India
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ओपिनियन
हर नागरिक अब रिपोर्टर: क्या यह लोकतंत्र की जीत है या मीडिया की चुनौती?
नागरिक पत्रकारिता का मतलब है जब आम लोग अपने मोबाइल या सोशल मीडिया के ज़रिए खबरें, वीडियो और विचार दुनिया…
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ओपिनियन
पर्यावरण से अर्थव्यवस्था तक: एक नीति जिसने उद्योग को पुनर्परिभाषित किया
भारत ने पिछले कुछ वर्षों में प्लास्टिक प्रदूषण से लड़ने के लिए कई सख्त कदम उठाए हैं, जिनमें सिंगल-यूज़ प्लास्टिक…
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ओपिनियन
निवेश की चमक और खेत की उलझन: क्या खेतों की चिंता भारत की व्यापार नीति रोक देगी?
जब भी भारत कोई नया वैश्विक व्यापार समझौता करता है, उम्मीदें भी बढ़ती हैं और डर भी। निवेश, नौकरियों और…
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ओपिनियन
एनीमेशन, गेमिंग और कॉमिक्स: राज्य की नई सॉफ्ट पावर का सीमांत
आज भारत की सांस्कृतिक ताकत सिर्फ फिल्मों या संगीत से नहीं मापी जाती अब अवतार, ग्राफिक्स और वर्चुअल अनुभव भी…
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ओपिनियन
युवा मानसिक स्वास्थ्य: दबाव और स्क्रीन के दौर में एक अधूरी मुस्कान
भागते शहर, तेज़ होती उम्मीदें, स्क्रीन पर झूलती जिंदगियां आज भारत के युवाओं के लिए यह रोज़ का सच है।…
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ओपिनियन
TEPA समझौते का आर्थिक महत्व और राष्ट्रीय आकांक्षाएँ
हाल ही में लागू हुआ भारत–EFTA (यूरोपीय फ्री ट्रेड एसोसिएशन) व्यापार और आर्थिक भागीदारी समझौता यानी TEPA, भारतीय आर्थिक नीतियों…
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
AI शिक्षा और नैतिकता: बच्चों को तकनीक के विवेक की ज़रूरत
भारत समेत पूरी दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हमारे जीवन, शिक्षा, नौकरी और सोशल मीडिया से लेकर स्वास्थ्य और कानून…
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ओपिनियन
सोनम वांगचुक: NSA और लद्दाख में असहमति की असली कीमत
लद्दाख की सरहदों पर हजारों फीट ऊंचे शांत पहाड़ों के बीच इस बार जितनी तेज गूंज है, उतनी शायद कभी…
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ओपिनियन
युवा आवाज़ और हिंसा: जब विरोध ही आखिरी उम्मीद बन जाए
भारत में युवा शक्ति अब देश की सबसे बड़ी सामाजिक और राजनीतिक ताकत बन चुकी है। लेकिन जब वे अपनी…
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अर्थव्यवस्था
त्योहारों के बीच महंगाई की मार: कमर्शियल एलपीजी बढ़ोतरी का असर
त्योहारों का मौसम भारतीय समाज का महत्वपूर्ण हिस्सा है ये समय परिवार, दोस्तों और समाज के साथ मिलकर खुशियां मनाने,…
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ओपिनियन
ट्रॉफी की राजनीति: जब ट्रॉफी मैदान में नहीं, विवाद में रह गई
एशिया कप 2025 का फाइनल भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के लिए गर्व का पल होना चाहिए था। भारतीय टीम ने रोमांचक…
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ओपिनियन
चीटिंग और राजनीति: विश्वविद्यालय के परीक्षा कक्ष में बैठा डर
भारत के विश्वविद्यालय प्राचीन काल से ही सत्य, न्याय और स्वतंत्र सोच के मंदिर माने जाते रहे हैं। लेकिन हाल…
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अदालत
न्याय खतरे में: भारत में गवाहों की सुरक्षा की असली तस्वीर
लुधियाना शहर की अदालत में हत्या के मामले की सुनवाई के दौरान एक गवाह पर भीड़ हमला करती है, तो…
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ओपिनियन
लद्दाख में विरोध का विस्फोट: युवा असंतोष, राज्य का दर्जा और लोकतंत्र की हदें
ऊँचे हिमालय, कठोर मौसम, बर्फ़ से ढकी घाटियाँ लद्दाख हमेशा भारत की रणनीतिक और सांस्कृतिक सीमा के तौर पर पहचाना…
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