
13 अप्रैल, 2026 की तारीख नोएडा के औद्योगिक इतिहास में एक काले अध्याय के रूप में दर्ज हो गई है। पिछले तीन दिनों से सुलग रहा श्रमिकों का आक्रोश सोमवार को एक भीषण ज्वालामुखी की तरह फट पड़ा। उत्तर प्रदेश के इस सबसे बड़े औद्योगिक केंद्र में उच्च वेतन, महंगाई भत्ते और बेहतर कार्य स्थितियों की मांग को लेकर शुरू हुआ शांतिपूर्ण प्रदर्शन अचानक हिंसक झड़पों, आगजनी और तोड़फोड़ में तब्दील हो गया।
नोएडा के सेक्टर 59, 60, फेज-2 और सेक्टर 84 जैसे प्रमुख औद्योगिक क्लस्टर्स में स्थिति युद्ध क्षेत्र जैसी नजर आई। हजारों की संख्या में सड़कों पर उतरे श्रमिकों और पुलिस के बीच हुए संघर्ष ने न केवल शहर की कानून-व्यवस्था को हिला कर रख दिया, बल्कि दिल्ली-एनसीआर की लाइफलाइन कही जाने वाली सड़कों पर भी चक्का जाम कर दिया।
नोएडा के विभिन्न सेक्टरों में स्थित गारमेंट, इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल पार्ट्स बनाने वाली कंपनियों के श्रमिक पिछले शनिवार से ‘टोकन स्ट्राइक’ पर थे। श्रमिक संघों का दावा है कि उन्होंने प्रशासन और प्रबंधन को कई बार चेतावनी दी थी, लेकिन उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया।
सुबह करीब 8:30 बजे, जब शिफ्ट बदलने का समय था, सेक्टर 59 और 60 के चौराहों पर श्रमिकों की भारी भीड़ जमा होने लगी। शुरुआत में यह एक शांतिपूर्ण घेराव था, लेकिन जैसे ही कुछ फैक्ट्रियों के सुरक्षा गार्डों और प्रदर्शनकारियों के बीच बहस हुई, स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। अफवाहें फैलीं कि कुछ प्रदर्शनकारी श्रमिकों को पुलिस ने हिरासत में लिया है, जिसके बाद आक्रोशित भीड़ ने पत्थरबाजी शुरू कर दी। देखते ही देखते, हजारों श्रमिक ‘नारेबाजी’ छोड़कर ‘तोड़फोड़’ पर उतारू हो गए।
हिंसा का सबसे भयावह रूप नोएडा के सेक्टर 59 और 60 के बीच देखने को मिला। यहाँ स्थित बड़ी आईटी और मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों को प्रदर्शनकारियों ने निशाना बनाया। उग्र भीड़ ने सड़क किनारे खड़े वाहनों के शीशे ईंट-पत्थरों से चकनाचूर कर दिए। रिपोर्टों के अनुसार, दो मोटरसाइकिलों को आग के हवाले कर दिया गया, जिससे आसमान में काले धुएं का गुबार छा गया। दो बड़ी कारों (SUV) को भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त किया गया।
प्रदर्शनकारियों ने जबरन फैक्ट्रियों के गेट खोल दिए और भीतर मौजूद मशीनों व शीशों को नुकसान पहुँचाया। सुरक्षा कारणों से सेक्टर 59 की लगभग सभी फैक्ट्रियों को दोपहर तक अपनी इकाइयां बंद करनी पड़ीं। काम कर रहे कर्मचारियों को पिछले दरवाजों से बाहर निकाला गया। नोएडा फेज-2 का औद्योगिक क्षेत्र, जो अपनी बड़ी गारमेंट एक्सपोर्ट इकाइयों के लिए जाना जाता है, पूरी तरह से छावनी में तब्दील हो गया। यहाँ सेक्टर 1 और सेक्टर 84 की सड़कों पर श्रमिकों ने मानव श्रृंखला बनाकर आवाजाही पूरी तरह ठप कर दी।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए नोएडा पुलिस के साथ-साथ पीएसी (Provincial Armed Constabulary) की अतिरिक्त टुकड़ियों को बुलाया गया। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को ‘हल्के बल’ का प्रयोग करना पड़ा। कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के लिए लाठियां भांजी गईं, जिससे कई श्रमिक घायल भी हुए। गौतम बुद्ध नगर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी खुद मौके पर डटे रहे। पुलिस ने ड्रोन के जरिए उपद्रवियों की पहचान शुरू की है। पुलिस का कहना है कि श्रमिकों के भेष में कुछ ‘असामाजिक तत्वों’ ने हिंसा को भड़काने का काम किया है।
इस विरोध प्रदर्शन का सबसे बड़ा असर यातायात पर पड़ा। नोएडा के भीतर की हिंसा की लहरों ने दिल्ली-नोएडा के प्रवेश द्वारों (Borders) को पूरी तरह जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने जब मुख्य मार्गों को अवरुद्ध किया, तो उसका असर डीएनडी फ्लाईवे, चिल्ला बॉर्डर और कालिंदी कुंज मार्ग पर पड़ा। सुबह की पीक आवर्स के दौरान दफ्तर जाने वाले लोग 4 से 5 घंटे तक जाम में फंसे रहे।जाम इतना भीषण था कि कई एंबुलेंस भी ट्रैफिक में फंसी नजर आईं। नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर भी यातायात की गति रेंगती रही।
यह हिंसा रातों-रात पैदा नहीं हुई है, बल्कि यह लंबे समय से पनप रहे असंतोष का परिणाम है। श्रमिक संघों के नेताओं ने अपनी मांगों को स्पष्ट किया है:
| मुख्य मांग | विवरण |
| न्यूनतम वेतन में वृद्धि | 2026 की महंगाई को देखते हुए वर्तमान न्यूनतम वेतन को कम से कम 25% बढ़ाने की मांग। |
| महंगाई भत्ता (DA) | समय पर डीए (DA) का भुगतान और एरियर की मांग। |
| काम के घंटे | 8 घंटे से अधिक काम करने पर डबल ओटी (Overtime) के भुगतान की गारंटी। |
| आवास और परिवहन | औद्योगिक क्षेत्रों के पास सस्ते आवास और सुरक्षित परिवहन की सुविधा। |
एक दिन की इस हिंसा ने नोएडा के औद्योगिक स्वास्थ्य को गहरी चोट पहुँचाई है एक अनुमान के अनुसार, सेक्टर 59 और फेज-2 की फैक्ट्रियों के बंद होने से एक ही दिन में करोड़ों रुपये के उत्पादन का नुकसान हुआ है। नोएडा की कई गारमेंट इकाइयां विदेशी ब्रांड्स को सप्लाई करती हैं। हिंसा के कारण शिपमेंट में देरी से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शहर की छवि खराब हो रही है। लगातार होती श्रमिक अशांति नए निवेशकों को नोएडा से दूर ले जा सकती है, जिसका असर भविष्य के रोजगार सृजन पर पड़ेगा।
सोमवार शाम तक पुलिस ने प्रमुख क्षेत्रों को खाली करा लिया है, लेकिन तनाव अभी भी बरकरार है। प्रशासन ने संवेदनशील औद्योगिक क्षेत्रों में निषेधाज्ञा लागू कर दी है। पाँच से अधिक लोगों के एक जगह इकट्ठा होने पर रोक है। जिलाधिकारी (DM) और लेबर कमिश्नर ने मंगलवार को श्रमिक संघों और फैक्ट्री मालिकों (Noida Entrepreneurs Association) के प्रतिनिधियों के बीच एक ‘त्रिपक्षीय वार्ता’ बुलाई है। पुलिस ने तोड़फोड़ और आगजनी के आरोप में कई संदिग्धों को हिरासत में लिया है और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जांच की जा रही है।
नोएडा की यह हिंसा एक चेतावनी है कि औद्योगिक विकास और श्रमिक कल्याण के बीच संतुलन बनाना कितना अनिवार्य है। जहाँ तोड़फोड़ और आगजनी का समर्थन नहीं किया जा सकता, वहीं श्रमिकों की जायज मांगों को अनसुना करना भी खतरनाक है। प्रशासन को चाहिए कि वह दमनकारी नीतियों के बजाय संवाद का रास्ता अपनाए ताकि उत्तर प्रदेश का यह ‘शो-विंडो’ फिर से शांतिपूर्ण और उत्पादक बन सके।



