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सिनेमा बनाम सुरक्षा: B62 प्रोडक्शंस पर BMC की कार्रवाई का एक गहन विश्लेषण

आदित्य धर और B62 प्रोडक्शंस की साख पर प्रभाव

मुंबई महानगरपालिका (BMC) द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता निर्देशक आदित्य धर के प्रोडक्शन हाउस, B62 प्रोडक्शंस, को ब्लैकलिस्ट करने का निर्णय भारतीय फिल्म उद्योग में प्रशासनिक जवाबदेही और सुरक्षा मानकों की एक नई मिसाल पेश करता है। यह कठोर कदम आगामी बड़े बजट की फिल्म ‘धुरंधर: द रिवेंज’ (Dhurandhar: The Revenge) की शूटिंग के दौरान नियमों के श्रृंखलाबद्ध उल्लंघन के बाद उठाया गया है। मुंबई जैसे घनी आबादी वाले महानगर में, जहाँ फिल्म निर्माण और नागरिक जीवन का गहरा तालमेल है, नागरिक निकाय की यह कार्रवाई यह संदेश देती है कि ‘पर्दे के पीछे की कला’ कभी भी ‘सार्वजनिक सुरक्षा’ से ऊपर नहीं हो सकती।

मुंबई को अक्सर ‘सपनों का शहर’ कहा जाता है और इसका एक बड़ा हिस्सा यहाँ की फिल्म इंडस्ट्री है। हर साल हजारों फिल्मों, विज्ञापनों और वेब सीरीज की शूटिंग यहाँ की सड़कों, ऐतिहासिक इमारतों और समुद्र तटों पर होती है। इस प्रक्रिया को व्यवस्थित करने के लिए BMC ने कड़े नियम बनाए हैं। आदित्य धर, जिन्होंने ‘उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक’ जैसी फिल्म से भारतीय सिनेमा में अपनी एक विशेष साख बनाई है, उनकी कंपनी पर लगा यह प्रतिबंध फिल्म उद्योग के लिए एक ‘शॉक थेरेपी’ की तरह आया है।

मामले की जड़ें मुंबई में चल रही फिल्म ‘धुरंधर: द रिवेंज’ की शूटिंग से जुड़ी हैं। शूटिंग स्थल के पास रहने वाले एक स्थानीय निवासी ने BMC को शिकायत की कि प्रोडक्शन टीम खुलेआम ‘फायर टॉर्च’ (मशालों) का उपयोग कर रही है, जिससे इलाके में आग लगने का गंभीर खतरा बना हुआ है। BMC के अधिकारियों ने मौके पर पहुँचकर टीम को “मौखिक रूप से चेतावनी” दी और तुरंत मशालों का उपयोग बंद करने का निर्देश दिया। नियमों के मुताबिक, शहरी क्षेत्रों में आग से संबंधित किसी भी स्टंट के लिए दमकल विभाग (Fire Department) की विशेष अनुमति और मौके पर सुरक्षा उपकरणों का होना अनिवार्य है। चेतावनी के बावजूद जब प्रोडक्शन हाउस ने काम जारी रखा, तो BMC ने पुलिस बल की सहायता ली। पुलिस ने घटनास्थल से पाँच फायर टॉर्च जब्त किए और अवैध रूप से शूटिंग जारी रखने के लिए पंचनामा तैयार किया।

ब्लैकलिस्ट करना किसी भी व्यावसायिक इकाई के लिए ‘मृत्यु दंड’ के समान होता है, खासकर जब वह इकाई सरकारी संसाधनों और अनुमतियों पर निर्भर हो। अब B62 प्रोडक्शंस को भविष्य में मुंबई के किसी भी सार्वजनिक स्थान पर शूटिंग के लिए BMC से ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (NOC) प्राप्त करने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। मुंबई में फिल्मकारों की सुविधा के लिए ‘सिंगल विंडो’ क्लीयरेंस सिस्टम है। ब्लैकलिस्ट होने के बाद, कंपनी इस सुविधा का लाभ नहीं उठा पाएगी और उसे हर छोटी अनुमति के लिए अतिरिक्त जांच और कठोर छानबीन से गुजरना होगा। ‘धुरंधर’ एक बड़ी एक्शन फिल्म है। शूटिंग रुकने और स्थान परिवर्तन (Location Shift) के कारण फिल्म के बजट पर करोड़ों रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।

मुंबई जैसे शहर में, जहाँ इमारतें एक-दूसरे से बहुत सटी हुई हैं, आग का छोटा सा खेल भी विनाशकारी साबित हो सकता है। फिल्म सेट पर आग बुझाने वाले यंत्र (Fire Extinguishers), रेत की बाल्टियाँ और कम से कम एक फायर टेंडर का होना अनिवार्य है यदि वहाँ ज्वलनशील पदार्थों का उपयोग हो रहा है। मुंबई के फिल्म स्टूडियोज (जैसे आर.के. स्टूडियो या अंधेरी के विभिन्न सेट्स) में आग लगने की पिछली घटनाओं ने प्रशासन को बहुत संवेदनशील बना दिया है। BMC की सख्ती इन अतीत के कड़वे अनुभवों का परिणाम है।

फिल्म निर्माता अक्सर शिकायत करते हैं कि मुंबई में शूटिंग करना नौकरशाही की जटिलताओं के कारण मुश्किल होता जा रहा है। दूसरी ओर, प्रशासन का कहना है कि निर्माता नियमों को हल्के में लेते हैं। निर्देशकों का तर्क हो सकता है कि ‘मशालों’ का उपयोग दृश्य की मौलिकता के लिए जरूरी था, लेकिन कानून की नजर में ‘मौलिकता’ सुरक्षा का विकल्प नहीं हो सकती। यह मामला दर्शाता है कि अब नागरिक जागरूक हैं। वे केवल मूकदर्शक नहीं हैं, बल्कि वे नियमों के उल्लंघन पर सीधे अधिकारियों तक पहुँच रहे हैं।

आदित्य धर को एक जिम्मेदार और तकनीक-प्रेमी फिल्म निर्माता माना जाता है। ‘उरी’ जैसी राष्ट्रवादी और अनुशासित फिल्म बनाने वाले निर्देशक के प्रोडक्शन हाउस पर ‘नियम तोड़ने’ का ठप्पा लगना ब्रांड इमेज के लिए नुकसानदेह है। फिल्म फेडरेशन और अन्य यूनियनें इस मामले में मध्यस्थता कर सकती हैं, लेकिन BMC का कड़ा रुख यह संकेत देता है कि वे इस मामले में किसी भी प्रकार की नरमी बरतने के मूड में नहीं हैं।

यह घटना पूरे बॉलीवुड के लिए एक चेतावनी है। अब निर्माताओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके सेट पर एक ‘अनुपालन अधिकारी’ (Compliance Officer) हो, जो स्थानीय नियमों की निगरानी करे। शूटिंग शुरू करने से पहले स्थानीय निवासियों को विश्वास में लेना और उन्हें संभावित शोर या गतिविधियों के बारे में सूचित करना विवादों को कम कर सकता है।

सिनेमा और मुंबई का अटूट रिश्ता है, लेकिन यह रिश्ता ‘कानून के शासन’ पर आधारित होना चाहिए। BMC द्वारा B62 प्रोडक्शंस को ब्लैकलिस्ट करना यह याद दिलाता है कि कोई भी प्रोडक्शन हाउस इतना बड़ा नहीं है कि वह सार्वजनिक सुरक्षा को दांव पर लगा सके। आदित्य धर की फिल्म का नाम भले ही ‘धुरंधर’ हो, लेकिन प्रशासनिक व्यवस्था के सामने कोई भी ‘धुरंधर’ नियमों से ऊपर नहीं हो सकता। उम्मीद है कि यह कार्रवाई फिल्म उद्योग में बेहतर सुरक्षा मानकों और नागरिक प्रशासन के प्रति सम्मान की एक नई लहर लेकर आएगी। अंततः, एक सुरक्षित सेट ही एक सफल फिल्म की पहली शर्त होनी चाहिए।

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