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स्मृति मंधाना: भारतीय क्रिकेट की स्वर्णिम गाथा और बीबीसी का सर्वोच्च सम्मान

विश्व कप की स्वर्णिम जीत: मंधाना का 'विजयी' बल्ला

भारतीय क्रिकेट के इतिहास में कुछ वर्ष ऐसे होते हैं जो किसी खिलाड़ी के करियर को ‘महानता’ की श्रेणी में स्थापित कर देते हैं। स्मृति मंधाना के लिए साल 2025-26 बिल्कुल वैसा ही रहा है। उनकी कलात्मक बल्लेबाजी, शांत नेतृत्व और मैदान पर उनकी गरिमा ने उन्हें न केवल क्रिकेट प्रेमियों का चहेता बनाया, बल्कि उन्हें भारतीय खेलों का सबसे बड़ा चेहरा भी बना दिया। ‘बीबीसी इंडियन स्पोर्ट्सवुमेन ऑफ द ईयर’ (BBC ISWOTY) का पुरस्कार उनके इस असाधारण सफर का एक उचित सम्मान है।

जब हम भारतीय क्रिकेट की बात करते हैं, तो अक्सर पुरुष क्रिकेटरों के नाम दिमाग में आते हैं। लेकिन स्मृति मंधाना ने अपनी प्रतिभा से इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है। बीबीसी द्वारा उन्हें ‘स्पोर्ट्सवुमेन ऑफ द ईयर’ चुनना यह साबित करता है कि आज मंधाना का कद किसी भी पुरुष सुपरस्टार के बराबर है। यह पुरस्कार उनके द्वारा विश्व कप में निभाई गई भूमिका और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) को मिली सफलताओं का एक निचोड़ है।

मंधाना के इस साल का सबसे बड़ा शिखर भारत की विश्व कप जीत रही। वर्षों के इंतजार के बाद जब भारतीय महिला टीम ने विश्व कप ट्रॉफी उठाई, तो मंधाना उसके केंद्र में थीं। टूर्नामेंट की शुरुआत से ही मंधाना ने जिम्मेदारी संभाली। उनकी बल्लेबाजी की सबसे बड़ी खूबी यह रही कि उन्होंने केवल रन नहीं बनाए, बल्कि ‘बड़े मैचों’ में रन बनाए। फाइनल और सेमीफाइनल जैसे उच्च दबाव वाले मुकाबलों में उनकी पारियों ने भारत को वह आत्मविश्वास दिया जिसकी कमी पहले खलती थी।

मंधाना की बल्लेबाजी को अक्सर ‘कविताओं’ की तरह सुंदर कहा जाता है। उनके ऑफ-साइड शॉट्स और विशेष रूप से उनके कवर ड्राइव की तुलना महानतम खिलाड़ियों से की जाती है। इस साल उन्होंने अपनी तकनीक में जो सुधार किया, उसने उन्हें दुनिया की सबसे खतरनाक सलामी बल्लेबाज बना दिया।

महिला प्रीमियर लीग (WPL) ने भारत में महिला क्रिकेट की तस्वीर बदल दी है, और स्मृति मंधाना इस बदलाव की अगुवाई कर रही हैं।रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) के लिए पिछला साल उतार-चढ़ाव भरा रहा था, लेकिन मंधाना ने अपनी टीम को एकजुट किया और उन्हें लगातार दूसरे डब्ल्यूपीएल खिताब तक पहुँचाया। एक कप्तान के तौर पर उन्होंने दिखाया कि वे न केवल अपने बल्ले से मैच जीत सकती हैं, बल्कि अपने रणनीतिक दिमाग से विपक्षी टीम को मात भी दे सकती हैं। आरसीबी के साथ जुड़ा ‘प्रशंसकों का भारी दबाव’ किसी भी कप्तान को विचलित कर सकता है। मंधाना ने जिस तरह से बेंगलुरु के फैंस की उम्मीदों को संभाला और टीम को चैंपियन बनाया, उसने उनकी मानसिक मजबूती को सिद्ध किया।

बीबीसी इंडियन स्पोर्ट्सवुमेन ऑफ द ईयर का पुरस्कार मिलना केवल क्रिकेट तक सीमित नहीं है। यह व्यापक खेल जगत में उनकी स्वीकार्यता का प्रतीक है। आज भारत के हर छोटे शहर की लड़की जब बल्ला उठाती है, तो वह ‘मंधाना’ बनना चाहती है। स्मृति ने यह साबित किया है कि क्रिकेट केवल पुरुषों का खेल नहीं है। उन्होंने महिला क्रिकेट को ‘ग्लैमर’ और ‘गंभीरता’ दोनों प्रदान किए हैं। मंधाना की सफलता ने प्रायोजकों (Sponsors) और ब्रांड्स का ध्यान महिला क्रिकेट की ओर खींचा है। आज वे भारत की सबसे अधिक ‘ब्रांड वैल्यू’ वाली एथलीटों में से एक हैं। यह पुरस्कार महिला एथलीटों को मिलने वाले सम्मान और अवसरों में वृद्धि का संकेत है।

यदि हम स्मृति के पिछले 12 महीनों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो वे किसी जादुई संख्या से कम नहीं लगते उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में दोहरा शतक जमाया, वनडे में शतकों की झड़ी लगाई और टी20 में सबसे तेज अर्धशतक बनाने वाले भारतीयों में शामिल रहीं। वे साल के अधिकांश समय आईसीसी की शीर्ष 3 महिला बल्लेबाजों में बनी रहीं, जो उनकी निरंतरता (Consistency) को दर्शाता है।

एक महान खिलाड़ी केवल अपने खेल से नहीं, बल्कि अपने आचरण से भी पहचाना जाता है। मंधाना की सादगी और खेल भावना (Sportsmanship) उन्हें अन्य खिलाड़ियों से अलग बनाती है। चोटों से उबरकर वापस आना और अपनी फिटनेस के स्तर को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप रखना उनकी कड़ी मेहनत को दर्शाता है। बीबीसी पुरस्कार प्राप्त करते समय भी उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपनी टीम के साथियों और कोचिंग स्टाफ को दिया। यह विनम्रता ही उन्हें एक महान लीडर बनाती है।

स्मृति मंधाना को मिला यह पुरस्कार उनके करियर का अंत नहीं, बल्कि एक नए युग की शुरुआत है। 29 वर्ष की आयु में, वे अपने करियर के शिखर पर हैं। भारतीय क्रिकेट को उनसे अभी बहुत कुछ मिलना बाकी है। स्मृति मंधाना ने यह दिखा दिया है कि यदि आपके पास प्रतिभा है और आप कड़ी मेहनत करने के लिए तैयार हैं, तो दुनिया की कोई भी ताकत आपको शीर्ष पर पहुँचने से नहीं रोक सकती। बीबीसी का यह सम्मान उन करोड़ों भारतीयों की आवाज है जिन्होंने मंधाना को मैदान पर संघर्ष करते और जीतते देखा है। स्मृति मंधाना केवल एक क्रिकेटर नहीं हैं, वे आधुनिक भारत की ‘नारी शक्ति’ का प्रतीक हैं।

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