ओपिनियनव्यंगसंपादकीय

पार्टी बदली कई, किस्मत एक भी नहीं—सिद्धू की पॉलिटिकल पहेली

ज्यादा पाने की चाहत कभी कभार जो हाथ में है उसे भी छीन लेती है। सिद्धु बीजेपी में थे और सुनने में आया कि तब के पंजाब में बीजेपी की पार्टनर पार्टी अकाली दल से इनकी नाराज़गी है। बीजेपी ने इनको राज्यसभा में भेजा और सिद्धू जी ने शपथ भी ले ली….लेकिन सिद्धू जी ‘ये दिल मांगे मोर’ वाली टैगलाइन से भयंकर तौर पर प्रभावित थे.

सिद्धु जी ने तड़ाक से राज्यसभा से इस्तीफा दिया और पंजाब कांग्रेस का हाथ मजबूत करने का बेड़ा उठा लिया। कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशन में बड़े जोश-खरोश में भाषण भी दिया, सोनिया जी की तारीफ में कसीदे भी पढ़े और मनमोहन सिंह के पैर छूकर बीजेपी में रहते हुए उनके खिलाफ दिए गए बयानों के लिए भूल-चूक माँफ वाली रस्म भी अदा कर ली. पर बेहतर कनेक्टिविटी के साथ 5G के जमाने में पुराने बातें भला कहाँ छुपती हैं। सिद्धू वही सब कांग्रेस अधिवेशन में बोले जो उन्होंने बीजेपी में रहते हुए गांधीनगर में नरेंद्र मोदी की सभा में बोला। बस पहले जहाँ-जहाँ कांग्रेस बोला था इस बार वहाँ पर बीजेपी.. बाँकी भाषण का फ्लो, अंदाज, उद्देश्य और स्क्रिप्ट एकदम वही पुरानी वाली थी.  सिद्धू जी का भाषण सुनकर गंगाधर ही शक्तिमान है वाली फीलिंग आयी लिहाज़ा सिद्धू ट्रोल होने लगे और खुद उनको भी लग ही गया होगा की उनकी दाल उतने अच्छे से गल नहीं पायी जितनी वो उम्मीद कर रहे थे. फिर भी अपने ही घर में ज्यादा जोर से बर्तन खटकने से चिंतित पंजाब कोंग्रेस में उन्हें प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी मिल ही गयी.

लेकिन सिद्धूजी पर टैगलाइन #YeDilMangeMore का प्रभाव इतना भयंकर था कि प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद भी बेचैनी गज़ब की थी और नई नौकरी में मिले प्रमोशन और Hike अब उन्हें कम लगने लगा…. लिहाज़ा सिद्धू साहब नई नौकरी की तलाश में फिर इंटरव्यू देने लगे.

मार्केट में ताजा-ताजा लॉन्च हुए पॉलिटिकल स्टार्टअप #आमआदमीपार्टी में संभावनाओं को तलाशा गया और सिद्धू साहब को ‘will get back to you’ वाला फीडबैक देकर झांसे में रखा गया….चूंकि सिद्धू जी ने अब से पहले बहुत ज्यादा इंटरव्यू दिए नहीं थे तो उनको will get back to you का मतलब पता ही नहीं था… उनको लगा सच में ही उनको नई नौकरी के लिए नए नवेले पोलिटिकल स्टार्टअप #आमआदमीपार्टी के प्रोपराइटर #ArvindKejriwal का फोन आ ही जायेगा. अब सिद्धू जी को कौन बताए कि पिछली नोकरी में उनका प्रोबेशन पीरियड भी कंप्लीट नहीं हुआ था, और पिछली जॉब में बिना कन्फर्म हुए नई नौकरी वो भी फिर प्रमोशन और मोटे hike के साथ थोड़ा मुश्किल होती है.

लिहाजा सिद्धू साहब पोलिटिकल एक्सप्रेस में वेटिंग लिस्ट में ही रहे। चाहत ट्रेन में पुरे कम्पार्टमेंट की थी लेकिन हकीकत में RAC भी नहीं मिली. और वो कहते हैं ना अगर रास्ता न पता हो तो कभी-कभी बहुत लम्बा जाकर फिर यू-टर्न लेना पड़ता है…अलबत्ता सिद्धू साहब ने भी इस बार लम्बा जाकर यू-टर्न लेकर फिर से क्रिकेट और टीवी की दुनिया में वापसी की है.

ताजा मामला नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर के बयान से गरमाया है जहाँ प्रेस को दिए गए एक बयान में नवजोत कौर ने कहा कि ‘CM की कुर्सी उसी को मिलती है जो पार्टी को 500 करोड़ की अटैची लाकर देता है”. हालाँकि उनके इस बयान के बाद कांग्रेस पार्टी के उन पर हमला बोलते हुए उनके इस बयान को उनके स्वास्थ्य से जोड़ते हुए कहा कि “नवजोत कौर ने अपने इलाज के दौरान जिन दवाइयों का सेवन किया है संभव है कि उन दवाइयों का असर उन पर असर हो गया है इसीलिए वो ऐसा बयान दे रही हैं “.

खैर, नवजोत कौर के बयान से लगता है कि अब सिद्धू जी फिर से नौकरी की तलाश में है और लगता है कि टैगलाइन इस बार भी वही है…#येदिलमांगेमोर

 

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