अदालतव्यक्ति विशेष
राहुल गांधी के 6 घंटे लंबे थाने धरने के बाद झुकी दिल्ली पुलिस: कथित पेलेट गन फायरिंग मामले में अज्ञात लोगों पर दर्ज हुई FIR
प्राथमिकी एवं घटनाक्रम का संपूर्ण विधिक ब्योरा (FIR & Incident Ledger)

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में शुक्रवार को एक बड़ा राजनीतिक और विधिक गतिरोध उस समय चरम पर पहुंच गया, जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने जंतर-मंतर पर कथित पेलेट गन फायरिंग में घायल हुए 19 वर्षीय छात्र साहिल लोचब (Sahil Lochab) को न्याय दिलाने के लिए संसद मार्ग स्थित डीसीपी (DCP) कार्यालय और थाने के बाहर लगभग 6 घंटे लंबा धरना दिया।
इस हाई-वोल्टेज ड्रामे और विपक्षी नेताओं के कड़े रुख के बाद दिल्ली पुलिस ने अंत अज्ञात लोगों के खिलाफ नए आपराधिक कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली। इस आंदोलन में राहुल गांधी के साथ कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, वरिष्ठ सांसद रणदीप सुरजेवाला, कुमारी शैलजा, जयराम रमेश और अधीर रंजन चौधरी सहित सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ता व घायल छात्र की मां संसद मार्ग थाने के बाहर डटे रहे।
इस पूरे विवाद की जड़ 20 जुलाई 2026 को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित छात्र संगठनों के ‘संसद चलो’ मार्च से जुड़ी है प्रतियोगी परीक्षाओं (NEET पेपर लीक विवाद) में कथित अनियमितताओं के विरोध में छात्रों और युवा संगठनों ने संसद भवन की ओर मार्च करने का प्रयास किया था। बैरिकेड्स तोड़ने के दौरान पुलिस और अर्धसैनिक बलों के साथ हुई झड़प में कथित तौर पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पेलेट गन और आंसू गैस का प्रयोग हुआ।
नजफगढ़ के रहने वाले 19 वर्षीय छात्र साहिल लोचब इस मार्च में शामिल थे। राहुल गांधी ने प्रेस के सामने साहिल की मेडिकल रिपोर्ट और छर्रे दिखाते हुए आरोप लगाया कि साहिल के शरीर में 200 से अधिक पेलेट के छर्रे धंसे हुए हैं। साहिल के पेट, छाती और दाईं आंख में पेलेट के छर्रे लगे थे। उन्हें तुरंत लेडी हार्डिंग अस्पताल और बाद में एम्स ट्रॉमा सेंटर (AIIMS Trauma Centre) रेफर किया गया, जहाँ उनकी आंख की सर्जरी की गई। डॉक्टरों के अनुसार, उनके दिल के पास और दाईं आंख के भीतर अभी भी कुछ छर्रे फंसे हैं, जिससे उनकी एक आंख की रोशनी पर गंभीर संकट बना हुआ है।
शुक्रवार सुबह लगभग 11:30 बजे राहुल गांधी घायल छात्र साहिल लोचब, उनकी मां और वकीलों की टीम के साथ सबसे पहले नई दिल्ली के मंदिर मार्ग थाने पहुंचे। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि साहिल ने अपने वकील के माध्यम से 14 अगस्त को 7 पन्नों की लिखित शिकायत दी थी। 17 अगस्त को ईमेल और फोन के जरिए फॉलो-अप किया गया, लेकिन पुलिस ने न तो कोई पावती (Acknowledgment) दी और न ही जांच अधिकारी (IO) का नंबर आवंटित किया।
मंदिर मार्ग से राहुल गांधी संसद मार्ग स्थित नई दिल्ली जिला डीसीपी कार्यालय पहुंचे। डीसीपी सचिन शर्मा के साथ लगभग एक घंटे चली बैठक में पुलिस अधिकारियों ने तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए गठित विशेषज्ञ समिति मामले को देख रही है। हालांकि, राहुल गांधी ने जोर देकर कहा कि संज्ञेय अपराध (Cognisable Offence) में एफआईआर दर्ज करना कानूनन अनिवार्य है।
मांग पूरी न होने पर राहुल गांधी साहिल और उनकी मां के साथ थाने के बाहर जमीन पर धरने पर बैठ गए। कुछ ही देर में प्रियंका गांधी वाड्रा भी पहुंच गईं। कांग्रेस कार्यकर्ताओं के भारी जमावड़े को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने थाने के लोहे के गेट बंद कर दिए और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) को तैनात कर दिया।
धरने के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट करते हुए राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय पर तीखे हमले बोले:
“यह पेलेट देखिए। यह पेलेट कहाँ से आया? यह 19 साल के भारतीय छात्र साहिल के शरीर से निकला है। उसके शरीर में 200 से ज्यादा छर्रे हैं, दिल के पास छर्रे हैं, आंख की रोशनी जा चुकी है। दिल्ली पुलिस कह रही है कि उसने पेलेट नहीं चलाए। तो सवाल यह है कि अगर पुलिस ने नहीं चलाए, तो क्या छात्र ने खुद अपने ऊपर गोली चलाई? शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर पेलेट गन चलाना केवल अवैध नहीं, बल्कि एक गंभीर अपराध है। गृह मंत्री अमित शाह जी न्याय से क्यों डर रहे हैं? एफआईआर दर्ज न करना संविधान को कुचलने जैसा है।”
— राहुल गांधी, नेता प्रतिपक्ष (लोकसभा)
राहुल गांधी ने इस मामले में सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में न्यायिक जांच और पेलेट गन चलाने का आदेश देने वाले शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की मांग की।
इस पूरे घटनाक्रम पर सत्ता पक्ष और पुलिस प्रशासन की ओर से भी आधिकारिक प्रतिक्रियाएं सामने आईं पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि 20 जुलाई के प्रदर्शन को लेकर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के संबंध में पहले से ही जांच प्रक्रिया चल रही है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और उच्चाधिकार प्राप्त समिति के दायरे को ध्यान में रखते हुए प्रक्रिया का पालन किया जा रहा था। अंततः शिकायत के आधार पर अज्ञात के खिलाफ बीएनएस की संबंधित धाराओं में केस पंजीकृत कर जांच क्राइम ब्रांच/स्थानीय टीम को सौंप दी गई है।
वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने राहुल गांधी के धरने को “अराजकता की राजनीति” करार दिया। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष बिना किसी पूर्व सूचना या अनुमति के थाने का घेराव कर रहे हैं और पुलिस पर अनुचित दबाव बना रहे हैं, जबकि मामला पहले से ही न्यायिक और प्रशासनिक जांच के अधीन है।
भारत में भीड़ नियंत्रण के लिए पेलेट गन का इस्तेमाल लंबे समय से कानूनी और मानवाधिकार विमर्श का विषय रहा है। न्यायपालिका के विभिन्न फैसलों में यह स्पष्ट किया गया है कि इसका इस्तेमाल केवल ‘असाधारण और अंतिम उपाय’ के रूप में ही किया जाना चाहिए।
नए कानून में घातक हथियारों या साधनों से स्वेच्छा से चोट पहुंचाने के लिए 10 वर्ष तक के कठोर कारावास और जुर्माने का कड़ा प्रावधान है। नीट और परीक्षा सुधारों से जुड़े मुद्दे पर संसद से लेकर सड़क तक विपक्ष का यह आक्रामक रुख आने वाले दिनों में और तेज होने के संकेत दे रहा है।



