Censorship
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ओपिनियन
फ्री स्पीच बनाम रेगुलेशन: सहयोग पोर्टल पर कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले के मायने
इंटरनेट और सोशल मीडिया आज न केवल संवाद, अभिव्यक्ति और जनचेतना के सबसे बड़े माध्यम बन चुके हैं बल्कि ये…
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ओपिनियन
क्या बोलने की आज़ादी पर फ़िल्टर होना चाहिए? आलोचना और अवमानना के बीच की पतली रेखा
भारतीय लोकतंत्र में बोलने की आज़ादी को अत्यंत मूल्यवान अधिकार माना गया है, लेकिन बदलते समय में इससे जुड़े सवाल…
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अंतरराष्ट्रीय
शैक्षिक स्वतंत्रता और सेंसरशिप: क्या विश्वविद्यालयों का मंच सिमट रहा है?
विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक स्वतंत्रता लोकतंत्र, नवाचार और सामाजिक जिज्ञासा को ऊर्जा देती है। लेकिन हाल ही में हार्वर्ड विश्वविद्यालय द्वारा…
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ओपिनियन
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सेंसरशिप : खुली सोच और सीमाओं के बीच लोकतांत्रिक संघर्ष
अभिव्यक्ति की आज़ादी वह मूल अधिकार है, जिससे कोई भी नागरिक अपनी सोच, सवाल और असहमति बिना डर के समाज…
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