नेपाल में ‘ईंधन आपातकाल’: दो दिवसीय साप्ताहिक अवकाश, आसमान छूती कीमतें और ईरान युद्ध का साया
ईरान युद्ध और वैश्विक तेल संकट का नेपाल पर प्रहार

5 अप्रैल, 2026 को नेपाल सरकार ने एक ऐतिहासिक और कड़ा निर्णय लेते हुए देश में दो दिवसीय साप्ताहिक अवकाश (Two-Day Weekly Holiday) की घोषणा की है। पश्चिमी एशिया में ईरान, इज़रायल और अमेरिका के बीच चल रहे भीषण युद्ध के कारण वैश्विक पेट्रोलियम आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) छिन्न-भिन्न हो गई है। नेपाल, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पूरी तरह से आयात पर निर्भर है, इस समय अपने इतिहास के सबसे गंभीर ईंधन संकट से गुजर रहा है।
प्रधानमंत्री कार्यालय (सिंहदरबार) में आयोजित कैबिनेट बैठक में लिए गए निर्णयों के अनुसार, नेपाल में अब सप्ताह में दो दिन का सार्वजनिक अवकाश होगा। यह नियम सोमवार, 6 अप्रैल, 2026 से पूरे देश में लागू हो गया है। सरकारी कार्यालयों के कार्य घंटों में भी संशोधन किया गया है। अब कार्यालय सुबह 9:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक खुलेंगे। सुबह के समय में एक घंटे की बढ़ोतरी की गई है ताकि दो दिनों की छुट्टी के कारण होने वाले कार्य के नुकसान की भरपाई की जा सके। सभी स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय भी शनिवार और रविवार को बंद रहेंगे। इसका मुख्य उद्देश्य स्कूल बसों और निजी वाहनों द्वारा की जाने वाली ईंधन की खपत को रोकना है।
नेपाल के इस संकट की जड़ें पश्चिमी एशिया के युद्ध में निहित हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास बढ़ते तनाव ने तेल टैंकरों की आवाजाही को लगभग ठप कर दिया है। नेपाल अपनी पेट्रोलियम जरूरतों के लिए पूरी तरह से भारत की इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) पर निर्भर है। चूंकि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की उपलब्धता कम हुई है, इसलिए नेपाल को मिलने वाली खेप में भी कटौती की आशंका बढ़ गई है। काठमांडू घाटी में पेट्रोल की कीमत अब तक के उच्चतम स्तर NPR 202 प्रति लीटर पर पहुँच गई है। वहीं, डीजल और केरोसिन की कीमतें NPR 182 प्रति लीटर हो गई हैं। पिछले 18 दिनों के भीतर कीमतों में यह तीसरी बड़ी बढ़ोतरी है।
नेपाल के पर्यटन क्षेत्र के लिए यह समय ‘पीक सीजन’ (Basant/Spring Season) होता है, लेकिन ईंधन संकट ने इस पर पानी फेर दिया है। नेपाल ऑयल कॉरपोरेशन (NOC) ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए विमान ईंधन की कीमतों में 117% तक की भारी वृद्धि की है।काठमांडू से बैंकॉक, दुबई और सिडनी जैसे रूटों पर हवाई किराए दोगुने से भी अधिक हो गए हैं। उदाहरण के लिए, काठमांडू-बैंकॉक का किराया NPR 35,000 से बढ़कर NPR 105,000 हो गया है। एविएशन ईंधन महंगा होने से नेपाल के भीतर आंतरिक उड़ानें (Domestic Flights) भी महंगी हो गई हैं, जिससे एवरेस्ट और अन्नपूर्णा क्षेत्र में जाने वाले पर्वतारोहियों ने अपनी बुकिंग रद्द करना शुरू कर दिया है।
NOC इस समय ‘दिवालिया’ होने की कगार पर है। कीमतों में इतनी वृद्धि के बावजूद, NOC को प्रति लीटर पेट्रोल पर लगभग NPR 34 और डीजल पर NPR 120 का घाटा हो रहा है। अनुमान है कि कंपनी को हर 15 दिन में NPR 11.71 बिलियन का नुकसान हो रहा है।NOC के प्रवक्ता मनोज कुमार ठाकुर के अनुसार, सबसे बड़ी चुनौती इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन को समय पर भुगतान करना है। यदि भुगतान में देरी हुई, तो IOC आपूर्ति रोक सकता है, जिससे पूरे नेपाल में ‘ब्लैकआउट’ जैसी स्थिति पैदा हो जाएगी।
संकट के बीच सरकार ने भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लिया है कैबिनेट ने पुराने पेट्रोल और डीजल वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने (Retrofitting) के लिए आवश्यक कानूनी ढांचा तैयार करने का निर्देश दिया है। सरकार का मानना है कि जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuel) पर निर्भरता कम करना ही एकमात्र स्थायी समाधान है। सरकार ने जनता से अपील की है कि वे वाहनों का उपयोग केवल अनिवार्य कार्यों के लिए करें। कई शहरों में ‘ईंधन राशनिंग’ (Fuel Rationing) की व्यवस्था भी लागू की जा सकती है।
साप्ताहिक अवकाश बढ़ाने से जहाँ सड़कों पर ट्रैफिक कम होगा, वहीं इसके कुछ नकारात्मक आर्थिक पहलू भी हैं:
| क्षेत्र | प्रभाव (Impact) |
| महंगाई | परिवहन लागत बढ़ने से खाद्य पदार्थों और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में 15-20% की वृद्धि हुई है। |
| दिहाड़ी मजदूर | दो दिन की छुट्टी का मतलब है कि दिहाड़ी पर काम करने वाले मजदूरों की आय में कमी आना। |
| शिक्षा | दो दिन स्कूल बंद रहने से कोर्स पूरा करने का दबाव बढ़ेगा, जिससे छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। |
नेपाल के लिए 2026 का यह ईंधन संकट 2015 की आर्थिक नाकाबंदी की याद दिलाता है। ईरान युद्ध ने नेपाल जैसे छोटे और भू-आबद्ध (Landlocked) देशों की संवेदनशीलता को उजागर कर दिया है। दो दिवसीय साप्ताहिक अवकाश एक साहसिक लेकिन मजबूरी में लिया गया फैसला है।
अब सारा दारोमदार इस बात पर है कि पश्चिमी एशिया में युद्ध कब थमता है और क्या नेपाल अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए भारत के साथ मिलकर कोई नया ‘ट्रीटी’ या ‘मैकेनिज्म’ विकसित कर पाता है। फिलहाल, नेपाल के नागरिक एक कठिन समय से गुजर रहे हैं, जहाँ बिजली, ईंधन और राशन सब कुछ एक संघर्ष बन गया है।



