
देश की राजधानी दिल्ली और समूचे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में लगातार दूसरे दिन हुई भीषण मानसूनी बारिश और गरज-चमक के साथ आए तूफानी झोंकों ने बुनियादी नागरिक व्यवस्था और यातायात तंत्र को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। शुक्रवार को जन्माष्टमी के पावन अवसर पर शुरू हुआ बादलों का बरसना शनिवार को भी अनवरत जारी रहा, जिसके चलते दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद के मुख्य राजमार्ग, अंडरपास, रिहायशी कॉलोनियां और एयरपोर्ट टर्मिनल जलमग्न हो गए।
सड़कों पर घुटनों से लेकर कमर तक पानी भर जाने के कारण लाखों वाहन चालक घंटों लंबे ट्रैफिक जाम में फंसे रहे। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राजधानी के कई हिस्सों के लिए ‘रेड अलर्ट’ और व्यापक क्षेत्र के लिए ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी करते हुए चेतावनी दी कि वायुमंडलीय परिस्थितियां बेहद सक्रिय हैं और आगामी समय में मूसलाधार बारिश के और दौर देखने को मिल सकते हैं।
राजधानी में हुई इस अप्रत्याशित मूसलाधार बारिश का सबसे गंभीर असर देश के सबसे व्यस्ततम हवाई अड्डे इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGIA) के संचालन पर पड़ा शनिवार दोपहर और शुक्रवार शाम को टर्मिनल-2 और टर्मिनल-3 के एप्रोच रोड तथा फोरकोर्ट (Forecourt) क्षेत्रों में पानी भर गया। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए पहुंचने वाले यात्रियों को घुटनों तक पानी में से अपनी ट्रॉलियां खींचकर प्रवेश द्वार तक जाना पड़ा। एयरपोर्ट ऑपरेटर डायल (DIAL) ने सफाई टीमों और उच्च क्षमता वाले सक्शन पंपों को तैनात कर स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की।
खराब मौसम, घने बादलों और 76 किमी/घंटा तक पहुंचे तूफानी झोंकों के कारण रनवे पर दृश्यता खतरनाक स्तर तक घट गई। दोपहर 3:30 से 4:30 बजे के बीच दिल्ली आने वाली 9 प्रमुख उड़ानों को डायवर्ट करना पड़ा। इनमें से 4 उड़ानों को जयपुर, 4 को लखनऊ और 1 को अहमदाबाद भेजा गया। दर्जनों उड़ानों के प्रस्थान और आगमन में 45 मिनट से लेकर डेढ़ घंटे तक का विलंब दर्ज किया गया। इंडिगो और एयर इंडिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर यात्रा परामर्श जारी करते हुए कहा कि दिल्ली में भारी बारिश के कारण उड़ान संचालन प्रभावित हुआ है, अतः यात्री एयरपोर्ट रवाना होने से पहले अपनी उड़ानों का लाइव स्टेटस अवश्य जांच लें और जाम को देखते हुए घरों से कम से कम 2 से 3 घंटे का अतिरिक्त मार्जिन लेकर निकलें।
दिल्ली और एनसीआर की जीवन रेखा माने जाने वाले प्रमुख राजमार्ग और संपर्क मार्ग जलभराव के कारण विशाल पार्किंग स्थल में तब्दील हो गए धौला कुआं से आईजीआई एयरपोर्ट और गुरुग्राम की ओर जाने वाले एनएच-48 पर महिपालपुर फ्लाईओवर के नीचे और पालम एयरपोर्ट टनल के मुहाने पर भयंकर जलभराव हुआ। दोपहिया और छोटी कारें पानी में डूबकर बंद हो गईं, जिसके चलते दिल्ली से गुरुग्राम के बीच वाहनों की कतारें 6 से 8 किलोमीटर लंबी हो गईं।
संगम विहार की नीम चौक रोड, महरौली-बदरपुर (MB) रोड, साकेत, छतरपुर, शकरपुर और लक्ष्मी नगर में स्थानीय नालों का पानी ओवरफ्लो होकर सड़कों पर बहने लगा। मथुरा रोड पर अपोलो अस्पताल और आश्रम चौक के बीच एक विशाल पेड़ गिरने से यातायात पूरी तरह ठप हो गया, जिससे एम्बुलेंस और आवश्यक सेवाओं के वाहन भी जाम में फंस गए। उपनगर द्वारका के सेक्टर 1, 7, 8, 9, 10 और 20 को जोड़ने वाली मुख्य सड़कों तथा ओमेक्स रोड पर नालों की सफाई न होने से घुटनों तक पानी भर गया।
दिल्ली से सटे उपग्रह शहरों (Satellite Cities) में भी बारिश ने नगर निगमों के मानसून पूर्व दावों की पोल खोल दी दिल्ली-जयपुर एक्सप्रेसवे पर नरसिंहपुर स्ट्रेच हर बार की तरह इस बार भी पूरी तरह जलमग्न हो गया। हीरो होंडा चौक, इफ्को चौक और सोहना रोड पर पानी भरने के बाद गुरुग्राम ट्रैफिक पुलिस ने परामर्श जारी कर कॉर्पोरेट दफ्तरों को ‘वर्क फ्रॉम होम’ (WFH) को प्राथमिकता देने और नागरिकों को बहुत जरूरी होने पर ही निजी वाहन निकालने की अपील की। नोएडा के सेक्टर 18, 62 और मॉडल टाउन अंडरपास के पास वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई। गाजियाबाद के लोनी, विजयनगर और मोहन नगर चौराहे पर पानी भरने से ऑटो-रिक्शा और बसों के संचालन में भारी बाधा आई।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, सितंबर के पहले सप्ताह में दिल्ली-एनसीआर में हो रही यह भीषण बारिश एक दुर्लभ और अत्यधिक सक्रिय मानसूनी मौसमी तंत्र का परिणाम है आईएमडी के महानिदेशक और वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों के ऊपर बना ‘वेल-मार्क्ड लो-प्रेशर एरिया’ (Well-marked Low Pressure Area) पिछले 48 घंटों से लगभग स्थिर बना हुआ है।
यह निम्न दबाव तंत्र अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों ओर से भारी मात्रा में नमी खींच रहा है। जब यह नम हवाएं उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में शुष्क हवाओं से टकराती हैं, तो विशाल ‘कपासी-वर्षी’ मेघ (Cumulonimbus Clouds) बनते हैं, जो कुछ ही घंटों में 50 से 100 मिमी तक पानी बरसाने में सक्षम होते हैं।
हालात की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस और दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) ने नागरिकों की सुरक्षा के लिए बहुस्तरीय दिशा-निर्देश जारी किए हैं मिंटो ब्रिज, जखीरा अंडरपास, पुल प्रहलादपुर और एनएच-8 अंडरपास जैसे संवेदनशील गड्ढों में जलस्तर बढ़ने पर बैरिकेडिंग कर दी गई है। चालकों को निर्देश दिया गया है कि वे पानी भरे रास्तों पर जोखिम लेकर गाड़ियां न दौड़ाएं।
दिल्ली पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि शहर में बारिश के साथ-साथ आगामी राजनयिक आयोजनों के सुरक्षा पूर्वाभ्यास (Rehearsals) के चलते कई मार्गों पर डायवर्जन लागू किया गया है। इसलिए नागरिक घर से निकलने से पहले गूगल मैप्स या दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के एक्स (ट्विटर) हैंडल पर रियल-टाइम ट्रैफिक अपडेट अवश्य देखें।
यह मूसलाधार बारिश एक बार फिर दिल्ली-एनसीआर के बुनियादी ढांचे और विभिन्न नागरिक एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी पर गंभीर सवाल खड़े करती है दिल्ली में नालों और सड़कों का प्रबंधन लोक निर्माण विभाग (PWD), दिल्ली नगर निगम (MCD), नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC), दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) में बंटा हुआ है। जब तेज बारिश होती है, तो इन एजेंसियों के बीच नाला सफाई और गाद (Silt) निकालने को लेकर जिम्मेदारी का अभाव सड़कों पर जलभराव के रूप में सामने आता है।
दिल्ली का अधिकांश ड्रेनेज नेटवर्क दशकों पुराना है, जिसे 20-30 मिमी प्रति घंटा बारिश के हिसाब से डिजाइन किया गया था। कंक्रीटीकरण बढ़ने के कारण वर्षा जल जमीन में रिस नहीं पाता और सीधे सड़कों पर बहकर नालों को चोक कर देता है। दिल्ली-एनसीआर में शनिवार को हुई भारी बारिश ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि जलवायु परिवर्तन के इस दौर में मौसम के मिजाज में अप्रत्याशित और तीव्र बदलाव एक सामान्य घटना बनते जा रहे हैं। चंद घंटों की बारिश ने देश के सबसे आधुनिक महानगर की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है।
हालांकि, राहत की बात यह है कि रविवार से मौसमी तंत्र के कमजोर पड़ने और शुष्क उत्तर-पश्चिमी हवाओं के चलने से बारिश की तीव्रता में उल्लेखनीय कमी आएगी। तब तक, नागरिकों के लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि वे मौसम विभाग की चेतावनियों का अक्षरशः पालन करें, अंडरपासों और जलभराव वाले चौराहों से दूरी बनाए रखें, और सड़क यात्रा के बजाय मेट्रो जैसे सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन का अधिकतम उपयोग कर अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करें।



