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महाराष्ट्र एफडीए (FDA) का ठाणे में बड़ा प्रहार: खर्डी गांव में फरसाण, वेफर्स और नमकीन की 11 अवैध फैक्ट्रियों पर छापा

₹20.48 लाख का 29 टन सड़ा-गला माल व प्रयुक्त खाद्य तेल जब्त, चूहों व बदबूदार गंदगी के बीच हो रहा था निर्माण

आगामी त्योहारी सीजन गणेशोत्सव, नवरात्रि और दीपावली से ठीक पहले आम जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाले मिलावटखोरों और अवैध खाद्य निर्माताओं के खिलाफ महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (Food and Drug Administration – FDA) ने राज्यव्यापी स्तर पर सबसे आक्रामक कार्रवाई शुरू की है।
राज्य के खाद्य सुरक्षा आयुक्त तुकाराम मुंढे के सख्त निर्देशों के तहत एफडीए ठाणे संभाग की विशेष खुफिया टीम ने 9 सितंबर 2026 की तड़के ठाणे जिले के शील-दिवा रोड स्थित खर्डी गांव (Khardi Village) के भास्कर कंपाउंड में चल रहे 11 खाद्य निर्माण एवं प्रसंस्करण कारखानों पर एक साथ छापा मारा। गोपनीय सूचना के आधार पर की गई इस आकस्मिक जांच में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 (Food Safety and Standards Act, 2006) के तमाम प्रावधानों की धज्जियां उड़ती पाई गईं।
छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने फैक्ट्रियों से कुल 28,955 किलोग्राम (लगभग 29 टन) तैयार नमकीन, अमानक कच्चा माल (मैदा, बेसन, मटर का आटा) और 56 लीटर बार-बार उबाला गया जहरीला खाद्य तेल जब्त किया। जब्त किए गए इस संपूर्ण दूषित और असुरक्षित स्टॉक का आधिकारिक बाजार मूल्यांकन ₹20,48,801.50 (20.48 लाख रुपये) आंका गया है।
एफडीए ने स्पष्ट किया है कि यह सख्त कार्रवाई व्यापक स्तर पर मिलावट (Adulteration), अमानक गुणवत्ता, घटिया स्टार्च के मिश्रण और इंसानी उपभोग के बिल्कुल अयोग्य, अत्यंत बदबूदार और अस्वास्थ्यकर वातावरण में खाद्य पदार्थ बनाए जाने के पुख्ता प्रमाण मिलने के बाद की गई है।
इन 11 कारखानों में औद्योगिक गंदे पानी की निकासी (Drainage System) का कोई विधिक प्रबंध नहीं था। कच्चे आलू धोने, बेसन का घोल तैयार करने और बर्तनों की धुलाई से निकलने वाला बदबूदार पानी कारखानों के ठीक मुख्य द्वारों पर गड्ढों में भरा हुआ था। इस सड़ांध भरे पानी से उठने वाली सीलन और दुर्गंध में सांस लेना तक दूभर था।
कारखानों के भंडारण कक्षों में जहां खुले बर्तनों और प्लास्टिक के कट्टों में तैयार फरसाण और चिवड़ा रखा हुआ था, वहां चारों तरफ चूहों की लीद और मरे हुए कीड़े पाए गए। दीवारों पर और फर्श की दरारों में सैकड़ों की संख्या में तिलचट्टे (Cockroaches) रेंग रहे थे। यही नहीं, कारखानों के आसपास आवारा गायें, भैंसें, कुत्ते और बिल्लियां खुलेआम घूम रही थीं और कई जगहों पर गोबर व पशु अपशिष्ट सीधे कारखाने की दहलीज तक फैला हुआ था।
खाद्य सामग्री तैयार करने वाले किसी भी हलवाई या मजदूर ने एप्रन, ग्लव्स (दस्ताने) या सिर ढकने वाली टोपी (Headgear) नहीं पहन रखी थी। कामगार पसीने से तर-बतर, मैले-कुचैले कपड़ों में नंगे हाथों से गर्म तेल में चीजें डाल रहे थे और बिना हाथ धोए ही तैयार नमकीन को पैकेटों में भर रहे थे। किसी भी कर्मचारी के पास मेडिकल फिटनेस प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं था।
इस पूरी छापेमारी में सबसे खतरनाक पहलू उपयोग किए जा रहे खाद्य तेल और कच्चे माल की गुणवत्ता को लेकर सामने आया है भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के सख्त वैज्ञानिक दिशा-निर्देशों के अनुसार, खाना पकाने के तेल को बार-बार गर्म करने पर उसमें टोटल पोलर कंपाउंड्स (TPC) बनते हैं। यदि किसी तेल में टीपीसी का स्तर 25% से अधिक हो जाता है, तो वह तेल इंसानी उपभोग के लिए जहरीला हो जाता है और उसे तुरंत नष्ट करना अनिवार्य होता है। खर्डी गांव की इकाइयों में 56 लीटर ऐसा तेल पाया गया जो जलकर पूरी तरह डामर जैसा काला पड़ चुका था, फिर भी उसमें नया तेल मिलाकर लगातार नमकीन तली जा रही थी।
मेडिकल साइंस के अनुसार, ऐसा रिसाइकिल और जला हुआ तेल शरीर में ट्रांस-फैट्स (Trans-Fats), फ्री रेडिकल्स और एक्रिलामाइड जैसे कैंसरकारी तत्वों को जन्म देता है। इसके नियमित सेवन से धमनियों में ब्लॉकेज, दिल का दौरा, लिवर सिरोसिस, हाई ब्लड प्रेशर और पेट के कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियां होती हैं। फरसाण और शेव बनाने के लिए महंगे चने के बेसन की जगह सस्ती, घटिया और कभी-कभी जानवरों के चारे के रूप में इस्तेमाल होने वाली पीली मटर का सड़ा आटा और अमानक मैदा मिलाया जा रहा था। नमकीन को पीला और आकर्षक दिखाने के लिए उसमें गैर-खाद्य (Non-Permitted) रासायनिक सिंथेटिक रंगों का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा था।
इनमें से अधिकांश इकाइयों के पास न तो नगर निगम का कोई अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) था और न ही एफएसएसएआई का वैध फूड लाइसेंस।
पैकेटों पर न तो निर्माण की तारीख (Manufacturing Date) थी, न एक्सपायरी, न बैच नंबर और न ही पोषण मूल्य की कोई जानकारी। यह माल मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई और कल्याण-डोंबिवली की स्थानीय फुटपाथ दुकानों और साप्ताहिक बाजारों में सस्ते दामों पर खपाया जाना था। महाराष्ट्र एफडीए के कड़क और निष्पक्ष कार्यशैली के लिए जाने जाने वाले आयुक्त तुकाराम मुंढे ने इस कार्रवाई के बाद पूरे
राज्य के खाद्य कारोबारियों को सख्त चेतावनी दी है:
“जनस्वास्थ्य और उपभोक्ताओं की सुरक्षा के साथ किसी भी सूरत में कोई समझौता नहीं किया जाएगा। जो कोई भी मुनाफा कमाने के लिए जनता को सड़ा-गला, एक्सपायर्ड, मिलावटी या अत्यंत गंदे माहौल में तैयार खाना परोसेगा या बेचेगा, उसके खिलाफ कानून के तहत कठोरतम दंडात्मक कार्रवाई होगी। हमारा अभियान केवल एक दिन की छापेमारी तक सीमित नहीं है, यह मिलावटखोरी के पूरे तंत्र को उखाड़ फेंकने का राज्यव्यापी संकल्प है।”
ठाणे की इस छापेमारी के समानांतर, एफडीए ने स्वच्छता नियमों का गंभीर उल्लंघन करने वाले 10 बड़े और प्रतिष्ठित होटलों, बेस किचनों और डार्क स्टोर्स के लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिए हैं 6 प्रतिष्ठित रेस्तरां और रेलवे बेस किचन (किचन में जिंदा कॉकरोच और बीमार/जख्मी कर्मचारियों से खाना बनवाने के आरोप में)। 2 प्रमुख भोजनालय और डेयरी आपूर्तिकर्ता। 1 बड़ा खाद्य प्रतिष्ठान। 1 इकाई का लाइसेंस रद्द।
आगामी गणेशोत्सव और दुर्गा पूजा के दौरान लाखों श्रद्धालुओं को बांटे जाने वाले महाप्रसाद और सामूहिक भोजन (Mass Food Distribution) को सुरक्षित बनाने के लिए एफडीए ने एक नई कानूनी व्यवस्था लागू की है सार्वजनिक गणेश मंडलों, धार्मिक ट्रस्टों और सामाजिक संस्थाओं को बड़े पैमाने पर भोजन या प्रसाद वितरण से कम से कम 7 दिन पहले राज्य के ‘खाद्य एवं औषधि शिकायत निवारण पोर्टल’ पर ऑनलाइन पूर्व-सूचना फॉर्म जमा करना होगा। हलवाइयों को निर्देश दिया गया है कि वे मावा (खोया), पनीर, घी और बेसन की खरीद केवल पंजीकृत थोक विक्रेताओं से ही करें और पक्के जीएसटी बिल सुरक्षित रखें। किसी भी संदिग्ध खेप को तुरंत जब्त कर नष्ट कर दिया जाएगा।

 

एफडीए के विशेषज्ञों ने त्योहारी सीजन में नागरिकों को जागरूक रहने और खरीदारी करते समय कुछ सावधानियां बरतने की सलाह दी है यदि नमकीन या वेफर्स का रंग जरूरत से ज्यादा पीला, नारंगी या लाल दिख रहा है, तो समझ लें कि उसमें हानिकारक केमिकल डाई का इस्तेमाल किया गया है। प्राकृतिक बेसन का रंग हल्का मटमैला पीला होता है।
यदि नमकीन खाते ही गले में हल्की कड़वाहट, तीखापन या सीने में जलन महसूस हो, या पैकेट खोलते ही पुराने तेल की अजीब दुर्गंध आए, तो वह बार-बार खौलाए गए जले तेल (Rancid Oil) में तली गई है। कभी भी खुले या बिना ब्रांड वाले पारदर्शी प्लास्टिक में बिकने वाले नमकीन न खरीदें। पैकेट पर FSSAI का 14 अंकों का लाइसेंस नंबर, निर्माण तिथि, अवयवों की सूची और बैच नंबर देखना अनिवार्य है।
ठाणे के खर्डी गांव में 11 अवैध नमकीन फैक्ट्रियों पर महाराष्ट्र एफडीए की यह ताबड़तोड़ कार्रवाई केवल ₹20.48 लाख के माल की जब्ती तक सीमित नहीं है। यह उन असामाजिक तत्वों के लिए एक कड़ा सबक है जो चंद रुपयों के मुनाफे के लिए मासूम नागरिकों, बच्चों और परिवारों की जिंदगी को दांव पर लगा देते हैं।
गंदगी, बदबूदार नालियों और चूहों के बीच 29 टन दूषित नमकीन तैयार करना आम जनता के विश्वास और स्वास्थ्य पर सीधा हमला था।
आयुक्त तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में एफडीए ने त्योहारी सीजन की शुरुआत में ही यह स्पष्ट कर दिया है कि महाराष्ट्र में मिलावटखोरों के लिए कोई सुरक्षित पनाहगाह नहीं है। यह कार्रवाई नागरिकों को भी यह संदेश देती है कि वे जागरूक बनें, अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों का बहिष्कार करें और अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए किसी भी संदिग्ध निर्माण की सूचना तुरंत खाद्य सुरक्षा विभाग को दें।

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