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नेपाल में जल-प्रलय की भीषण त्रासदी पर 7 सितंबर को राष्ट्रीय शोक दिवस घोषित

सरकारी दफ्तरों और विदेशों में स्थित मिशनों पर आधा झुका रहेगा राष्ट्रध्वज

नेपाल-चीन सीमावर्ती हिमालयी क्षेत्र और रसुवा जिले के भोटे कोशी व त्रिशूली नदी बेसिन में आई विनाशकारी आकस्मिक बाढ़ (Bhotekoshi Flash Flood) और मलबे के जलजले में अपनी जान गंवाने वाले सैकड़ों नागरिकों के सम्मान में नेपाल सरकार ने आगामी 7 सितंबर (सोमवार / 22 भाद्र 2083) को औपचारिक रूप से ‘राष्ट्रीय शोक दिवस’ (National Day of Mourning) के रूप में मनाने की घोषणा की है।
सिंहदरबार स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय में गुरुवार दोपहर प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) की उच्चस्तरीय बैठक में यह संवेदनशील निर्णय लिया गया।
सरकार के प्रवक्ता और शिक्षा एवं खेल मंत्री सस्मित पोखरेल ने कैबिनेट निर्णयों की आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया कि सनातन हिंदू और बौद्ध धार्मिक-सांस्कृतिक परंपरा के अनुसार किसी भी दिवंगत आत्मा की शांति के लिए किए जाने वाले 13वें दिन के श्राद्ध/मृत्यु अनुष्ठान (13th-day death anniversary rites) के अनुरूप 26 अगस्त को आई इस महाविपदा के ठीक 13वें दिन (7 सितंबर) पूरे राष्ट्र की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी।
इस शोक दिवस पर नेपाल भर के सभी सरकारी भवनों, अर्ध-सरकारी कार्यालयों और विदेशों में स्थित नेपाली दूतावासों, उच्चायोगों और राजनयिक मिशनों पर देश का राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका (Flown at Half-Mast) रहेगा। इसके साथ ही, कैबिनेट ने शोक दिवस के ठीक अगले दिन, यानी 8 सितंबर (23 भाद्र) को पहले से निर्धारित ‘जेन-जी शहीद दिवस’ (Gen-Z Martyrs’ Day) के उपलक्ष्य में पूरे देश में सार्वजनिक अवकाश (Public Holiday) घोषित करने का भी निर्णय लिया है।
गुरुवार शाम कैबिनेट बैठक के समापन के बाद सिंहदरबार में आयोजित प्रेस ब्रीफिंग में सरकार के प्रवक्ता, शिक्षा एवं खेल मंत्री सस्मित पोखरेल ने भावुक होते हुए सरकार के निर्णयों की विस्तृत जानकारी दी:
“रसुवा जिले के सीमावर्ती क्षेत्र में भोटे कोशी नदी में आई अकल्पनीय और भयावह आकस्मिक बाढ़ ने हमारे सैकड़ों नागरिकों, विदेशी अतिथियों और सुरक्षाबलों के जवानों को हमसे छीन लिया है। इस प्राकृतिक महाविपदा ने राष्ट्र के हृदय पर एक ऐसा गहरा घाव दिया है जिसे भरने में लंबा समय लगेगा। हमारे सनातन हिंदू और हिमालयी बौद्ध समाज में किसी भी प्रियजन के निधन के बाद 13वें दिन का अनुष्ठान अत्यंत पवित्र और मोक्षदायिनी माना जाता है। इसी सांस्कृतिक भावना का आदर करते हुए कैबिनेट ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि आपदा के 13वें दिन—यानी 7 सितंबर को—पूरा राष्ट्र एक स्वर में दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना करेगा और राष्ट्रीय शोक मनाएगा।
उस दिन हमारे सभी सरकारी प्रतिष्ठानों और दुनिया भर के देशों में स्थित नेपाली दूतावासों पर राष्ट्रध्वज आधा झुका रहेगा। राष्ट्र इस असहनीय पीड़ा की घड़ी में शोकाकुल परिवारों, अनाथ हुए बच्चों और बेघर हुए नागरिकों के साथ चट्टान की तरह खड़ा है। हमारा संकल्प केवल शोक व्यक्त करना नहीं है, बल्कि मलबे में तब्दील हुए अपने हिमालयी गांवों और बुनियादी ढांचे को पहले से भी अधिक सुरक्षित और सुदृढ़ बनाकर दोबारा खड़ा करना है।”
प्रवक्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि चूंकि 7 सितंबर को प्रशासनिक और राहत कार्यों में कोई व्यवधान न आए, इसलिए उस दिन सरकारी कार्यालय सामान्य रूप से काम करेंगे और कोई सार्वजनिक अवकाश नहीं होगा। हालांकि, अगले दिन 8 सितंबर को पहले से घोषित ‘जेन-जी शहीद दिवस’ पर पूर्ववत सार्वजनिक अवकाश रहेगा।
आपदा के पहले दिन से ही कीचड़, उफनती नदियों, भूस्खलन और क्षतिग्रस्त सुरंगों के भीतर घुसकर जान बचाने वाले सुरक्षा बलों और सिविल अधिकारियों के अद्वितीय पराक्रम को रेखांकित करते हुए कैबिनेट ने एक व्यापक ‘रेस्क्यूअर्स वेलफेयर पैकेज’ (Rescuers Welfare Package) को मंजूरी दी है नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल (APF), नेपाल पुलिस और स्थानीय गोताखोरों तथा सिविल कर्मचारियों को रसुवा, नुवाकोट, धादिंग और चितवन के बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में राहत व खोज कार्यों के दौरान दैनिक आधार पर विशेष जोखिम भत्ता और नाश्ता/भोजन खर्च प्रदान किया जाएगा।
कैबिनेट ने तय किया है कि यदि खोज और बचाव अभियान के दौरान किसी भी सुरक्षाकर्मी, तकनीकी विशेषज्ञ या सिविल कर्मचारी की दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु होती है, तो उसके आश्रित परिवार को सरकार की ओर से 10 लाख नेपाली रुपये (1 मिलियन रु.) की एकमुश्त राहत राशि दी जाएगी। अभियान के दौरान घायल होने वाले किसी भी बचाव कर्मी का काठमांडू के त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल (TUTH), पाटन अस्पताल या मिलिट्री अस्पताल में होने वाला संपूर्ण इलाज सरकारी खजाने से किया जाएगा।
बाढ़ के कारण नष्ट हुए पुलों, सड़कों, पेयजल योजनाओं और स्कूलों के त्वरित पुनर्निर्माण के लिए नेपाल सरकार ने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सहयोग की दिशा में भी कदम बढ़ाया है कैबिनेट ने एशियाई विकास बैंक द्वारा नेपाल को प्रदान किए गए 5 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 67 करोड़ नेपाली रुपये / ₹42 करोड़ भारतीय रुपये) के आपातकालीन अनुदान को औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, इस अनुदान राशि का उपयोग सीधे रसुवा और डाउनस्ट्रीम जिलों में क्षतिग्रस्त सड़कों की तात्कालिक बहाली, नदी तटबंधों की अस्थायी मरम्मत और बेघर हुए परिवारों के लिए ‘प्री-फैब्रिकेटेड शेल्टर’ (अस्थायी आवास) के निर्माण में किया जाएगा।
भोटे कोशी और त्रिशूली नदी बेसिन नेपाल की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। इस गलियारे में नेपाल के कई बड़े जलविद्युत संयंत्र, चीन के साथ व्यापारिक ट्रांसशिपमेंट हब और पर्यटन उद्योग स्थित हैं। इस तबाही से ठप हुए उद्योगों को पुनर्जीवित करने के लिए सरकार ने विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा की है
कैबिनेट ने उद्योग, वाणिज्य एवं आपूर्ति मंत्रालय को निर्देश दिया है कि वह बाढ़ प्रभावित उद्यमियों के लिए एक व्यापक पैकेज लागू करे। इसके तहत क्षतिग्रस्त उद्योगों को बिना किसी जटिल कागजी कार्रवाई के तुरंत परिचालन फिर से शुरू करने में मदद की जाएगी। जिन कारखानों, रिसॉर्ट्स, पोल्ट्री फार्म्स और जलविद्युत संयंत्रों को बाढ़ से भौतिक क्षति पहुंची है, उन्हें आगामी वित्तीय वर्ष के लिए प्रत्यक्ष करों, उत्पाद शुल्क और स्थानीय राजस्व में विशेष छूट दी जाएगी।
नेपाल के सबसे बड़े राष्ट्रीय त्योहारों दशईं, तिहार और छठ को निकट देखते हुए बाजार में आवश्यक वस्तुओं की किल्लत और कालाबाजारी रोकने के लिए सरकार ने सार्वजनिक उपक्रमों साल्ट ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड और खाद्य व्यवस्था तथा व्यापार कंपनी लिमिटेड को मात्र 1% सीमा शुल्क (Customs Duty) पर 25,000 मीट्रिक टन चीनी आयात करने की विशेष अनुमति प्रदान की है।
कैबिनेट बैठक के समय गृह मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, आपदा की भयावहता का दायरा रसुवा से लेकर दक्षिण में भारत की सीमा से सटे तराई जिलों तक फैल चुका है सुरक्षा बलों और गोताखोरों द्वारा आठ जिलों से मलबे और नदियों से शवों को निकालने के साथ ही पुष्टि की गई कुल मौतों का आंकड़ा 1,003 के पार पहुंच चुका है। इनमें से अकेले चितवन जिले में नारायणी नदी के किनारों से 321 शव बरामद किए गए हैं, जबकि नवलपरासी पूर्व में 216 और नवलपरासी पश्चिम में 170 शव मिले हैं। तिब्बत (चीन) की ओर भी 16 मौतों की पुष्टि हुई है।
कैबिनेट में यह जानकारी दी गई कि सेना और आर्म्ड पुलिस फोर्स के विशेष तकनीकी दल 60 मेगावाट की त्रिशूली-3A जलविद्युत परियोजना के इनटेक पोर्टल और टनल के मुहाने से भारी कीचड़ और विशाल बोल्डर हटाने के बेहद करीब पहुंच चुके हैं। सुरंग के भीतर पानी भर जाने से कई कामगारों के फंसे होने की आशंका थी, जिसके लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों के लाइफ-डिटेक्टर उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है।
नेपाल-चीन सीमा के पार बनी कृत्रिम बैरियर झील में जलस्तर की निगरानी के लिए बीजिंग स्थित चीनी मौसम विज्ञान प्रशासन और उपग्रह निगरानी केंद्रों से निरंतर डेटा साझा किया जा रहा है, ताकि निचले इलाकों में किसी अन्य संभावित फ्लैश फ्लड की स्थिति में समय रहते पूर्व-चेतावनी जारी की जा सके।
नेपाल सरकार द्वारा 7 सितंबर को घोषित राष्ट्रीय शोक दिवस केवल एक औपचारिक सरकारी शिष्टाचार नहीं है, बल्कि यह प्रकृति के क्रूरतम प्रहार के सामने 3 करोड़ नेपालियों के अटूट धैर्य, सामूहिक वेदना और मानवीय गरिमा का एक भावुक प्रमाण है।
राष्ट्रध्वज को आधा झुकाकर अपने खोए हुए नागरिकों को नमन करने के साथ-साथ, 50 लाख डॉलर के एडीबी फंड की स्वीकृति, बचाव कर्मियों के लिए 10 लाख रुपये के सुरक्षा कवच की स्थापना और स्थानीय उद्योगों के पुनरुद्धार के फैसले यह दर्शाते हैं कि नेपाल केवल अपनी त्रासदी पर आंसू नहीं बहा रहा है, बल्कि वह भविष्य की जलवायु चुनौतियों का सामना करने के लिए अपने पैरों पर दोबारा मजबूती से खड़े होने के लिए कृतसंकल्प है। आने वाले दिन नेपाल के पुनर्निर्माण, पारदर्शी राहत वितरण और हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण की सबसे कठिन परीक्षा साबित होंगे।

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