
20वें एशियाई खेल 2026 में भारत का दो सप्ताह लंबा बहु-खेल अभियान शनिवार, 3 अक्टूबर को एक शानदार और स्वर्णिम परिणति पर पहुंचा। काकामीगाहारा के कावासाकी जूको स्टेडियम में खेले गए पुरुष हॉकी के खिताबी मुकाबले में कप्तान हरमनप्रीत सिंह की भारतीय टीम ने मलेशिया को एकतरफा अंदाज में 5-1 से पराजित कर लगातार दूसरा एशियाई खेल स्वर्ण पदक जीत लिया। महिला टीम द्वारा चीन को 1-0 से हराकर 44 साल बाद जीते गए ऐतिहासिक स्वर्ण पदक के ठीक अगले दिन पुरुष टीम की इस विजय ने भारतीय हॉकी को ऐतिहासिक ‘डबल गोल्ड’ की गौरवमयी उपलब्धि दिला दी।
यह स्वर्ण पदक इन खेलों में भारत का 21वां स्वर्ण (Gold Medal) और कुल मिलाकर 85वां पदक (85th Overall Medal) साबित हुआ। इस स्वर्णिम अंत के साथ ही भारत ने महाद्वीपीय खेलों की आधिकारिक समग्र पदक तालिका में 5वां स्थान हासिल करते हुए लगातार दूसरे एशियाई खेलों में शीर्ष-5 खेल शक्तियों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
हालांकि, 2022 के हांगझोउ एशियाई खेलों (जो 2023 में आयोजित हुए थे) में हासिल किए गए 106 पदकों के सर्वकालिक रिकॉर्ड की तुलना में भारत का यह अभियान कुछ खेल विधाओं में मिली-जुली और कुछ में अपेक्षाकृत निराशाजनक चुनौतियों से भरा रहा। भारत की कुल पदक संख्या हांगझोउ के मुकाबले 21 पदक कम रही, जबकि स्वर्ण पदकों की संख्या में 7 पदकों की शुद्ध गिरावट दर्ज की गई।
‘सरपंच साहब’ के नाम से विख्यात हरमनप्रीत सिंह ने फाइनल में दो गोल (7वें और 42वें मिनट) दागे। पूरे टूर्नामेंट में उनके ड्रैग-फ्लिक्स ने भारतीय पेनल्टी कॉर्नर रूपांतरण दर को 40% से ऊपर बनाए रखा। फॉरवर्ड सुखजीत सिंह और अभिषेक ने अपनी गति और सर्किल एंट्रीज से मलेशियाई रक्षकों को लगातार छकाया। भारतीय महिला टीम ने जहां 2 अक्टूबर को चीन को 1-0 से हराकर 44 साल बाद स्वर्ण जीता, वहीं पुरुष टीम ने लगातार दूसरा स्वर्ण हासिल किया। इस ऐतिहासिक दोहरी खिताबी जीत के चलते भारत की दोनों हॉकी टीमों ने लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 (LA 2028 Olympics) के लिए सीधे तौर पर क्वालीफिकेशन कोटा हासिल कर लिया।
हांगझोउ 2022 में भारतीय निशानेबाजों ने 7 स्वर्ण, 9 रजत और 6 कांस्य सहित कुल 22 पदक जीतकर भारतीय अभियान की रीढ़ तैयार की थी। आईची-नागोया में जापान की इनडोर रेंज परिस्थितियों और कड़े चीनी व दक्षिण कोरियाई विरोध के बीच भारत को कुल 14 पदक (4 स्वर्ण, 4 रजत, 6 कांस्य) ही मिले। विशेष रूप से पिस्टल और ट्रैप स्पर्धाओं में भारतीय निशानेबाज मामूली अंतर से फाइनल में शीर्ष स्थान से चूक गए।
हांगझोउ में भारत ने तीरंदाजी में 5 स्वर्ण पदकों के साथ कुल 9 पदक जीते थे, जहां कंपाउंड स्पर्धाओं में ओजस देवताले और ज्योति सुरेखा वेन्नम ने क्लीन स्वीप किया था। नागोया में दक्षिण कोरिया, चीनी ताइपे और मलेशिया के कड़े प्रतिरोध के कारण भारत को 2 स्वर्ण सहित कुल 5 पदक मिले, जिससे पदकों की संख्या में 4 की कमी आई।
हांगझोउ में भारत ने एथलेटिक्स में 29 पदक (6 स्वर्ण, 14 रजत, 9 कांस्य) जीते थे। नागोया में यह संख्या 24 पदक (5 स्वर्ण, 11 रजत, 8 कांस्य) रही। नीरज चोपड़ा ने भाला फेंक (Javelin Throw) में अपना स्वर्ण बरकरार रखा, लेकिन बाधा दौड़ (Hurdles), रिले और मिडिल-डिस्टेंस रेसों में बहरीन, कतर और श्रीलंका के धावकों ने कई महत्वपूर्ण स्पर्धाओं में भारतीय एथलीटों को रजत और कांस्य पर रोक दिया।
हांगझोउ में रोइंग (नौकायन) और सेलिंग में भारत ने 8 पदक जीते थे। जापान के तटीय और अंतर्देशीय जलमार्गों पर तेज हवाओं और जापानी एथलीटों की घरेलू परिस्थितियों के चलते भारतीय रोवर्स और सेलर्स कुल 4 पदकों पर ही सिमट गए।
दूसरे सप्ताह में मुक्केबाजों और पहलवानों ने कई महत्वपूर्ण कांस्य और रजत पदक जोड़कर भारत की पदक तालिका को मजबूती दी। अमन सहरावत और अंतिम पंघाल ने मैट पर कड़ा संघर्ष करते हुए पोडियम फिनिश हासिल किए। सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की पुरुष युगल जोड़ी ने टूर्नामेंट के अंतिम चरण में कड़े मुकाबले जीतकर बहुमूल्य पदक जोड़े। जब ऐसा लग रहा था कि भारत पदक तालिका में छठे या सातवें स्थान पर खिसक सकता है, तब महिला हॉकी टीम (चीन पर 1-0) और पुरुष हॉकी टीम (मलेशिया पर 5-1) के स्वर्ण पदकों ने भारत को उज्बेकिस्तान के ठीक पीछे 5वें स्थान पर मजबूती से स्थापित कर दिया।
2014 और 2018 में भारत आठवें स्थान पर रहता था। हांगझोउ में चौथे और अब नागोया में पांचवें स्थान पर रहकर भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह अब एशियाई खेलों में कजाकिस्तान, चीनी ताइपे और थाईलैंड जैसे देशों से लगातार आगे निकल चुका है।दोनों हॉकी टीमों का सीधे लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 के लिए क्वालीफाई करना भारत के लिए सबसे बड़ी रणनीतिक उपलब्धि है, क्योंकि इससे खिलाड़ियों और महासंघों को अगले दो वर्षों तक बिना किसी क्वालीफाइंग दबाव के अपनी उच्च-स्तरीय तैयारी का मौका मिलेगा।
अभियान के समापन के बाद भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) और खेल प्राधिकरण (SAI) के विशेषज्ञों ने 2028 ओलंपिक की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण समीक्षा बिंदु रेखांकित किए हैं एशियाई स्तर पर तकनीकी कौशल में भारतीय खिलाड़ी पीछे नहीं हैं, लेकिन अंतिम क्वार्टर और नॉकआउट मुकाबलों में स्टैमिना और रिकवरी में जापानी और चीनी एथलीटों का स्तर अभी भी बेहतर है।
निशानेबाजी में योग्यता राउंड में शानदार स्कोर करने के बाद फाइनल राउंड में बिखरने की प्रवृत्ति को रोकने के लिए स्पोर्ट्स साइकोलॉजिस्ट्स की स्थायी नियुक्ति की आवश्यकता है। हांगझोउ के कई वरिष्ठ पदक विजेता अब करियर के अंतिम पड़ाव पर हैं। जूनियर स्तर से सीनियर स्तर पर खिलाड़ियों के बदलाव की गति को तेज करना होगा।
आईची-नागोया 2026 का अभियान भारतीय खेल प्रेमियों के लिए अपेक्षाओं, उतार-चढ़ाव और अंततः गर्व का संगम रहा। हांगझोउ के 106 पदकों के जादुई आंकड़े से 21 पदक पीछे रह जाना निश्चित रूप से आत्ममंथन का विषय है, लेकिन 21 स्वर्ण और कुल 85 पदकों के साथ महाद्वीप के शीर्ष-5 में अपनी जगह को सुरक्षित रखना यह साबित करता है कि भारतीय खेल का आधार अब किसी एक टूर्नामेंट की विफलता से हिलने वाला नहीं है।
काकामीगाहारा के मैदान पर पुरुष हॉकी टीम द्वारा मलेशिया के खिलाफ लहराया गया विजय पताका और महिला टीम द्वारा 44 साल बाद हासिल किया गया स्वर्णिम इतिहास इस पूरे अभियान का सबसे उज्ज्वल अध्याय रहेगा। नागोया से मिले कड़वे सबक और मीठी सफलताएं अब 2028 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक की आधारशिला बनेंगी, जहां भारत अपनी इस क्षमता को वैश्विक पोडियम पर बदलने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ेगा।



