिया है।

शनिवार सुबह 5:30 बजे के आसपास, दिल्ली के सफदरजंग और पालम मौसम केंद्रों ने दृश्यता (Visibility) में भारी गिरावट दर्ज की।दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे, डीएनडी फ्लाईवे और नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर दृश्यता गिरकर 50 मीटर से भी कम रह गई। हेडलाइट्स और फॉग लाइट्स के बावजूद वाहनों की गति 20-30 किमी/घंटा तक सिमट गई। कोहरे के कारण इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI) पर ‘कैट-III’ (CAT-III) लैंडिंग सिस्टम सक्रिय करना पड़ा। कई उड़ानों में देरी हुई, जबकि उत्तर भारत की ओर आने वाली लंबी दूरी की ट्रेनें 2-3 घंटे की देरी से चलीं। शुक्रवार की बारिश के बाद शनिवार सुबह का न्यूनतम तापमान 13.5°C दर्ज किया गया, जो सामान्य से लगभग 4 डिग्री कम है।

मौसम विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक अखिल श्रीवास्तव ने इस बदलाव को वैश्विक और स्थानीय मौसमी प्रणालियों का एक जटिल मिश्रण बताया है। श्रीवास्तव के अनुसार, “वर्तमान में भारत के एक बड़े हिस्से में बड़े पैमाने पर गर्जना के साथ बारिश की गतिविधियां देखी जा रही हैं। यह केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है, बल्कि एक शक्तिशाली ‘पश्चिमी विक्षोभ’ (Western Disturbance) और अरब सागर से उठने वाली नमी के मिलन का परिणाम है।”

शुक्रवार को दिल्ली में हुई भारी बारिश (लगभग 25-30 मिमी) ने हवा में नमी का स्तर 95% तक पहुँचा दिया। इसके कारण शनिवार को अधिकतम तापमान में 2-3°C की अतिरिक्त गिरावट आने की संभावना है। आज का दिन दिल्ली के लिए पिछले 10 वर्षों में मार्च का सबसे ‘ठंडा शनिवार’ साबित हो सकता है। जब भारी बारिश के बाद जमीन ठंडी हो जाती है और हवा में नमी की मात्रा बहुत अधिक होती है, तो रात के समय तापमान गिरने पर हवा की नमी संघनित (Condense) होकर कोहरे का रूप ले लेती है। मार्च में इतनी अधिक नमी और कम तापमान का संयोग विरला ही होता है।

आईएमडी के बुलेटिन के अनुसार, दिल्ली वालों को अभी अपनी छतरियां वापस नहीं रखनी चाहिए। शनिवार शाम को दिल्ली, गाजियाबाद, फरीदाबाद और सोनीपत में ‘हल्की से मध्यम’ बारिश की संभावना बनी हुई है। आसमान में बादल छाए रहेंगे, जिससे सूरज की तपिश धरती तक नहीं पहुँच पाएगी।

विभाग ने शनिवार के लिए येलो अलर्ट जारी किया है, जिसका अर्थ है कि अचानक आने वाले तेज झोंकों (30-40 किमी/घंटा) और बिजली कड़कने के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। अखिल श्रीवास्तव ने पुष्टि की है कि बारिश का यह सिलसिला शनिवार रात तक समाप्त हो जाएगा। रविवार (22 मार्च) से आसमान साफ होने लगेगा और तापमान में क्रमिक वृद्धि (2-4 डिग्री प्रतिदिन) शुरू होगी।

इस बिन मौसम की बरसात ने दिल्ली के फेफड़ों को तो राहत दी है, लेकिन मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ा दिया है। बारिश के कारण हवा में मौजूद धूल के कण (PM2.5 और PM10) जमीन पर बैठ गए हैं। शनिवार सुबह दिल्ली का औसत AQI 85 (Good/Satisfactory) दर्ज किया गया, जो पिछले कई महीनों में सबसे बेहतर है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि तापमान में अचानक आए इस उतार-चढ़ाव (शुक्रवार दोपहर 32°C से शनिवार सुबह 13°C) के कारण वायरल फीवर, गले में संक्रमण और अस्थमा के रोगियों की समस्याएं बढ़ सकती हैं। ‘मार्च की ठंड’ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए चुनौतीपूर्ण होती है।

जहाँ शहरवासी इस सुहावने मौसम का आनंद ले रहे हैं, वहीं ग्रामीण इलाकों और किसानों के लिए यह चिंता का विषय है। मार्च का महीना गेहूं और सरसों की कटाई का समय होता है। तेज हवाओं और ओलावृष्टि (जो कुछ हिस्सों में हुई है) के कारण तैयार फसलें खेतों में बिछ गई हैं, जिससे पैदावार घटने का डर है। बारिश के कारण निर्माण कार्यों (Construction) में देरी और आतिथ्य क्षेत्र (Hospitality) में बाहरी आयोजनों के रद्द होने से स्थानीय स्तर पर आर्थिक नुकसान की भी खबरें हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि मार्च 2026 की यह घटना ‘जलवायु परिवर्तन’ (Climate Change) का एक स्पष्ट संकेत है। पहले मार्च में हीटवेव (Heatwave) की खबरें आती थीं, लेकिन अब भारी बारिश और कोहरे का होना यह दर्शाता है कि ऋतुओं का चक्र (Seasonal Cycle) विस्थापित हो रहा है। प्रशांत महासागर में बदलते तापमान के पैटर्न का असर अब भारत के मानसूनी और गैर-मानसूनी वर्षा चक्र पर स्पष्ट रूप से दिखने लगा है।

21 मार्च, 2026 का यह दिन दिल्ली के इतिहास में ‘कोहरे वाले वसंत’ (Foggy Spring) के रूप में याद किया जाएगा। आईएमडी की सलाह है कि लोग शनिवार शाम की संभावित बारिश के लिए तैयार रहें और रविवार से शुरू होने वाली गर्मी के लिए खुद को मानसिक रूप से ढाल लें। यह प्रकृति का वह पल है जहाँ वह हमें याद दिलाती है कि हम चाहे कितनी भी तकनीक विकसित कर लें, अंतिम नियंत्रण उसी के पास है।

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