Politics
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धर्म
सरेआम कत्ल, सरेआम सवाल: क्या बांग्लादेश में कानून का राज खत्म हो रहा है?
एक समय था जब बांग्लादेश की पहचान उसकी तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और सामाजिक सुधारों से होती थी। लेकिन आज,…
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अंतरराष्ट्रीय
एक नाज़ुक ठहराव: क्या 72 घंटे का संघर्षविराम थाईलैंड-कंबोडिया के दशकों पुराने घाव भर पाएगा?
दक्षिण-पूर्व एशिया के जंगलों और प्राचीन पत्थरों के बीच एक ऐसी लड़ाई छिड़ी हुई है जो जितनी ज़मीन की है,…
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अभी-अभी
हिजाब, पहचान और राजनीति: संवैधानिक सिद्धांतों की कसौटी पर बिहार का विवाद
भारत का राजनीतिक परिदृश्य अक्सर ‘रोटी, कपड़ा और मकान’ जैसे बुनियादी मुद्दों से भटककर भावनात्मक और पहचान-आधारित बहस की ओर…
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सोशल-मीडिया
X Vs सरकार और भारत की सोशल मीडिया के मंच पर लोकतंत्र की अग्निपरीक्षा
भारत आज तकनीक, संचार और विचारों के खुले प्रवाह के दौर में है। सोशल मीडिया मंच, खासकर X , देश…
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ओपिनियन
करूर की भीड़-त्रासदी: राजनीति, भीड़ सुरक्षा और शासन का इम्तिहान
27 सितंबर 2025 को तमिलनाडु के करूर ज़िले में वह मंजर सामने आया, जिसे सुनना भी रूह कंपा देता है।…
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ओपिनियन
चीटिंग और राजनीति: विश्वविद्यालय के परीक्षा कक्ष में बैठा डर
भारत के विश्वविद्यालय प्राचीन काल से ही सत्य, न्याय और स्वतंत्र सोच के मंदिर माने जाते रहे हैं। लेकिन हाल…
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ओपिनियन
राजनीति में महिलाओं का आरक्षण: प्रतीकवाद या असली सशक्तिकरण?
भारतीय राजनीति में महिलाओं के लिए आरक्षण का सवाल न सिर्फ प्रतिनिधित्व, बल्कि सामाजिक न्याय, लैंगिक बराबरी और लोकतंत्र की…
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राष्ट्रीय
UCC: समानता की ओर या विविधता का संकट?
भारतीय समाज में “समान नागरिक संहिता” यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) पर चर्चा जितनी जरूरी है, उतनी ही जटिल और…
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फ्रांस में लोकतंत्र की थकान: एक वर्ष में तीसरे प्रधानमंत्री का इस्तीफा और बढ़ती अस्थिरता
फ्रांस में बार-बार बदलती प्रधानमंत्री की कुर्सी, खासकर फ्रांस्वा बायरू के हालिया इस्तीफे के बाद, देश के लोकतंत्र में गहरी…
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अंतरराष्ट्रीय
शैक्षिक स्वतंत्रता और सेंसरशिप: क्या विश्वविद्यालयों का मंच सिमट रहा है?
विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक स्वतंत्रता लोकतंत्र, नवाचार और सामाजिक जिज्ञासा को ऊर्जा देती है। लेकिन हाल ही में हार्वर्ड विश्वविद्यालय द्वारा…
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ओपिनियन
एक देश, एक चुनाव: क्या भारत इस क्रांतिकारी बदलाव के लिए तैयार है?
“एक देश, एक चुनाव” आज देश की राजनीति, प्रशासन और लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं की बहस का केंद्र बन चुका है। यह…
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ओपिनियन
वोट देने का अधिकार: लोकतंत्र की धड़कन और चुनौतियाँ
आम नागरिक के लिए मताधिकार केवल एक संवैधानिक प्रावधान नहीं, बल्कि अपने भविष्य और समाज के स्वरूप को चुनने का…
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ओपिनियन
नेतृत्व में महिलाएं: वैश्विक राजनीति में बदलाव की यात्रा
दुनिया आज तकनीकी क्रांति और लोकतांत्रिक संवाद के युग में है, जहां हर आवाज़ के सुने जाने की संभावना पहले…
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