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‘धाकड़ धनकड़’ की इस्तीफ़े की वजह महज खराब स्वास्थ्य तो नहीं…

सरकार और विपक्ष की तरफ से आये बयान कुछ और ही इशारा करते हैं

 

भारत के चौदहवें उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड़ ने इस्तीफा दे दिया ये ख़बर तो अब आप तक पहुंच गई होगी। राष्ट्रपति को भेजे अपने इस्तीफे में उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया है, और शुरुआती दौर में तमाम टीवी  और सोशल मीडिया पर चल रहीं पोस्ट/ बाइट्स के बावजूद लगता था कि शायद सच में ही उपराष्ट्रपति के इस्तीफ़े के पीछे प्रमुख कारण उनका स्वास्थ्य रहा हो। पर बीते दिन जिस तरह सत्ता पक्ष और विपक्ष के तरफ से नेताओं ने टीवी और सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की हैं और मेरे लिए तो आश्चर्यजनक हैं, अब एक बात तो पक्के तौर पर कही जा सकती है कि उपराष्ट्रपति के इस्तीफ़े की वजह सिर्फ उनका स्वास्थ्य तो नहीं है.

संसद के मानसून सत्र के पहले दिन उपराष्ट्रपति राज्यसभा में सभापति के तौर पर अपना उत्तरदायित्व निभाते दिखे। शारीरिक तौर पर स्वस्थ्य भी दिख रहे थे। राज्यसभा के बिजनेस एडवाइजरी कमेटी के मीटिंग भी रखी। देर शाम तक विपक्ष के सांसदों से मिलने की खबरों की पुष्टि भी हुई है और फिर रात 9 बजे बिना किसी पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के सीधे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलकर सीधा अपना इस्तीफा सौंप दिया।और उसके कुछ देर बाद ही उपराष्ट्रपति कार्यालय से उनके इस्तीफे की आधिकारिक जानकारी साझा की गई.

जगदीप धनकड़ पिछले 2 दशक से अधिक समय से बीजेपी से जुड़े रहे जबकि पूर्व में जनता पार्टी और कांग्रेस से जुड़े रहे। जगदीप धनकड़ राजस्थान विधानसभा के सदस्य के साथ ही राजस्थान बार एसोसिएशन से भी जुड़े रहे। इसलिए कानून पर उनकी अच्छी पकड़ के साथ ही किसान परिवार से होने के कारण किसानों से जुड़े मुद्दों पर भी धनकड़ काफी मुखर रहे.

अपने सख्त, मुखर और अनुशासित लहजे के कारण धाकड़ धनकड़ की छवि

जगदीप धनकड़ जुलाई 2019 में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल बने और राज्यपाल पद पर बने रहने के दौरान बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ अक्सर उनका टकराव देखने को मिला। राज्य सरकार के सुस्त और ढ़िलमिल रवैये के खिलाफ धनकड़ राज्यपाल रहते काफी मुखर रहे और यही से वो अक्सर सुर्खियों में रहने लगे। अगस्त 2022 में जगदीप धनकड़ भारत के चौदहवें उपराष्ट्रपति निर्वाचित हुए, लेकिन राज्यसभा के सभापति के तौर पर उनकी भूमिका से विपक्ष अक्सर नाराज़ दिखा, इतना ही नहीं कई बार विपक्ष ने संसद से वॉकआउट कर उनकी सख़्त कार्यशैली का विरोध भी किया। संसद संचालन में उनके सख्त और अनुशासित लहज़े को अक्सर विपक्ष की तरफ से एकतरफा और सरकार के इशारों पर काम करने वाला बताया गया। समाजवादी पार्टी की राज्यसभा सांसद जया बच्चन ने सदन में उनके बात करने के अंदाज पर भी सवाल उठाया था।  उनके राज्यसभा संचालन से नाराज होकर विपक्षी सांसद संसद के बाहर विरोध प्रदर्शन करते हुए उनकी मिमिक्री कर ठहाके लगाते देखे गए.

इस्तीफ़े पर पक्ष-विपक्ष की प्रतिक्रिया उम्मीद से विपरीत

धनकड़ जितने गाजे-बाजे के साथ राज्यसभा के सभापति बने उनती ही खामोशी से उनकी विदाई हो गई। ना फेयरवेल, ना कोई स्पीच और ना ही कोई पूर्व सूचना। जितना उनके इस्तीफे ने चौंकाया उससे अधिक इस्तीफे के बाद सत्ता पक्ष की खामोशी और विपक्ष के अचानक से धनकड़ प्रेम ने भी सबका ध्यान अपनी ओर खींचा.

प्रधानमंत्री मोदी ने महज 2-4 लाइन के एक सोशल मीडिया पोस्ट कर उनके उत्तम स्वास्थ्य की कामना करते हुए उनके इस्तीफे पर प्रतिक्रिया दी तो वही राष्ट्रपति कार्यालय ने भी उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया। इससे साफ पता चलता है कि सरकार की तरफ से उन्हें मनाने की कोशिश नहीं हुई। सरकार के मंत्रियों के इक्का-दुक्का औपचारिक बयानों से साफ है कि सरकार और धनकड़ के बीच सब कुछ ऑल इज वेल वाली स्तिथि नहीं थी.

दूसरी ओर धनकड़ के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने वाला विपक्ष अचानक से धनकड़ से सहानुभूति दिखाते नजर आया। कांग्रेस हो या आम आदमी पार्टी या फिर समाजवादी पार्टी सभी पार्टी के सांसद अब धनकड़ की कार्यशैली की तारीफ में बयान दे रहे हैं। जिन सांसदों ने धनकड़ के सभापति के तौर पर भूमिका को पक्षपात पूर्ण बताया था वहीं आज कह रहे हैं कि वो सबको पर्याप्त समय देते थे। जो विपक्ष महाभियोग लाकर उनको हटाना चाहता था वहीं अब प्रधानमंत्री से उनको इस्तीफा वापस लेने के लिए मनाने की बात कर रहे हैं.

सत्ता पक्ष की उदासीनता और विपक्ष का अचानक से उमड़ा धनकड़ प्रेम दोनों ही बताता है कि धनकड़ के उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफे के पीछे कारण सिर्फ स्वास्थ्य नहीं बल्कि असल कारण कुछ और है.

 

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