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‘कॉमेडी किंग’ की कानूनी त्रासदी: राजपाल यादव और ₹6 करोड़ का चेक बाउंस केस दिल्ली हाईकोर्ट की सख्त फटकार

दिल्ली हाईकोर्ट की फटकार: "कानून के साथ लुका-छिपी बंद करें"

 3 अप्रैल, 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट के गलियारों में बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता राजपाल यादव (Rajpal Yadav) के लिए एक ‘ब्लैक फ्राइडे’ साबित हुआ। अपनी बेजोड़ कॉमिक टाइमिंग से करोड़ों चेहरों पर मुस्कान लाने वाले राजपाल यादव खुद एक ऐसे कानूनी भंवर में फंस गए हैं, जहाँ से निकलना अब उनके लिए लगभग नामुमकिन नजर आ रहा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने ₹6 करोड़ के चेक बाउंस मामले में उन्हें अतिरिक्त समय देने से साफ इनकार कर दिया है। अदालत ने न केवल उनकी याचिका खारिज की, बल्कि उनके पिछले 10 वर्षों के आचरण पर ऐसी तीखी टिप्पणियां कीं, जो किसी भी सार्वजनिक हस्ती के लिए बेहद अपमानजनक हो सकती हैं।

इस विवाद की शुरुआत आज से 16 साल पहले हुई थी। राजपाल यादव, जो उस समय अपने करियर के शीर्ष पर थे, उन्होंने निर्देशन के क्षेत्र में उतरने का फैसला किया। अपनी इस महत्वाकांक्षी फिल्म के लिए राजपाल यादव ने दिल्ली के एक व्यवसायी मुराली प्रोजेक्ट्स (Murli Projects) से ₹5 करोड़ का कर्ज लिया था।

कर्ज चुकाने के लिए उन्होंने जो चेक दिए, वे बैंक में ‘अपर्याप्त धनराशि’ (Insufficient Funds) के कारण बाउंस हो गए। 2013 में यह मामला पहली बार अदालत पहुँचा। ₹5 करोड़ का वह मूल कर्ज, ब्याज और कानूनी पेनाल्टी के साथ बढ़कर अब ₹6 करोड़ से अधिक हो चुका है।

अप्रैल 2026 की इस सुनवाई में न्यायमूर्ति ने राजपाल यादव के ‘शिफ्टिंग स्टैंड’ (बार-बार बदलते बयान) पर गहरी नाराजगी व्यक्त की।अदालत ने पाया कि जब भी भुगतान की तारीख नजदीक आती है, राजपाल यादव एक नया ‘सेटलमेंट एग्रीमेंट’ (समझौता पत्र) लेकर आ जाते हैं, लेकिन कभी भी राशि का भुगतान नहीं करते।

हाईकोर्ट ने सख्त लहजे में कहा, “आप एक प्रसिद्ध अभिनेता हो सकते हैं, लेकिन कानून की नजर में आप केवल एक ‘डिफॉल्टर’ हैं। आपने अदालती आदेशों का पालन न करके न्यायपालिका की उदारता का अपमान किया है।” जब उनके वकीलों ने उनकी “खराब वित्तीय स्थिति” का हवाला देते हुए कुछ और महीनों की मोहलत मांगी, तो अदालत ने इसे सिरे से खारिज कर दिया।

यह पहली बार नहीं है जब राजपाल यादव इस मामले में संकट में हैं। 2018 में, इसी मामले में झूठा हलफनामा (False Affidavit) देने के कारण उन्हें तीन महीने की जेल काटनी पड़ी थी। जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने वादा किया था कि वे पाई-पाई चुका देंगे, लेकिन 8 साल बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद, अब लेनदार (मुराली प्रोजेक्ट्स) राजपाल यादव की चल और अचल संपत्तियों की कुर्की (Attachment of Property) के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसमें उनका मुंबई स्थित घर और उनके प्रोडक्शन हाउस के उपकरण शामिल हो सकते हैं।

अभिनेता के करीबी सूत्रों और उनके कानूनी दल का कहना है कि राजपाल यादव भुगतान करना चाहते हैं, लेकिन उनकी वित्तीय स्थिति वैसी नहीं है जैसी दिखती है। 2020 के बाद राजपाल यादव ने ‘भूल भुलैया 2’ जैसी फिल्मों से शानदार वापसी की है, लेकिन उनके अधिकांश पारिश्रमिक (Fees) का उपयोग पुराने कर्जों और कानूनी खर्चों में जा रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि वे कई बार ‘आउट-ऑफ-कोर्ट’ सेटलमेंट की कोशिश कर चुके हैं, लेकिन लेनदार पक्ष पूरी राशि एकमुश्त (Lumpsum) मांग रहा है, जो उनके लिए फिलहाल संभव नहीं है।

2026 राजपाल यादव के लिए एक व्यस्त साल है। वे ‘भूल भुलैया 3’ और अन्य बड़ी कॉमेडी फिल्मों का हिस्सा हैं।

प्रभाव क्षेत्र संभावित परिणाम (Consequences)
ब्रांड वैल्यू बार-बार जेल जाने की खबरों से विज्ञापनों और ब्रांड एंडोर्समेंट में गिरावट आ सकती है।
शूटिंग शेड्यूल यदि उन्हें दोबारा हिरासत में लिया जाता है, तो करोड़ों रुपये के प्रोजेक्ट्स लटक सकते हैं।
इंडस्ट्री का भरोसा फिल्म निर्माता वित्तीय रूप से विवादित अभिनेताओं के साथ ‘साइनिंग अमाउंट’ साझा करने में कतराते हैं।

2026 में भारत में चेक बाउंस से जुड़े कानूनों में काफी सख्ती आई है। अब अदालतों को निर्देश है कि चेक बाउंस मामलों का निपटारा ‘समरी ट्रायल’ के जरिए जल्द से जल्द किया जाए। कानून अब आरोपी को शिकायतकर्ता को चेक राशि का 20% ‘अंतरिम मुआवजे’ के रूप में तुरंत देने का आदेश दे सकता है।

राजपाल यादव के लिए यह मामला केवल पैसों का नहीं, बल्कि उनकी साख (Credibility) का है। दिल्ली हाईकोर्ट का कड़ा रुख यह संदेश देता है कि बॉलीवुड का ग्लैमर कानून की बेड़ियों को नहीं तोड़ सकता। राजपाल यादव के पास अब केवल सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का विकल्प बचा है। यदि वहां से भी उन्हें राहत नहीं मिलती, तो उन्हें एक बार फिर जेल की सलाखों के पीछे जाना पड़ सकता है।

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