
बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने अत्यंत तीव्र चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के तटीय क्षेत्रों की ओर तेजी से बढ़ने की मौसम विभाग की चेतावनी के बाद भारतीय रेलवे ने पूर्वी और दक्षिणी भारत के विस्तृत रेल नेटवर्क पर बड़े पैमाने पर एहतियाती कदम उठाए हैं। ओडिशा, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में भारी मूसलाधार बारिश, तेज आंधी और तटीय पटरियों पर जलभराव के खतरे को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने 27 अक्टूबर से 5 नवंबर 2026 के बीच चलने वाली 26 प्रमुख एक्सप्रेस और मेल ट्रेनों को पूरी तरह निरस्त करने की घोषणा की है। इसके साथ ही दर्जनों अन्य महत्वपूर्ण ट्रेनों के मार्गों में बदलाव, आंशिक रद्दीकरण और पुनर्निर्धारण किया गया है, जिससे अंतरराज्यीय रेल यातायात व्यापक रूप से प्रभावित हुआ है।
रेलवे बोर्ड द्वारा जारी आपातकालीन परिचालन बुलेटिन के अनुसार, इस रद्दीकरण का सीधा असर विशाखापट्टनम, कोरापुट, जगदलपुर, राउरकेला, भुवनेश्वर, हावड़ा और सिकंदराबाद जैसे प्रमुख महानगरों और औद्योगिक केंद्रों को आपस में जोड़ने वाले रेल गलियारों पर पड़ा है। विशेष रूप से दक्षिण ओडिशा और बस्तर के आदिवासी क्षेत्रों को राज्य की राजधानी भुवनेश्वर से जोड़ने वाली जीवनरेखा मानी जाने वाली हीराखंड एक्सप्रेस के परिचालन में बड़ा बदलाव किया गया है। यह ट्रेन निर्दिष्ट तिथियों पर जगदलपुर के बजाय रायगड़ा स्टेशन पर ही समाप्त की जाएगी और वापसी में वहीं से अपनी यात्रा शुरू करेगी। इसके अतिरिक्त, स्थानीय आवागमन को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से 28 और 29 अक्टूबर को संचालित होने वाली चार अतिरिक्त पैसेंजर ट्रेनों को भी पूरी तरह रद्द कर दिया गया है।
रेलवे प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह कदम किसी प्रशासनिक विवशता के कारण नहीं, बल्कि यात्रियों की जान-माल की पुख्ता सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ‘जीरो कैजुअल्टी’ नीति के तहत उठाया गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने चक्रवात ‘अर्नब’ के प्रभाव से तटीय इलाकों में 100 से 135 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज तूफानी हवाएं चलने और मूसलाधार बारिश का पूर्वानुमान व्यक्त किया है। ऐसे गंभीर मौसम में ओवरहेड इलेक्ट्रिक केबल टूटने, भारी भरकम पेड़ों और खंभों के पटरियों पर गिरने और निचले इलाकों में रेल ट्रैक के नीचे से गिट्टी बह जाने का गंभीर जोखिम रहता है। यदि इन पटरियों पर तेज गति से चलने वाली यात्री गाड़ियां संचालित होती रहीं, तो किसी भी समय भीषण दुर्घटना का अंदेशा बना रहता है। इसी आशंका को भांपते हुए रेलवे बोर्ड ने पूर्व तट रेलवे, दक्षिण पूर्व रेलवे और दक्षिण मध्य रेलवे को पहले से ही सुरक्षात्मक शटडाउन और डायवर्जन लागू करने का निर्देश दिया।
रद्द की गई ट्रेनों की सूची में हावड़ा-चेन्नई मुख्य तटीय लाइन और विशाखापट्टनम-रायपुर रेल खंड से गुजरने वाली लंबी दूरी की कई लोकप्रिय गाड़ियां शामिल हैं। विशाखापट्टनम और कोरापुट-किरंदुल रेल लाइन पर चलने वाली नियमित नाइट एक्सप्रेस और स्पेशल ट्रेनों को 5 नवंबर तक की लंबी अवधि के लिए स्थगित रखा गया है क्योंकि यह रेल मार्ग पूर्वी घाट की अत्यधिक दुर्गम पहाड़ियों, गहरी घाटियों और सुरंगों से होकर गुजरता है। अत्यधिक बारिश के दौरान इस पहाड़ी मार्ग पर बोल्डर गिरने और भूस्खलन की घटनाएं आम हैं। रेलवे इंजीनियरों का कहना है कि जब तक तूफान पूरी तरह शांत नहीं हो जाता और ट्रैक इंस्पेक्शन दल पटरियों के सुरक्षित होने का औपचारिक ग्रीन सिग्नल नहीं दे देता, तब तक इन संवेदनशील खंडों पर ट्रेनों को चलाना यात्रियों की सुरक्षा से खिलवाड़ होगा।
हीराखंड एक्सप्रेस के आंशिक रद्दीकरण ने बस्तर और कोरापुट के दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले यात्रियों की चिंताओं को बढ़ा दिया है। यह ट्रेन इस पूरे वन क्षेत्र के लोगों के लिए ओडिशा की राजधानी तक पहुंचने का एकमात्र विश्वसनीय और सुगम साधन मानी जाती है। रेलवे के संशोधित आदेश के अनुसार, भुवनेश्वर से चलकर जगदलपुर जाने वाली हीराखंड एक्सप्रेस को रायगड़ा में ही रोक दिया जाएगा, जबकि जगदलपुर से भुवनेश्वर जाने वाली गाड़ी रायगड़ा से ही अपने तय समय पर रवाना होगी। रायगड़ा और जगदलपुर के बीच के हिस्से को निरस्त रखने का निर्णय कोरापुट-कोटावलासा घाट सेक्शन में तेज हवाओं और जलप्रपातों के उफान के खतरे को ध्यान में रखकर लिया गया है। रेलवे प्रशासन ने स्थानीय जिला प्रशासन और राज्य सड़क परिवहन निगम के साथ समन्वय स्थापित किया है ताकि आवश्यक कार्य से यात्रा करने वाले फंसे हुए यात्रियों को सुरक्षित सड़क मार्गों से गंतव्य तक पहुंचाया जा सके।
चक्रवात की गंभीरता को देखते हुए पूर्व तट रेलवे के मुख्यालय भुवनेश्वर में एक केंद्रीय वार-रूम और नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है जो चौबीसों घंटे सातों दिन मौसम विभाग के रडार डेटा और जिला प्रशासनों के साथ सीधे संपर्क में है। रेलवे ने संवेदनशील रेल पुलों, नदियों पर बने गार्डरों और जल निकासी वाले कल्वर्ट्स पर विशेष गश्ती दल तैनात किए हैं। इन गश्ती दलों को सैटेलाइट फोन, जीपीएस ट्रैकर और आपातकालीन लाल झंडियों से लैस किया गया है ताकि पानी का स्तर खतरे के निशान से ऊपर जाते ही वे तत्काल आने वाली ट्रेनों को रोक सकें। इसके अलावा, प्रमुख रेलवे स्टेशनों जैसे विशाखापट्टनम, विजयनगरम, रायगड़ा, कोरापुट, संबलपुर, भुवनेश्वर और पुरी में आपातकालीन रिलीफ ट्रेनें, क्रेन और ट्रैक रिपेयरिंग मशीनें तैयार रखी गई हैं। चक्रवात के गुजरते ही यदि कहीं बिजली के तार टूटते हैं या पेड़ गिरते हैं, तो टावर वैगन और कटर मशीनों से लैस टीमें चंद घंटों के भीतर मार्ग बहाल करने का काम शुरू कर देंगी।
रेलवे स्टेशनों पर फंसे यात्रियों की सुविधा और भीड़ नियंत्रण के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। भुवनेश्वर, कटक, विशाखापट्टनम और रायगड़ा जैसे प्रमुख जंक्शनों पर अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती के साथ-साथ आपातकालीन सहायता केंद्र और हेल्पडेस्क शुरू किए गए हैं। इन काउंटरों पर यात्रियों को भोजन, सुरक्षित पेयजल और चिकित्सा सहायता प्रदान की जा रही है। यात्रियों के मन में टिकटों के पैसे डूबने को लेकर उठने वाली आशंकाओं को दूर करते हुए भारतीय रेलवे ने एक स्पष्ट और पारदर्शी रिफंड नीति की घोषणा की है। रेलवे के अनुसार, जिन यात्रियों ने आईआरसीटीसी की वेबसाइट या मोबाइल ऐप के जरिए ऑनलाइन ई-टिकट बुक किए थे और जिनकी ट्रेनें पूरी तरह रद्द कर दी गई हैं, उन्हें टिकट कैंसिल कराने के लिए किसी फॉर्म को भरने या काउंटर पर जाने की आवश्यकता नहीं होगी; उनके टिकटों की पूरी राशि बिना किसी रद्दीकरण शुल्क की कटौती के सीधे उसी बैंक खाते में स्वतः वापस भेज दी जाएगी जिससे भुगतान किया गया था। वहीं, स्टेशन के पीआरएस काउंटरों से नकद टिकट खरीदने वाले यात्रियों को अपना पूरा किराया वापस लेने के लिए ट्रेन के निर्धारित प्रस्थान समय से तीन दिनों के भीतर किसी भी कम्प्यूटरीकृत आरक्षण काउंटर पर टिकट सरेंडर करने की सुविधा दी गई है।
रेल प्रशासन ने आम जनता और यात्रियों से विशेष अपील की है कि वे किसी भी अपुष्ट अफवाह पर विश्वास न करें और अपनी यात्रा शुरू करने से पहले अपनी संबंधित ट्रेन का वास्तविक समय और परिचालन स्थिति अवश्य जांच लें। यात्री नेशनल ट्रेन इन्क्वायरी सिस्टम यानी एनटीईएस के ऑनलाइन पोर्टल या रेलवे के आधिकारिक मोबाइल एप्लिकेशन पर अपनी ट्रेन संख्या दर्ज करके उसका लाइव स्टेटस देख सकते हैं। इसके अतिरिक्त, रेलवे के सार्वभौमिक हेल्पलाइन नंबर 139 पर भी चौबीसों घंटे कॉल करके किसी भी ट्रेन के डायवर्जन, रद्दीकरण या समय परिवर्तन की सटीक जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
प्राकृतिक आपदाओं के समय सार्वजनिक परिवहन तंत्र की सुरक्षा एक अत्यंत जटिल और संवेदनशील चुनौती बन जाती है। ओडिशा और उसके पड़ोसी राज्यों का तटीय इतिहास गवाह रहा है कि चक्रवाती तूफानों ने किस तरह रेल पटरियों और सिग्नल प्रणालियों को तहस-नहस किया है। ऐसे में समय रहते 26 ट्रेनों को निरस्त करने और रूटों को सीमित करने का रेलवे का यह निर्णय निश्चित रूप से यात्रियों को तात्कालिक असुविधा पहुंचाएगा, लेकिन यह कठोर प्रशासनिक कदम सैकड़ों जिंदगियों को किसी भी संभावित प्राकृतिक विनाश से बचाने की दृष्टि से अत्यंत विवेकपूर्ण और आवश्यक है। आगामी 5 नवंबर तक जब तक चक्रवात ‘अर्नब’ का प्रभाव पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता, तब तक रेलवे का यह सुरक्षा कवच पूर्वी और दक्षिणी भारत के रेल यात्रियों के लिए एक मजबूत ढाल का काम करेगा।



