निवेशपर्यावरणराष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र

दिल्ली-एनसीआर में 1 अक्टूबर से ‘नो पीयूसी, नो फ्यूल’ लागू

बिना वैध प्रदूषण प्रमाण पत्र के नहीं मिलेगा पेट्रोल, डीजल और सीएनजी

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (Delhi-NCR) में सर्दियों के दस्तक देने और मौसमी वायु प्रदूषण के गंभीर स्तर पर पहुंचने से पहले ही केंद्र और राज्य के नियामक तंत्र ने अब तक का सबसे कड़ा और तकनीकी रूप से सुसज्जित कदम उठा लिया है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (Commission for Air Quality Management – CAQM) के निर्देश संख्या 101 (Direction No. 101) के तहत गुरुवार, 1 अक्टूबर 2026 से पूरे दिल्ली-एनसीआर में ‘नो पीयूसी, नो फ्यूल’ (No PUCC, No Fuel) नीति को अनिवार्य रूप से लागू कर दिया गया है।

इस नीति के प्रभावी होते ही दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के एनसीआर जिलों में स्थित किसी भी खुदरा ईंधन स्टेशन (Fuel Station) पर पेट्रोल, डीजल या सीएनजी (CNG) तब तक नहीं दी जाएगी, जब तक कि संबंधित वाहन के पास केंद्रीय ‘वाहन’ (VAHAN) पोर्टल से सत्यापित वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (Pollution Under Control Certificate – PUCC) मौजूद न हो।

सीएक्यूएम की प्रवर्तन एवं निगरानी उप-समिति (Sub-Committee on Enforcement) की 26वीं उच्चस्तरीय बैठक में लिए गए निर्णयों के अनुसार, इस अभियान को दिल्ली के लगभग 500 पेट्रोल-सीएनजी स्टेशनों और एनसीआर के जिलों में स्थित 1,041 ईंधन पंपों पर “मिशन मोड” में लागू किया जा रहा है।

ईंधन स्टेशनों की प्रवेश लेन पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरे लगाए जा रहे हैं, जो वाहन के प्रवेश करते ही उसकी नंबर प्लेट को स्कैन कर तुरंत डेटाबेस से वैधता की जांच करेंगे। वैध पीयूसी न होने की दशा में डिस्पेंसिंग नोजल स्वतः लॉक हो जाएगा और वाहन चालक को ईंधन देने से साफ इनकार कर दिया जाएगा। इसके साथ ही मोटर वाहन अधिनियम की धारा 190(2) के अंतर्गत बिना पीयूसी पाए जाने वाले वाहन मालिकों के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर ₹10,000 का ऑनलाइन ई-चालान स्वतः प्रेषित किया जाएगा।

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और सीमावर्ती क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021 के तहत मिली शक्तियों का प्रयोग करते हुए 15 मई 2026 को डायरेक्शन नंबर 101 जारी किया था। इस निर्देश में सभी तेल विपणन कंपनियों (OMCs—IOCL, BPCL, HPCL) और गैस वितरकों (IGL आदि) को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया गया था कि वे 30 सितंबर तक अपने सभी खुदरा आउटलेट्स पर तकनीकी बुनियादी ढांचा तैयार कर लें, ताकि 1 अक्टूबर से बिना पीयूसी वाले किसी भी वाहन को ईंधन न दिया जाए।

29 सितंबर को सीएक्यूएम के अध्यक्ष राजेश वर्मा की अध्यक्षता में आयोजित उप-समिति की बैठक में दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के वरिष्ठ परिवहन और पुलिस अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में यह पाया गया कि दिल्ली में लगभग 85% से अधिक पंपों पर कैमरे और डिजिटल लिंकेज की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। आयोग ने निर्देश दिया कि जो पंप संचालक नियमों की अनदेखी कर बिना पीयूसी वाले वाहनों को ईंधन देंगे, उनके खिलाफ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम की धारा 15 के तहत आपराधिक मुकदमा और बिक्री लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई की जाएगी।

पेट्रोल और सीएनजी पंपों की प्रत्येक इनलेट लेन और डिस्पेंसिंग आइलैंड पर विशेष ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकॉग्निशन (OCR) सक्षम कैमरे लगाए गए हैं। जब कोई दोपहिया, चारपहिया या व्यावसायिक वाहन नोजल के पास रुकता है, तो कैमरा गाड़ी की नंबर प्लेट का ऑटोमैटिक स्नैपशॉट लेता है।

कैमरा सिस्टम तुरंत वाहन पंजीकरण संख्या को सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के राष्ट्रीय ‘वाहन’ (VAHAN) डेटाबेस पर भेजता है। डेटाबेस सेकंड के 100वें हिस्से में यह जांचता है कि क्या वाहन का पीयूसी प्रमाणपत्र वैध है? क्या वाहन 10 साल पुराना डीजल या 15 साल पुराना पेट्रोल (EoL) वाहन तो नहीं है?

स्क्रीन पर हरा संकेत (Green Light) आता है, पंप ऑपरेटर की नोजल अनलॉक हो जाती है और ईंधन भरा जा सकता है। सिस्टम तुरंत लाल चेतावनी (Red Alert) देता है। डिस्पेंसिंग मशीन ईंधन छोड़ने से मना कर देती है। उसी क्षण, ट्रैफिक पुलिस के सर्वर को सिग्नल चला जाता है और मोटर वाहन अधिनियम की धारा 190(2) के तहत वाहन मालिक के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर ₹10,000 के चालान का एसएमएस पहुंच जाता है।

दिल्ली और एनसीआर के आरटीओ द्वारा 10 वर्ष से अधिक पुराने डीजल और 15 वर्ष से अधिक पुराने पेट्रोल वाहनों के लिए पीयूसी प्रमाणपत्र जारी करने की सुविधा सॉफ्टवेयर स्तर पर ही ब्लॉक कर दी गई है। इसका सीधा अर्थ यह है कि ऐसे वाहन किसी भी वैध केंद्र से प्रदूषण प्रमाणपत्र बनवा ही नहीं सकते। अब तक पुराने वाहनों के मालिक गलियों या स्थानीय इलाकों में गाड़ियां चलाते रहते थे। लेकिन जब उन्हें किसी भी पंप पर पेट्रोल, डीजल या सीएनजी नहीं मिलेगी, तो ये गाड़ियां स्वतः ही सड़कों से बाहर होने पर विवश हो जाएंगी। बैठक में दिल्ली पुलिस, यातायात पुलिस और संभागीय परिवहन अधिकारियों को स्पष्ट आदेश दिए गए हैं कि वे पेट्रोल पंपों के आसपास नियमित औचक निरीक्षण करें और पकड़े गए EoL वाहनों को जब्त कर सीधे अधिकृत स्क्रैप केंद्रों में भेजें।

वायु प्रदूषण की कोई प्रशासनिक सीमा नहीं होती। दिल्ली में कड़े नियम लागू करने के बाद यदि लोग सीमा पार नोएडा या गुरुग्राम जाकर पेट्रोल भरवाने लगें, तो नीति अप्रभावी हो जाती। इसीलिए सीएक्यूएम ने इसे एक एकीकृत क्षेत्रीय ढांचे के रूप में पूरे एनसीआर में लागू किया है उत्तर प्रदेश सरकार के परिवहन विभाग ने गौतमबुद्ध नगर (नोएडा/ग्रेटर नोएडा), गाजियाबाद, हापुड़, मेरठ, बुलंदशहर, बागपत, मुजफ्फरनगर और शामली के सभी जिलाधिकारियों को आदेश जारी कर दिए हैं कि 1 अक्टूबर की सुबह से बिना पीयूसी किसी भी वाहन में ईंधन न डाला जाए। हरियाणा के गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत और झज्जर सहित कुल 14 एनसीआर जिलों और राजस्थान के अलवर व भरतपुर जिलों में भी तेल कंपनियों के समन्वय से इस नियम को लागू किया गया है। एनसीआर में कुल 1,041 ईंधन स्टेशनों को इस नेटवर्क से जोड़ा गया है।

दिल्ली सरकार और डीएमआरसी 1 से 10 अक्टूबर के बीच ‘दिल्ली मेट्रो सारथी ऐप’ (Delhi Metro Sarthi App) को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष अभियान चला रहे हैं। रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन्स (RWAs), मार्केट यूनियनों और कॉलेजों में विशेष कैंप लगाकर लोगों को ऐप डाउनलोड कराया जा रहा है, ताकि वे निजी कारों के बजाय मेट्रो का उपयोग करें। नवंबर महीने में दिल्ली और एनसीआर के सभी मान्यता प्राप्त प्रदूषण जांच केंद्रों (PUCC Centres) के सेंसरों और गैस एनालाइजर्स का परीक्षण व अपग्रेडेशन किया जाएगा, ताकि कोई भी केंद्र फर्जी या जाली प्रमाणपत्र जारी न कर सके।

पंजाब और हरियाणा के कृषि विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे 15 मई को जारी डायरेक्शन नंबर 99 के तहत धान की कटाई के दौरान पराली जलाने की घटनाओं को शून्य करने के लिए सख्त प्रशासनिक निगरानी रखें। एनसीआर में चलने वाली सभी औद्योगिक इकाइयों में अनधिकृत कोयले या फर्नेस ऑयल के इस्तेमाल पर पूर्ण पाबंदी रहेगी।

1 अक्टूबर से लागू होने वाली इस व्यवस्था के तहत किसी भी असुविधा, चालान या ईंधन की कमी से बचने के लिए वाहन मालिकों को निम्नलिखित कदम तुरंत उठाने की सलाह दी गई है वाहन मालिक अपने वाहन के प्रदूषण प्रमाणपत्र की समाप्ति तिथि की जांच करें। यदि पीयूसी एक्सपायर हो चुका है या अगले 7 दिनों में समाप्त हो रहा है, तो निकटतम पेट्रोल पंप स्थित केंद्र पर जाकर तुरंत नया प्रमाणपत्र बनवाएं।

परिवहन सेवा पोर्टल (parivahan.gov.in) पर जाकर वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर और चेसिस नंबर के अंतिम 5 अंक दर्ज कर यह सुनिश्चित करें कि आपका पीयूसी डेटाबेस में एक्टिव दिख रहा है। यदि आपका डीजल वाहन 10 साल और पेट्रोल वाहन 15 साल पूरे कर चुका है, तो उसे लेकर पेट्रोल पंप पर बिल्कुल न जाएं। ऐसा करने पर ईंधन तो मिलेगा ही नहीं, गाड़ी भी तुरंत जब्त कर ली जाएगी। यद्यपि ANPR कैमरे ऑनलाइन डेटाबेस से जांच करेंगे, फिर भी अपने मोबाइल में एम-परिवहन (mParivahan) या डिजीलॉकर (DigiLocker) में पीयूसी की डिजिटल कॉपी अवश्य रखें, ताकि किसी भी तकनीकी खराबी की स्थिति में इसे दिखाया जा सके।

दिल्ली-एनसीआर में 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होने वाली ‘नो पीयूसी, नो फ्यूल’ व्यवस्था केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं है, बल्कि यह स्वच्छ वायु के मौलिक अधिकार की रक्षा के लिए उठाया गया एक क्रांतिकारी तकनीकी हस्तक्षेप है। दशकों से यह देखा जाता रहा है कि लाखों वाहन चालक प्रदूषण प्रमाणपत्र समाप्त होने के बावजूद बेखौफ सड़कों पर गाड़ियां दौड़ाते थे और सामान्य पुलिस चेकिंग में पकड़े जाने से बच निकलते थे।

पेट्रोल और सीएनजी पंपों को एएनपीआर कैमरों और ‘वाहन’ डेटाबेस से सीधे जोड़कर सरकार ने इस विसंगति को जड़ से समाप्त कर दिया है। अब प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को ईंधन मिलना ही बंद हो जाएगा, जो सीधे तौर पर वाहन मालिकों को अपनी गाड़ियों की नियमित सर्विसिंग और उत्सर्जन जांच कराने के लिए बाध्य करेगा।

1 नवंबर से लागू होने वाले विंटर निर्माण प्रतिबंधों, 50% वर्क-फ्रॉम-होम और दोगुनी पार्किंग दरों से ठीक पहले 1 अक्टूबर से इस नीति का लागू होना यह प्रमाणित करता है कि इस वर्ष दिल्ली-एनसीआर ने सर्दियों के जहरीले स्मॉग से निपटने के लिए समय से पहले ही एक अभेद्य चक्रव्यूह तैयार कर लिया है।

इस नीति की पूर्ण सफलता अब पंप संचालकों की ईमानदारी, तकनीकी सर्वरों की निरंतर सक्रियता और आम नागरिकों की सहभागिता पर निर्भर करेगी, ताकि आने वाले महीनों में राष्ट्रीय राजधानी और इसके आसपास रहने वाले करोड़ों लोग खुली और स्वच्छ हवा में सांस ले सकें।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button