धर्मफ़िल्मी दुनिया

भक्ति फिल्म ‘हनुमान अंश’ का अभूतपूर्व प्रभाव: कैंची धाम में उमड़ा श्रद्धालुओं का महासैलाब

सप्ताहांत पर 20,000 के पार पहुंचा फुटफॉल, हल्द्वानी से भवाली तक थमे पहिए

देवभूमि उत्तराखंड के कुमाऊं अंचल में स्थित सुप्रसिद्ध आध्यात्मिक तीर्थस्थल कैंची धाम (Kainchi Dham) में इन दिनों आस्था, भक्ति और श्रद्धा का अप्रत्याशित ज्वार देखने को मिल रहा है। बीसवीं सदी के महान संत बाबा नीम करोली महाराज (Baba Neem Karoli Maharaj) के पावन जीवन और लीलाओं पर आधारित कम बजट की भक्ति-बायोपिक फिल्म ‘हनुमान अंश’ (Hanuman Ansh) की अभूतपूर्व बॉक्स ऑफिस सफलता ने देश भर के लाखों श्रद्धालुओं और युवाओं को कैंची धाम की पावन वादियों की ओर खींच लिया है।
नैनीताल जिला पुलिस और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, फिल्म की रिलीज से पहले जहां कैंची धाम में सामान्य दिनों में औसतन 4,000 से 5,000 श्रद्धालु प्रतिदिन दर्शन के लिए आते थे, वहीं अब कार्यदिवसों में भी यह संख्या निरंतर 6,000 से 8,000 से अधिक बनी हुई है। विशेष रूप से सप्ताहांत (शनिवार और रविवार) तथा अक्टूबर के पहले सप्ताह में पड़े तीन दिनों के लंबे अवकाश (लॉन्ग वीकेंड) के दौरान यह संख्या बढ़कर 15,000 से 20,000 श्रद्धालु प्रतिदिन के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई है।
श्रद्धालुओं के इस विशाल जनसैलाब के कारण नैनीताल-अल्मोड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-109) पर हल्द्वानी, काठगोदाम, ज्योलिकोट और भवाली से लेकर कैंची धाम तक वाहनों की कई किलोमीटर लंबी कतारें लग गई हैं। मंदिर परिसर के भीतर दर्शन के लिए 2 से 3 घंटे की लंबी प्रतीक्षा कतारें देखी जा रही हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नैनीताल पुलिस को अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा है और कई स्थानों पर ट्रैफिक डायवर्जन लागू करने पड़े हैं।
डॉ. विशाल चतुर्वेदी द्वारा लिखित और निर्देशित यह फिल्म उनके स्वयं के आध्यात्मिक संस्मरण ‘डिवाइन डिटूर: दैट चेंज्ड माई लाइफ’ पर आधारित एक प्रस्तावित त्रयी (Trilogy) की पहली कड़ी है। चतुर्वेदी ने 2009 से 2023 के बीच लगभग डेढ़ दशक तक बाबा नीम करोली महाराज से जुड़े विभिन्न पावन स्थलों वृंदावन, अकबरपुर, नीब करौरी (फर्रुखाबाद) और लखनऊ का सघन भ्रमण कर संतों, प्रत्यक्षदर्शियों और भक्तों से उनके वास्तविक संस्मरण संकलित किए थे। फिल्म को किसी भारी-भरकम वीएफएक्स (VFX) या बड़े बजट के सितारों के बिना, चित्रकूट और मुंबई के वास्तविक लोकेशनों पर मात्र ₹1.8 से ₹2 करोड़ के बजट में फिल्माया गया था।
फिल्म के मुख्य अभिनेता के चयन का किस्सा भी किसी चमत्कार से कम नहीं रहा। मुख्य भूमिका निभाने वाले अभिनेता के अचानक बीमार पड़ने के बाद, फिल्म के 26 वर्षीय सेकंड असिस्टेंट डायरेक्टर शोभिनव सत्य (Shobhinaw Satyaa) ने ऑडिशन दिया और उन्हें बाबा नीम करोली के युवा स्वरूप (पं. लक्ष्मी नारायण शर्मा) के रूप में चुन लिया गया। उनके अभिनय की सहजता, आंखों की दिव्यता और सादगी ने दर्शकों के दिलों को सीधे छू लिया।
7 अगस्त 2026 को जब यह फिल्म रिलीज हुई, तो इसे उत्तर भारत के चुनिंदा सिनेमाघरों में बहुत कम शो मिले थे। लेकिन जैसे ही दर्शकों ने फिल्म के भीतर ‘गृहस्थ योगी’ के दर्शन, निस्वार्थ प्रेम, ‘सबको भोजन कराओ’ (Feed Everyone) के सिद्धांत और हनुमान जी के प्रति अनन्य भक्ति को देखा, थियेटरों में दर्शकों के आंसू छलक पड़े। सोशल मीडिया पर बिना किसी प्रायोजित प्रचार के लाखों रील्स और समीक्षाएं तैरने लगीं। फिल्म ने भारत में ₹320 करोड़ से अधिक की शुद्ध कमाई की और वैश्विक स्तर पर ₹415 करोड़ से अधिक का सकल कारोबार करके 2026 की सबसे सनसनीखेज सफलता का परचम लहरा दिया।
पिछले कुछ वर्षों में बॉलीवुड या मुख्यधारा के सिनेमा ने धार्मिक या पौराणिक विषयों पर जो फिल्में बनाईं, उनमें से अधिकांश अत्यधिक वीएफएक्स, अस्वाभाविक संवादों या सतहीपन के कारण जनता के दिलों से नहीं जुड़ सकीं। ‘हनुमान अंश’ ने यह साबित कर दिया कि भारतीय दर्शक भव्यता नहीं, बल्कि भाव, प्रामाणिकता और अपनी आध्यात्मिक जड़ों से सच्चा जुड़ाव तलाश रहे हैं।
यह घटनाक्रम यह दर्शाता है कि 21वीं सदी का भारत अपनी आध्यात्मिक और योगिक विरासत को लेकर किसी हीनभावना का शिकार नहीं है। युवा पीढ़ी बाबा नीम करोली को किसी रूढ़िवादी पंथ के रूप में नहीं, बल्कि चेतना के एक उच्च स्तर और संकट के समय संबल देने वाले एक जीवंत मार्गदर्शक के रूप में देख रही है।
इस भारी फुटफॉल ने उत्तराखंड के नाजुक हिमालयी पर्यावरण के सामने एक बड़ा प्रश्नचिह्न भी खड़ा कर दिया है। शिप्रा नदी के तट पर स्थित कैंची धाम एक संकरी घाटी में बसा हुआ है। यदि सप्ताहांत पर 20,000 लोग एक साथ पहुंचेंगे, तो कचरा प्रबंधन, प्लास्टिक प्रदूषण और संकरी पहाड़ी सड़कों की वहन क्षमता (Carrying Capacity) पर भारी दबाव पड़ेगा। पर्यावरणविदों का मानना है कि चारधाम यात्रा की तर्ज पर कैंची धाम के लिए भी भविष्य में दैनिक ई-पास या स्लॉट-आधारित ऑनलाइन पंजीकरण प्रणाली पर विचार करना होगा।
फिल्म ‘हनुमान अंश’ ने यह भली-भांति सिद्ध कर दिया है कि जब कला और सिनेमा अपनी सांस्कृतिक जड़ों और सच्चे संतों के जीवन-मूल्यों के प्रति ईमानदार होते हैं, तो वे केवल बॉक्स ऑफिस पर करोड़ों रुपये नहीं कमाते, बल्कि वे समाज के भीतर सोई हुई आस्था और भक्ति की सुप्त धाराओं को जाग्रत कर देते हैं। बाबा नीम करोली महाराज हमेशा सादगी की प्रतिमूर्ति रहे। वे किसी बड़े प्रचार, भव्य आश्रमों या आडंबर के घोर विरोधी थे।
एक कंबल ओढ़े, लकड़ी की चौकी पर बैठे हुए उन्होंने दुनिया को प्रेम, क्षमा और सेवा का जो पाठ पढ़ाया था, आज 50 साल बाद सिनेमा के माध्यम से वह संदेश देश के कोने-कोने में गूंज रहा है। कैंची धाम की घाटी में गूंजते ‘जय सीता-राम’ और ‘हनुमान चालीसा’ के स्वर, घंटों कतारों में लगकर भी चेहरे पर शांति लिए खड़े हजारों युवा, और शिप्रा नदी के शांत तट पर जलते दीप यह सब इस बात का जीवंत प्रमाण हैं कि भारत की आध्यात्मिक चेतना कभी क्षीण नहीं होती। प्रशासन के लिए यह समय यातायात और सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने का है, ताकि बाबा के दर पर आने वाले किसी भी श्रद्धालु को असुविधा न हो और देवभूमि की यह पावन धरा शांति और भक्ति का केंद्र बनी रहे।

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