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केदारनाथ धाम में लगातार दूसरे दिन बर्फबारी से बढ़ी कंपकंपी: मंदिर प्रांगण और चोटियां बर्फ की सफेद चादर से ढकीं

मंदिर समिति ने श्रद्धालुओं के लिए जारी की एडवाइजरी

उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में मौसम के मिजाज में आए तीव्र बदलाव के कारण ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग श्री केदारनाथ धाम में लगातार दूसरे दिन रुक-रुक कर जोरदार बर्फबारी का सिलसिला जारी रहा। बीती रात से शुरू हुए हल्के हिमपात ने सुबह होते-होते पूरी केदारघाटी को अपनी आगोश में ले लिया, जिसके चलते मंदिर परिसर, आसपास की हिमाच्छादित चोटियां और 16 किलोमीटर लंबा मुख्य पैदल ट्रैक बर्फ की मोटी सफेद चादर में तब्दील हो गए। अक्टूबर माह के अंतिम सप्ताह में हुई इस बेमौसम बर्फबारी से तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है और पूरी घाटी भीषण शीतलहर की चपेट में आ गई है। बर्फीली हवाओं और कड़ाके की हाड़ कंपाने वाली ठंड के बावजूद हजारों श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन के लिए धाम में डटे हुए हैं, किंतु गिरते पारे ने यात्रा मार्ग और दर्शन कतारों में खड़ी तीर्थयात्रियों की परीक्षा लेना शुरू कर दिया है।
मौसम के इस प्रतिकूल और जोखिम भरे बदलाव को देखते हुए श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के वरिष्ठ सदस्य विनीत पोस्ती ने देश-विदेश से पहुंच रहे श्रद्धालुओं के लिए एक तत्काल एवं विशेष सुरक्षा परामर्श जारी किया है। उन्होंने श्रद्धालुओं से भावुक अपील करते हुए कहा कि वे आस्था के साथ-साथ अपने स्वास्थ्य और सुरक्षा के प्रति अत्यधिक सतर्कता बरतें। श्री पोस्ती ने स्पष्ट निर्देश दिए कि कोई भी श्रद्धालु बिना पर्याप्त भारी ऊनी कपड़ों, थर्मल इनर, दस्ताने, कैप और वॉटरप्रूफ जूतों के सोनप्रयाग या गौरीकुंड से ऊपर की चढ़ाई न करे। उन्होंने बताया कि धाम में लगातार हो रहे हिमपात और बर्फीली हवाओं के चलते वातावरण में नमी और ठंडक बहुत बढ़ गई है, जिससे विशेष रूप से बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं पैदा हो सकती हैं।
केदारनाथ घाटी में मौसम का यह बदलाव पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के चलते देखा गया है। सुबह से ही आसमान में घने काले बादलों का डेरा बना रहा और दोपहर बाद बर्फबारी की रफ्तार तेज हो गई। मंदिर के मुख्य शिखर, सभा मंडप, नंदी प्रतिमा के चारों ओर और मंदिर के पीछे स्थित दिव्य शिला तक कई इंच बर्फ की परत जम चुकी है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों जैसे भैरवनाथ चोटी, वासुकी ताल और गांधी सरोवर की पहाड़ियों पर भारी बर्फबारी से दृश्यता काफी घट गई है। धाम में अधिकतम तापमान मुश्किल से चार डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे लुढ़क चुका है। रात के समय तापमान में और अधिक गिरावट आने की संभावना को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और मंदिर प्रबंधन ने राहत एवं बचाव तंत्र को पूरी तरह से हाई अलर्ट पर रख दिया है।
बर्फबारी के कारण केदारनाथ धाम का स्वरूप यद्यपि अत्यंत दिव्य, मनोहारी और अलौकिक नजर आ रहा है, किंतु इसके साथ ही तीर्थयात्रियों की दैनिक दिनचर्या और आवागमन में गंभीर बाधाएं उत्पन्न हो गई हैं। गौरीकुंड से जंगलचट्टी, भीमबली, लिनचोली और रुद्रा प्वाइंट होते हुए केदारनाथ बेस कैंप तक जाने वाले पथरीले मार्ग पर गिरी बर्फ के पिघलने और फिर जमने के कारण जगह-जगह खतरनाक फिसलन बन गई है। तीर्थयात्री लाठियों के सहारे संभल-संभल कर कदम आगे बढ़ा रहे हैं। घोड़े-खच्चरों और डंडी-कंडी के संचालन में भी फिसलन के चलते रुकावट आ रही है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए राज्य आपदा प्रतिवादन बल यानी एसडीआरएफ, डीडीआरएफ और प्रांतीय रक्षक दल के जवान संवेदनशील मोड़ों और ग्लेशियर प्वाइंट्स पर तैनात किए गए हैं, जो श्रद्धालुओं का हाथ पकड़कर उन्हें सुरक्षित बर्फ पार करा रहे हैं।
वर्तमान समय में केदारनाथ धाम की यात्रा अपने अंतिम और अत्यंत महत्वपूर्ण चरण में है। पारंपरिक पंचांग और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रतिवर्ष दीपावली के बाद भैयादूज के पावन पर्व पर श्री केदारनाथ धाम के कपाट आगामी शीतकाल के लिए विधि-विधान के साथ बंद कर दिए जाते हैं। कपाट बंद होने में अब केवल कुछ ही दिनों का समय शेष रह गया है, जिसके चलते देश के कोने-कोने से श्रद्धालु अंतिम दिनों में बाबा केदार के स्वयंभू शिवलिंग के दर्शन करने के लिए भारी संख्या में पहुंच रहे हैं। कपाट बंदी से ठीक पहले धाम में प्रतिदिन दस से पंद्रह हजार श्रद्धालुओं की आमद हो रही है। ऐसे समय में अचानक हुई इस भारी बर्फबारी ने दर्शन व्यवस्था और यात्रियों के ठहराव के प्रबंधन को बेहद चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
कड़ाके की ठंड और निरंतर गिरती बर्फ के बीच मंदिर प्रांगण में दर्शन के लिए लगी लंबी कतारों में खड़े श्रद्धालुओं को राहत पहुंचाने के लिए बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति और जिला प्रशासन ने संयुक्त प्रयास शुरू किए हैं। मंदिर समिति के सदस्य विनीत पोस्ती के अनुसार, मंदिर परिसर, वीआईपी दर्शन द्वार और सामान्य कतारों के आसपास बर्फ को फावड़ों और आधुनिक उपकरणों से निरंतर हटाया जा रहा है ताकि बर्फ जमने से श्रद्धालुओं के फिसलने की घटनाएं न हों। इसके अलावा श्रद्धालुओं को कड़ाके की ठंड से बचाने के लिए मंदिर परिसर और प्रमुख चौराहों पर अलाव की व्यवस्था की गई है। जगह-जगह स्वयंसेवकों और मंदिर कर्मियों द्वारा श्रद्धालुओं को गर्म चाय और खौलता हुआ पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि शरीर का तापमान सामान्य बना रहे।
स्वास्थ्य विभाग ने भी मौसम के बिगड़े तेवरों को देखते हुए यात्रा मार्ग पर स्थित सभी मेडिकल रिलीफ पोस्ट्स और केदारनाथ स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को पूरी तरह सतर्क कर दिया है। समुद्र तल से लगभग ग्यारह हजार सात सौ फीट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित केदारनाथ में अत्यधिक ठंड के कारण वायुमंडलीय दबाव और ऑक्सीजन के स्तर में अचानक कमी आ जाती है। ऐसे मौसम में बिना तैयारी के पहुंचे यात्रियों में हाइपोथर्मिया, एक्यूट माउंटेन सिकनेस, रक्तचाप में अप्रत्याशित वृद्धि और सांस फूलने जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं तेजी से उभरती हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों ने परामर्श दिया है कि जो श्रद्धालु पहले से हृदय रोग, अस्थमा, उच्च रक्तचाप या मधुमेह से पीड़ित हैं, वे अपनी आवश्यक दवाएं अनिवार्य रूप से जेब में रखें और संभव हो तो पोर्टेबल ऑक्सीजन कैन साथ लेकर चलें। यदि किसी यात्री को सीने में भारीपन, चक्कर आना या अत्यधिक कंपकंपी महसूस हो, तो वह यात्रा तुरंत रोककर निकटतम मेडिकल कैंप में अपनी जांच कराए।
रुद्रप्रयाग के जिला प्रशासन ने सोनप्रयाग, सीतापुर और गौरीकुंड के प्रवेश नियंत्रण द्वारों पर भी निगरानी बढ़ा दी है। सोनप्रयाग से यात्रियों को केवल मौसम के अपडेट और उनके पास मौजूद गर्म कपड़ों व रेनकोट की जांच करने के बाद ही आगे जाने की अनुमति दी जा रही है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से यह भी आग्रह किया है कि वे धाम में पहुंचने के बाद खुले में टेंट या प्लास्टिक शेड में न रुकें, बल्कि गढ़वाल मंडल विकास निगम के पक्के भवनों, कॉटेज, आश्रमों या होटल एसोसिएशन द्वारा अधिकृत सुरक्षित शेल्टरों में ही रात्रि विश्राम करें। केदारनाथ में रात का तापमान अत्यधिक शून्य से नीचे जाने के कारण खुले में रुकना जानलेवा साबित हो सकता है।
केदारनाथ धाम में मौसम का यह मिजाज प्रकृति के उस कठोर और विहंगम सौंदर्य की याद दिलाता है जो हिमालय की ऊंचाइयों की पहचान है। एक ओर जहां गिरती बर्फ के बीच गूंजते ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय बाबा केदार’ के जयकारों से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर है, वहीं दूसरी ओर प्रकृति की इस परीक्षा में मानव संकल्प और प्रशासनिक मुस्तैदी का कड़ा इम्तिहान हो रहा है। मंदिर समिति के सदस्य विनीत पोस्ती और प्रशासन की ओर से दी गई सतर्कता की यह सलाह आने वाले दिनों में यात्रा के सुरक्षित और निर्बाध समापन के लिए सबसे महत्वपूर्ण ढाल बनेगी। जब तक मौसम सामान्य नहीं होता, तब तक प्रत्येक तीर्थयात्री के लिए संयम, पूर्व तैयारी और सुरक्षा दिशानिर्देशों का पालन ही इस पावन यात्रा को सुखद और मंगलमय बनाए रख सकता है।

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