
28 मार्च, 2026 का दिन भारतीय विमानन इतिहास और उत्तर प्रदेश के भाग्य-निर्माण के लिए एक स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाने वाला अध्याय बन गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली-एनसीआर के निकट जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (NIA) के पहले चरण का भव्य उद्घाटन किया। यह केवल एक हवाई पट्टी या टर्मिनल का उद्घाटन नहीं था, बल्कि यह भारत की बदलती कार्य-संस्कृति, वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच अडिग संकल्प और उत्तर प्रदेश को ‘उत्तम प्रदेश’ से ‘विकसित प्रदेश’ बनाने की दिशा में एक महाप्रयाण था।
प्रधानमंत्री ने रिबन काटकर और अत्याधुनिक एकीकृत टर्मिनल (Integrated Terminal) का भ्रमण कर इस विशाल परियोजना के पहले चरण को राष्ट्र को समर्पित किया। पहले चरण में यह हवाई अड्डा प्रति वर्ष 1.2 करोड़ (12 Million) यात्रियों को संभालने की क्षमता रखता है। प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि 2050 तक इसे दुनिया के सबसे बड़े हवाई अड्डों में से एक (7 करोड़ यात्री क्षमता) बनाया जाएगा। यह भारत का पहला ‘नेट-जीरो’ (Net-Zero) कार्बन उत्सर्जन वाला एयरपोर्ट है। यहाँ की पूरी बिजली सौर ऊर्जा से उत्पन्न होगी। पीएम ने इसे “प्रकृति और प्रगति का अद्भुत संगम” बताया। एयरपोर्ट को ‘नमो भारत’ (RRTS), दिल्ली मेट्रो और जेवर-बुलंदशहर राजमार्ग से जोड़ा गया है। प्रधानमंत्री ने इसे ‘मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी’ का वैश्विक मॉडल करार दिया।
प्रधानमंत्री के भाषण का एक बड़ा हिस्सा वर्तमान ईरान-इजरायल तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार में मची उथल-पुथल पर केंद्रित था। उन्होंने देश को आश्वस्त किया कि भारत इन लहरों से टकराने के लिए तैयार है। पीएम मोदी ने कहा, “पूरी दुनिया युद्ध की आग और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से परेशान है। लेकिन हमारी सरकार ने ‘नेशन फर्स्ट’ की नीति अपनाकर अंतरराष्ट्रीय दबाव का बोझ अपने नागरिकों और किसानों पर नहीं पड़ने दिया है।”
उन्होंने उल्लेख किया कि जेवर के आसपास के गन्ने के किसानों ने इथेनॉल उत्पादन में मदद कर देश को तेल आयात पर निर्भरता कम करने में सहायता की है। भारत ने अब तक ₹1.5 लाख करोड़ की विदेशी मुद्रा बचाई है, जो रक्षा और बुनियादी ढांचे में काम आ रही है।प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत अब केवल एक क्षेत्र (पश्चिम एशिया) पर निर्भर नहीं है, बल्कि वह अमेरिका, रूस और दक्षिण अमेरिका से तेल आयात कर अपनी ‘ऊर्जा टोकरी’ को सुरक्षित कर रहा है।
प्रधानमंत्री ने विपक्षी दलों, विशेषकर उत्तर प्रदेश की पिछली सरकारों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने जेवर प्रोजेक्ट की तुलना पिछली कार्यशैली से की उन्होंने याद दिलाया कि जेवर एयरपोर्ट का प्रस्ताव 2001 में आया था, लेकिन पिछली सरकारों ने इसे “अटकाने, लटकाने और भटकाने” का काम किया। पीएम ने व्यंग्य करते हुए कहा कि एक समय था जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री नोएडा आने से डरते थे (नोएडा जिंक्स), लेकिन आज वही नोएडा निवेश का वैश्विक केंद्र बन गया है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सराहना करते हुए कहा कि ‘डबल इंजन’ सरकार ने अंधविश्वास को विकास की आंधी में उड़ा दिया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले नोएडा को राजनीतिक दलों के ‘एटीएम’ के रूप में इस्तेमाल किया जाता था, लेकिन आज यहाँ पारदर्शी व्यवस्था के कारण दुनिया की सबसे बड़ी मोबाइल और डेटा कंपनियां काम कर रही हैं।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट केवल यात्रियों के लिए नहीं, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था के ‘इंजन’ के रूप में कार्य करेगा। प्रधानमंत्री ने 40 एकड़ में बन रहे विमान मरम्मत केंद्र का विशेष जिक्र किया। उन्होंने कहा, “अब तक हमारे विमानों को छोटी-छोटी मरम्मत के लिए दुबई या सिंगापुर जाना पड़ता था। अब जेवर में यह काम होगा, जिससे न केवल अरबों रुपये की बचत होगी, बल्कि हमारे हजारों इंजीनियरिंग छात्रों को उच्च-स्तरीय रोजगार मिलेगा।” पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ‘ओडीओपी’ (One District One Product) उत्पादों अलीगढ़ के ताले, मेरठ के खेल के सामान और मुरादाबाद के पीतल के बर्तनों को अब सीधे वैश्विक बाजार तक पहुँचाया जा सकेगा। जेवर उत्तर भारत का सबसे बड़ा लॉजिस्टिक्स हब बनेगा।
प्रधानमंत्री ने स्थानीय किसानों को धन्यवाद दिया जिन्होंने राष्ट्रहित में अपनी भूमि दी। उन्होंने जेवर को ‘ब्रज’ और ‘दिल्ली’ के बीच का सेतु बताया। जेवर एयरपोर्ट से मथुरा, वृंदावन और आगरा की दूरी कम हो जाएगी, जिससे धार्मिक और ऐतिहासिक पर्यटन को अभूतपूर्व गति मिलेगी। पीएम ने उल्लेख किया कि इस एयरपोर्ट के निर्माण और संचालन में महिला शक्ति का बड़ा योगदान है, जो ‘नारी शक्ति वंदन’ के संकल्प को सिद्ध करता है।
अपने संबोधन के समापन में प्रधानमंत्री मोदी ने 140 करोड़ भारतीयों से एक होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि “जेवर एयरपोर्ट केवल ईंट-पत्थर की इमारत नहीं है, यह भारत के आत्मविश्वास की गूँज है।” वैश्विक संकटों (West Asia Crisis) के बीच भारत ने यह दिखा दिया है कि वह न केवल अपनी रक्षा कर सकता है, बल्कि बड़े स्तर पर निर्माण भी जारी रख सकता है। जेवर का यह ‘महा-उद्घाटन’ 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में एक निर्णायक मील का पत्थर साबित होगा।


