पर्यावरणराष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र
दिल्ली में विंटर एक्शन प्लान का व्यापक और कड़ा प्रहार: प्रदूषण विरोधी अभियान के पहले ही दिन नियमों का उल्लंघन करने वालों पर 68.4 लाख रुपये का भारी-भरकम जुर्माना
पंद्रह हजार वाहनों की सघन जांच, पंद्रह सौ से अधिक गाड़ियां सीमाओं से वापस

उत्तर भारत में सर्दी की आमद के साथ ही राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक के खतरनाक स्तर पर पहुंचने और हवा में घुले जहरीले कणों की मार से निपटने के लिए दिल्ली सरकार और तमाम नियामक संस्थाओं ने पूरी ताकत झोंक दी है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के कड़े निर्देशों और राजधानी के विंटर एक्शन प्लान के तहत प्रदूषण के स्थानीय स्रोतों पर नकेल कसने के उद्देश्य से शुरू किए गए गहन प्रदूषण विरोधी अभियान के पहले ही दिन प्रशासनिक तंत्र ने अपनी अब तक की सबसे आक्रामक और व्यापक दंडात्मक कार्रवाई को अंजाम दिया है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति, दिल्ली यातायात पुलिस, दिल्ली नगर निगम और राजस्व विभाग की संयुक्त प्रवर्तन टीमों ने नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ जबर्दस्त शिकंजा कसते हुए महज चौबीस घंटों के भीतर 68 लाख 40 हजार रुपये का भारी-भरकम जुर्माना और पर्यावरणीय मुआवजा अधिरोपित किया है। यह कार्रवाई इस बात का स्पष्ट संकेत है कि आने वाले महीनों में वायु प्रदूषण के किसी भी कारक को बख्शा नहीं जाएगा और राजधानी की हवा को जहरीला बनाने वाले तत्वों के खिलाफ शून्य सहनशीलता की नीति पर अमल किया जाएगा।
सर्दियों के इस मौसम में दिल्ली की आबोहवा को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाले दो प्रमुख घटक वाहनों से निकलने वाला जहरीला धुआं और निर्माण एवं विध्वंस गतिविधियों से उड़ने वाली धूल हैं। इसी तथ्य को ध्यान में रखते हुए प्रवर्तन एजेंसियों ने अभियान के पहले दिन इन दोनों ही मोर्चों पर एक साथ सुनियोजित प्रहार किया। दिल्ली की सभी प्रमुख अंतर-राज्यीय सीमाओं जैसे सिंघु, टिकरी, गाजीपुर, बदरपुर, कालिंदी कुंज, आया नगर और कापसहेड़ा के साथ-साथ शहर के आंतरिक रिंग रोड और प्रमुख व्यस्त चौराहों पर विशेष नाकेबंदी की गई थी। यातायात पुलिस और परिवहन विभाग की सौ से अधिक उड़नदस्ता टीमों ने सुबह से लेकर देर रात तक लगभग 15,000 वाहनों की गहन और सिलसिलेवार जांच की। इस व्यापक जांच अभियान का प्राथमिक उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि सड़कों पर केवल वही वाहन दौड़ें जो पर्यावरण मानकों पर पूरी तरह खरे उतरते हैं और जिनके पास वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र मौजूद है।
जांच के दौरान सीमावर्ती प्रवेश द्वारों पर तैनात पुलिस और परिवहन अधिकारियों ने राजधानी के निर्धारित उत्सर्जन नियमों और उम्र सीमा की कसौटियों पर खरा न उतरने वाले 1,539 वाहनों को दिल्ली की सीमा में प्रवेश करने से पूरी तरह रोक दिया और उन्हें वहीं से वापस लौटा दिया। इनमें प्रमुख रूप से पुराने गैर-अनुपालन वाले भारी व्यावसायिक डीजल ट्रक, बिना वैध पर्यावरण परमिट के चल रहे मालवाहक और ऐसे गैर-गंतव्य वाहन शामिल थे जिनका अंतिम पड़ाव दिल्ली नहीं था। इन वाहनों को शहर के भीतर प्रवेश देकर अतिरिक्त जाम और धुएं का बोझ बढ़ाने के बजाय कुंडली-मानेसर-पलवल और कुंडली-गाजियाबाद-पलवल जैसे ईस्टर्न और वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे की ओर मोड़ दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि जब तक वायु प्रदूषण की स्थिति सामान्य नहीं हो जाती, तब तक गैर-आवश्यक व्यावसायिक डीजल गाड़ियों और धुआं उगलने वाले वाहनों पर सीमा पर यह प्रतिबंध और कड़ी निगरानी चौबीसों घंटे जारी रहेगी।
सड़कों पर की गई इस नाकेबंदी के दौरान वाहनों के प्रदूषण मानकों की जांच में भी बड़े पैमाने पर लापरवाही उजागर हुई। प्रवर्तन टीमों ने दिनभर में 566 वाहनों को वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUCC) के बिना सड़कों पर सरपट दौड़ते हुए पकड़ा। इन सभी उल्लंघनकर्ता चालकों के खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम की संशोधित और अत्यंत सख्त धारा 190(2) के तहत तुरंत दस-दस हजार रुपये के दंडात्मक चालान जारी किए गए। अधिकारियों ने वाहन चालकों को कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि बिना पीयूसीसी गाड़ी चलाना न केवल एक गंभीर वित्तीय अपराध है, जिससे उनकी जेब पर भारी जुर्माना पड़ता है, बल्कि बार-बार उल्लंघन करने की स्थिति में उनका ड्राइविंग लाइसेंस तीन महीने के लिए निलंबित किया जा सकता है और वाहन को जब्त भी किया जा सकता है। दिल्ली सरकार ने राजधानी के सभी वाहन स्वामियों से पुरजोर अपील की है कि वे समय पर अपने नजदीकी अधिकृत पेट्रोल पंपों पर जाकर वाहनों की उत्सर्जन जांच कराएं और अद्यतन प्रदूषण प्रमाणपत्र अपनी गाड़ियों में अनिवार्य रूप से रखें।
सड़कों पर वाहनों के धुएं को रोकने के समानांतर, दूसरा सबसे बड़ा और निर्णायक हमला राजधानी भर में चल रही निर्माण और विध्वंस गतिविधियों पर बोला गया। वैज्ञानिक अध्ययनों और वायु गुणवत्ता विश्लेषणों से यह बात भलीभांति सिद्ध हो चुकी है कि दिल्ली की हवा में तैरने वाले सूक्ष्म कणों यानी पीएम 2.5 और पीएम 10 के स्तर को खतरनाक बनाने में निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल का बहुत बड़ा योगदान होता है। सूखी हवा और तापमान में गिरावट के कारण यह धूल वायुमंडल के निचले स्तर पर फंस जाती है, जो घने और जहरीले स्मॉग का रूप धारण कर लेती है। इसी खतरे को कुचलने के लिए दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति और स्थानीय नगर निगम के पर्यावरण इंजीनियरों की विशेष टीमों ने राजधानी के विभिन्न इलाकों में चल रहे 300 से अधिक छोटे और बड़े निर्माण स्थलों का औचक निरीक्षण किया। इन साइटों में निजी आवासीय व व्यावसायिक इमारतें, सरकारी अवसंरचना परियोजनाएं, फ्लाईओवर निर्माण और बहुमंजिला आवासीय परिसरों के काम शामिल थे।
इस व्यापक निरीक्षण के दौरान प्रवर्तन दलों को 32 निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के अनिवार्य चौदह सूत्रीय दिशा-निर्देशों का खुला और घोर उल्लंघन देखने को मिला। कई परियोजनाओं पर खुले में रेत, सीमेंट, रोड़ी और मलबे के विशाल ढेर बिना किसी तिरपाल या सुरक्षात्मक आवरण के छोड़ दिए गए थे, जिससे तेज हवा के साथ धूल उड़कर आसपास के रिहायशी इलाकों में फैल रही थी। इसके अलावा 500 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाली कई प्रमुख साइटों पर आवश्यक ग्रीन नेटिंग गायब पाई गई, ट्रकों के पहियों की मिट्टी धोने के लिए कोई वाशिंग प्वाइंट स्थापित नहीं किया गया था और धूल को दबाने के लिए वाटर स्प्रिंकलर व एंटी-स्मॉग गन या तो मौके पर मौजूद ही नहीं थे, या फिर उन्हें केवल औपचारिकता के लिए बंद करके रखा गया था।
डीपीसीसी के अधिकारियों ने नियमों की इस खुली अवहेलना को बेहद गंभीरता से लिया और इन 32 निर्माण परियोजनाओं पर परियोजना के आकार और उल्लंघन की गंभीरता के आधार पर लाखों रुपये का पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति मुआवजा अधिरोपित किया। इसके साथ ही इन बिल्डरों और निर्माण एजेंसियों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि जब तक वे धूल शमन के सभी उपायों को मौके पर लागू करके उसका सत्यापन नहीं कराते, तब तक वहां सभी प्रकार की निर्माण गतिविधियों को पूरी तरह बंद रखा जाए। अधिकारियों ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि किसी साइट पर दोबारा बिना ढके काम होता पाया गया, तो उसका बिजली-पानी का कनेक्शन काटने और संबंधित ठेकेदारों व डेवलपर्स के खिलाफ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत आपराधिक मामले दर्ज करने से भी परहेज नहीं किया जाएगा।
विंटर एक्शन प्लान के पहले ही दिन की गई यह चौतरफा कार्रवाई केवल एक सांकेतिक कदम नहीं है, बल्कि यह आगामी चार महीनों तक चलने वाले एक बेहद कठोर प्रशासनिक अभियान की औपचारिक शुरुआत है। दिल्ली सरकार के पर्यावरण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि नवंबर से लेकर जनवरी तक के महीनों में मौसम संबंधी प्रतिकूल परिस्थितियों जैसे कम हवा की गति, तापमान में तेज गिरावट और पश्चिमी विक्षोभ के चलते राजधानी में वायु प्रदूषण का दबाव कई गुना बढ़ जाता है। ऐसे में यदि स्थानीय स्तर पर उत्पन्न होने वाले धुएं और धूल पर शत-प्रतिशत नियंत्रण नहीं पाया गया, तो दिल्ली के करोड़ों नागरिकों, विशेष रूप से छोटे बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों के स्वास्थ्य पर इसका अत्यंत घातक और जानलेवा प्रभाव पड़ सकता है।
सरकार ने पूरी राजधानी में चिन्हित किए गए तेरह प्रमुख प्रदूषण हॉटस्पॉट्स जैसे आनंद विहार, वजीरपुर, जहांगीरपुरी, बवाना, नरेला, ओखला, विवेक विहार और पंजाबी बाग में चौबीसों घंटे काम करने वाली विशेष निगरानी टीमें तैनात कर दी हैं। इन संवेदनशील इलाकों में धूल को उड़ने से रोकने के लिए मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों के फेरे दोगुने कर दिए गए हैं और सैकड़ों की संख्या में मोबाइल वाटर स्प्रिंकलर्स और एंटी-स्मॉग गनों के जरिए लगातार पानी की फुहारों का छिड़काव किया जा रहा है। इसके साथ ही औद्योगिक क्षेत्रों में अनाधिकृत ईंधन के इस्तेमाल और कचरा या सूखी पत्तियां खुले में जलाने की घटनाओं पर पैनी नजर रखने के लिए ड्रोन कैमरों और रात्रि गश्ती दलों का भी सहारा लिया जा रहा है।
प्रशासनिक सख्ती के साथ-साथ सरकार ने जनता की सक्रिय भागीदारी को भी इस पूरी मुहिम की सफलता के लिए अनिवार्य माना है। पर्यावरण मंत्री और संबंधित अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे इस साझा लड़ाई में प्रशासन का साथ दें। लोगों से आग्रह किया गया है कि वे सर्दियों के दौरान अपने निजी वाहनों का उपयोग कम से कम करें और दैनिक आवागमन के लिए दिल्ली मेट्रो और वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसों जैसी पर्यावरण-अनुकूल सार्वजनिक परिवहन प्रणालियों को प्राथमिकता दें। साथ ही, यदि किसी भी नागरिक को अपने आसपास खुले में निर्माण सामग्री डंप होती दिखे, कोई ठेकेदार बिना ग्रीन नेट के काम करता नजर आए, या फिर कहीं भी खुले में कूड़ा जलाया जा रहा हो, तो वे उसकी तस्वीर खींचकर तुरंत सरकार के ‘ग्रीन दिल्ली ऐप’ पर अपलोड करें। सरकार ने आश्वासन दिया है कि इस ऐप पर आने वाली प्रत्येक शिकायत पर चौबीस घंटे के भीतर त्वरित जमीनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
दिल्ली में विंटर एक्शन प्लान के पहले दिन की गई यह सघन घेराबंदी, 68.4 लाख रुपये के जुर्माने की वसूली, 15,000 वाहनों की चेकिंग और दर्जनों नियम तोड़ने वाली साइटों पर की गई सख्त कार्रवाई यह रेखांकित करती है कि इस बार प्रशासन कागजी औपचारिकताओं से आगे बढ़कर ठोस और असरदार कार्रवाई करने के मूड में है। आने वाले दिनों में जैसे-जैसे सर्दियों का असर और गहरा होगा, वैसे-वैसे यह निगरानी और अधिक सख्त होगी।



