आर्म्ड फोर्सेजराष्ट्रीय
भारतीय वायुसेना का 94वां स्थापना दिवस: हिंडन एयरबेस पर गरजी ‘अचूक, अभेद्य और सटीक’ शक्ति
राफेल, सुखोई-30 MKI और प्रचंड ने दिखाई आसमानी ताकत

भारतीय वायुसेना (IAF) ने आज अपने अदम्य साहस, शौर्य और तकनीकी उत्कृष्टता के 94 वर्ष पूरे होने का भव्य और ऐतिहासिक उत्सव मनाया। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित एशिया के सबसे बड़े हवाई ठिकानों में से एक, एयर फोर्स स्टेशन हिंडन (Air Force Station Hindon) के विशाल टरमैक पर आयोजित मुख्य समारोह में भारत की वायु शक्ति ने देश और दुनिया को अपनी सामरिक मारक क्षमता और अभेद्य सुरक्षा तंत्र का जबर्दस्त परिचय दिया।
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS), वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह (Air Chief Marshal AP Singh), थलसेना व नौसेना के शीर्ष कमांडरों, मित्र देशों के रक्षा राजनयिकों और हजारों वायु सैनिकों की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित इस समारोह में न केवल औपचारिक अनुशासित परेड का प्रदर्शन हुआ, बल्कि अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों, स्वदेशी युद्धक हेलिकॉप्टरों और आधुनिक वायु रक्षा मिसाइल प्रणालियों के स्टेटिक और फ्लाइंग डिस्प्ले ने हिंडन के आसमान को गर्व के रंगों से भर दिया।
वर्ष 2026 के इस 94वें वायुसेना दिवस का आधिकारिक विषय (Theme) घोषित किया गया है “भारतीय वायुसेना: अचूक, अभेद्य और सटीक” (Indian Air Force – Infallible, Impervious and Precise)। यह विषय 21वीं सदी के बहु-क्षेत्रीय, हाइब्रिड और तकनीकी रूप से जटिल युद्धक्षेत्र में भारतीय वायुसेना की शून्य-त्रुटि मारक क्षमता, देश के संपूर्ण हवाई क्षेत्र को अभेद्य बनाने की क्षमता और पिन-पॉइंट सर्जिकल स्ट्राइक की दक्षता का स्पष्ट राष्ट्रीय उद्घोष है।
8 अक्टूबर 1932 को जब ब्रिटिश हुकूमत के तहत रॉयल इंडियन एयर फोर्स (RIAF) की स्थापना हुई थी, तब इसके पास मात्र 4 पुराने ‘वेस्टलैंड वापिटी’ (Westland Wapiti) बाइप्लेन और 19 हवाई सैनिक (हवाई सिपाही) थे। सुब्रतो मुखर्जी (जो बाद में भारत के पहले भारतीय वायुसेना प्रमुख बने) सहित 6 अधिकारियों ने जिस नन्हीं शाखा की नींव रखी थी, आज वह दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी और सबसे शक्तिशाली सामरिक वायु सेनाओं में शुमार है।
आजादी के तुरंत बाद जब कबायली वेश में पाकिस्तानी सेना ने श्रीनगर पर धावा बोला, तो वायुसेना के डकोटा विमानों ने सिख रेजिमेंट के जवानों को सीधे श्रीनगर एयरफील्ड पर उतारकर कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बनाए रखा। वायुसेना ने केवल 14 दिनों में पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) के आसमान पर पूर्ण नियंत्रण (Air Supremacy) स्थापित कर दिया। ढाका में गवर्नर हाउस पर किए गए सटीक हमले ने पाकिस्तानी सेना का मनोबल तोड़ दिया, जिसके परिणामस्वरूप 93,000 सैनिकों का ऐतिहासिक आत्मसमर्पण हुआ।
दुनिया के सैन्य इतिहास में पहली बार लड़ाकू विमानों ने 18,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर उड़ान भरकर सटीक लेजर गाइडेड बम गिराए और पाकिस्तानी घुसपैठियों की कमर तोड़ दी। भारतीय वायुसेना ने यह सिद्ध कर दिया कि देश की संप्रभुता पर हमला होने पर वह किसी भी सीमा रेखा की परवाह किए बिना दुश्मन के घर में घुसकर सटीक प्रहार करने में तनिक भी संकोच नहीं करती।
फ्रांस निर्मित और भारतीय आवश्यकताओं के अनुरूप 14 विशिष्ट संवर्द्धनों (ISE) से लैस राफेल लड़ाकू विमान ने जैसे ही हिंडन के रनवे से उड़ान भरी, दर्शकों की सांसें थम गईं। राफेल ने टरमैक से मात्र 100 फीट की ऊंचाई पर तेज गति से उड़ान भरते हुए अचानक 90 डिग्री के कोण पर आसमान की ओर सीधी चढ़ाई की, जिसे सैन्य भाषा में ‘वर्टिकल चार्ली’ कहा जाता है। आफ्टरबर्नर से निकलती नारंगी लपटों और ध्वनि की गति के करीब पहुंचते ही पैदा हुए दबाव ने इसकी असाधारण गतिशीलता (Agility) का लोहा मनवाया।
तीन सुखोई-30 MKI विमानों ने अत्यंत संकीर्ण वी-फॉर्मेशन (V-formation) में प्रवेश किया। रनवे के ठीक ऊपर पहुंचते ही तीनों विमान तीन अलग-अलग दिशाओं में मुड़े और आसमान में भगवान शिव के पावन अस्त्र ‘त्रिशूल’ का आकार बनाया। इस दौरान विमानों ने हवा में सैकड़ों इन्फ्रारेड फ्लेयर्स (दहकते हुए अंगारे) दागे, जिनका उपयोग युद्ध में दुश्मन की हीट-सीकिंग मिसाइलों को भटकाने के लिए किया जाता है।
स्वदेशी रूप से विकसित लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर (LCH) ‘प्रचंड’ ने कम ऊंचाई पर उड़ते हुए 360-डिग्री टर्न और क्विक-पुल-अप की क्षमता दिखाई। प्रचंड ने यह दर्शाया कि किस तरह यह सियाचिन ग्लेशियर और पूर्वी लद्दाख के संकरे दर्रों में छिपकर दुश्मन के टैंकों और ड्रोन को हवा से हवा में मार करने वाली ‘मिस्ट्रल’ मिसाइलों और 20mm की तोप से भून सकता है। वहीं, सारंग डिस्प्ले टीम के 4 एएलएच ध्रुव हेलिकॉप्टरों ने अपनी प्रसिद्ध ‘डॉल्फिन डाइव’ और क्रॉस-ओवर से भारतीय एयरोस्पेस इंजीनियरिंग के संतुलन को रेखांकित किया।
वायुसेना का हर मिशन दांव पर लगे राष्ट्रीय सम्मान और रणनीतिक उद्देश्यों से जुड़ा होता है। ‘अचूक’ का अर्थ है कि किसी भी प्रकार की तकनीकी खराबी, खराब मौसम या दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग के बावजूद भारतीय पायलट अपने लक्ष्य को पहले ही प्रयास में नष्ट करने की क्षमता रखते हैं। यह कठोर सिमुलेटर प्रशिक्षण, निर्बाध लॉजिस्टिक्स और रियल-टाइम खुफिया सूचनाओं (C4ISR नेटवर्क) के समन्वय से संभव हुआ है।
21वीं सदी के युद्धों में अंधाधुंध बमबारी का दौर समाप्त हो चुका है। अब युद्ध स्टैंड-ऑफ रेंज (सैकड़ों किमी दूर सुरक्षित दायरे) से लड़े जाते हैं। ‘सटीक’ का अर्थ है कि भारतीय वायुसेना फ्रेंच हैमर (HAMMER) स्मार्ट गाइडेड म्यूनिशंस, इजरायली स्पाइस-2000 गाइडेड किट्स, स्वदेशी ‘अस्त्र’ बियॉन्ड विजुअल रेंज मिसाइल (Astra BVR) और सुपरसोनिक ‘ब्रह्मोस-ए’ के माध्यम से दुश्मन के एक विशिष्ट कमरे, रडार बंकर या रनवे को बिना किसी नागरिक क्षति के सटीक निशाना बना सकती है।
वायुसेना प्रमुख ने कहा, “किसी भी वायुसेना के पास दुनिया के सबसे उन्नत विमान या सबसे जटिल मिसाइल प्रणालियां हो सकती हैं। लेकिन उसकी वास्तविक ताकत केवल इस बात से मापी जाती है कि उसकी परिचालन तत्परता कैसी है यानी जब भी राष्ट्र का आह्वान हो, वह कितनी तेजी, आत्मविश्वास और अचूकता के साथ कार्य करती है।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और वैश्विक आपूर्ति शृंखला में आने वाले व्यवधानों ने यह सिद्ध कर दिया है कि भारत को अपने हथियारों, इंजनों और स्पेयर पार्ट्स के लिए विदेशी ताकतों पर निर्भर नहीं रहा जा सकता। स्वदेशी एलसीए तेजस एमके-1ए, एलसीएच प्रचंड और आगामी पांचवीं पीढ़ी के उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (AMCA) को समय पर शामिल करना वायुसेना की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने वायु सैनिकों को चेतावनी दी कि आने वाले युद्ध केवल आकाश में नहीं, बल्कि साइबर स्पेस, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम और अंतरिक्ष (Space) में भी लड़े जाएंगे। डिफेंस स्पेस एजेंसी (DSA) के साथ समन्वय कर वायुसेना उपग्रह-आधारित संचार और निगरानी को अपनी रीढ़ बना रही है।
स्टेटिक डिस्प्ले में स्वदेशी एयर-टू-एयर मिसाइल ‘अस्त्र’ (Astra Mk-1 और Mk-2) को प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया। यह मिसाइल भारत को अमेरिकी ‘अमराम’ (AMRAAM) और रूसी ‘आर-77’ (R-77) पर अपनी निर्भरता को पूरी तरह समाप्त करने की शक्ति देती है। मेक इन इंडिया के तहत विकसित ‘एएलएफए-एस’ (ALFA-S) स्वार्म ड्रोन्स और मानवरहित कॉम्बैट एरियल व्हीकल्स (UCAV) के प्रोटोटाइप्स ने दर्शाया कि भारतीय वायुसेना मानवयुक्त और मानवरहित विमानों के साझा तालमेल (Manned-Unmanned Teaming – MUM-T) के युग में प्रवेश कर चुकी है।
वायुसेना की स्वीकृत ताकत 42 स्क्वाड्रन की है, लेकिन पुराने सोवियत मूल के लड़ाकू विमानों (जैसे मिग-21) के चरणबद्ध रिटायरमेंट के कारण वर्तमान में यह संख्या लगभग 31 स्क्वाड्रन के आसपास बनी हुई है। इस कमी को पूरा करने के लिए एचएएल द्वारा तेजस एमके-1ए के सालाना उत्पादन को 16 से बढ़ाकर 24 विमान प्रति वर्ष करने पर काम चल रहा है।
वायुसेना 114 नए 4.5+ जनरेशन के लड़ाकू विमानों की खरीद प्रक्रिया को ‘मेक इन इंडिया’ के तहत आगे बढ़ा रही है, जिसमें वैश्विक एयरोस्पेस दिग्गजों के साथ रणनीतिक साझेदारी के तहत भारत में ही निर्माण किया जाएगा। भारत अपने घरेलू लॉन्ग-रेंज एयर डिफेंस सिस्टम ‘प्रोजेक्ट कुशा’ (Project Kusha) पर तेजी से काम कर रहा है, जो 2028-2029 तक 350 किमी की दूरी तक दुश्मन के किसी भी हवाई खतरे को नेस्तनाबूद करने की स्वदेशी क्षमता प्रदान करेगा।
श्रीमद्भगवद्गीता के 11वें अध्याय से लिया गया भारतीय वायुसेना का आदर्श वाक्य ‘नभः स्पृशं दीप्तम्’ (Touch the Sky with Glory – दीप्ति के साथ आकाश को स्पर्श करो) आज हिंडन एयरबेस के रनवे से लेकर लद्दाख की शून्य डिग्री तापमान वाली अग्रिम चौकियों और कन्याकुमारी के तटों तक जीवंत दिखाई दे रहा है। 94 वर्षों की यह अविराम यात्रा इस बात की साक्षी है कि भारतीय वायुसेना ने हर संकट, हर युद्ध और हर प्राकृतिक आपदा में राष्ट्र के विश्वास को कभी डिगने नहीं दिया है।
चाहे वह युद्ध के मैदान में दुश्मन के दांत खट्टे करना हो, या तुर्किये और नेपाल के भूकंप से लेकर सूडान और यूक्रेन के युद्ध क्षेत्रों से अपने नागरिकों को सुरक्षित एयरलिफ्ट करना (Humanitarian Assistance and Disaster Relief – HADR) हो वायुसेना ने हर मोर्चे पर अपनी विश्वसनीयता सिद्ध की है। 94वें स्थापना दिवस पर हिंडन के आसमान से गूंजा “अचूक, अभेद्य और सटीक” का यह संकल्प 140 करोड़ भारतीयों को यह अटूट भरोसा दिलाता है कि जब तक तिरंगे के पंख लिए ये जांबाज पायलट और वायु सैनिक आकाश के प्रहरी बनकर तैनात हैं, तब तक मां भारती का मस्तक सदैव ऊंचा रहेगा और कोई भी महाशक्ति भारत की संप्रभुता को चुनौती देने का दुस्साहस नहीं कर सकती।



