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आम नागरिकों के लिए पूरी तरह मुफ़्त रहेगा UPI: वित्त मंत्रालय का बड़ा स्पष्टीकरण
बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर लग सकता है नाममात्र का MDR

भारत के डिजिटल भुगतान तंत्र और करोड़ों नागरिकों की रोज़मर्रा की जिंदगी की रीढ़ बन चुके यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) पर शुल्क लगाए जाने की अटकलों और भ्रम पर केंद्र सरकार ने पूरी तरह से विराम लगा दिया है। वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) तथा पत्र सूचना कार्यालय (PIB) द्वारा जारी एक विस्तृत बयान में यह स्पष्ट किया गया है कि आम नागरिकों और ग्राहकों के लिए UPI सेवा पूरी तरह से मुफ़्त (Free) रहेगी।
정सरकार ने जोर देकर कहा है कि पर्सन-टू-पर्सन (P2P – एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति) के बीच होने वाले सभी ट्रांसफर और आम ग्राहकों द्वारा दुकानदारों को किए जाने वाले रोज़मर्रा के मर्चेंट पेमेंट्स (P2M) पर कोई चार्ज नहीं लगेगा। हालाँकि, UPI इकोसिस्टम के दीर्घकालिक स्थायित्व (Long-term Sustainability), साइबर सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने और फिनटेक इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए भविष्य में एक तय सीमा (Threshold) से अधिक के बड़े व्यावसायिक/मर्चेंट लेन-देन पर नाममात्र का मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किया जा सकता है।
वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि इस विधायी संशोधन का अर्थ यह कदापि नहीं है कि आम जनता पर कोई बोझ डाला जा रहा है केवल जुलाई 2026 के महीने में ही UPI ने 2,366 करोड़ लेनदेन निष्पादित किए, जिनका कुल मूल्य ₹29.9 लाख करोड़ रहा। इतने विशाल स्केल को सुरक्षित रूप से संचालित करने के लिए बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स (PSPs) को आईटी इन्फ्रास्ट्रक्चर, सर्वर और साइबर सुरक्षा में निरंतर भारी निवेश करना पड़ता है।
सरकार द्वारा शून्य-MDR (Zero-MDR) नीति लागू होने के बाद से अब तक सब्सिडी के जरिए इस पारितंत्र को सहायता दी जा रही थी। लेकिन UPI के अगले चरण के विस्तार और ग्रामीण क्षेत्रों में प्रसार के लिए केवल सब्सिडी पर निर्भर रहना व्यावहारिक नहीं है; इसके लिए एक आत्मनिर्भर राजस्व मॉडल (Self-sustaining Revenue Model) आवश्यक है। कानून में संशोधन के बाद, भविष्य में यदि कोई नाममात्र शुल्क तय किया जाता है, तो उसका निर्णय नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के नेतृत्व वाली “UPI एंड सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी” द्वारा सभी हितधारकों से चर्चा के बाद लिया जाएगा।
मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वह शुल्क होता है जो कोई व्यापारी (Merchant) अपने ग्राहकों से डिजिटल माध्यम (जैसे डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या यूपीआई) से भुगतान स्वीकार करने के लिए बैंकों या पेमेंट गेटवे (जैसे PhonePe, Google Pay, Paytm) को देता है।
सरकार ने डिजिटल पेमेंट्स को बढ़ावा देने के लिए जनवरी 2020 में UPI और रूपे (RuPay) डेबिट कार्ड पर MDR को शून्य (0%) कर दिया था।
विशेषज्ञ और वित्तीय बाजार की रिपोर्ट दर्शाती हैं कि यदि भविष्य में MDR लागू भी होता है, तो यह केवल सालाना ₹1 करोड़ से अधिक टर्नओवर वाले बड़े कॉर्पोरेट मर्चेंट्स या उच्च मूल्य (जैसे ₹2,000 से अधिक) के व्यावसायिक ट्रांजैक्शन पर 0.05% से 0.25% जैसा मामूली शुल्क हो सकता है। गली-मोहल्ले के किराना स्टोर, सब्जी विक्रेता, छोटे दुकानदार और रेहड़ी-पटरी वाले व्यापारी किसी भी प्रकार के MDR के दायरे में नहीं आएंगे।
सरकार ने इस बात पर गर्व व्यक्त किया है कि स्वदेशी रूप से विकसित UPI आज दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे सफल रियल-टाइम डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम बन चुका है। वर्तमान में UPI तकनीक दुनिया के 11 से अधिक देशों (जैसे सिंगापुर, यूएई, फ्रांस, नेपाल, श्रीलंका, मॉरीशस आदि) में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लाइव काम कर रही है और दुनिया के कई अन्य विकसित देश भी इसे अपनाने में गहरी रुचि दिखा रहे हैं। सरकार ने उन मीडिया रिपोर्टों का भी जोरदार खंडन किया जिनमें किसी बाहरी दबाव में नीति बदलने का दावा किया गया था, और उन्हें पूरी तरह से भ्रामक व बेबुनियाद करार दिया।
वित्त मंत्रालय के इस त्वरित और पारदर्शी बयान ने देश के करोड़ों UPI उपयोगकर्ताओं और छोटे व्यापारियों की चिंता पूरी तरह समाप्त कर दी है। सरकार का यह कदम यह सुनिश्चित करता है कि वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) का भारत का यह ऐतिहासिक डिजिटल मॉडल पूरी तरह से मुफ़्त, सुरक्षित, समावेशी और भविष्य की आवश्यकताओं के लिए पूरी तरह से तैयार बना रहे।



