
उत्तर प्रदेश के बुनियादी ढांचागत विकास, नागरिक उड्डयन और राजनीतिक इतिहास में शुक्रवार को एक युगांतरकारी निर्णय लिया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) की अध्यक्षता में लोकभवन, लखनऊ में संपन्न हुई उत्तर प्रदेश मंत्रिपरिषद (Cabinet) की महत्वपूर्ण बैठक में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के गौतमबुद्ध नगर जिले के जेवर में विकसित किए जा रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम बदलकर ‘नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट, नोएडा-जेवर’ (Narendra Modi International Airport, Noida-Jewar) करने के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से औपचारिक मंजूरी दे दी गई है।
मंत्रिपरिषद की बैठक के उपरांत आयोजित एक विस्तृत संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस निर्णय की औपचारिक घोषणा की। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह प्रस्ताव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित सरकार के प्रमुख के रूप में 25 वर्ष (7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर 2026 में भारत के प्रधानमंत्री तक) की निरंतर और निष्कलंक लोक-सेवा के ऐतिहासिक अवसर को समर्पित है।
मंत्रिपरिषद ने इस अवसर पर एक विशेष बधाई प्रस्ताव (Congratulatory Resolution) भी पारित किया। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पारित यह प्रस्ताव अब अग्रिम प्रशासनिक अनुमोदन और भारत के आधिकारिक राजपत्र (The Gazette of India) में अंतिम अधिसूचना जारी करने के लिए केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय (MoCA) तथा केंद्रीय मंत्रिमंडल को प्रेषित किया जाएगा।
संवाददाता सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने न केवल इस मेगा-ग्रीनफील्ड एविएशन प्रोजेक्ट के रणनीतिक महत्व को रेखांकित किया, बल्कि पिछले नौ वर्षों के दौरान उत्तर प्रदेश में हुए सांस्कृतिक पुनरुद्धार, धार्मिक पर्यटन के अभूतपूर्व कायाकल्प, काशी विश्वनाथ धाम के विस्तार, बौद्ध सर्किट के विकास, काशी तमिल संगमम और संत रविदास व भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी से जुड़ी राष्ट्रीय धरोहर परियोजनाओं का विस्तृत लेखा-जोखा भी प्रस्तुत किया।
“उत्तर प्रदेश की मंत्रिपरिषद ने आज सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि गौतमबुद्ध नगर के जेवर में स्थापित हो रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम ‘नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट, नोएडा-जेवर’ होगा। यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित सरकार के प्रमुख के रूप में 25 वर्ष का सफल, निष्कलंक और लोक-कल्याणकारी कार्यकाल पूरा किया है।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश को प्रधानमंत्री जी का एक अनमोल उपहार है। आने वाले वर्षों में यह हवाई अड्डा न केवल उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा, बल्कि भारत का सबसे विशाल एविएशन हब बनकर उभरेगा। यह एयरपोर्ट राज्य की अर्थव्यवस्था, उद्योग, निर्यात, पर्यटन और वैश्विक संपर्क (Global Connectivity) को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। उत्तर प्रदेश की 25 करोड़ जनता की ओर से कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए कैबिनेट ने यह प्रस्ताव पारित किया है।”
मुख्यमंत्री ने विस्तार से बताया कि कैसे प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में श्री काशी विश्वनाथ धाम ने विश्व पटल पर धार्मिक पर्यटन की परिभाषा बदल दी है। दशकों तक मात्र 3,000 वर्ग फुट के संकरे और अवरुद्ध परिसर में सिमटे रहने वाले बाबा विश्वनाथ के मंदिर को मां गंगा से सीधे जोड़कर 5 लाख वर्ग फुट से अधिक के विशाल और दिव्य कॉरिडोर के रूप में पुनर्जीवित किया गया। इसके परिणामस्वरूप, वाराणसी में आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या में लगभग दस गुना वृद्धि हुई है, जिसने स्थानीय नाविकों, बुनकरों, हस्तशिल्पियों और होटल व्यवसायियों की आर्थिकी को कई गुना समृद्ध किया है।
भगवान बुद्ध के जीवन से जुड़े पावन स्थलों के समग्र विकास का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा भगवान बुद्ध के महापरिनिर्वाण स्थल पर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट संचालित होने से थाईलैंड, म्यांमार, जापान, श्रीलंका, कंबोडिया, दक्षिण कोरिया और वियतनाम जैसे बौद्ध बहुल देशों के श्रद्धालुओं के लिए यात्रा अत्यंत सुगम हो चुकी है। सारनाथ (प्रथम उपदेश स्थली), श्रावस्ती (सर्वाधिक वर्षावास स्थल), कपिलवस्तु (राजकीय गृह त्याग स्थली), कौशाम्बी और संकिसा को फोर-लेन सड़कों, उन्नत अतिथि गृहों, लाइट एंड साउंड शो और बहुभाषी व्याख्या केंद्रों से जोड़ा गया है।
मुख्यमंत्री ने ‘काशी तमिल संगमम’ और ‘सौराष्ट्र तमिल संगमम’ जैसी राष्ट्रीय पहलों को रेखांकित करते हुए कहा कि इन आयोजनों ने तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश के सदियों पुराने आध्यात्मिक, साहित्यिक और व्यापारिक संबंधों को पुनर्जीवित किया है। अगस्त्य ऋषि और महाकवि सुब्रमण्य भारती की विरासत को संजोते हुए काशी में तमिल विद्वानों, छात्रों, कारीगरों और संतों का स्वागत कर राष्ट्रीय एकात्मता को एक नया धरातल प्रदान किया गया।
वाराणसी स्थित संत रविदास की जन्मस्थली का वृहद सौंदर्यीकरण किया गया है। वहां ₹100 करोड़ से अधिक की लागत से भव्य लंगर हॉल, रविदास पार्क, 25 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा और आधुनिक सामुदायिक सुविधाओं का निर्माण कर देश-विदेश के लाखों रैदासियों के लिए यात्रा को सुगम बनाया गया। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में उनके पैतृक गांव बटेश्वर (आगरा) को हेरिटेज टूरिज्म हब के रूप में विकसित किया गया है। इसके अतिरिक्त, राज्य के सभी 18 मंडलों में गरीब व श्रमिक बच्चों के लिए विश्वस्तरीय ‘अटल आवासीय विद्यालय’ संचालित किए जा रहे हैं, जो आधुनिक शिक्षा और भारतीय संस्कारों का उत्कृष्ट केंद्र बन चुके हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में राज्य के पारंपरिक शिल्प को वैश्विक मंच मिला है। प्रधानमंत्री मोदी ने विदेशी राष्ट्राध्यक्षों को भेंट स्वरूप काशी की ‘गुलाबी मीनाकारी’, निजामाबाद (आजमगढ़) की ‘ब्लैक पॉटरी’, कन्नौज का ‘इत्र’ और लखनऊ की ‘जरदोज़ी’ देकर उत्तर प्रदेश के ग्रामीण दस्तकारों और बुनकरों के स्वाभिमान को सात समंदर पार प्रतिष्ठित किया है।
वर्तमान में दिल्ली का आईजीआई एयरपोर्ट वार्षिक 7.5 करोड़ से अधिक यात्रियों का संचालन करता है और अपनी अधिकतम संतृप्ति (Saturation) सीमा के करीब पहुंच रहा है। जेवर एयरपोर्ट, जो आईजीआई से मात्र 72 किमी की दूरी पर स्थित है, एनसीआर क्षेत्र के लिए दूसरा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बनेगा और भविष्य के अंतरराष्ट्रीय व घरेलू यातायात का एक बड़ा हिस्सा अपने ऊपर लेगा।
यह हवाई अड्डा केवल दिल्ली या नोएडा के लिए नहीं है। इसका सीधा लाभ पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के विशाल भूभाग को मिलेगा, जिसमें आगरा, मथुरा, अलीगढ़, मेरठ, गाजियाबाद, बुलंदशहर, हापुड़, मुरादाबाद, पलवल और फरीदाबाद जैसे प्रमुख औद्योगिक व पर्यटन शहर शामिल हैं। मथुरा और आगरा आने वाले विदेशी पर्यटकों को अब दिल्ली के जाम में फंसे बिना सीधे यमुना एक्सप्रेसवे के जरिए मात्र एक से डेढ़ घंटे में ताजमहल और बांके बिहारी मंदिर पहुंचने की सुविधा मिलेगी।
इस परियोजना को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत ‘यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड’ (YIAPL) द्वारा विकसित किया जा रहा है, जो स्विट्जरलैंड की प्रसिद्ध विमानन कंपनी ‘ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी’ की शत-प्रतिशत स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है। हवाई अड्डे को पर्यावरण के अनुकूल ‘नेट-जीरो कार्बन एमिशन’ (Net-Zero Carbon) एयरपोर्ट के रूप में डिजाइन किया गया है।
28 जुलाई 2021 को तत्कालीन नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने संसद में स्पष्ट किया था कि किसी भी हवाई अड्डे के नामकरण का अंतिम निर्णय केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा लिया जाता है। राज्य विधानसभा या कैबिनेट द्वारा पारित प्रस्ताव एक अनुशंसात्मक (Recommendatory) प्रस्ताव के रूप में केंद्र को भेजा जाता है।
सामान्यत भारत में हवाई अड्डों के नाम ऐतिहासिक हस्तियों (जैसे मुंबई में छत्रपति शिवाजी महाराज, पोर्ट ब्लेयर में वीर सावरकर, उदयपुर में महाराणा प्रताप), आध्यात्मिक गुरुओं (जैसे अमृतसर में श्री गुरु रामदास जी, रायपुर में स्वामी विवेकानंद) या दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्रियों (जैसे दिल्ली में इंदिरा गांधी, लखनऊ में चौधरी चरण सिंह, वाराणसी में लाल बहादुर शास्त्री) के नाम पर रखे जाते रहे हैं।
जीवित या वर्तमान पद पर आसीन किसी नेता के नाम पर किसी हवाई अड्डे का नामकरण करने का यह स्वतंत्र भारत के इतिहास में एक अत्यंत दुर्लभ और असाधारण मामला है। इससे पूर्व, गुजरात के अहमदाबाद स्थित मोटेरा स्टेडियम का नाम बदलकर ‘नरेंद्र मोदी क्रिकेट स्टेडियम’ किया गया था, जो दुनिया का सबसे बड़ा खेल स्टेडियम है।
भाजपा नेताओं और मंत्रियों ने इस निर्णय का पुरजोर स्वागत करते हुए कहा कि जेवर का यह क्षेत्र, जो कभी दंगों, अपराध और पिछड़ेपन के लिए जाना जाता था, आज प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में ‘ग्लोबल इन्वेस्टमेंट हब’ बन चुका है। ऐसे ऐतिहासिक रूपांतरण के सूत्रधार के नाम पर इस आधुनिक एयरपोर्ट का नाम होना सर्वथा उचित और न्यायसंगत है।
प्रमुख विपक्षी दलों (समाजवादी पार्टी और कांग्रेस) ने इस फैसले पर त्वरित टिप्पणी करते हुए कहा कि हवाई अड्डों और सार्वजनिक संस्थाओं के नाम स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, शहीदों या स्थानीय महापुरुषों के नाम पर रखे जाने चाहिए। विपक्ष ने इसे “व्यक्ति-पूजा” (Personality Cult) की संज्ञा दी, हालांकि राज्य सरकार ने पलटवार करते हुए कहा कि देश के कई प्रमुख हवाई अड्डों और संस्थानों के नाम एक ही राजनीतिक परिवार के नेताओं के नाम पर रखे गए थे, जबकि यह निर्णय 25 वर्षों के निर्बाध लोकतांत्रिक नेतृत्व और विकास की स्वीकारोक्ति है।
उत्तर प्रदेश मंत्रिपरिषद द्वारा जेवर एयरपोर्ट का नाम ‘नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ रखने का प्रस्ताव पारित किया जाना केवल एक नाम पट्टिका बदलने की सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है। यह 21वीं सदी के बदलते भारत और विशेष रूप से नए उत्तर प्रदेश की उस विकास यात्रा का प्रतीक है, जहां आधुनिकता और सांस्कृतिक गौरव एक साथ कदमताल कर रहे हैं।
एक ओर जहां राज्य सरकार ने काशी, अयोध्या, मथुरा, सारनाथ और कुशीनगर के माध्यम से अपनी हजारों वर्ष पुरानी सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक क्षितिज पर पुनः स्थापित किया है, वहीं दूसरी ओर जेवर का यह बहु-अरब डॉलर का अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा राज्य को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के संकल्प को पंख लगा रहा है।
जब यह प्रस्ताव केंद्रीय मंत्रिमंडल से अनुमोदित होकर राजपत्र में अधिसूचित होगा, तो यह न केवल राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के दूसरे अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के रूप में अपनी औपचारिक पहचान दर्ज करेगा, बल्कि आधुनिक भारत के निर्माण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के नेतृत्व के एक स्थायी और विहंगम स्मारक के रूप में दुनिया भर के यात्रियों का स्वागत करेगा।



