पाकिस्तान में ‘छिपी पहचान’ का विस्फोट: हिना बलोच का “80% गे” वाला दावा और बंद समाज का कड़वा सच
ऑनलाइन बहस: समर्थन और विरोध

3 अप्रैल, 2026 को सोशल मीडिया के तमाम प्लेटफॉर्म्स टिकटॉक, एक्स (X) और इंस्टाग्राम पर एक वीडियो ने पूरे पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया के वैचारिक गलियारों में भूचाल ला दिया है। यह वीडियो है प्रसिद्ध पाकिस्तानी ट्रांसजेंडर कार्यकर्ता हिना बलोच (Hina Baloch) का। अपने इस सनसनीखेज वीडियो में हिना ने एक ऐसा दावा किया है जिसने पाकिस्तान के पारंपरिक और कट्टरपंथी समाज की बुनियाद को हिलाकर रख दिया है।
हिना ने दावा किया कि “पाकिस्तान की 80% आबादी गे (Gay) है और बाकी 20% बायसेक्सुअल (Bisexual) है।” उन्होंने तर्क दिया कि पाकिस्तान में यौन पहचान (Sexuality) को लेकर एक भयावह ‘पाखंड’ (Hypocrisy) व्याप्त है, जहाँ लोग सामाजिक दबाव, धर्म और ‘पारिवारिक सम्मान’ (Ghairat) के कारण अपनी वास्तविकता को पूरी तरह छिपाकर रखते हैं।
हिना बलोच कोई साधारण सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर नहीं हैं; वे वर्षों से पाकिस्तान की गलियों में ट्रांसजेंडर (ख्वाजासिरा) समुदाय के साथ काम कर रही हैं। उनका यह दावा किसी वैज्ञानिक डेटा पर आधारित नहीं है, बल्कि उनके ‘अनुभव’ और ‘अवलोकन’ पर आधारित है।
हिना का कहना है कि पाकिस्तान में विवाह को केवल एक सामाजिक अनुबंध माना जाता है। यहाँ लोग अपनी पसंद से नहीं, बल्कि परिवार के दबाव में शादी करते हैं। इसके परिणामस्वरूप, कई पुरुष और महिलाएं अपनी वास्तविक यौन पहचान को दबाकर एक ‘दोहरी जिंदगी’ (Double Life) जीते हैं। हिना का मानना है कि जो लोग खुद को ‘नॉर्मल’ या ‘हेट्रोसेक्सुअल’ (Heterosexual) कहते हैं, वे वास्तव में परिस्थितियों के अनुसार अपनी यौन प्राथमिकताएं बदल लेते हैं, जिसे उन्होंने ‘फ्लुइडिटी’ (Fluidity) कहा है। पाकिस्तान में ‘लोग क्या कहेंगे’ और ‘खानदान की नाक’ जैसे जुमले किसी भी व्यक्तिगत इच्छा से बड़े होते हैं। हिना ने कहा, “यहाँ लोग मरना पसंद करेंगे, लेकिन यह स्वीकार नहीं करेंगे कि वे किसे पसंद करते हैं।”
समाजशास्त्रियों के अनुसार, पाकिस्तान एक ‘होमोसोशियल सोसाइटी’ है। इसका अर्थ है कि यहाँ सार्वजनिक जीवन में पुरुषों का पुरुषों के साथ और महिलाओं का महिलाओं के साथ रहना अनिवार्य सा है। स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक समारोहों में स्त्री और पुरुष अलग-अलग रहते हैं। इस कारण पुरुषों के बीच आपस में बहुत गहरी मित्रता और निकटता होती है, जिसे अक्सर पश्चिमी समाज ‘समलैंगिकता’ के रूप में देख सकता है।
पाकिस्तान में कई पुरुष समलैंगिक कृत्यों में शामिल होते हैं, लेकिन वे खुद को ‘गे’ नहीं मानते। उनके लिए ‘गे’ होना एक पश्चिमी पहचान है, जबकि उनका व्यवहार केवल एक ‘शारीरिक जरूरत’ है। हिना बलोच इसी ‘व्यवहार और पहचान’ के बीच के धुंधलेपन की बात कर रही हैं।
हिना के वीडियो पर इतना बवाल इसलिए भी है क्योंकि पाकिस्तान में समलैंगिकता केवल एक सामाजिक ‘कलंक’ नहीं, बल्कि एक ‘अपराध’ है। औपनिवेशिक काल की धारा 377 आज भी लागू है, जिसके तहत “अप्राकृतिक कृत्य” के लिए उम्रकैद तक की सजा हो सकती है।
पाकिस्तान के कट्टरपंथी धार्मिक समूह समलैंगिकता को ‘लूत की कौम’ (People of Lot) की बुराई मानते हैं और इसे इस्लाम के खिलाफ बताते हैं। हिना बलोच के वीडियो के बाद कई मौलवियों ने उनके खिलाफ ‘फतवा’ जारी करने और उन पर ‘ईशनिंदा’ (Blasphemy) के आरोप लगाने की मांग की है। पाकिस्तान ने 2018 में ट्रांसजेंडरों को पहचान का अधिकार दिया था, लेकिन 2023-24 तक आते-आते धार्मिक समूहों ने इसे “समलैंगिकता को बढ़ावा देने वाला” बताकर अदालत में चुनौती दी, जिससे यह कानून अब कमजोर पड़ गया है।
2026 में पाकिस्तान का युवा वर्ग (Gen Z) अब खामोश रहने को तैयार नहीं है। हिना बलोच का वीडियो इसी बदलाव का हिस्सा है।ग्राइंडर (Grindr) और टिंडर (Tinder) जैसे ऐप्स पाकिस्तान के बड़े शहरों (कराची, लाहौर, इस्लामाबाद) में प्रतिबंधित होने के बावजूद ‘VPN’ के जरिए धड़ल्ले से इस्तेमाल होते हैं। यह हिना के उस दावे को बल देता है कि एक विशाल आबादी ‘ऑनलाइन’ अपनी पहचान को जी रही है।
हिना जैसे कार्यकर्ताओं ने टिकटॉक और यूट्यूब को अपना हथियार बनाया है। वे जानते हैं कि मुख्यधारा का मीडिया उन्हें जगह नहीं देगा, इसलिए वे सीधे जनता से संवाद कर रहे हैं।
| पहलू | प्रभाव (Impact) |
| मानसिक स्वास्थ्य | पहचान छिपाने के कारण पाकिस्तान में एलजीबीटीक्यू+ समुदाय में डिप्रेशन और आत्महत्या की दर बहुत अधिक है। |
| सुरक्षा | हिना जैसे बयानों के बाद समुदाय के प्रति नफरत और ‘हॉनर किलिंग’ (Honor Killing) का खतरा बढ़ जाता है। |
| वैश्विक छवि | ऐसे वीडियो पाकिस्तान की मानवाधिकार रिकॉर्ड को वैश्विक मंच पर चर्चा में लाते हैं। |
विशेषज्ञ हिना के “80%” वाले आंकड़े को तथ्यात्मक रूप से गलत मानते हैं, लेकिन इसके पीछे के ‘सामाजिक सत्य’ को स्वीकार करते हैं। जब किसी समाज में किसी इच्छा को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया जाता है, तो वह ‘विकृत’ (Distorted) रूप में सामने आती है। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि पाकिस्तान में पुरुषों के बीच होने वाले ‘यौन शोषण’ के कई मामले इसी दबे हुए यौन रुझान का परिणाम हैं। कुछ आलोचकों का कहना है कि हिना बलोच ‘यौन पहचान’ के पश्चिमी चश्मे से पाकिस्तान को देख रही हैं। पाकिस्तान में लोग ‘गे’ या ‘स्ट्रैट’ जैसी श्रेणियों में खुद को नहीं बांधते, वे बस अपनी जिंदगी जीते हैं।
हिना के वीडियो के बाद इंटरनेट पर दो तरह की प्रतिक्रियाएं देखी गईं हजारों लोगों ने हिना को जान से मारने की धमकी दी और उन पर ‘पाकिस्तानी संस्कृति को नष्ट करने’ का आरोप लगाया। कुछ उदारवादी पाकिस्तानियों और एलजीबीटीक्यू+ कार्यकर्ताओं ने कहा कि भले ही आंकड़े गलत हों, लेकिन “पाकिस्तान की हिप्पोक्रैसी (पाखंड)” के बारे में हिना ने जो कहा, वह 100% सच है।
हिना बलोच का दावा वैज्ञानिक रूप से गलत हो सकता है, लेकिन यह पाकिस्तान के उस ‘अंधेरे तहखाने’ का दरवाजा खोलता है जिसे समाज ने सदियों से बंद कर रखा है। 2026 के पाकिस्तान में, जहाँ धर्म और आधुनिकता के बीच भीषण द्वंद्व चल रहा है, हिना का वीडियो एक चेतावनी है।
यह वीडियो बताता है कि आप कानून और धर्म के जरिए शरीर को तो नियंत्रित कर सकते हैं, लेकिन मानवीय पहचान को पूरी तरह नहीं दबा सकते। पाकिस्तान को अब यह तय करना होगा कि वह अपने नागरिकों को एक ‘झूठी पवित्रता’ में रहने के लिए मजबूर करेगा या उनकी ‘विविधता’ को स्वीकार कर उन्हें सम्मान से जीने का हक देगा।



