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एशियन गेम्स 2026: भारतीय स्क्वैश का ऐतिहासिक दिन

अनाहत सिंह और अभय सिंह ने एकल वर्ग में जीते रजत पदक

जापान के आइची-नागोया में आयोजित 20वें एशियाई खेलों (Aichi-Nagoya Asian Games 2026) के नौवें दिन भारतीय स्क्वैश के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ा, हालांकि देश का पहला व्यक्तिगत स्क्वैश स्वर्ण पदक जीतने का सपना अंतिम पड़ाव पर जाकर अधूरा रह गया। रविवार को नागोया के किंजो फूतो एरेना (Kinjo Futo Arena) में खेले गए दोहरे खिताबी मुकाबलों में भारत के दोनों शीर्ष एकल खिलाड़ियों 18 वर्षीय युवा सनसनी अनाहत सिंह और पुरुष वर्ग के शीर्ष खिलाड़ी अभय सिंह ने अपने-अपने फाइनल में जुझारू संघर्ष के बाद रजत पदक (Silver Medal) अपने नाम किया।
महिला एकल के फाइनल में मौजूदा वर्ल्ड जूनियर चैंपियन अनाहत सिंह का सामना विश्व की 5वें नंबर की दिग्गज खिलाड़ी और शीर्ष वरीयता प्राप्त मलेशिया की शिवसंगासुब्रमण्यम (Sivasangari Subramaniam) से हुआ। अनुभवी मलेशियाई खिलाड़ी ने यह खिताबी मुकाबला सीधे सेटों में 11-4, 11-4, 11-7 से जीतकर अपने स्वर्ण पदक का सफलतापूर्वक बचाव किया।
इस हार के बावजूद अनाहत सिंह एशियाई खेलों के इतिहास में महिला एकल स्क्वैश स्पर्धा के फाइनल में पहुंचने वाली और रजत पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनकर इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गईं। इससे पहले, पुरुष एकल स्पर्धा के फाइनल में भारत के 28 वर्षीय खिलाड़ी अभय सिंह (विश्व रैंकिंग 26) ने गत चैंपियन और विश्व के 17वें नंबर के खिलाड़ी मलेशिया के इयान यो एनजी (Eain Yow Ng) के खिलाफ कड़ा मुकाबला लड़ा।
लंबी और थका देने वाली रैलियों के बाद इयान यो ने मुकाबला 11-9, 11-5, 11-5 से जीतकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। अभय सिंह दिग्गज सौरव घोषाल (2014 इंचियोन और 2023 हांगझोउ) के बाद एशियाई खेलों के पुरुष एकल में रजत पदक जीतने वाले भारत के दूसरे पुरुष खिलाड़ी बन गए।
इन दो ऐतिहासिक पदकों के साथ ही भारत ने एशियाई खेलों में अपनी पदक तालिका में बहुमूल्य इजाफा किया है। हालांकि, दोनों खिलाड़ियों के फाइनल हारने के कारण भारत लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक (LA 2028) के लिए सीधे मिलने वाले कॉन्टिनेंटल ओलंपिक कोटे (Olympic Quota Spot) से मामूली अंतर से चूक गया, जहां स्क्वैश पहली बार आधिकारिक ओलंपिक खेल के रूप में पदार्पण करने जा रहा है।
18 वर्षीय भारतीय किशोरी अनाहत सिंह ने जब कोर्ट पर कदम रखा, तो उनके कंधों पर देश के 93 वर्षों के स्क्वैश इतिहास में पहला एकल स्वर्ण पदक दिलाने का भारी दबाव था। उनके सामने दुनिया की सबसे आक्रामक और फॉर्म में चल रही खिलाड़ी मलेशिया की 27 वर्षीय शिवसंगासुब्रमण्यम थीं
अनाहत ने मैच की शुरुआत सकारात्मक अंदाज में की। उन्होंने अपने तेजतर्रार फोरहैंड ड्राइव्स का इस्तेमाल करते हुए 3-1 की शुरुआती बढ़त बना ली। हालांकि, अनुभवी शिवसंगारी ने इसके बाद खेल की गति को पूरी तरह नियंत्रित कर लिया। उन्होंने कोर्ट के आगे के कोनों का बेहतरीन इस्तेमाल करते हुए कुछ अचूक ड्रॉप शॉट्स लगाए। अनाहत ने लगातार कुछ अनफोर्स्ड एरर्स किए, जिसका फायदा उठाते हुए मलेशियाई स्टार ने स्कोर 9-3 कर दिया। अनाहत ने एक दर्शनीय बैकहैंड ड्रॉप से अंक हासिल किया, लेकिन शिवसंगारी ने 11-4 से पहला गेम अपने नाम कर लिया।
दूसरे गेम में शिवसंगारी पूरी तरह हावी रहीं। उन्होंने टी-एरिया (T-Area) पर अपना कब्जा जमाए रखा और अनाहत को कोर्ट के चारों कोनों में दौड़ने पर मजबूर कर दिया। अनाहत की लेंथ गेंदों पर शिवसंगारी ने हवा में ही वॉली लगाकर शानदार विनर बटोरे। कुछ ही मिनटों में 6-2 की बढ़त 9-3 में बदल गई और शिवसंगारी ने दूसरा गेम भी महज 9 मिनट में 11-4 से जीत लिया।
दो गेम से पिछड़ने के बाद तीसरे गेम में अनाहत ने शुरुआती चार अंक गंवा दिए (0-4)। लेकिन यहां से इस भारतीय किशोरी ने अपने साहसिक जज्बे का परिचय दिया। उन्होंने कोर्ट पर डाइव लगाकर अंक बचाए और लगातार दो बेहतरीन ड्रॉप शॉट्स खेलकर स्कोर 3-5 किया। शिवसंगारी ने अपनी आक्रामकता जारी रखते हुए स्कोर 10-6 कर स्वर्ण पदक मैच पॉइंट हासिल किया। अनाहत ने एक गोल्ड मेडल पॉइंट जरूर बचाया, लेकिन अगली ही रैली में शिवसंगारी ने एक तीखा क्रॉस-कोर्ट निक शॉट लगाकर 11-7 से गेम और मैच अपने नाम कर लिया।
यद्यपि अनाहत फाइनल में स्वर्ण से चूक गईं, लेकिन सेमीफाइनल में उनका प्रदर्शन एशियाई खेलों के इतिहास के सबसे रोमांचक मुकाबलों में से एक माना जाएगा घरेलू जापानी दर्शक जब अपनी स्टार खिलाड़ी सातोमी वतनबे की जीत का जश्न मनाने की तैयारी कर रहे थे, तब 18 साल की अनाहत ने अविश्वसनीय मानसिक दृढ़ता दिखाते हुए लगातार तीन गेम जीतकर मैच 3-2 से अपने नाम किया और फाइनल में जगह बनाई। इस मैच ने पूरे स्क्वैश जगत को यह संदेश दे दिया कि भारतीय महिला स्क्वैश का भविष्य सुरक्षित हाथों में है।
महिला फाइनल से ठीक पहले पुरुष वर्ग का खिताबी मुकाबला खेला गया, जहां भारत के शीर्ष वरीय पुरुष खिलाड़ी अभय सिंह का सामना टूर्नामेंट के सबसे मजबूत दावेदार मलेशिया के इयान यो एनजी से हुआ पहला गेम शारीरिक और मानसिक क्षमता की कठोर परीक्षा था। अभय सिंह ने शुरू से ही इयान यो को बेसलाइन पर बांधे रखा। दोनों के बीच 40-50 शॉट्स की कई लंबी रैलियां देखने को मिलीं।
अभय ने अपनी कलाई के जादू का इस्तेमाल करते हुए कुछ खूबसूरत बैकहैंड फ्लिक खेले और स्कोर 7-8 तक खींच लाए। इयान यो ने 10-8 पर गेम पॉइंट हासिल किया। अभय ने एक गेम पॉइंट बचाया, लेकिन मलेशियाई खिलाड़ी ने बैकहैंड वॉल शॉट के साथ 11-9 से पहला गेम जीत लिया।
पहले गेम की शारीरिक थकान 28 वर्षीय भारतीय खिलाड़ी के पैरों में साफ दिखने लगी। दूसरे गेम में इयान यो ने कोर्ट की गति को तेज कर दिया और अभय को गलतियां करने पर विवश किया। इयान यो ने यह गेम आसानी से 11-5 से जीत लिया। तीसरे गेम में अभय ने अपनी बची हुई ऊर्जा झोंकते हुए 4-2 की बढ़त बनाई। लेकिन यहां इयान यो ने अपनी विश्व स्तरीय फिटनेस का परिचय देते हुए लगातार अंक बटोरे और स्कोर 6-5 से सीधे 11-5 पर पहुंचाकर मैच समाप्त कर दिया। इयान यो ने 2023 हांगझोउ के बाद 2026 नागोया में भी स्वर्ण पदक जीतकर एशियाई स्क्वैश पर अपना एकछत्र राज कायम रखा।
एक 18 वर्षीय का एशिया की सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को पछाड़ते हुए फाइनल तक पहुंचना और देश की पहली महिला एकल रजत पदक विजेता बनना, और दूसरी ओर अभय सिंह का पुरुष एकल में देश के सम्मान को शीर्ष पर बनाए रखना—यह दर्शाता है कि भारतीय स्क्वैश अब केवल एक या दो खिलाड़ियों की व्यक्तिगत प्रतिभा पर निर्भर नहीं है, बल्कि एक मजबूत और सतत खेल व्यवस्था का निर्माण हो चुका है।
नागोया के किंजो फूतो एरेना में लहराते दो तिरंगे और दोनों खिलाड़ियों के गलों में चमकते रजत पदक इस बात की गारंटी हैं कि जब 2028 में लॉस एंजिल्स के मंच पर स्क्वैश का ओलंपिक महाकुंभ सजेगा, तो पोडियम पर भारत की उपस्थिति को कोई रोक नहीं पाएगा।

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