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पान मसाला की पैकेजिंग पर FSSAI का बड़ा फैसला: प्लास्टिक, एल्युमीनियम फॉयल और सिंथेटिक लेयर पर प्रतिबंध

केवल कागज, कांच व टिन के डिब्बों को मंजूरी

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (Food Safety and Standards Authority of India – FSSAI) ने देश में पान मसाला उत्पादों की पैकेजिंग, बिक्री और पर्यावरण-अनुकूल व्यवस्था को लेकर एक ऐतिहासिक एवं अत्यंत कड़ा फैसला लिया है। एफएसएसएआई ने खाद्य सुरक्षा और मानक (पैकेजिंग) संशोधन विनियम, 2026 (Food Safety and Standards (Packaging) Amendment Regulations, 2026) के तहत पान मसाला के निर्माण और बिक्री में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक-आधारित पाउच, लैमिनेटेड पाउच और मल्टी-लेयर सिंथेटिक पैकेजिंग पर पूरी तरह से रोक लगा दी है।
सरकारी राजपत्र (Official Gazette) में अंतिम संशोधन की आधिकारिक अधिसूचना प्रकाशित होने के साथ ही यह नया नियम देश भर में तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। खाद्य सुरक्षा नियामक ने एक प्रेस विज्ञप्ति में विशेष रूप से यह स्पष्ट किया है कि यह प्रतिबंध केवल पान मसाला की पैकेजिंग सामग्रियों पर लागू किया गया है, स्वयं पान मसाला उत्पाद की बिक्री या निर्माण पर नहीं।
एफएसएसएआई द्वारा अधिसूचित नए नियमों के अनुसार, पान मसाला निर्माताओं को अब अपने उत्पादों को पैक करने के लिए केवल पर्यावरण-अनुकूल, प्राकृतिक और बायोडिग्रेडेबल सामग्रियों का ही उपयोग करना होगा।
भारत में पान मसाला और गुटखा उद्योग द्वारा हर साल अरबों की संख्या में छोटे प्लास्टिक पाउच (Sachets) बाजार में उतारे जाते हैं। एफएसएसएआई ने इस व्यापक संशोधन के पीछे तीन मुख्य कानूनी, पर्यावरण और स्वास्थ्य कारणों को रेखांकित किया है पान मसाला के छोटे पाउच बनाने के लिए मल्टी-लेयर प्लास्टिक (Multi-layered Plastic) और एल्युमीनियम फॉयल का इस्तेमाल किया जाता था। ये पाउच बेहद छोटे और लचीले होने के कारण रिसाइकिल (Recycle) नहीं हो पाते थे। नालियों, सड़कों और खुले मैदानों में जमा होकर ये कचरा पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बन रहे थे।
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा समय-समय पर संशोधित प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2016 (Plastic Waste Management Rules) के तहत सिंगल-यूज़ प्लास्टिक और नॉन-रीसाइक्लेबल पाउच के इस्तेमाल को चरणबद्ध तरीके से खत्म करने का जनादेश दिया गया है। एफएसएसएआई के इस नए पैकेजिंग विनियम ने खाद्य नियामक मानकों को सीधे पर्यावरण कानूनों के साथ जोड़ दिया है।
प्लास्टिक पाउच और मेटलाइज्ड लेयर में बंद पान मसाला जब लंबे समय तक नमी या तापमान के संपर्क में रहता है, तो प्लास्टिक से फथलेट्स (Phthalates) और माइक्रोप्लास्टिक के कण खाद्य पदार्थ में घुलने का खतरा रहता है। कांच, टिन और शुद्ध कागज की पैकेजिंग इस प्रकार के रासायनिक क्षरण (Chemical Leaching) को पूरी तरह रोकती है।
एफएसएसएआई के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, यदि कोई कंपनी कागज के पाउच का उपयोग करती है, तो उस कागज में भी किसी प्रकार का सिंथेटिक प्लास्टिक कोटिंग नहीं होना चाहिए।
“अक्सर देखा जाता है कि कागजी पाउच को वाटरप्रूफ या सील करने योग्य बनाने के लिए अंदर से पॉलीथीन की बहुत पतली परत (Plastic Lining) लगाई जाती है। नए नियमों के तहत ऐसी छुपी हुई प्लास्टिक परत भी पूरी तरह से गैर-कानूनी मानी जाएगी। निर्माताओं को केवल शुद्ध सेलुलोज, पेपरबोर्ड या टिन-कांच के कंटेनरों का ही उपयोग करना होगा।”
एफएसएसएआई आधिकारिक वक्तव्य
एफएसएसएआई के इस आदेश का भारत के पान मसाला उद्योग और एफएमसीजी पैकेजिंग सेक्टर पर गहरा आर्थिक और रणनीतिक प्रभाव पड़ेगा कंपनियों को अपनी पुरानी फॉर्म-फिल-सील (FFS) प्लास्टिक पैकेजिंग मशीनों को बदलकर 100% पेपर-बेस्ड या टिन-फिलिंग लाइन्स में निवेश करना होगा।
कांच, टिन के डिब्बों और विशेष प्लास्टिक-मुक्त कागज की लागत साधारण प्लास्टिक पाउच की तुलना में अधिक होती है, जिससे छोटे पाउच के दामों में बदलाव देखा जा सकता है। नए गज़ट नोटिफिकेशन के लागू होने के बाद यदि कोई भी निर्माता या विक्रेता प्लास्टिक या एल्युमीनियम फॉयल पैकेजिंग में पान मसाला बेचते हुए पाया जाता है, तो ‘खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006’ (FSS Act 2006) की धारा 58 और 59 के तहत भारी जुर्माना, माल की जब्ती और लाइसेंस रद्द करने की सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पान मसाला की पैकेजिंग से प्लास्टिक, एल्युमीनियम फॉयल और सिंथेटिक पॉलीमर को पूरी तरह बाहर करने का एफएसएसएआई का यह फैसला भारत के पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। जहाँ एक ओर इससे देश में रोजाना पैदा होने वाले टन प्लास्टिक कचरे पर रोक लगेगी, वहीं दूसरी ओर कंपनियों के लिए पर्यावरण-अनुकूल packaging अपनाना अब एक कानूनी बाध्यता बन गया है।

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