
16 मार्च, 2026 को भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने केरल विधानसभा चुनावों के लिए अपने 47 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर एक महत्वपूर्ण चुनावी बिगुल फूंक दिया है। इस सूची की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि पार्टी ने ‘प्रतीकात्मक लड़ाई’ के बजाय ‘परिणामोन्मुखी रणनीति’ अपनाई है। राज्य के राजनीतिक इतिहास में पहली बार भाजपा ने अपने सबसे कद्दावर चेहरों केंद्रीय मंत्रियों, प्रदेश अध्यक्षों और पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों को एक साथ चुनावी मैदान में उतारा है। विशेष रूप से, नेमोम (Nemom) निर्वाचन क्षेत्र से वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर की उम्मीदवारी ने इस चुनाव को राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना दिया है।
केरल में भाजपा की पहली सूची केवल नामों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह एक बहुआयामी रणनीति का हिस्सा है पार्टी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह अब “वोट शेयर” बढ़ाने के चरण से आगे निकलकर “सीटें जीतने” के लक्ष्य पर केंद्रित है। राजीव चंद्रशेखर, वी. मुरलीधरन और जॉर्ज कुरियन जैसे नामों को उतारना यह दर्शाता है कि भाजपा अपनी पूरी ताकत झोंक रही है।
केरल की लगभग 18% ईसाई आबादी को साधने के लिए भाजपा ने इस सूची में महत्वपूर्ण ईसाइयों को जगह दी है। जॉर्ज कुरियन को कांजिरापल्ली से उतारना मध्य केरल (रबर बेल्ट) में पैठ बनाने की कोशिश है। राजीव चंद्रशेखर जैसे नेताओं के माध्यम से भाजपा केरल के शिक्षित युवाओं और आईटी क्षेत्र के कर्मचारियों को ‘नया केरल’ (New Kerala) का सपना दिखा रही है, जो पारंपरिक यूडीएफ (UDF) और एलडीएफ (LDF) की राजनीति से ऊब चुके हैं।
तिरुवनंतपुरम जिले का नेमोम क्षेत्र केरल की राजनीति में “गुजरात” माना जाता है, क्योंकि यहीं से भाजपा ने 2016 में अपना खाता खोला था। राजीव चंद्रशेखर की छवि एक कुशल प्रशासक और आधुनिक भारत के निर्माता के रूप में है। उनका मुकाबला माकपा (CPIM) के कद्दावर नेता और मौजूदा शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी से है। शिवनकुट्टी का इस क्षेत्र में जमीनी आधार बहुत मजबूत है। नेमोम में कांग्रेस (UDF) का प्रदर्शन निर्णायक होगा। यदि कांग्रेस एक मजबूत उम्मीदवार उतारती है, तो भाजपा विरोधी वोट बंट सकते हैं, जिससे भाजपा को लाभ हो सकता है।
भाजपा ने केरल के तीन प्रमुख क्षेत्रों (दक्षिण, मध्य और उत्तर) के लिए अलग-अलग रणनीतियां बनाई हैं यहाँ भाजपा का आधार सबसे मजबूत है। कझाकुट्टम में ‘टेक्नोपार्क’ स्थित है। मुरलीधरन यहां के शहरी और शिक्षित मतदाताओं के बीच काफी लोकप्रिय हैं। यहाँ उनका मुकाबला एलडीएफ के मौजूदा विधायक से होगा। पूर्व आईपीएस अधिकारी के रूप में उनकी साख भ्रष्टाचार विरोधी है, जो शहरी मतदाताओं को आकर्षित कर सकती है।
यह क्षेत्र पारंपरिक रूप से कांग्रेस और ईसाई पार्टियों का गढ़ रहा है। वे वर्तमान में मोदी सरकार में मंत्री हैं। उनकी उम्मीदवारी का उद्देश्य ‘कैथोलिक’ वोटों को भाजपा की ओर मोड़ना है। पूर्व मुख्यमंत्री के. करुणाकरण की बेटी होने के नाते, उनके पास पुराने कांग्रेसियों का एक बड़ा समर्थन आधार है जिसे भाजपा भुनाना चाहती है। यहाँ भाजपा और एलडीएफ के बीच अक्सर हिंसक और वैचारिक टकराव देखा जाता है। यह सीट कर्नाटक की सीमा से लगी है और यहां भाषाई अल्पसंख्यक (कन्नड़ भाषी) बड़ी संख्या में हैं, जो भाजपा के पारंपरिक समर्थक हैं।
केरल की जनता इस बार केवल ‘बदलाव’ के लिए नहीं, बल्कि ‘विकल्प’ के लिए मतदान कर रही है एलडीएफ सरकार पर भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और आर्थिक कुप्रबंधन के आरोप लग रहे हैं। भाजपा इसे भुनाने की कोशिश कर रही है। भाजपा प्रधानमंत्री मोदी की केंद्रीय योजनाओं (जैसे किसान सम्मान निधि, आयुष्मान भारत) को अपनी उपलब्धि बता रही है और राज्य सरकार पर इन योजनाओं को रोकने का आरोप लगा रही है। सबरीमाला और हालिया ‘वक्फ बोर्ड’ संबंधी विवादों ने हिंदू और ईसाई समुदायों के बीच एक नई चर्चा को जन्म दिया है, जिसका लाभ भाजपा को मिलने की संभावना है।
| वर्ग/समुदाय | उम्मीदवारों की संख्या (47 में से) | रणनीतिक उद्देश्य |
| ईसाई (Christian) | 09 | ‘मिडिल केरल’ में पैठ बनाना |
| महिलाएं (Women) | 07 | महिला सशक्तिकरण और सुरक्षा को मुद्दा बनाना |
| युवा और पेशेवर | 12 | शिक्षित और ‘न्यूट्रल’ वोटर्स को जोड़ना |
| एससी/एसटी | 06 | हाशिए पर मौजूद समुदायों में उपस्थिति दर्ज करना |
भाजपा की पहली सूची यह संकेत देती है कि पार्टी ने अपनी ‘रक्षात्मक’ मुद्रा छोड़ दी है। राजीव चंद्रशेखर और जॉर्ज कुरियन जैसे नामों को उतारकर भाजपा ने एलडीएफ और यूडीएफ, दोनों को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया है।
हालांकि, केरल की जमीनी हकीकत आज भी चुनौतीपूर्ण है। भाजपा को अपनी संगठनात्मक शक्ति (RSS कैडर) और मोदी की लोकप्रियता को वोटों में बदलने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी। यदि भाजपा 47 सीटों वाली इस पहली सूची में से 5 से 7 सीटें भी जीतने में सफल रहती है, तो यह केरल की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत होगी।



