
धनतेरस और दीपावली के बहुप्रतीक्षित त्योहार से ठीक पहले राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की आबोहवा एक बार फिर अत्यंत खतरनाक और दमघोंटू स्थिति में पहुंच गई है। शनिवार, 7 नवंबर को पूरे दिन आसमान में छाई धुंध और जहरीले स्मॉग की मोटी चादर के बीच दिल्ली का चौबीस घंटे का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 366 दर्ज किया गया, जो आधिकारिक मानकों के अनुसार ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वास्तविक समय निगरानी आंकड़ों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राजधानी में संकट केवल औसत आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि शहर के 59 वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों में से 22 प्रमुख स्टेशनों पर प्रदूषण का स्तर चार सौ के मनोवैज्ञानिक और स्वास्थ्य आपातकालीन आंकड़े को पार कर ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज किया गया। राजधानी के प्रमुख रिहायशी और संस्थागत इलाके आरके पुरम में प्रदूषण अपने चरम पर रहा, जहां सूचकांक 442 के चिंताजनक स्तर तक पहुंच गया। पंजाबी बाग, विवेक विहार, जहांगीरपुरी, बवाना, वजीरपुर, आनंद विहार और रोहिणी जैसे सघन आबादी वाले इलाकों में भी वायु गुणवत्ता सूचकांक चार सौ से चार सौ पैंतीस के बीच झूलता रहा, जिसने राजधानी के निवासियों की सांसों पर भारी संकट खड़ा कर दिया।
हवा की बेहद धीमी गति, गिरते तापमान, मौसमी प्रतिकूलताओं और वातावरण की निचली सतह में प्रदूषक तत्वों के फंसने की गंभीर स्थिति को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने आपातकालीन समीक्षा बैठक आयोजित कर पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान के तीसरे चरण यानी ग्रैप स्टेज-तीन की कठोर पाबंदियों को तत्काल प्रभाव से लागू करने का वैधानिक आदेश जारी कर दिया। आयोग के तकनीकी विशेषज्ञों और मौसम वैज्ञानिकों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि आगामी तीन से चार दिनों के दौरान दीपावली के त्योहार और मौसमी बदलाव के चलते प्रदूषण के स्तर में और अधिक गिरावट आने की आशंका है। ऐसे में वायु गुणवत्ता को ‘गंभीर प्लस’ श्रेणी में जाने से रोकने के लिए ग्रैप-तीन के तहत प्रदत्त सभी आपातकालीन शक्तियों का प्रयोग करते हुए निर्माण गतिविधियों, पुराने डीजल-पेट्रोल वाहनों के संचालन और औद्योगिक उत्सर्जनों पर अभूतपूर्व प्रशासनिक शिकंजा कस दिया गया है।
ग्रैप स्टेज-तीन के प्रभावी होते ही दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर और सोनीपत जिलों में निजी और व्यावसायिक वाहनों पर व्यापक अंकुश लगा दिए गए हैं। आयोग के निर्देशों के अनुसार राजधानी दिल्ली और इन पांच प्रमुख एनसीआर जिलों की सड़कों पर बीएस-तीन मानक वाले पेट्रोल चालित चार पहिया वाहनों और बीएस-चार मानक वाले डीजल चालित चार पहिया हल्के मोटर वाहनों के संचालन पर पूर्ण और सख्त प्रतिबंध लागू रहेगा। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस और संबंधित राज्यों के परिवहन विभागों ने इस नियम का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम के तहत सीधे बीस हजार रुपये का भारी चालान काटने और जरूरत पड़ने पर वाहनों को जब्त करने के आदेश जारी किए हैं। दिल्ली के बाहर पंजीकृत गैर-आवश्यक मध्यम और भारी मालवाहक डीजल वाहनों को भी दिल्ली की सीमा में प्रवेश करने से रोक दिया गया है। केवल उन वाणिज्यिक वाहनों, सीएनजी, इलेक्ट्रिक और एलएनजी से चलने वाली गाड़ियों तथा आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में लगे ट्रकों को ही राजधानी की सीमाओं में आने की अनुमति दी जा रही है। दैनिक यात्रियों की आवाजाही को सुगम बनाने और सड़कों पर निजी वाहनों का दबाव कम करने के लिए दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने अपनी सभी लाइनों पर दैनिक फेरों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की है, जबकि डीटीसी और क्लस्टर बसों के बेड़े को भी पूरी क्षमता से चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
धूल प्रदूषण को नियंत्रित करने के उद्देश्य से आयोग ने दिल्ली-एनसीआर में सभी प्रकार के निजी और सार्वजनिक निर्माण तथा विध्वंस कार्यों पर पूरी तरह रोक लगा दी है। इसके तहत किसी भी स्थल पर मिट्टी की खुदाई, बोरिंग, ड्रिलिंग, संरचनात्मक डिमोलिशन, ईंट-चिनाई, प्लास्टर, टाइल कटिंग, वेल्डिंग और आरएमसी बैचिंग प्लांट के संचालन को गैर-कानूनी घोषित कर दिया गया है। इसके साथ ही पूरे एनसीआर क्षेत्र में संचालित स्टोन क्रशर इकाइयों और खनन गतिविधियों को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया है। हालांकि, जनहित और राष्ट्रीय महत्व से जुड़ी अत्यंत आवश्यक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं जैसे दिल्ली मेट्रो रेल नेटवर्क, क्षेत्रीय त्वरित रेल परिवहन प्रणाली, रेलवे स्टेशनों, हवाई अड्डों, अंतरराज्यीय बस टर्मिनलों, रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा प्रतिष्ठानों, सार्वजनिक अस्पतालों, प्रमुख राजमार्गों, विद्युत पारेषण लाइनों और स्वच्छता व सीवेज उपचार संयंत्रों से जुड़े आवश्यक कार्यों को इस प्रतिबंध से सशर्त छूट दी गई है। आयोग ने सख्त हिदायत दी है कि छूट प्राप्त इन परियोजनाओं को भी निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के सभी कड़े नियमों, तीस फीट ऊंची ग्रीन नेटिंग, एंटी-स्मॉग गनों के निरंतर संचालन और पानी के नियमित छिड़काव की अनिवार्य शर्तों का अक्षरशः पालन करना होगा, अन्यथा उनका संचालन भी तुरंत निरस्त कर दिया जाएगा।
वायु प्रदूषण के इस खतरनाक स्तर का सर्वाधिक दुष्परिणाम स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य पर न पड़े, इसके लिए आयोग ने एनसीआर की सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिया है कि वे प्राथमिक स्तर यानी कक्षा पांचवीं तक के विद्यार्थियों के लिए शैक्षणिक गतिविधियों को हाइब्रिड मॉडल पर संचालित करने का निर्णय लें। इसके अंतर्गत दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के संबंधित जिला प्रशासनों को अधिकार दिया गया है कि वे प्राथमिक विद्यालयों में ऑफलाइन कक्षाओं के समानांतर ऑनलाइन कक्षाओं का संचालन अनिवार्य करें ताकि छोटे बच्चों को सुबह के समय छाए रहने वाले जहरीले स्मॉग में घरों से बाहर निकलने के लिए विवश न होना पड़े। इसके अतिरिक्त सरकारी, नगरपालिका और निजी कार्यालयों में कर्मचारियों की भारी आवाजाही और उससे होने वाले उत्सर्जन को कम करने के लिए आयोग ने संबंधित राज्य सरकारों को यह छूट दी है कि वे अपने कार्यालयों को 50 प्रतिशत स्टाफ क्षमता के साथ संचालित करने और शेष 50 प्रतिशत कार्यबल को वर्क-फ्रॉम-होम यानी घर से कार्य करने की अनुमति देने का औपचारिक आदेश जारी कर सकें। निजी कॉरपोरेट कंपनियों, आईटी फर्मों और वित्तीय संस्थानों से भी पुरजोर अपील की गई है कि वे जनहित और अपने कर्मचारियों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए स्वेच्छा से पचास प्रतिशत वर्क-फ्रॉम-होम प्रणाली को तुरंत लागू करें।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों, छाती रोग विशेषज्ञों और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के चिकित्सकों ने दिल्ली-एनसीआर की वर्तमान वायु गुणवत्ता पर अत्यधिक चिंता व्यक्त करते हुए इसे एक गंभीर स्वास्थ्य आपातकाल करार दिया है। चिकित्सकों का कहना है कि हवा में अति-सूक्ष्म धूल कणों यानी पीएम 2.5 और पीएम 10 का स्तर सामान्य अंतरराष्ट्रीय मानकों से छह से आठ गुना अधिक बढ़ चुका है। ये सूक्ष्म कण सांस के जरिए फेफड़ों की सबसे गहरी नलिकाओं और रक्तप्रवाह में सीधे प्रवेश कर जाते हैं, जिससे न केवल अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज के मरीजों की स्थिति बिगड़ती है, बल्कि स्वस्थ व्यक्तियों में भी सीने में जकड़न, आंखों में जलन, सिरदर्द, गले में खराश और सांस फूलने जैसी गंभीर समस्याएं पैदा होने लगती हैं। चिकित्सकों ने वरिष्ठ नागरिकों, गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों और हृदय रोगियों को सुबह और देर शाम के समय खुले में टहलने, दौड़ने या किसी भी प्रकार का भारी शारीरिक व्यायाम करने से पूरी तरह बचने की सख्त सलाह दी है। इसके साथ ही घर से बाहर निकलते समय एन-95 या समकक्ष प्रमाणित मास्क का नियमित उपयोग करने तथा घरों के भीतर खिड़कियां और दरवाजे बंद रखने का परामर्श जारी किया गया है।
दीपावली के आगमन के साथ ही प्रदूषण का यह चक्रव्यूह और अधिक जटिल हो गया है। एक तरफ जहां पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में पराली जलाने की घटनाएं मौसमी हवाओं के साथ दिल्ली की ओर बह रही हैं, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर चलने वाले भारी ट्रैफिक, कचरा जलाने और औद्योगिक इकाइयों के धुएं ने राजधानी को चारों तरफ से घेर लिया है। दिल्ली सरकार ने अपने सभी संबंधित विभागों, तीनों नगर निगमों, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति और लोक निर्माण विभाग को चौबीसों घंटे हाई अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया है। शहर के सभी तेरह प्रमुख प्रदूषण हॉटस्पॉट्स पर दर्जनों मोबाइल एंटी-स्मॉग गन, वाटर स्प्रिंकलर और मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनें लगातार तैनात की गई हैं, ताकि सड़कों पर जमी धूल को वातावरण में उड़ने से रोका जा सके। इसके अलावा जिलाधिकारियों और उपमंडल मजिस्ट्रेटों की विशेष निगरानी टीमें गठित की गई हैं जो रात के समय खुले में कचरा, पत्ते या औद्योगिक अपशिष्ट जलाने वालों पर नजर रख रही हैं और भारी आर्थिक दंड लगा रही हैं।



