राष्ट्रीय
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शिक्षक दिवस पर 48 उत्कृष्ट शिक्षकों को प्रदान किए राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026
विज्ञान भवन में गरिमामयी समारोह; 27 राज्यों, 7 केंद्र शासित प्रदेशों और 6 केंद्रीय संगठनों के शिक्षकों को मिला सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान

शिक्षक दिवस (Teachers’ Day) के पावन और ऐतिहासिक अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में आयोजित एक भव्य एवं गरिमामयी राष्ट्रीय समारोह में देश भर के 48 चयनित उत्कृष्ट स्कूल शिक्षकों को ‘राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026′ (National Teachers’ Award 2026) से सम्मानित किया।
यह प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान उन समर्पित गुरुओं को प्रदान किया गया है जिन्होंने अपनी अद्वितीय शिक्षण पद्धतियों, तकनीकी नवाचारों, समाज के वंचित वर्गों के विद्यार्थियों को मुख्यधारा से जोड़ने और सीखने के पारंपरिक अनुभवों को पूरी तरह रूपांतरित करने में असाधारण और अनुकरणीय योगदान दिया है।
स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग, शिक्षा मंत्रालय (Ministry of Education) द्वारा आयोजित इस राष्ट्रीय समारोह में देश की भौगोलिक और सांस्कृतिक विविधता का अनुपम संगम देखने को मिला। इस वर्ष के 48 पुरस्कृत शिक्षकों का चयन देश भर के 27 राज्यों, 7 केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्र सरकार के 6 प्रमुख शैक्षणिक संगठनों से किया गया है। इस प्रतिष्ठित समूह में 26 पुरुष शिक्षक और 22 महिला शिक्षक शामिल हैं।
पुरस्कार वितरण के दौरान विज्ञान भवन के मुख्य सभागार में प्रत्येक पुरस्कृत शिक्षक के जीवन, उनके द्वारा किए गए जमीनी नवाचारों और शैक्षणिक यात्रा पर आधारित लघु वृत्तचित्र (Short Documentaries) भी प्रदर्शित किए गए, जिसने सभागार में मौजूद शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं और अतिथियों को भावविभोर कर दिया।
विज्ञान भवन में उपस्थित देश भर के शिक्षकों, छात्रों और शिक्षाविदों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वतंत्र भारत के द्वितीय राष्ट्रपति और महान दार्शनिक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को उनकी जयंती पर श्रद्धासुमन अर्पित किए। राष्ट्रपति ने अपने भाषण में शिक्षकों की सामाजिक, नैतिक और राष्ट्र-निर्माण से जुड़ी भूमिका पर गहराई से प्रकाश डाला:
“हमारे संविधान में अवसर की समानता (Equality of Opportunity) का जो पावन आदर्श निहित है, उसे साकार करने का सबसे सशक्त और प्रभावी माध्यम केवल शिक्षा है। स्कूल शिक्षा समूची ज्ञान व्यवस्था की आधारशिला होती है। ज्ञान और तकनीकी कौशल तो जीवन के किसी भी पड़ाव पर सीखे जा सकते हैं, लेकिन बचपन में दिए गए अच्छे संस्कार, नैतिक मूल्य और आचरण के पाठ जीवनपर्यंत अमिट रहते हैं। यदि शिक्षक प्रारंभिक कक्षाओं में ही बच्चों के बौद्धिक, शारीरिक और नैतिक विकास पर पूरी निष्ठा से ध्यान दें, तो हम एक ऐसी भावी पीढ़ी तैयार कर सकते हैं जो ज्ञानवान होने के साथ-साथ अत्यंत कर्तव्यनिष्ठ नागरिक भी हो।
हमारे समाज में बहुत से बच्चे अत्यंत विपन्न और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं। कई बच्चे अपने परिवार के ‘फर्स्ट जेनरेशन लर्नर’ (पहली पीढ़ी के शिक्षार्थी) होते हैं। कुछ छात्र ग्रामीण परिवेश से निकलकर शहरों के बड़े स्कूलों में आते हैं, जहां वे हीनभावना या संकोच का शिकार हो जाते हैं। कुछ बच्चे जन्मजात प्रतिभाशाली होते हैं लेकिन उनमें आत्मविश्वास की कमी होती है, और कुछ दिव्यांग या विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चे (CWSN) होते हैं। हमारे शिक्षकों का यह विशेष नैतिक दायित्व है कि वे ऐसे प्रत्येक बच्चे के भीतर आत्मविश्वास का संचार करें और उन्हें हीनभावना से उबारकर सफलता के शिखर तक पहुंचाएं।
आज जब भारत वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ (Viksit Bharat) के महान लक्ष्य की ओर तेजी से अग्रसर है, तो यह लक्ष्य केवल तभी प्राप्त किया जा सकता है जब हमारी शिक्षा प्रणाली विश्वस्तरीय हो। हमारे शिक्षक ही उस शिक्षा व्यवस्था में प्राण फूंकते हैं। देश के प्राथमिक स्कूलों में ड्रॉपआउट दर को लगभग नगण्य करने में हमारे शिक्षकों का योगदान ऐतिहासिक रहा है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि देश का एक भी बच्चा गुणवत्तापूर्ण और समावेशी शिक्षा से वंचित न रहे। शिक्षक अपने स्नेह, संवेदनशीलता और समर्पण से विद्यार्थियों के जीवन में ज्ञान की स्थायी ज्योति प्रज्वलित करें।'”
इस वर्ष के राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कारों की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें प्रांतीय सरकारी स्कूलों के साथ-साथ केंद्र सरकार के अधीन संचालित 6 प्रमुख विशिष्ट शैक्षणिक तंत्रों के शिक्षकों को भी उनके नवाचारों के लिए चुना गया देश के दूरदराज के क्षेत्रों, सामरिक छावनियों और सीमाओं पर तैनात रक्षा और अर्धसैनिक बलों के बच्चों को आधुनिक तकनीक, डिजिटल क्लासरूम और द्विभाषी दक्षता से लैस करने वाले शिक्षकों को यह सम्मान मिला।
ग्रामीण पृष्ठभूमि के प्रतिभावान विद्यार्थियों को नि शुल्क आधुनिक शिक्षा देने वाले जवाहर नवोदय विद्यालयों के शिक्षकों ने सह-पाठ्यचर्या, पर्यावरण संरक्षण और छात्र कल्याण में उत्कृष्ट मॉडल प्रस्तुत किए। अनुभवात्मक शिक्षा (Experiential Learning), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का कक्षा में एकीकरण और बहुविषयक दृष्टिकोण (Multidisciplinary Pedagogy) लागू करने वाले शिक्षकों को मान्यता दी गई।
विश्लेषणात्मक चिंतन, कला-एकीकृत शिक्षा (Art-integrated learning) और भाषा शिक्षण में उच्च मानक स्थापित करने वाले शिक्षकों का चयन किया गया। विद्यार्थियों में सैन्य अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, शारीरिक सुदृढ़ता और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति समर्पण की भावना रोपने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया गया। देश के परमाणु ऊर्जा परिसरों में वैज्ञानिक सोच (Scientific Temperament), रोबोटिक्स और गणितीय नवाचारों को बच्चों के लिए सहज बनाने वाले शिक्षकों को राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया।
शिक्षा मंत्रालय ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कारों की गरिमा और निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए एक अत्यंत पारदर्शी, योग्यता-आधारित और तकनीक-संचालित त्रि-स्तरीय चयन प्रणाली को लागू किया था देश के किसी भी मान्यता प्राप्त स्कूल का शिक्षक शिक्षा मंत्रालय के समर्पित ‘राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल’ पर सीधे अपना नामांकन दाखिल कर सकता था। इसमें शिक्षकों को अपने अभिनव शिक्षण मॉडल, खिलौना-आधारित पेडागॉजी, डिजिटल कंटेंट और छात्रों के प्रदर्शन में आए गुणात्मक सुधार के साक्ष्य प्रस्तुत करने थे।
जिला स्तरीय समितियों ने इन दावों का जमीनी और दस्तावेजी सत्यापन किया। इसके बाद राज्य स्तरीय समितियों ने प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश से सर्वश्रेष्ठ शिक्षकों की सूची तैयार कर केंद्र को भेजी। अंतिम चयन भारत सरकार द्वारा गठित एक स्वतंत्र राष्ट्रीय जूरी (Independent National Jury) द्वारा किया गया। इस जूरी में प्रख्यात वैज्ञानिक, कुलपति, वरिष्ठ शिक्षाविद और समाजशास्त्री शामिल थे। उम्मीदवारों ने जूरी के सामने अपनी शिक्षण पद्धतियों पर व्यक्तिगत प्रस्तुतियां (Presentations) दीं और गहन साक्षात्कार के बाद ही अंतिम 48 नामों का चयन किया गया।
समारोह का सबसे भावुक और प्रेरणादायी क्षण वह था जब विज्ञान भवन के विशाल पर्दों पर प्रत्येक शिक्षक के संघर्ष और सफलता पर तैयार की गई लघु फिल्में प्रदर्शित की गईं कई शिक्षकों ने दिखाया कि कैसे सीमित सरकारी बजट के बावजूद उन्होंने बेकार पड़े प्लास्टिक के डिब्बों, कार्डबोर्ड और तारों की मदद से भौतिकी और रसायन विज्ञान की अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं तैयार कर दीं।
पूर्वोत्तर और जनजातीय बहुल क्षेत्रों के शिक्षकों ने बच्चों की शुरुआती हिचक को तोड़ने के लिए पाठ्यपुस्तकों का अनुवाद उनकी स्थानीय बोलियों में किया और लोककथाओं के माध्यम से गणित व विज्ञान के जटिल सूत्र सिखाए। कई महिला शिक्षकों ने सुदूर गांवों में घर-घर जाकर रूढ़िवादी अभिभावकों को समझाया और बालिकाओं के स्कूल छोड़ने की दर को शून्य पर ला दिया।
समारोह में उपस्थित केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने रेखांकित किया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के चार वर्ष पूरे होने के बाद यह पुरस्कार इस बात का साक्ष्य हैं कि नीति के सिद्धांत केवल दस्तावेजों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे देश की अंतिम पंक्ति के स्कूलों तक पहुंच चुके हैं प्राथमिक कक्षाओं में बच्चों को रटने की बजाय समझने और तार्किक रूप से सोचने की क्षमता विकसित करने में इन शिक्षकों ने ‘निपुण भारत’ (NIPUN Bharat) मिशन को गति दी है। मिडिल और सेकेंडरी स्तर पर कोडिंग, वोकेशनल स्किल्स, हैंडीक्राफ्ट्स और स्थानीय व्यवसायों से छात्रों को जोड़ने की दिशा में पुरस्कृत शिक्षकों ने विशेष योगदान दिया है।
विज्ञान भवन में आयोजित ‘राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026’ केवल 48 व्यक्तियों को पदक और प्रमाणपत्र सौंपने का औपचारिक अनुष्ठान नहीं था, बल्कि यह भारत की सनातन ‘गुरु-शिष्य परंपरा’ और आधुनिक ज्ञान-आधारित समाज का राष्ट्रीय उत्सव था। लद्दाख की बर्फीली चोटियों से लेकर अंडमान के द्वीपों तक, और पूर्वोत्तर के जंगलों से लेकर थार के रेगिस्तान तक, विपरीत परिस्थितियों में भी बिना थके, बिना रुके देश के भविष्य को संवारने वाले ये 48 शिक्षक 140 करोड़ देशवासियों के लिए प्रेरणा के प्रकाश स्तंभ हैं।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों मिला यह सर्वोच्च सम्मान देश के समस्त शिक्षक समुदाय को यह विश्वास दिलाता है कि राष्ट्र उनके मौन तप, उनके पसीने और उनके समर्पण का सदैव ऋणी रहेगा और ‘विकसित भारत’ की भव्य इमारत इन्हीं शिक्षकों द्वारा रखी गई मजबूत शैक्षणिक नींव पर ही खड़ी होगी।



