India
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ओपिनियन
फ्री स्पीच बनाम रेगुलेशन: सहयोग पोर्टल पर कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले के मायने
इंटरनेट और सोशल मीडिया आज न केवल संवाद, अभिव्यक्ति और जनचेतना के सबसे बड़े माध्यम बन चुके हैं बल्कि ये…
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ओपिनियन
MSME: भारत की आर्थिक आत्मा
भारत की गलियों में जहां चायवाले, बेकरी, टेलरिंग शॉप, हस्तशिल्प की दुकानें पीढ़ियों तक बैठती रहीं, वहीं आज यही छोटे…
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ओपिनियन
स्वदेशी 4G नेटवर्क: भारत का डिजिटल अभिमान
भारत के दूरसंचार क्षेत्र में हाल ही में एक बड़ा और गर्व करने योग्य बदलाव आया है। BSNL ने पूरी…
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ओपिनियन
AI इन न्यूज़रूम: सच्चाई का नया सहारा या अफवाहों का खतरा?
भारत में न्यूज़रूम का परिदृश्य अब AI के चलते लगातार बदल रहा है। AI टेक्नोलॉजी न केवल हेडलाइन्स और आर्टिकल…
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ओपिनियन
दिल्ली से काठमांडू तक: डिजिटल स्वतंत्रता की जंग में Gen Z सबसे आगे
नेपाल में 2025 में हुए सोशल मीडिया बैन के विरोध ने न सिर्फ हिमालयी देश को हिला दिया बल्कि पूरे…
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ओपिनियन
BRICS विस्तार: क्या भारत दोस्ती और प्रतिस्पर्धा के बीच संतुलन कायम कर पाएगा?
BRICS का विस्तार विश्व राजनीति और अर्थव्यवस्था की एक नई बहस छेड़ रहा है। भारत सहित कई प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं…
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ओपिनियन
बॉलीवुड से सुप्रीम कोर्ट तक: कैसे व्यक्तित्व अधिकार रचनात्मकता को नया आयाम दे रहे हैं
बॉलीवुड की रंगीन दुनिया से सुप्रीम कोर्ट की गंभीरता तक, आज ‘व्यक्तित्व अधिकार’ यानी Personality Rights की चर्चा अचानक हर…
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ओपिनियन
क्या बोलने की आज़ादी पर फ़िल्टर होना चाहिए? आलोचना और अवमानना के बीच की पतली रेखा
भारतीय लोकतंत्र में बोलने की आज़ादी को अत्यंत मूल्यवान अधिकार माना गया है, लेकिन बदलते समय में इससे जुड़े सवाल…
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ओपिनियन
राजनीति में महिलाओं का आरक्षण: प्रतीकवाद या असली सशक्तिकरण?
भारतीय राजनीति में महिलाओं के लिए आरक्षण का सवाल न सिर्फ प्रतिनिधित्व, बल्कि सामाजिक न्याय, लैंगिक बराबरी और लोकतंत्र की…
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राष्ट्रीय
UCC: समानता की ओर या विविधता का संकट?
भारतीय समाज में “समान नागरिक संहिता” यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) पर चर्चा जितनी जरूरी है, उतनी ही जटिल और…
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ओपिनियन
मासिक धर्म अवकाश नीति: प्रगति या कार्यस्थल में नई खाई?
मासिक धर्म छुट्टी नीति एक ओर इसे प्रगतिशील कदम के रूप में सराहा जा रहा है, दूसरी ओर इसके सामाजिक…
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ओपिनियन
प्रधानमंत्री मोदी का दौरा: राहत और भरोसे की कोशिश
उत्तर भारत में हालिया बाढ़ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हिमाचल और पंजाब दौरा किसी प्रशासनिक रस्म या औपचारिक घोषणा…
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ओपिनियन
खेलों का व्यवसायीकरण: खिलाड़ियों के लिए वरदान या बोझ?
खेलों का व्यवसायीकरण आज भारतीय खेल परिदृश्य की हकीकत बन चुका है जहाँ हर टूर्नामेंट, हर स्टार खिलाड़ी और हर…
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ओपिनियन
क्रेडिट कार्ड कल्चर: भारत की गति या कर्ज़ का फंदा?
भारत में क्रेडिट कार्ड का चलन अब छोटे-छोटे शहरों, कॉलेज के छात्रों और मध्यमवर्गीय परिवारों तक फैला है। जो क्रेडिट…
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अर्थव्यवस्था
पैसो की सुरक्षा या वृद्धि: निवेशकों की दुविधा
भारतीय संस्कृति में सोना हमेशा से आर्थिक सुरक्षा, संकट के समय मददगार और विरासत का प्रतीक रहा है। जब बाजार…
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