
जैसलमेर के तपते रेगिस्तान और भारत-पाकिस्तान सीमा की रणनीतिक सरगर्मी के बीच, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा स्वदेशी HAL लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (LCH) ‘प्रचंड’ के कॉकपिट से आसमान को नापना केवल एक फोटो-अप नहीं, बल्कि आधुनिक भारत की सैन्य और तकनीकी संप्रभुता का एक ऐतिहासिक उद्घोष है। ‘वायु शक्ति 2026’ अभ्यास के दौरान राष्ट्रपति की यह उड़ान भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता (Atmanirbharta) और स्वदेशी कौशल के प्रति अटूट विश्वास का प्रतीक है।
जब भारत की तीनों सेनाओं की सर्वोच्च कमांडर (Supreme Commander) लड़ाकू हेलीकॉप्टर के कॉकपिट में को-पायलट के रूप में बैठती हैं, तो यह संदेश स्पष्ट होता है भारत अब रक्षा तकनीक के क्षेत्र में केवल एक ‘बाज़ार’ नहीं, बल्कि एक ‘निर्माता’ (Creator) बन चुका है। जैसलमेर में ‘वायु शक्ति 2026’ के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की यह उड़ान भारतीय वायु सेना (IAF) की बढ़ती मारक क्षमता और ‘मेक इन इंडिया’ की सफलता का प्रमाण है।
‘प्रचंड’ को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा विकसित किया गया है। यह कोई सामान्य युद्धक हेलीकॉप्टर नहीं है, बल्कि यह दुनिया की उन चुनिंदा मशीनों में से एक है जिसे विशेष रूप से अत्यंत ऊंचाई वाले युद्ध (High-altitude warfare) के लिए बनाया गया है। ‘प्रचंड’ दुनिया का एकमात्र लड़ाकू हेलीकॉप्टर है जो 5,000 मीटर (16,400 फीट) की ऊंचाई पर उतरने और वहां से हथियार लेकर उड़ान भरने में सक्षम है। यह क्षमता इसे सियाचिन ग्लेशियर और पूर्वी लद्दाख जैसे इलाकों के लिए ‘गेम-चेंजर’ बनाती है। यह हेलीकॉप्टर 20 मिमी की एम204 बुर्ज गन, हवा से हवा में मार करने वाली ‘मिस्ट्रल’ मिसाइलों और ’70 मिमी’ के घातक रॉकेट प्रणालियों से लैस है।
राष्ट्रपति की यह उड़ान भारतीय वायुसेना के प्रमुख अग्नि शक्ति (Firepower) प्रदर्शन अभ्यास ‘वायु शक्ति 2026’ का हिस्सा थी। भारत-पाकिस्तान सीमा के इतने करीब राष्ट्रपति का उड़ान भरना हमारे पड़ोसी देशों को यह संदेश देता है कि भारत की सीमाएं सुरक्षित हैं और हमारा नेतृत्व अपनी रक्षा प्रणालियों पर पूर्ण विश्वास रखता है। इस अभ्यास में केवल ‘प्रचंड’ ही नहीं, बल्कि ‘तेजस’ (LCA), ‘ध्रुव’ (ALH) और अन्य स्वदेशी प्रणालियों ने अपनी ताकत दिखाई। यह इस बात का संकेत है कि भारतीय वायुसेना का ‘भारतीयकरण’ तेजी से हो रहा है।
पिछले कुछ वर्षों में भारत ने रक्षा आयात पर अपनी निर्भरता को कम करने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। ‘प्रचंड’ इस बदलाव का सबसे चमकदार उदाहरण है। प्रचंड को पूरी तरह से भारत में डिजाइन और विकसित किया गया है। इसकी स्टील्थ (Stealth) विशेषताएं इसे दुश्मन के रडार से बचने में मदद करती हैं और इसके क्रैश-प्रतिरोधी लैंडिंग गियर इसे युद्ध की कठिन परिस्थितियों के लिए तैयार करते हैं। जिस हेलीकॉप्टर में स्वयं राष्ट्रप्रमुख उड़ान भरें, उसकी विश्वसनीयता वैश्विक स्तर पर बढ़ जाती है। ‘प्रचंड’ के लिए अब कई मित्र देशों ने रुचि दिखाई है, जो भारत को रक्षा निर्यातक (Defense Exporter) बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का यह साहस करोड़ों भारतीयों, विशेषकर महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। सुदूर आदिवासी क्षेत्र से देश के सर्वोच्च पद तक पहुँचने वाली महिला जब युद्धक विमान के कॉकपिट में बैठती है, तो वह रूढ़ियों को तोड़ती है। यह भारतीय सेना में महिलाओं की बढ़ती भूमिका और उनके प्रति देश के विश्वास का सम्मान है। राष्ट्रपति का को-पायलट बनना यह सुनिश्चित करता है कि भारतीय रक्षा उत्पादों की सुरक्षा और मानकों पर देश के सर्वोच्च स्तर से सहमति है।
उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर बढ़ते तनाव को देखते हुए, भारत को ऐसे प्लेटफार्मों की आवश्यकता थी जो दुर्गम चोटियों पर दुश्मन के टैंकों और घुसपैठियों को नष्ट कर सकें। जहाँ अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर भारी मारक क्षमता के लिए जाना जाता है, वहीं ‘प्रचंड’ को हिमालय की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार ‘कस्टमाइज’ किया गया है। राष्ट्रपति की उड़ान ने यह प्रमाणित किया कि भारत की विशिष्ट जरूरतों के लिए स्वदेशी समाधान ही सबसे प्रभावी हैं।
जैसलमेर के रेतीले आसमान में ‘प्रचंड’ की गर्जना और उसमें सवार भारत की राष्ट्रपति, एक आत्मनिर्भर और आत्मविश्वास से भरे भारत की तस्वीर है। यह उड़ान केवल 30 या 40 मिनट की सॉर्टी नहीं थी, बल्कि यह भारत के रक्षा वैज्ञानिकों, पायलटों और सैन्य नेतृत्व के कठिन परिश्रम को मिला एक सर्वोच्च सम्मान था। ‘वायु शक्ति 2026’ और राष्ट्रपति का यह कदम यह सुनिश्चित करता है कि भविष्य के युद्धों में भारत न केवल अपनी रक्षा करेगा, बल्कि स्वदेशी तकनीक के साथ दुनिया का नेतृत्व भी करेगा।



