नेपाल की राजनीति में प्रलय: शेर बहादुर देउबा और आरजू राणा के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट
जांच की चिंगारी: 'जेन-जी' (Gen Z) क्रांति और जले हुए नोट

8 अप्रैल, 2026 की सुबह नेपाल के राजनीतिक इतिहास में एक ऐसे मोड़ के रूप में दर्ज की गई है, जिसकी कल्पना कुछ महीनों पहले तक असंभव थी। काठमांडू जिला अदालत ने नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री और नेपाली कांग्रेस के कद्दावर नेता शेर बहादुर देउबा (Sher Bahadur Deuba) और उनकी पत्नी, पूर्व विदेश मंत्री डॉ. आरजू राणा देउबा (Arju Rana Deuba) के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिए हैं। यह कार्रवाई न केवल एक भ्रष्टाचार की जांच है, बल्कि नेपाल के पुराने राजनीतिक तंत्र (Old Guard) के पतन का संकेत भी मानी जा रही है।
दंपति पर आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित करने, मनी लॉन्ड्रिंग और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय हेराफेरी के गंभीर आरोप हैं। चूंकि देउबा दंपति वर्तमान में देश से बाहर हैं, इसलिए नेपाल सरकार ने उन्हें पकड़ने के लिए इंटरपोल (Interpol) की मदद लेने का आधिकारिक निर्णय लिया है।
काठमांडू जिला अदालत ने यह वारंट सम्पत्ति शुद्धीकरण जांच विभाग (Department of Money Laundering Investigation – DMLI) की उस रिपोर्ट के आधार पर जारी किया है, जिसमें देउबा परिवार की संपत्ति में पिछले दो दशकों में 4000% की वृद्धि दिखाई गई है। जांच एजेंसी का दावा है कि देउबा ने अपने पांच प्रधानमंत्रित्व काल के दौरान विभिन्न नीतिगत भ्रष्टाचारों (Policy Corruption) के जरिए अरबों रुपये की संपत्ति बनाई। इसमें हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स के लाइसेंस वितरण और बड़े बुनियादी ढांचा ठेकों में कमीशनखोरी के आरोप शामिल हैं।
आरजू राणा देउबा पर आरोप है कि उन्होंने विभिन्न एनजीओ (NGOs) और शेल कंपनियों के माध्यम से इस अवैध धन को सफेद किया और उसे विदेशों (सिंगापुर, स्विट्जरलैंड और ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स) में निवेश किया। वारंट जारी करते समय अदालत ने कहा कि “आरोपियों की अनुपस्थिति जांच प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न कर रही है, और प्रथम दृष्टया साक्ष्य उनके खिलाफ गंभीर वित्तीय अपराध की ओर इशारा करते हैं।”
नेपाल पुलिस के प्रवक्ता ने पुष्टि की है कि देउबा दंपति के खिलाफ ‘रेड कॉर्नर नोटिस’ (Red Notice) जारी करने के लिए इंटरपोल के मुख्यालय (ल्योन, फ्रांस) को आवश्यक दस्तावेज भेज दिए गए हैं। एक बार रेड नोटिस जारी होने के बाद, दुनिया भर के 196 सदस्य देशों के हवाई अड्डों और बंदरगाहों पर देउबा दंपति को संदिग्ध के रूप में चिह्नित कर लिया जाएगा। उन्हें किसी भी देश में प्रवेश करते ही हिरासत में लिया जा सकता है।
खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, दंपति वर्तमान में सिंगापुर में हैं, जहाँ शेर बहादुर देउबा कथित तौर पर “मेडिकल चेकअप” करा रहे हैं। हालांकि, विभाग को संदेह है कि वे वहां से किसी ऐसे देश में भागने की फिराक में हैं जिसका नेपाल के साथ प्रत्यर्पण संधि (Extradition Treaty) नहीं है।
इस पूरी जांच की पृष्ठभूमि सितंबर 2025 के उस ऐतिहासिक ‘जेन-जी’ विद्रोह में छिपी है, जिसने नेपाल की राजनीति को बदल कर रख दिया। प्रदर्शनकारियों ने जब देउबा के बूढ़ानीलकंठ स्थित आवास पर हमला किया था, तब वहां से भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा और जले हुए 1000 रुपये के नेपाली नोटों के ढेर मिले थे।
हाल ही में आई फॉरेंसिक रिपोर्ट ने पुष्टि की है कि वे नोट असली थे और उन्हें जांच से बचने के लिए आनन-फानन में जलाने की कोशिश की गई थी। इस घटना ने “कैश-एट-होम” (घर में नकदी) के आरोपों को पुख्ता कर दिया। वर्तमान प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह (Balen Shah) के नेतृत्व वाली सरकार ने ‘भ्रष्टाचार मुक्त नेपाल’ का नारा दिया है। देउबा के खिलाफ यह वारंट उसी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का हिस्सा है, जिसके तहत 1990 के बाद के सभी शक्तिशाली नेताओं की फाइलें खोली जा रही हैं।
डॉ. आरजू राणा देउबा को अक्सर नेपाल की राजनीति में “किंगमेकर” या “पावर ब्रोकर” के रूप में देखा जाता रहा है। उन पर आरोप है कि उन्होंने विदेश मंत्री रहते हुए और उससे पहले भी, नेपाल के विदेशी निवेश और कूटनीतिक नियुक्तियों में अपने निजी हितों को प्राथमिकता दी। DMLI की जांच में सिंगापुर के एक प्रमुख बैंक में एक संयुक्त खाते का पता चला है, जिसमें $250 मिलियन (लगभग 33 अरब नेपाली रुपये) जमा होने का संदेह है। जांच एजेंसी इस खाते के विवरण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग मांग रही है।
देउबा के खिलाफ वारंट ने नेपाल की सबसे पुरानी पार्टी, नेपाली कांग्रेस, को एक गहरे संकट में डाल दिया है।
| राजनीतिक प्रभाव | संभावित परिणाम (Consequences) |
| नेतृत्व का संकट | पार्टी के भीतर गगन थापा और विश्व प्रकाश शर्मा जैसे युवा नेता अब देउबा के इस्तीफे और पूरी तरह से नेतृत्व परिवर्तन की मांग कर रहे हैं। |
| गठबंधन की राजनीति | देउबा की गिरफ्तारी या फरार होने से वर्तमान सत्ता पक्ष को और अधिक मजबूती मिलेगी, जबकि विपक्षी गठबंधन बिखर सकता है। |
| जनता का आक्रोश | यह घटना जनता के उस विश्वास को पुख्ता करती है कि पुराने नेता केवल व्यक्तिगत लाभ के लिए राजनीति कर रहे थे। |
नेपाल सरकार के लिए देउबा दंपति को वापस लाना आसान नहीं होगा। नेपाल की बहुत कम देशों के साथ सक्रिय प्रत्यर्पण संधियां हैं। यदि वे सिंगापुर से किसी यूरोपीय देश या यूके चले जाते हैं, तो कानूनी लड़ाई लंबी खिंच सकती है। देउबा के वकील इसे “राजनीतिक प्रतिशोध” (Political Vendetta) करार दे रहे हैं। वे अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों में यह दलील दे सकते हैं कि नेपाल में उनके मुवक्किल को निष्पक्ष सुनवाई नहीं मिलेगी।
शेर बहादुर देउबा, जो पांच बार देश के प्रधानमंत्री रहे और दशकों तक नेपाल की सत्ता की धुरी बने रहे, उनका इस तरह ‘फरार’ घोषित होना एक युग के अंत का प्रतीक है। 8 अप्रैल 2026 की यह घटना दर्शाती है कि कानून के हाथ अब उन तक भी पहुँच रहे हैं जिन्हें कभी ‘अछूत’ (Untouchable) माना जाता था।
यदि इंटरपोल के जरिए उन्हें वापस लाया जाता है, तो यह दक्षिण एशिया में भ्रष्टाचार के खिलाफ सबसे बड़ी कानूनी जीत होगी। फिलहाल, नेपाल की जनता सांसें रोककर काठमांडू के त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की ओर देख रही है क्या “शेर” वापस लौटेगा या यह निर्वासन उनकी राजनीति का अंतिम अध्याय होगा?


